Monday, June 26, 2017

शशांक खेतान - SHASANK KHAITAN


शशांक खेतान एक भारतीय फिल्म निर्देशक हैं। उन्हें हिंदी सिनेमा में फिल्म हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया के लिए जाना जाता है।

प्रष्ठभूमि

शशांक खेतान का जन्म कोलकाता में हुआ था।लेकिन उन्होंने अपना पूरा बचपन मुंबई में बिताया। शशांक कभी भी फिल्म निर्देशक नहीं बनना चाहते थे, उनका रुझान बचपन से ही क्रिकेट की ओर था, लेकिन सत्रह वर्ष की उम्र में उन्होंने फ़िल्मी दुनिया में आने की सोची।

पढाई

शशांक खेतान ने अपनी शुरुआती पढाई मुंबई से सम्पन्न की है। उन्होंने फ़िल्म में अपना करियर बनाने के लिए सुभाष घई का विश्लिंग वुड्स फिल्म कॉलेज को ज्वाइन किया, यंहा उन्होंने निर्देशन से जुडी हर प्रकार की तकनीक को अच्छे से सीखा। उन्होंने अपनी पढाई के दौरान ही शेरवानी कहाँ है, फिल्म निर्देशित की, लेकिन फिल्म कुछ खास नहीं चली, और बुरी फ्लॉप साबित हुई।

करियर

विशलिंग वुड्स इंस्टीयूट से पढ़ाई खत्म होने के बाद शशांक ने निर्देशक सुभाष घई को उनकी फिल्म ब्लैक एंड वाइट में बतौर सहायक निर्देशक असिस्ट किया। उकसे बाद उन्होंने बतौर फिल्म निर्देशक हिंदी सिनेमा में करन जौहर निर्मित फिल्म फिल्म हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया निर्देशित की। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में अलिया भट्ट और वरुण धवन नजर आये थे। फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर काफी अच्छा व्यापार किया था।

साभार :
hindi.filmibeat.com/celebs/shashank-khaitan/biography.html

Friday, June 23, 2017

VARSHNEY VAISHYA HISTORY - वार्ष्णेय वैश्य इतिहास



Shri Krishna has been addressed as Varshney in Verse 40-Chapter 1 and Verse 36-Chapter 3 of Bhagavad Gita , as of Vrishnilineage. Barahsaini or Varshney Vaish regard themselves as descendants of Akrurji of the same lineage,which was primarily settled in Vrij (or Braj).

Advent of Indian Culture

At the beginning of the present 28th Chaturyug of 7th Manvantar, Caspian Sea isolated to form a lake like large water body. Offsprings of great sage Kashyap and Aditi,daughter of Daksh Prajapati thrived along the banks of this water body. Their son Vivaswan continued the lineage with Shraddhdev(Manu) ,Ila, Aayu, Nahusha and Yayati.

Vedic- Saraswati Culture in Central Part of Bharat- Varsh

The Great Saraswati River originated from Bandarpunch massif of Himalayas. Sutudri or Sutlej from Mt. Kailash merged with Saraswati near present day Satrana (Punjab). Yamuna from Yamunotri also assisted the Saraswati at present day Paonta Sahib(Himachal Pradesh).
Saraswati River flowed parallel to Sindhu river from Mt.Kailash, on its west side and Drisadvati river from Shivalik hills on its east side. All the three rivers flowed from North to South. Biggest of these, Saraswati traversed through Punjab, Haryana, and Rajasthan, finally falling in Arabian sea at Rann of Kutch in Gujarat.
The son of great king Yayati,Yadu migrated along the banks of Saraswati and settled at lower plains of Middle Bharat. Marriage system was first adopted in this region. Thus man dominated lineage or Vansh started .

There were heavy settlements along the Saraswati river ,as water resources were of prime importance for this agrigarian society. They were grouped in small units lead by a Vish-pati and common man was called Vish. These people were trading overseas with other cultures of the same period.Saraswati river provided them the passage to the sea. 

Later the Vish changed to Vaish , the first evolved varna of later adopted four Varnas. Rigveda also originated and propogated as hymns ,as there was no writing script. 

Yadu vansh or lineage continued with Shahastrajit,Satjit,Haihaya,Dharm,Netra,Kunti,Sohajji,Mahishman,Bhadrasen,Dhanak,Kratveerya,KartveeryaArjun,Jaydhwaj,Taljangh,Veetihotra or Vrisha.

Vrij and Vrishni

Vrij was a region falling within the present Jaipur, Agra And Delhi (Indraprashtha).This region,named after Vrisha, was traditionally acknowledged as Golden triangle.Its centre Madhupuri or Mathura was known after Madhu who was the son of Vrisha and father of Vrishni.

The Supreme god Vishnu took birth in Vrishni lineage.He established the might of Bharat through economic,political and cultural developments,which sustained through thousands of years and changed the entire world .To develop economy, coins and seals were introduced. Units of weights and measures were adopted. Writing scripts with alphabets and numbers were mooted and organised by rules of grammer and maths.As a result,all of the four Vedas originated till then ,were scripted and preserved. Vrijarea was the main region of all these activities. Dwarika was an international trade city.Vrij andDwarika, both were ruled as the republics, which was the new form of polity.
Later identified Sindhu or Indus valley civilisation was actually remnant of the Saraswati civilisation.The whole of the world adopted original economic,political and intellectual systems of Bharat-Varsh to develop their own lands.

Decline of the Vedic culture

Almost 3900 years ago, due to tectonic plate movements Sutudri/Sutlej turned abruptly at present Ropar (Punjab) and finally merged with Sindhu.While Yamuna shifted its course to the east. Remnant Saraswati subsided before reaching to Rajasthan. It dried up in Rajasthan which was once a very thriving area, leaving it a desert.

Varnas system classified the society on the basis of work efficiency and aptitude but with equal rights and flexibility. It slowly changed into rigid caste system based on births,which gave unequal rights and discriminated people.Thus a vibrant and knowledge based society so badly fell from its height that ,it again and again was routed by foreign invasions.The very heart of civilisation ,Vrij ,was ruined and ruled By Mugals at Agra and then Delhi.Illustrious Vrishni lineage of Vrij got so severe drubbings that, even the memories of its golden past have been wiped out.











साभार:  
Varshney History
varshneyhistory.blogspot.in/


Thursday, June 22, 2017

शत्-शत् नमन 22 जून/बलिदान-दिवस,नगर सेठ अमरचन्द बांठिया को फांसी।



स्वाधीनता समर के अमर सेनानी सेठ अमरचन्द मूलतः बीकानेर (राजस्थान) के निवासी थे। वे अपने पिता श्री अबीर चन्द बाँठिया के साथ व्यापार के लिए ग्वालियर आकर बस गये थे। जैन मत के अनुयायी अमरचन्द जी ने अपने व्यापार में परिश्रम, ईमानदारी एवं सज्जनता के कारण इतनी प्रतिष्ठा पायी कि ग्वालियर राजघराने ने उन्हें नगर सेठ की उपाधि देकर राजघराने के सदस्यों की भाँति पैर में सोने के कड़े पहनने का अधिकार दिया। आगे चलकर उन्हें ग्वालियर के राजकोष का प्रभारी नियुक्त किया।

अमरचन्द जी बड़े धर्मप्रेमी व्यक्ति थे। 1855 में उन्होंने चातुर्मास के दौरान ग्वालियर पधारे सन्त बुद्धि विजय जी के प्रवचन सुने। इससे पूर्व वे 1854 में अजमेर में भी उनके प्रवचन सुन चुके थे। उनसे प्रभावित होकर वे विदेशी और विधर्मी राज्य के विरुद्ध हो गये। 1857 में जब अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय सेना और क्रान्तिकारी ग्वालियर में सक्रिय हुए, तो सेठ जी ने राजकोष के समस्त धन के साथ अपनी पैतृक सम्पत्ति भी उन्हें सौंप दी।

उनका मत था कि राजकोष जनता से ही एकत्र किया गया है। इसे जनहित में स्वाधीनता सेनानियों को देना अपराध नहीं है और निजी सम्पत्ति वे चाहे जिसे दें, पर अंग्रेजों ने राजद्रोही घोषित कर उनके विरुद्ध वारण्ट जारी कर दिया। "ग्वालियर राजघराना भी उस समय अंग्रेजों के साथ था।"

अमरचन्द जी भूमिगत होकर क्रान्तिकारियों का सहयोग करते रहे, पर एक दिन वे शासन के हत्थे चढ़ गये और मुकदमा चलाकर उन्हें जेल में ठूँस दिया गया। सुख-सुविधाओं में पले सेठ जी को वहाँ भीषण यातनाएँ दी गयीं। मुर्गा बनाना, पेड़ से उल्टा लटका कर चाबुकों से मारना, हाथ पैर बाँधकर चारों ओर से खींचना, लोहे के जूतों से मारना, अण्डकोषों पर वजन बाँधकर दौड़ाना, मूत्र पिलाना आदि अमानवीय अत्याचार उन पर किये गये। अंग्रेज चाहते थे कि वे क्षमा माँग लें; पर सेठ जी तैयार नहीं हुए। इस पर अंग्रेजों ने उनके आठ वर्षीय निरपराध पुत्र को भी पकड़ लिया।

अब अंग्रेजों ने धमकी दी कि यदि तुमने क्षमा नहीं माँगी, तो तुम्हारे पुत्र की हत्या कर दी जाएगी। यह बहुत कठिन घड़ी थी, पर सेठ जी विचलित नहीं हुए। इस पर उनके पुत्र को तोप के मुँह पर बाँधकर गोला दाग दिया गया। बच्चे का शरीर चिथड़े-चिथड़े हो गया। इसके बाद सेठ जी के लिए 22 जून, 1858 को फाँसी की तिथि निश्चित कर दी गयी। इतना ही नहीं, नगर और ग्रामीण क्षेत्र की जनता में आतंक फैलाने के लिए अंग्रेजों ने यह भी तय किया गया कि सेठ जी को 'सर्राफा बाजार' में ही फाँसी दी जाएगी।

अन्ततः 22 जून भी आ गया। सेठ जी तो अपने शरीर का मोह छोड़ चुके थे। अन्तिम इच्छा पूछने पर उन्होंने नवकार मन्त्र जपने की इच्छा व्यक्त की। उन्हें इसकी अनुमति दी गयी, पर धर्मप्रेमी सेठ जी को फाँसी देते समय दो बार ईश्वरीय व्यवधान आ गया। एक बार तो रस्सी और दूसरी बार पेड़ की वह डाल ही टूट गयी, जिस पर उन्हें फाँसी दी जा रही थी। तीसरी बार उन्हें एक मजबूत नीम के पेड़ पर लटकाकर फाँसी दी गयी और शव को तीन दिन वहीं लटके रहने दिया गया।

सर्राफा बाजार स्थित जिस नीम के पेड़ पर सेठ अमरचन्द बाँठिया को फाँसी दी गयी थी, उसके निकट ही सेठ जी की प्रतिमा स्थापित है। हर साल 22 जून को वहाँ बड़ी संख्या में लोग आकर देश की स्वतन्त्रता के लिए प्राण देने वाले उस अमर हुतात्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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घनश्याम अगरवाल की फेसबुक वाल से साभार 

Wednesday, June 21, 2017

वैश्य समुदाय से आपत्ति क्यों......

जिन्हें वैश्य समुदाय(बनिया, पटेल, खत्री, अरोड़ा, सिन्धी, सूद, भाटिया, लोहाना, चेट्टियार, शेट्टी, चेट्टी, मुदलियार, नाडार, वन्नियार, जैन, तेली, साहू, राठोड़, कलवार, कायस्थ, आदि) से आपत्ति हैं. --उनके लिए -- कुछ निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत कर रहा हूँ.

इसे पढ़ कर वैश्यों के बारे में धारणा ठीक हो जाएगी जिन्हे कुछ भी भ्रम है --

भारत में वैश्यों की स्तिथि --इन तथ्यों को भी जान लें -

-- सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य
-- सम्राट अशोक
-- गुप्त वंश के सम्राट
-- सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
-- सम्राट समुद्रगुप्त
-- सम्राट हर्षवर्धन
-- भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट हेमू विक्रमादित्य 
--ःभारत के राष्ट्र पिता महात्मा गांधी
--पहले सेनाध्यक्ष जनरल करियप्पा 
--प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी
--भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह 
--भारत के कुल इनकम टैक्स में 64% योगदान -
--भारत में विभिन्न प्रकार के दिए जाने वाले दान में 62% योगदान -
--लगभग 12000 गोशालाओं का सुचारु संचालन -
--भारत के 46% शेयर ब्रोकर बनिए हैं -
--भारत की GDP में लगभग 60% योगदान -
--बनिए भारत की कुल संपत्ति के 38% पर मालिकाना अधिकार रखते हैं -
--लगभग 35% चार्टर्ड अकाउंटेंट बनिए हैं -
--18% इंजीनियर-
--20% डॉक्टर -
--21% कंपनी सेक्रेटरी -
--21% कॉस्ट अकाउंटेंट -
--17% एम् बी ए, 12% वकील -
--लगभग 80% से ज्यादा धर्मशालाएं बनियों द्वारा संचालित हैं -
--मंदिरों में दिए जाने वाले दान में सबसे जयादा हिस्सा बनियों का होता है --
ये बनियों के मालिकाना हक़ वाली कुछ कंपनियों की सूची है --
--जिंदल स्टील -
--मित्तल आर्सेलर स्टील -
--भारती एयरटेल -
--जेट एयरवेज-
--वेदांता स्टरलाइट -
--ज़ी ग्रुप (एस्सेल ग्रुप)
--बिग बाजार -
--रिलायंस ग्रुप -
--टेली सोलुशन -
--ग्रासिम -
--हिंडालको-
--आईडिया सेलुलर -
--सन फार्मा -
--एस्सार स्टील-
--अम्बुजा सीमेंट -
--डालमियां सीमेंट -
--अल्ट्राटेक सीमेंट -
--विक्रम सीमेंट -
--जे के सीमेंट -
--हिंदुस्तान मोटर्स -
--बजाज ऑटो -
--टाइम्स ऑफ़ इंडिया -
--हिंदुस्तान टाइम्स -
--अमर उजाला -
--दैनिक जागरण -
--दैनिक भास्कर -
--दिव्या भास्कर -
--लोकमत -
--इंडियन एक्सप्रेस -
--फ्लिपकार्ट -

साथ ही जी टीवी, टीवी 18, इ टीवी, नेटवर्क 18, आज तक, ABP NEWS 
--Myntra- 
--yebhi-
--Indiamart-
--Zamato -
--snapdeal -

इतना सब कुछ और जनसँख्या 20 करोड़ ---और -- वो भी बिना किसी आरक्षण के ! आगे बढ़ने के लिए दिमाग और मेहनत चाहिए। अपना स्वाभिमान हैं. अपनी मेहनत हैं, इसलिए तो सबसे आगे हैं. यह तो एक झलकी हैं मेरे दोस्त, आगे तो पूरी रामायण हैं……

Tuesday, June 20, 2017

बनिया तो चतुर ही होगा


अब मेरी समझ में आया कि शब्दकोष में हर शब्द के कई मायने क्यों दिए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि उसका इस्तेमाल करने वाले लोग अलग-अलग राजनीतिक दल विविध सोच लिए होते हैं और वे अपनी जरूरत के अनुसार किसी शब्द का अर्थ गढ़ सकते है। इसमें शब्दकोष उनकी मदद करता है। ठीक वैसे ही जैसे कि जब कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में दोनों पक्षों के बीच जमकर जुतम पैजार हुई, जूते चप्पल और माइक तक एक दूसरे पर खींच कर मारे गए तो एक कार्टून में किसी नेता को हाथ में जूता व माइक लिए यह कहते दिखाया गया कि यह चलने और बोलने के काम भी आते है।

जब सीताराम केसरी कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो पार्टी ने अपने अंदरूनी हालात जानने के लिए एक सर्वे करवाया। सर्वे करवाने वाली कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि “कांग्रेंस लीडरशिप इज एजेड एंड जेडेड” मैने तुरंत शब्दकोष का सहारा लिया तो वहां जेडेड शब्द के कई अर्थ दिए गए थे। इसका एक अर्थ मरियल घोड़ा भी था। मेरी मनोकामना पूरी हो गई और मैंने अखबार में खबर छाप दी कि कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे का अपना मानना है कि पार्टी नेतृत्व बूढ़ा व मरियल घोड़े जैसा है।

इस पर जबरदस्त हंगामा हुआ और सीताराम केसरी ने मुझे नींद से जगा कर जमकर खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि सामने तो मुझे चचा कहते हो और अखबार में मुझे बुढ़ा मरियल घोड़ा बताते हो।

अब ठीक वैसा ही विवाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा हाल ही में महात्मा गांधी को बहुत चतुर बनिया बताते हुए कहा कि उन्होंने ठीक ही कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस को भंग कर देना चाहिए क्योंकि न तो यह पार्टी किसी सिद्धांत पर आधारित थी और न ही उसकी कोई विचारधारा थी। वह तो आजादी हासिल करने के लिए गठित की गई स्पेशल परपज वैहिकिल की तरह थी।

उनके यह कहने के बाद हंगामा खड़ा हो गया। महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी से लेकर जाने-माने इतिहासकार व गांधी विशेषज्ञ रामचंद गुहा ने उनके इस बयान की निंदा की। कांग्रेंस से लेकर तृणमुल कांग्रेस तक ने गांधी को चतुर बताए जाने पर शाह को घेरने की कोशिश की। यह सब देख व पढ़ कर मुझे याद आया कि जब हम छोटे थे तो अक्सर पर्यायवाची शब्द याद करते थे। तब चतुर का मतलब होशियार होता था। किसी फिल्म में महमूद ने एक गीत भी गाया था जिसके बोल थे एक चतुर नार बड़ी होशियार। हां, जब पंचतंत्र की कहानियों में लोमड़ी के लिए चतुर शब्द का इस्तेमाल किया जाता तब जरूर उसका अर्थ चालाक हो जाता था। वैसे चालाक होना बहुत बुरी बात नहीं है। खासतौर से जब तक कि कोई किसी को अपनी चालाकी से नुकसान न पहुंचाए। अगर बापू को चालाक भी कहा जाए तो उसमें कोई गलती नहीं है।

एक समय अंग्रेज दुनिया की सबसे चालाक कौम हुआ करती थी। उन्होंने अपनी चालाकी के चलते ही कुछ सौ सैनिकों को साथ ला कर भारत पर राज किया। उनके साम्राज्य में सूरज डूबता ही नहीं था। भारत को गुलाम बनाने और उसे जम कर लूटने के बाद भी वे बड़े मजे से हमें टा टा करते हुए इस देश से रवाना हुए। अपने शर्मनाक कारनामों के बावजूद उन्हें गुलाम देशों का क्लब राष्ट्रमंडल बनाया जिसके आयोजन पर भारत सरीखे देश भी खुद को गौरांवित महसूस करते हैं। जब राष्ट्रमंडल खेल होते है तो हम चाहते है कि हमारे पुराने आंका ब्रिटेन की महारानी उसका उद्घाटन करे। अगर वे नहीं आ सकती हो तो कम से कम अपने किसी प्रतिनिधी को भेज दे। तब उन अंग्रेजो को भारत छोड़ने के लिए बाध्य कर देने वाले गांधी उनसे ज्यादा चालाक व चतुर कहे जाएंगे या नहीं?

आकार पटेल ने महात्मा गांधी को चतुर बनाए जाने पर अपने कॉलम में लिखा कि गुजरात में चतुर एक अच्छा सम्मानवाचक शब्द माना जाता है। वहां की जनसंख्या में महज दस फीसदी लोग ही बनिए है जो कि सांस्कृतिक दृष्टि, उदारता, अहिंसा, गोरक्षा व्यापार, शाकाहारी होने सरीखे गुणों के कारण पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। वहां बनियों की अहमियत तो उन ब्राह्मणों से भी ज्यादा है जो कि उत्तर भारत से आए थे। आजादी के आंदोलन में पहले मराठी व बंगाली ब्राह्मण हावी थे बाद में उस पर गुजराती बनिए, गांधी, पटेल, जिन्ना हावी हो गए। जिन्ना खोजा मुसलमान थे जोकि वहां का व्यापारी समुदाय है। अमित शाह तो खुद भी बनिया (जैन) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मोध बनिए है।

गुजराती के कहावत कोष में लिखा है कि बनिए की मूंछ नीची होती है। वह कभी ठाकुरों की तरह अपनी मूंछे मरोड़ कर किसी को चुनौती नहीं देता है बल्कि बड़ी विनम्रता से अपना काम निकाल लेता है। उसका मानना है कि महज दिखावे के लिए अभिमान या झूठी शान जताने से क्या फायदा? बनिए अपनी बुद्धि और कंजूसी दोनों के लिए प्रसिद्ध है। मैं इसी कॉलम में लिख चुका हूं कि पहले बनियों को व्यापार के लिए ही जाना जाता था मगर अब वे हर क्षेत्र में हावी हो चुके हैं। आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम दिखाने वाला विज्ञापन देखिए उसमें हर तीसरा प्रतियोगी बनिया नजर आएगा। आईआईटीजी हो, पीएमटी हो, सिविल सेवा हो या कुछ और आपको बंसल, अग्रवाल, जिंदल, मोदी, गुप्ता आदि ही नाम नजर आएंगे। उनकी बुद्धि का जवाब नहीं। सीए, कंपनी सेक्रेटरी से लेकर डाक्टर व आईपीएस तक सभी क्षेत्रों में उन्होंने धूम मचा कर रख दी है।

पिछले साल महज 250 रुपए में सेल फोन देने के लिए बुकिंग करने वाला रिगिंग टोन कंपनी का मालिक मोहित गोयल भी कोई युवा बनिया ही था। देश के तमाम बड़े समाचार पत्रों के मालिक बनिए ही है। चाहे वह हिंदुस्तान टाइम्स हो, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया अथवा जागरण, अमर उजाला या भास्कर। महात्मा गांधी तो खुद भी अखबार निकाल चुके थे। जयशंकर से लेकर मैथलीशरण गुप्त सरीखे साहित्यकार भी बनिए ही थे। अपना मत है कि बनिए कंजूस होते हैं मगर वे दान पुण्य में काफी आगे रहते हैं। शादी और मकान बनाने में अपनी थैलियां खोल देते हैं। पिछले दिनों श्मशान घाट जाना पड़ा। वहां खड़े-खड़े नजर दौड़ाई तो पता चला कि हर घाट, कमरे वातानुकूलित हाल पर किसी न किसी बनिए का नाम लिखा था। मैं सोच में पड़ गया कि अगर बनिए नहीं होते तो शायद हिंदुओं का अंतिम क्रिया कर्म भी ढंग से नहीं हो पाता।

वृंदावन जाने वाले 80 फीसदी लोग बनिए होते हैं। वे धर्मशालाएं, मंदिर, कुंए, बावड़ी बनवाते हैं। अगर बनिए न होते तो वृदावन मथुरा के पुजारी अन्ना बन कर रह जाते। व्यापारी, बैकर, साहूकार सभी बनिए ही तो हैं। अगर बनिया चालाक नहीं होगा तो कौन होगा? आकार पटेल ने खुलासा किया है कि गुजरात में मोदी मोध बनिए होते हैं। जोकि वितरक व एक दाम पर काम करने वाले होते हैं। उनमें लचीलापन या किसी को अपने में समाहित करने का गुण नहीं होता है।

बनियों पर खोज करते हुए किसी ने एक चुटकुला सुनाया। एक बार अरब का कोई शेख बहुत बीमार पड़ गया। उसे खून की सख्त जरूरत थी। उसके बनिया दोस्त ने उसे अपना खून दिया। शेख ठीक हो गया और उसने कृतज्ञता जताते हुए उसे अपनी मर्सीडीज कार उपहार में दे दी। कुछ साल बाद शेख बीमार पडा और बनिया ने उसे पुनः खून दिया। जब वह उसके ठीक होने पर उससे मिलने गया तो चलते समय शेख ने उसके हाथ में मिठाई का डिब्बा पकड़ा दिया। बनिए ने इसकी वजह पूछते हुए कहा कि पिछली बार तो तुमने मुझे कार उपहार में दी थी। शेख ने मुस्कुराते हुए कहा ‘अब मेरी रगों’ में तुम्हारा खून दौड़ रहा है।

अमित शाह का महात्मा गांधी को चतुर बनिया कहना देश में हंगामे की वजह बन गया, लेकिन गुजरात के लोगों को अंचभा हो रहा है. जाने-माने स्तंभकार आकार पटेल ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखा है कि भले ही देश में ‘बनिया’ शब्द लेकर आपत्ति हो रही हो, लेकिन गुजरात के बनियों को इससे कोई दिक्कत नहीं है.

चतुर का मतलब होता है चालाक, सतर्क , कुशाग्र. हालांकि चतुर बनिया कहने पर धूर्तता के हल्के तत्व का आभास होता है, लेकिन इसमें शेक्सपियर के पात्र शाइलॉक जैसी धूर्तता नहीं है. बनिया शब्द में कठोरता नहीं एक तरह का लचीलापन है. बनिया जाति के लोग सेना में सबसे कम है. इसका मतलब क्या वे कायर होते हैं. बिल्कुल नहीं.

बनिया दांव लगाता है, सोच-समझकर, ऐसा दांव, जिसे जाट भी लगाने से घबराएगा. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधी, जिन्ना और पटेल जैसे गुजरातियों से पहले मराठी और बंगाली ब्राह्मणों का वर्चस्व था. लेकिन गुजरात की संस्कृति की लोच और अहम को किनारे रखने के गुण के जरिए सौदेबाजी की कला ने उन्हें अपरिहार्य कर दिया.

Monday, June 19, 2017

सीता साहू बनी पटना की मेयर


जीत के बाद मिठाई खातीं सीता साहू।

पटना. मेयर चुनाव महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। एनडीए समर्थित उम्मीदवार सीता साहु ने पटना मेयर की कुर्सी अपने नाम कर लिया है। सीता पटना की पहली महिला मेयर होंगी। कड़े मुकाबले में सीता ने रजनी राय को 3 वोट से पराजित किया है।सीता और रजनी में था कांटे की टक्कर...

पटना में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में सीता साहू को 38 वोट मिले थे, जबकि रजनी राय को 35 वोट मिले हैं। कुल 75 वोट पड़े थे। इसमें 2 वोट अवैध घोषित किए गए थे। सीता वार्ड 58 से पार्षद चुनी गई हैं। रजनी वार्ड पार्षद 22 से चुनी गई हैं। इन दोनों के बीच शुरू से ही कांटे की टक्कर थी। रजनी को महागठबंधन के नेताओं का समर्थन प्राप्त था, जबकि सीता साहू को एनडीए का समर्थन प्राप्त था।

पटना नगर निगम मेयर-डिप्टी मेयर का चुनाव सोमवार की सुबह कलेक्ट्रेट सभागार में शुरू हुआ। चुनाव दलीय आधार पर नहीं होने के बाद भी इस बार मेयर चुनाव में भाजपा और महागठबंधन के विधायक मंत्रियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी।

मुकाबला भाजपा गुट की सीता साहू और महागठबंधन गुट की रजनी देवी के बीच शुरू से चल रहा था। दोनों गुटों का दावा था कि उन्हें 50 से अधिक पार्षदों का समर्थन है। भाजपा गुट के पार्षदों का नेतृत्व विधायक नितिन नवीन अरुण सिन्हा और महागठबंधन गुट का नेतृत्व एमएलसी संजय सिंह और श्याम रजक नेता कर रहे थे।

सीता साहू

साभार: दैनिक भास्कर 


Sachin Gupta MUSIC DIRECTOR



Sachin Gupta (born 12 August 1984 in New Delhi) is an Indian music director, composer, guitarist, record producer and a Singer. His work has spanned everything from playing live shows with his previous band 'Mrigya' to composing indie popalbums for artists like Atif Aslam, Alisha Chinoy, Jal, Ahmed Jahanzeb, Apache Indian and Mika among others. Termed by international media as the 'Flying Finger Melodies',  his music, as he says, is inspired by real life instances, while his guitar playing has been heavily influenced by Yngwie Malmsteen.

Sachin Gupta was born in a family of doctors and has studied science at school level. He was in Frank Anthony and spent a couple of years in Apeejay School in New Delhi. Having gotten through IIT-Delhi in Mechanical Engineering, Sachin decided to instead study physics (honours) and went to Sri Venkateswara College in Delhi University. But after a year, he moved to study B.Com (Hons) at Shahid Bhagat Singh College while pursuing music simultaneously. He was introduced to the guitar at the age of 7 by his mother and ever since, he took music as his calling in life. He has performed at over 600 concerts across various countries including Dubai, London, Singapore, New Zealand and Australia  that has included major music festivals such as the Jazz Fest, Edinburgh Fest and Scotland Fest. He met with the Vice-President of TIPS Films in London during one of his shows, and he moved to Mumbai in 2005. A progression into Bollywood came naturally to him.

Sachin has made a variety of songs under various genres. His rock tones in his compositions for Atif Aslam's Doorie brought him fame in dismal indie music scene. He has composed and produced tracks on Mika's album Dunali, Ashok Masti's Clap on the Beat and Alisha Chinnoy's Shut Up N Kiss Me. He also produced tracks for Apache Indian and UK based Khiza. Other names include Pakistani artists Jal, Adeel and Ahmed Jahanzeb. Presently Sachin is working on two Indian bands, Rooh and Ni9NE.

Sachin ventured into Bollywood with the two promotional tracks called Yaad Aaye Woh Pal and Farishta for the Jimmy Shergill-KK Menon starrer Strangers released in 2007. His first full-fledged film is Dil Kabaddi that stars Irrfan Khan, Soha Ali Khan, Rahul Bose, Konkona Sen Sharma and Rahul Khanna. His music is a mix of reggaeton beats in the groovy Utha Le Ya Phek De. He shared his voice with Jaspreet Singh for the single Ehsaan which is a soulful melody. He also directed Fateh Ali Khan on the track Zindagi Ye in the same film. His music in the film Bolo Raam has a nice contemporary sound and is somewhat different than Sachin's earlier works. The songs Maa and Tere Ishq Mein are cord-touching soulful numbers. He was featured in Prince, a TIPS film with Kumar Taurani that has Viveik Oberoi in the lead. His second film was Manoj Bajpai starrer Jugaad. The rock version of its title track Tension Lene Ka Nahin Dene Ka which was introduced in Ni9NE, got rave reviews from public. His music for the movie Jo Hum Chahein that had lyrics by Kumaar was widely appreciated for its complete soundtrack appeal, his next film album is for Yash Raj Films youth film division Y-Films production Mere Dad Ki Maruti where he teams up with lyricist Kumaar again.

Gupta married to actress Sasha Agha in 2014, against her parents wishes in a court at Mumbai. Before the marriage, Agha's mother Salma Agha had lodged a complaint against Sachin. In April 2015, Agha separated from her husband and moved to Dubai, however Sachin denied about their separation.

Finding Fanny

1 Song With Sachin-Jigar

2013 

Table No. 21

Mere Dad Ki Maruti

Yamla Pagla Deewana 2

Promo Track- Aidaan Hi Nachna 

Issaq

2 songs 

2012 

Jo Hum Chahein

Damadamm!

1 Song With Himesh Reshammiya

Will you marry me?

2 songs 

2011 

Warning 

5 August 2011 

Chalo Dilli


2010 

Prince

full soundtrack(all songs) 

2009 

Bolo Raam

Jugaad 

13 February 2009 

2008 

Dil Kabaddi

. Full soundtrack 

2013 

Issaq

Aag Ka Dariya (Unplugged) 

2013 

Issaq

Bhole Chale 

Rahul Ram

2012 

Will you marry me?

Tu ru tu ru tu 

Monali Thakur

2012 

Damadamm!

Bhool Jaaun 

Himesh Reshammiya

2010 

Prince

Tere Liye (Unplugged) 

Solo 

2009 

Jugaad 

Tension Lene Ka Nahi – Remix 

Aditya Jassi

2008 

Dil Kabaddi

Ehsaan 

Jaspreet Singh 



Sachin Gupta - FILM DIRECTOR


Sachin Gupta (born 9 March 1978) is an Indian film Producer,Writer and Director.He produces films under Chilsag Motion Pictures & also an Artistic Director of Chilsag Chillies Theatre Company.He made his writing and directorial debut with the critically acclaimed film Paranthe Wali Gali (2014), produced by Chilsag Motion Pictures, a production company he established in 2012.Sachin's sojourn into theatre started when he was 12 years old, and to date he has staged more than Hundred shows around the world working as an Actor, Director and Playwright including his award-winning Off Broadway play 'Celebration of life', 'Handicapped City' & 'Kailashnath weds Madhumati' which he staged Off-Broadway, New York and in Toronto, Canada for which he got huge appreciation amongst theatre lovers in North America.

Sachin Gupta was born in New Delhi,India & did his schooling at Summer Fields School,Kailash Colony New Delhi and then attended Engineering College in Noida UP,India from where he received his bachelor's degree in Computer Engineering & later he completed his MBA Degree from Symbiosis Pune.

Recipient of National Award "Natya Bhushan", Sachin Gupta, is a qualified software engineer. He is the founder and CEO of Chilsag Entertainment Network, a media and entertainment company.

In March 2003 he started his Chilsag Chillies Theatre Company which has produced thirteen original theatre productions written and directed by Sachin Gupta addressing various social issues, even through musicals and comedy theatre productions, has formed a Theatre laboratory and a Drama Therapy centre. Also he has trained more than 300 actors in various acting programs under the acting school he began in 2004.

Internationally, he marked his debut in 2005 as he moved to North America to expand his film and theatre work, staged three Off Broadway shows at Soho Playhouse New York with American actors and studied acting at Lee Strasberg Theatre Institute, New York and at Fanshawe College, Canada and has learned nuances of Shakespearean acting at the Emerson College in the US.Since then he has performed world over, including major cities lik NewYork,Toronto,London,Birmingham,Boston,West Virginia,Connecticut,Philadelphia,Mumbai,New Delhi,Kolkata,Ontario,Orissa,Bangalore,Goa etc. In the past, Sachin has been invited to perform at some of the most prestigious International festivals held across the globe,

While working as an Artistic Director in the Chilsag Chillies Theatre Company Sachin Gupta has also been editing a theatre magazine – Theatre Pasta – that has interviewed theatre personalities from across the world and made it available on the net. With pursuit of works of the masters Sachin went to the UK to do research on Shakespeare and also did a case study on Harvard University's Theatre Company 'American Repertory Theatre' . In acknowledgement of his continued work he has received letters of positive feedback for social themed plays from the former President of India Dr APJ Abdul Kalam and an award conferred on him by Delhi's Chief Minister Sheila Dikshit on behalf of Balwant Ray Society in India.  Recently he received a National Award 'Natya Bhushan' for his contribution to theatre.

Sachin's sojourn into theatre started when he was 12 years old, and to date he has staged seventy-five shows around the world working as an Actor, Director and Playwright including his award-winning Off Broadway play 'Celebration of life', 'Handicapped City' & 'Kailashnath weds Madhumati' which he staged Off-Broadway, New York and in Toronto, Canada for which he got huge appreciation amongst theatre lovers in North America. Recently he staged his theatre production The Play Begins @8pm in Orissa while working as an actor along with film actor and playback singer Vasundhara das.

Film and television actors who have worked with Gupta's Theatre Company include Huma Qureshi, Jitin Gulati, Deepak Wadhwa, Vasundhara Das, Gauri Karnik, Anjum Farooki, Nausheen Ali Sardar, Anuj Saxena, Prerna Wanvari, Kashmira Irani, Shraddha Musale, Rubina Dilaik and Neha Pawar.

Plays written and directed by Sachin Gupta"
Celebration of Life (2003), English, Drama
Handicapped City (2004), English, Drama
Suicide is Painless (2005), Bilingual, Drama
A Roller Coaster Ride (2007), English, Children's Play
Next Indian Idol (2005), Hindi, Comedy
Great Mind at work (2005), Hindi, Comedy
KailashNath weds Madhumati (2007), Hindi, Comedy
Live Telecast (2005), Bilingual, Comedy
Devil's Carnival (2005), Musical, Drama
Don't Miss my Party (2005), Hindi, Drama
No Cheating Today (2005), Hindi, Comedy
The Play Begins @8pm (2010), Hindi, Drama

Film career

Gupta made his writing and directorial debut with the critically acclaimed film Paranthe Wali Gali (2014), produced by Chilsag Motion Pictures, a production company he established in 2012.

Filmography

YearFilmFunctioned AsNotes
DirectorProducerWriter2014 Paranthe Wali Gali Yes Yes Yes Songs by Vasundhara Das, KK, Joi Barua
2015 Thoda Lutf Thoda Ishq Yes Yes Yes Songs by Mohd Irfan, Palak Muchal, Labh Janjua
2016 Pakhi Yes Yes Yes Upcoming

As an actor

KailashNath weds Madhumati Off-Broadway Musical Comedy 2009, New York
The Play Begins @8pm Drama, 2011 Performance by Vasundhara Das & Sachin Gupta, Orissa

SABHAR: WIKIPEDIA

Saturday, June 17, 2017

DR. VARSHA AGARWAL - Santoor Maestro



Santoor Maestro


Dr. Varsha Agrawal is the one and only female artiste of Sufiyana Gharana from India who has received international recognition for her brilliant performance on Santoor.

Santoor is rare musical instruments of Kashmir and to find a female artist playing on this is rarest, Dr. Varsha Agrawal is a dedicated Santoor player who displays remarkable genius. It is really a great pleasure listening to her performance. Her audience is always spellbound when she reaches the zenith of expression during her performance.

Jhalawar is the place where the childhood memories of great Sitar player, Bharat Ratna Pt. Ravi Shankar have been fondly cherished. Dr. Varsha, grand daughter of renowned Physician of Rajasthan Dr. Kalyanmal Agrawal, belongs to Jhalawar.

Dr. Varsha is an emerging Santoor Player of Sufiyana Gharana. She is one of the most brilliant young artists of Santoor. She has been continuously performing on Santoor in various cities of the country & abroad. She has polished her art by strenuous training and ‘Riyaz’ and has won appreciation from audience all over the country & abroad.

She started learning Vocal & Tabla at an age of six from Shri Elahi Bakshji Jhalawar & Shri Girdhari Lalji Dangi, Ajmer (Raj.), since then she has been learning Vocal, Tabla & Santoor under the able guidance of Pt. Lalit Mahantji Ujjain who is a renowned Tabla Artists of Banaras Gharana and a leading disciple of Padmavibhushan Pt. Kishan Maharajji, Varanasi and Lt. Pt. Riz Ramji Desad, Mumbai of Delhi Gharana.

At present Dr. Varsha is the ‘Gandabandh’ disciple of renowned Santoor player, Saint of Santoor, king of strings Padm Shri Pandit Bhajan Sopori ji.

Dr. Varsha Agrawal is the one and only female artist of Sufiyana Gharana from India who has received international recognition for her brilliant performance on Santoor. She is the regular "A" grade artiest of santoor by AIR (All India Radio)

She is associated to AIR and Doordarshan. Her interviews & performance have been telecast on Sahara Samay T.V. Channel. A number of ragas on Santoor have also been telecast on Doordarshan. She is lac member of air.

Dr. Varsha Agrawal is the first female Santoor Maestro of the country who travelled abroad for Santoor concerts by the ministry of external affairs, India.

She is the first female Santoor Maestro whose Santoor recital was broadcast on the National Programme of Music by All India Radio

She has got top grade on the feature written by her for AIR.

She has been empanelled with indian council for cultural relations (ICCR).

She has also done Sangeet Bhusan, Sangeet Prabhakar Vocal, Sangeet Alankar (Tabla), Master of Arts (Vocal) in First Division with merit.

She was awarded Ph.D. on the subject of ‘Hadoti Ki Lok Gathavo Ki Gayan Parampara’.

At present she is working as Professor in Music Department, Govt. Girls’ P. G. College of Excellence, Dashera Maidan, Ujjain. Affiliated to Vikram University, Ujjain. Ujjain is a holy city famous for lord Mahakaleshwar Temple. It is the Sikshasthali (seat of learning) of lord Krishna .

She has been recognized as a guide for Ph.D. research work in Music by Vikram University, Ujjain and many students are doing research under her guidance.

Many Bandishes, research Papers have been published by her in Sangeet Masik, Shodh-Samvet, research link etc.


Awards
Honored by Madhya Pradesh Governor H. E. Dr. Balram Jakhar in Raj Bhawan.
Dr. Varsha awarded with "Hari Om Trust Prize" in 1998 at Hyderabad.
Research Link award 2003-04.
Kala Vidushi Award 2007.
Samrat Vikramaditya Samman 2008.
Dagar Gharana Award - 2010
Vaishya Ratna Award - 2010
Woman of the year 2012 (City winner)
Woman of Substance
Winner of Listener’s choice category
Sangeet Parampara Ratna 2013
Award of Excellence 2014

SABHAAR: 

santoortabla.com