Thursday, June 4, 2015

जैन समुदाय, ज्ञान, दान है पहचान

बात जैनों की हो और रईसी का जिक्र न आए, ऐसा कभी नहीं हो सकता है। हमेशा जेब से दमदार मानी जाने वाली यह कम्युनिटी दिल के मामले में भी काफी रईस है। हालांकि यही दौलत इन्हें दहेज जैसे मामलों में खींचकर नाम भी खराब करती है। पहले बिजनेस से जुड़े, लेकिन अब जॉब की तरफ भी रुख करनेवाले जैन समुदाय के मनोमिजाज पर रोशनी डाल रहे हैं 

देश की कुल आबादी करीब 125 करोड़ में से कुल 1 करोड़ जैन हैं, लेकिन इनकी अहमियत प्राचीन काल से बरकरार रही है। 'परस्परोग्रहों जीवानाम्' और 'जियो और जीने दो' जैसे नारों की वजह से इन्हें दुनिया भर में सम्मान की नजर से देखा जाता है। जैन दुनिया के सबसे पुराने स्वतंत्र धर्मों मे से है, जो वैदिक धर्म की शाखा नहीं है।

कॉमन अजेंडा

जैन सिर्फ आगे बढ़ने और किसी से न उलझने में विश्वास रखते हैं। उनका यह फंडा बिजनेस में साफ तौर पर नजर आता है। सादा जीवन और ऊंची सोच इस कम्युनिटी का पैरामीटर बन चुकी है। हालांकि मौज-मस्ती के लिए पैसा बहाना जैसी कमजोरियां भी हैं, लेकिन किसी की मदद करने में ये कभी पीछे नहीं रहते। यही वजह है कि जैन समाज बड़े-बड़े अस्पताल, कॉलेज, स्कूल, धर्मशाला आदि बनवाने के अलावा गरीब लड़कियों की शादी कराने में काफी आगे नजर आता है। कहा जाता है कि भारत में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स भी जैन ही चुकाते हैं। यह कौम रूढ़िवादी नहीं, बल्कि प्रगतिशील हैं और स्त्री समानता की प्रबल समर्थक भी। 

शिक्षा पर जोर 

पढ़ाई-लिखाई के लिए जैन समाज में काफी जोर दिया जाता है, जिसके तहत महिलाओं को शिक्षा दिलाने में भी ये आगे नजर आते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में जैन महिलाओं का लिटरेसी रेश्यो करीब 96 पर्सेंट है। विकसित सोच की वजह से आज देश भर में जैन उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। 

शाकाहार से फेमस 

पूरी दुनिया में शाकाहार का प्रचार करने के मामले में जैन अग्रणी हैं। सूरज छिपने से पहले ही खाना खा लेना और पानी भी छानकर पीना इनका ट्रेडमार्क है। हालांकि मॉडर्न लाइफस्टाइल में काफी जैन परिवार इस परंपरा को नहीं अपना पाते। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि बताते हैं कि जैनों की कोशिश से अब इंडियन रेलवे और एयरलाइंस में जैन फूड भी मिलने लगा है। इस तरह के भोजन में लहसुन, प्याज आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। साथ ही, फूलगोभी व बैंगन जैसी सब्जियां भी नहीं होती हैं। इसके अलावा बारिश के 4 महीनों में कंद जैसे आलू, गाजर, अदरक आदि से परहेज किया जाता है। 

शो-ऑफ की आदत 

मर्सेडीज, ऑडी और जगुआर जैसी महंगी गाड़ियों में घूमने और महंगे रेस्तरां जाने को जैन अपना स्टेटस सिंबल मानते हैं। इसके अलावा ब्रैंडेड कपड़े पहनना और आशियाने को आलीशान बनाना इनके शो-ऑफ का तरीका है। जैन समाज, दिल्ली के अध्यक्ष और समाजसेवी चक्रेश जैन बताते हैं कि अपनी विकसित सोच के कारण जैन हमेशा आगे रहना ही पसंद करते हैं। 

दहेज बड़ी दिक्कत 

शादी-समारोह में पैसे को पानी की तरह बहाना और मोटे दहेज की मांग करना इस समुदाय की सबसे बड़ी दिक्कत रही है। हालांकि बदलते वक्त के साथ काफी बदलाव आया है और अब बेहतर लड़का या लड़की देखकर शादी होने लगी है। इसके बावजूद जैन कम्युनिटी में शादी में दहेज अब भीकाफी बड़ी कमजोरी है। कुछ लोग इस परंपरा को तोड़कर आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है। इसके अलावा कई तरह के रीति-रिवाजों को लेकर मतभेद सामने आते हैं। जैसे जैन कम्युनिटी से जुड़े लोग जीव हिंसा से बचने के लिए पानी छानकर पीने व दिन छिपने से पहले भोजन करने में विश्वास रखते हैं। वहीं, रात के वक्त मंदिरों में पूजा करने के दौरान दीपक जलाए जाते हैं, जिससे जीव हिंसा होती है। इस तरह की बातों को लेकर अक्सर विरोध होता है। 
पैसे से मुसीबत भी 

ज्यादा पैसे वाला होने की गूंज से इस समुदाय को अक्सर नुकसान भी पहुंचा है। ऐसे में जैनों को अक्सर रंगदारी और किडनैपिंग जैसी वारदातों से भी जूझना पड़ता है। इस वजह से भी काफी लोग अपने नाम में जैन लिखने की जगह गोत्र का इस्तेमाल करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस आर. एम. लोढा, इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज दलबीर भंडारी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, एक्ट्रेस आशा पारेख, डायरेक्टर सूरज बड़जात्या आदि जैन हैं, लेकिन गोत्र लिखने के कारण लोगों को पहली नजर में इनके जैन होने का पता नहीं चलता है। 

ग्लोबल सिटिजन 

वैसे तो जैन पूरे भारत में हैं, लेकिन गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि में इनकी संख्या काफी ज्यादा है। वहीं, बिजनेस और जॉब के चक्कर में वे लगातार विदेशों में भी बस रहे हैं। लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ में दर्शन विभाग के एचओडी प्रफेसर वीर सागर जैन के मुताबिक, बिजनेस के चलते साउथ अमेरिका और जॉब की वजह से नॉर्थ अमेरिका में काफी जैन रहते हैं। पुणे से बिलॉन्ग करने वाले रमेश जैन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में कंप्यूटर साइंस एंड एजुकेशन के प्रफेसर रह चुके हैं। साथ ही, अब बतौर साइंटिस्ट काम कर रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका में फैंटम के नाम से फेमस ह्यूमन मॉडल बनाने वाले अनिल जैन चर्चाओं में हैं। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय मूल के दीपक सी. जैन इस वक्त बैंकॉक की एक यूनिवर्सिटी में डीन हैं। वह लंदन की नॉर्थम्प्टन यूनिवर्सिटी से संबंधित केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन भी रह चुके हैं। 

हर फील्ड में कमा रहे हैं नाम

मेरे हिसाब से जैन धर्म किसी भी मामले में किसी से पीछे नहीं है। इस कम्युनिटी से जुड़े लोग हर फील्ड में खूब नाम कमा रहे हैं, चाहे वह कला का क्षेत्र हो या राजनीति का। बिजनेस व पढ़ाई में जैन समाज पहले से ही अव्वल हैं, लेकिन अब जॉब करने में भी वह किसी से पीछे नहीं हैं। नए जमाने के हिसाब से भी उनका कोई तोड़ नहीं है। -रवींद्र जैन, संगीतकार 

नीरसता ने दूर किया नई पीढ़ी को जैन समुदाय के लोगों के पास माल बढ़िया है, लेकिन पैकिंग यानी प्रस्तुतिकरण काफी खराब है। जमाना प्रजेंटेशन का है, जिससे किसी भी चीज के बारे में लोगों को पता चलता है। अहिंसा, अपरिग्रह व अनेकांत आदि इसी धर्म के सिद्धांत हैं, जिन्हें लोग अब भी मानते हैं। लेकिन अध्यात्म व सिद्धांत को इतना नीरस बना दिया गया कि नई पीढ़ी जैन धर्म से दूर होती चली गई।

-तरुण सागर, जैन मुनि

साभार: नवभारत टाइम्स 

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