Friday, August 8, 2014

ABHISHEK ROONGTA - अभिषेक रुंगटा - 50 रुपये से शुरू हुआ बिजनस आज 40 करोड़ का


अभिषेक रुंगटा कोलकाता की बिजनस फैमिली से आते हैं। शुरुआत में उन्होंने खुद का ई-मेल सर्विस सेंटर खोलने का फैसला लिया। उन्हें इसमें परिवार से पूरा सपोर्ट मिला। यह 1997 की बात है। उस वक्त इंटरनेट नया कॉन्सेप्ट था। ई-मेल सर्विस सेंटर का काम बिजनस और उसके कस्टमर के बीच कम्युनिकेशन का था।

बिजनस शुरू करने के लिए मैंने फैमिली से 46,000 रुपये का लोन लिया। इसमें से 30,000 मैंने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को दिए। बाकी पैसे से मैंने मॉडम खरीदा। मुझे इसके लिए कंप्यूटर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि मेरे पास पहले से एक कंप्यूटर था। दुर्भाग्यवश सर्विस प्रोवाइडर बिजनस बंद कर मेरे पैसे लेकर फरार हो गया। हालांकि इसके बाद भी मैंने हार नहीं मानी। मैंने ऐसा नया बिजनस शुरुआत करने की सोची, जिसमें ज्यादा पैसे की जरूरत न हो। मैंने टेक एक्सपो में जाना शुरू कर दिया, जिससे मैं लोगों के साथ संपर्क बना सकूं। मैंने महसूस किया कि एक्सपो में लोग आउटलेट खोलकर अच्छा बिजनस कर रहे हैं।

मुझे वेबसाइट डिजाइनिंग के बारे में पता था। इसलिए मैंने ऐसे ही एक एक्सपो में किराए पर स्टॉल लेने का फैसला लिया। एक स्टॉल को तीन दिन किराए पर लेने का खर्च 6000 रुपये था। मेरे पास उतने पैसे नहीं थे। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं इस स्टॉल मैं छोटा सा हिस्सा लूंगा और बाकी का एरिया किसी दूसरे व्यक्ति को दूंगा, जो उसमें मॉडम बेचेगा। मैंने वेबसाइट डिजाइनिंग की एडवरटाइजिंग हैंडबिल्स से करने का फैसला किया। इसकी कॉस्ट 50 रुपये पड़ी। कंपनी का नाम भी वहीं पर ही तय हुआ। इस तरह इंडस नेट टेक्नॉलजी की शुरुआत हुई।

एक्सपो में मेरे अलावा एक और कंपनी वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए आई थी, लेकिन उसकी सर्विसेज काफी महंगी थी। इसलिए ज्यादा लोग मेरे स्टॉल पर आ रहे थे। तीन दिन के एक्सपो में मुझे 20,000 रुपये के 2 प्रोजेक्ट मिल चुके थे। दोनों क्लाइंट ने 50 पर्सेंट अडवांस पेमेंट किया। मैं कॉमर्स ग्रेजुएट था। इसलिए मुझे काफी रिसर्च और कंप्यूटर बुक्स पढ़ने की जरूरत थी, जिससे मैं बिजनस को अच्छी तरह संभाल सकूं। इस दौरान मैंने वेब हॉस्टिंग सर्विसिज पर अपनी खोज शुरू कर दी। मैंने पाया कि इस सेक्टर में कई ऐसी कंपनियां हैं, जो सर्विस के लिए ज्यादा पैसे चार्ज कर रही हैं। मैंने एक इटैलियन कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट किया, जो भारतीय कंपनियों को वेब हॉस्टिंग सर्विस 20 पर्सेंट कम प्राइस पर देने को मान गई।

मैंने उस कंपनी को इस बात पर भी राजी कर लिया कि वह तीन महीने के क्रेडिट पर मुझे भारत में सर्विस प्रोवाइड करने का मौका दे। नई सर्विस ने मेरा बिजनस बढ़ा दिया। 1997-98 के अंत तक फर्म का टर्नओवर 1 लाख रुपये तक पहुंच गया था। इसके बाद मैंने एंप्लॉयीज को हायर करना शुरू किया।

कोलकाता के डलहौजी स्क्वेयर में मैंने ऑफिस के लिए छोटी सी जगह किराए पर ली। इसी साल कॉमर्स से मैं ग्रेजुएट भी हुआ। मैंने इसके बाद अमेरिका से एक साल का मल्टीमीडिया प्रोग्राम करने का प्लान किया। तब मैंने पूरा बिजनस अपनी बहन को सौंप दिया। जब मैं 2000 में वापस लौटा तो देखा कि एयरपोर्ट के बाहर काफी संख्या में डॉटकॉम कंपनियों के होर्डिंग्स लगे थे। मेरे आने के बाद कई महीने तक मेरी फर्म ने कोई नया बिजनस जेनरेट नहीं किया। इसके बाद मैंने सोशल मीडिया साइट्स के जरिये बिजनस को दुनिया भर में बढ़ाने की कोशिश शुरू की। साल 2000 के अंत तक फिर से मेरे पास काम आना शुरू हो गया। 2002 तक कंपनी का टर्नओवर 15 लाख से ज्यादा हो गया था।

2007 में यह बढ़कर लगभग 6 करोड़ हो गया। इसी साल हमने डिजिटल मार्केटिंग डिवीजन शुरू की। आज हम डिजिटिल मार्केटिंग, वेब एप्लिकेशन सहित कई सर्विसेज दे रहे हैं। पिछले साल कंपनी का टर्नओवर 40 करोड़ तक पहुंच गया। इस समय कंपनी के सर्विस स्पेक्ट्रम में 200 से ज्यादा क्लाइंट्स हैं और 500 लोग कंपनी के लिए काम कर रहे हैं। अगले फाइनैशल ईयर में हमारा प्लान 60 करोड़ टर्नओवर हासिल करने का है।

साभार : इकनॉमिक टाइम्स | Aug 7, 2014

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