Monday, February 25, 2013

वैश्य महाकुम्भ, रुड़की

उत्तराँचल वैश्य महाकुम्भ, दिनांक ३/३/१३, दिन रविवार, आप सभी वैश्य बंधू सादर आमंत्रित


5 comments:

  1. जाट भी आ सकते है क्या?

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  2. भाई मेरे वर्ण व्यवस्था के हिसाब से तो कृषि और खेती बाड़ी वैश्य का कर्म हैं, और जाट जाति एक कृषक जाति हैं. इसीलिए जाट भी तो वैश्य हुए ना.. इसीलिए जाटो का भी स्वागत हैं....

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  3. प्रवीण जी...मैं भी एक बनिया हू,,बहुत लोग मुझ से कहते हैं की बनियों ने देश के लिए कभि कुछ नहीं किया ,,
    बस पैसे कमाने के चक्कर में रहते हैं>>
    बल्कि वास्तविकता इसके विपरीत हैं'.....

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    1. समझाओ सालो को की महाराणा प्रताप भले इतिहास में अमर हो पर उनको अमर करने का श्रेय भामा साह को भी है अब यह मत पूछना यह भामा साह कौन है।

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  4. सभी लोगो का अलग अलग छेत्र होता हैं...

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