Saturday, June 30, 2018

HARSH SAHU - हर्ष साहू को अबुधाबी में मिला १.७५ करोड़ का पॅकेज


साभार: दैनिक जागरण 

Friday, June 29, 2018

GOTAM ADANI - देश के टॉप 10 बिजनेसमैन भले हो गए अडानी, गरीबी में संघर्ष याद करने पैतृक घर जरूर जाते हैं

देश के टॉप 10 बिजनेसमैन भले हो गए अडानी, गरीबी में संघर्ष याद करने पैतृक घर जरूर जाते हैं

60 हजार करोड़ के मालिक गौतम अडानी आज अनिल अंबानी को बाहर कर देश के टॉप 10 रईसों में स्थान बना चुके हैं। मगर गरीबी के दिन भूले नहीं हैं। पुराने घर आज भी जाते हैं


कुछ किस्मत से, कुछ अपने शार्प बिजनेस माइंड से और कुछ सियासत के दिग्गजों से नजदीकियां बनाकर। इन तीन समीकरणों के दम पर आज 60 हजार करोड़ का आर्थिक साम्राज्य खड़ा करने वाले पीएम मोदी के करीबी 54 वर्षीय बिजनेसमैन गौतम अडानी कभी दाने-दाने को मोहताज थे। 12 साल की उम्र तक जिस घर में रहे, उसकी हालत देखकर आपको उनके परिवार की माली हालत का अंदाजा खुद लग जाएगा। संकरे मकान में किसी तरह उनका लंबा-चौड़ा परिवार गुजर-बस करता था। खास बात है कि आज भी वे बेटे-बहू के साथ इस मकान में जाते हैं। इस दौरान वे परिवार के साथ अपने संघर्ष को याद करते हैं। बेटों को एक आम आदमी से बड़ा बिजनेसमैन बनने तक के कठिन सफर से रूबरू कराते हैं। 

गुजरात के बनासकांठा जिले में है पैतृक मकान

गौतम अडानी का पैतृक घर गुजरात के बनासकांठा जिले के थराद में हैं। पिता शांतिलाल कपड़ा बेचकर किसी तरह सात बेटे-बेटियों का परिवार चलाते थे। संकरे मकान में पूरा परिवार रहता था। गौतम अडानी ने जब बिजनेस शुरू किया तो आर्थिक स्थिति संवरतनी शुरू हुई। धीरे-धीरे व देश के बड़े बिजनेस घरानों के टक्कर में अपने साम्राज्य को खड़ा करने में सफल रहे। फिर मकान तो छूटना ही थी। अब इस मकान में दिनेशभाई रहते हैं। दिनेशभाई कहते हैं कि कई बार उन्होंने किराया देने की कोशिश की मगर गौतम अडानी मना कर देते हैं। कहते हैं कि वे चाहते हैं कि बस घर की साफ-सफाई होती रहे। 

जब बहू ने पूछा पापा यह क्या है

दिनेशभाई कहते हैं कि एक बार गौतम अडानी बेटे और बहू के साथ पैतृक घर पहुंचे। घर में मौजूद फानूस को देखकर बहू ने पूछा कि पापा कौन सी चीज है। इस पर अडानी ने बताया, बेटा जब हमारे बचपन के जमाने में बिजली नहीं रहती थी, तब दादा-पिता लोग फानूस का इस्तेमाल उजाले के लिए करते थे। इस पर बहू अपने साथ फानूस लेते गईं। 

जानिए, अडानी के संघर्ष की कहानी, 18 साल में भागे थे घर से

गौतम अडानी के दिमाग में हमेशा रातोंरात अमीर बनने के सपने आते थे। 12 वीं पास होते ही बीकाम करने के लिए अहमदाबाद के कॉलेज में दाखिला लिया। मगर मन नहीं लगा तो 18 साल की उम्र में अहमदाबाद में पिता शांतिलाल के कपड़ों का व्यापार छोड़कर मुंबई भाग निकले। यहां हीरे की कंपनी महिंद्रा ब्रदर्स में महज तीन सौ रुपये पगार पर अडानी काम करने लगे। दिमाग तो था ही इधर-उधर से कुछ पैसा जुटा तो 20 साल की उम्र में ही हीरे का ब्रोकरेज आउटफिट खोलकर बैठ गए। किस्मत ने साथ दिया और पहले ही साल कंपनी ने लाखों का टर्नओवर किया। फिर भाई मनसुखलाल के कहने पर अडानी मुंबई से अहमदाबाद आकर भाई की प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करने लगे। पीवीसी इंपोर्ट का सफल बिजनेस शुरू हुआ। डेंटिस्ट प्रीति से उन्होंने शादी रचा ली। दोस्त मलय महादेविया को अपने साथ साये की तरह इसलिए अडानी रखते थे क्योंकि कम पढ़ाई के कारण उनकी अंग्रेजी खराब थी। अफसर व कारोबारियों से धारा प्रवाह अंग्रेजी में बिजनेस डील करने में परेशानी होती थी। अडानी की यह खूबी कही जाएगी कि उन्होंने अपनी कंपनियों में आज भी मलय को बड़े पद दे रखे हैं। 

1988 में गौतम ने डाली थी अडानी ग्रुप की नींव

जब प्लास्टिक कारोबार से पूंजी इकट्ठा हुई तो 1988 में गौतम ने अडानी एक्सपोर्ट लिमिटेड की नींव शुरू की। यह कंपनी पॉवर व एग्रीकल्चर कमोडिटीज के सेक्टर में काम करने लगी। गौतम अडानी के पेशेवर हुनर ने तीन साल में ही कंपनी के पैर जमा दिए। इस बीच धीरे-धीरे एक्सपोर्ट का कारोबार गति पकड़ता रहा। धीरे-धीरे उन्होंने पोर्ट सहित कई कारोबार में हाथ डाले तो हर जगह सफलता नसीब हुई। के बारे में बताया जाता है कि एक बार उनकी कंपनी के एकाउंटेंट ने कोई बड़ी गलती कर दी, जिससे लाखों का नुकसान होने पर उसने बिना कुछ कहे-सुने अडानी के सामने इस्तीफा रख दिया। इस्तीफा हाथ में लेकर अडानी ने फाड़ दिया। कहा कि तुम्हें गलती का अहसास हो गया, यही बहुत है। अब तुम दोबारा गलती नहीं करोगे। अगर तुम्हें रिलीव कर दूंगा तो नुकसान मेरा हुआ और यहां से गलती से जो सीखे हो उसका फायदा दूसरे कंपनी को मिलेगा। इससे पता चलता है कि अडानी किस तरह बिजनेस कार्यकुशलता रखते हैं। आज फोर्ब्स पत्रिका की नजर में अडानी की संपत्ति 7.1 बिलियन है। 


साभार: hindi.indiasamvad.co.in/specialstories/adani-lived-in-this-house-ever-14581

Thursday, June 28, 2018

सोलन की श्रुति गुप्ता ने माइनस 24 डिग्री में कथक कर तीसरी बार बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

सोलन की श्रुति ने माइनस 24 डिग्री में कथक कर तीसरी बार बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड


 सोलन की श्रुति गुप्ता ने तीसरी बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है। श्रुति ने मनाली से लेह तक पांच दुर्गम दर्रों पर एक ही दिन कथक कर यह विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए नृत्य के माध्यम से समाज को जागरूक किया। इससे पहले भी उन्हें दुर्गम स्थानों पर जागरूकता फैलाने के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है।



सोलन जिला के चंबाघाट में 15 अगस्त 1987 को जन्मीं श्रुति गुप्ता अपने साहसिक कार्यों के लिए चर्चा में रहती हैं। हिमालय की चोटियों पर जहां सांस लेना भी मुश्किल होता है वहां इस बार 16 जून को माइनस डिग्री तापमान में श्रुति ने नंगे पैर कथक कर सभी को हैरान कर दिया। विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए ऑक्सीजन की भारी कमी के बावजूद प्रत्येक दर्रे पर सात से दस मिनट तक प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले 13050 फीट की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रे पर जल संरक्षण, बारालाचा दर्रे पर 16040 फीट की ऊंचाई पर वायु प्रदूषण, नाकिला दर्रा 15547 फीट की ऊंचाई पर भूमि संरक्षण, लांचूगला दर्रा 16616 फीट की उंचाई पर नेचर सेलिब्रेशन और अंत में 17582 फीट की ऊंचाई पर तांगलांग पास में भारतीय जवानों को नृत्य से नमन किया। 


लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दो बार दर्ज हुअा नाम 

इससे पहले श्रुति गुप्ता ने पहली बार बारालाचा दर्रे पर ही 18 अक्टूबर 2015 को माइनस चार डिग्री सेल्सियस के तापमान में कथक प्रस्तुत कर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया था। दूसरी बार माइनस 24 डिग्री सेल्सियस तापमान में 27 अक्टूबर 2016 को कथक कर नाम दर्ज करवाया था। श्रुति गुप्ता को उनके सराहनीय कार्यों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं।


सफलता का श्रेय

शिमला यूनिवर्सिटी से सितार वादन में मास्टर्स कर चुकी श्रुति अपनी इस सफलता का श्रेय पिता आरबी गुप्ता, मां परवीन गुप्ता और पति व गुरु को देती हैं। श्रुति अब तक 300 से भी ज्यादा परफॉरमेंस दे चुकी है। 

साभार:  Babita
jagran.com/himachal-pradesh/solan-solan-girl-enters-limca-book-18133797.html

Wednesday, June 20, 2018

“अनपढ़ बनिया पढ़ा जैसा, पढ़ा बनिया खुदा जैसा”।

एक व्यक्ति के तीन बेटे थे। उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे। मरने से पहले वह वसीयत लिख गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये। बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की।

बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल नहीं कर सका। उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह का दरबारी कवि था।

खुसरो ने कहा कि मैंने बनियो के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और उनके फैसले भी सुने हैं और बनिया समाज का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है। नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह फैसला तो हो ही नहीं सकता परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने बनिया समाज में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर सौरम गांव (जिला मुजफ्फरनगर) भेजा। चिट्ठी पाकर पंचायत के प्रधान ने बनिया रामसहाय को दिल्ली भेजने का फैसला किया।

बनिया अपने घोड़े पर सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गया और बादशाह ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये। वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया ।

रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया -“शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर राजा का भी हक होता है। इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है। इसलिये मैं यह अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।”

बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और बनिये ने अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया, इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये।

अब बनिये ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-

★ आधा हिस्सा (20÷2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े बेटे को दे दिये।

★ चौथाई हिस्सा (20 ÷ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे दिये।

★ पांचवां हिस्सा (20 ÷ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे दिये।

इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19) घोड़ों का बंटवारा हो गया। बीसवां घोड़ा रामसहाय का ही था जो बच गया।

बंटवारा करके उसने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?” बादशाह ने हां कह दी और बनिये का बहुत सम्मान और तारीफ की। बनिया रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से कहा -

“अनपढ़ बनिया पढ़ा जैसा, पढ़ा बनिया खुदा जैसा”।

सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी। तभी से यह कहावत हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई। यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्न-बतूत भी वहीं दिल्ली दरबार में मौजूद था। यह किस्सा बादशाह बलबन के अभिलेखागार में मौजूद है।

★★ ये है बनियो का इतिहास और हमें गर्व है कि हम बनिया हैं।

साभार: Aggarwal Smaj




Monday, June 18, 2018

ELIZA BANSAL, एलिजा बंसल AIIMS आल इंडिया टोपर, RANK - 1st.



देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में चार विद्यार्थियों ने टॉप किया है। इनमें तीन लड़कियां हैं। पंजाब और हरियाणा की इन बेटियों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। इनमें पंजाब के संगरुर जिला निवासी एलिजा बंसल, बठिंडा निवासी रमणीक कौर और हरियाणा के पंचकूला निवासी महक अरोड़ा है। चौथे टॉपर बठिंडा निवासी मनराज सरा ने भी 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। 

सोमवार को जारी परिणाम के अनुसार, दिल्ली निवासी अमूल्य गुप्ता ने आठवां स्थान हासिल किया है। उन्होंने 99.99 पर्सेंटाइल हासिल किया । उन्होंने सामान्य वर्ग में केमिस्ट्री में 100 पर्सेंटाइल हासिल किया। नीट परीक्षा में टॉपर रहीं बिहार की कल्पना ने 72वीं रैंक हासिल की है।

26 और 27 मई को हुई एम्स की प्रवेश परीक्षा में 807 एमबीबीएस सीटों के लिए देश भर के 171 परीक्षा केंद्रों पर दो लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 2049 छात्र ही सफल रहे। जबकि 2017 के दौरान 2.84 लाख में से 4905 ने परीक्षा पास किया था।

पिछले वर्ष की तुलना में अबकी बार आधे छात्र ही सफल हो सके हैं। अब एमबीबीएस में प्रवेश के लिए 3 जुलाई को काउंसलिंग शुरू होगी। काउंसलिंग का पहला चरण 3 से 6 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त से और तीसरा चरण 4 सितंबर को होगा। इसके बाद ओपन काउंसलिंग 27 सितंबर से शुरू होगी। 

साभार: अमर उजाला 

Sunday, June 10, 2018

JEE ADVANCED TOPPERS LIST - THE GREAT VAISHYA SAMAJ

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इसमें दिल्ली की मीनल पारेख भी वैश्य हैं. टॉप ८ वैश्य समाज से हैं.

साभार: अग्रजन सेवक 

श्रद्धा भंसाली - 26 साल की यह लड़की चलाती है एक अनोखा शाकाहारी रेस्‍तरां

26 साल की यह लड़की चलाती है एक अनोखा शाकाहारी रेस्‍तरां, यहां वही पकता है जो यहां उगता है

हमारे चारों ओर जो कुछ भी हम देखते हैं, गगनचुंबी इमारतों से लेकर हाथों में पकड़े स्मार्टफोन तक, सब एक छोटे से विचार से ही संभव हो पाया है। एक ऐसा विचार जो सरल और अस्तित्वहीन था जब तक कि किसी ने इसे महानता में तब्दील करने का फैसला नहीं किया। आइडिया साधारण ही क्यों न हो उस पर किया जाने वाला रचनात्मक कार्य उसे एक नए स्तर तक ले जाकर असाधारण बना देता है। आज विश्व में जितनी भी समस्याएं हैं उनके समाधान भी मौजूद हैं। लेकिन सारे समाधान साधारण से आइडिया के आवरण में छिपे हैं, जिस पर काम होना बाकी है।


मुंबई की 26 साल की श्रद्धा भंसाली ने एक ऐसा ही तरीका खोज निकाला है स्‍वस्‍थ और खुशहाल रहने का। ‘कैंडी एंड ग्रीन’ रेस्‍तरां की संस्थापिका और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रद्धा का यह शाकाहारी रेस्टोरेंट अपने आप में बड़ा अनूठा है। आप भी जानेंगे तो मन ऐसे रेस्‍टोरेंट में एक बार जाने की इच्छा तो अवश्य ही होगी। यहां आने वाले ग्राहकों को परोसा जाने वाला भोजन साधारण नहीं बहुत विशिष्‍ट है। सबसे ख़ास बात यह है कि इस शाकाहारी रेस्टोरेंट में खाने में प्रयोग होने वाली सभी सब्जियां यहीं पर उगाई जाती हैं। 

मुंबई के एक व्यवसायिक घराने से संबंध रखने वाली श्रद्धा ने स्कूल की पढ़ाई के बाद यूनाइटेड स्टेट्स में बोस्टन यूनिवर्सिटी से हॉस्पिटैलिटी और बिज़नेस मैनेजमेंट में स्नातक किया। साल 2014 में मुंबई लौट कर एक पांच सितारा होटल में नौकरी मिलने के बाद भी व्यावसायिक विरासत के गुण श्रद्धा को हमेशा कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता था। घर की रसोई में मां को अपने हाथों से खाना बनाते हुए श्रद्धा ने हमेशा देखा कि उनकी मां भोजन की गुणवत्ता का बहुत ध्यान रखती है क्‍योंकि उन्‍हें घर के हरेक सदस्‍य की सेहत की बेहद चिंता रहती है। बस यही संदेश वह लोगों तक अपने व्यापार के जरिए पहुंचाना चाहती थी। वैसे आइडिया तो साधारण था क्योंकि हर भारतीय मां इसी भावना से रसोई घर में खाना बनाती है, लेकिन उस आइडिया को परिवार से बाहर लोगों तक पहुंचाने की मंशा सच में असाधारण थी। और इस असाधारण आइडिया को कारोबार में तब्दील होते देर नहीं लगी।


ऐसा रेस्‍तरां जहां सब्जी उगाई जाए और बनाई भी जाए हालांकि यह चुनौतीपूर्ण था लेकिन श्रद्धा ने इस चुनौती को स्वीकार कर बेहद दिलचस्प तरीके से रेस्तरां के मैन्यू को मौसमी सब्जियों के अनुरूप व्यवस्थित किया और यह आइडिया ग्राहकों को भा गया।

फरवरी 2017 में श्रद़धा ने स्काइबे भूलाभाई देसाई रोड पर स्थित एक इमारत की चौथी मंजिल पर रेस्‍तरां और पांचवी मंजिल पर रेस्‍तरां के सब्जी गार्डन की शुरुआत की। रोचक बात यह है कि यह किचन गार्डन रेस्‍तरां में आने वाले कस्‍टमर्स के देखने के लिए भी खुला है। यह लोगों के लिए एक नया प्रयोग है जिसे वह खूब पसंद कर रहे हैं।

आज यह रेस्‍तरां देश भर में प्रशंसा का विषय बन गया है। यहां तक कि सीएनबीसी आवाज़ ने इसे ‘भविष्य का बुलंद सितारा’ नाम दे दिया। फोर्ब्‍स इंडिया 30 अंडर 30 में श्रद्धा के इस प्रयोग की बहुत सराहना की गई। अपने रेस्तरां की बड़ी सफलता के साथ, अब वह आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक और रेस्तरां शुरू करने की योजना बना रही हैं। इसके अंतर्गत वह नियमित ग्राहकों को सस्ते दर पर भोजन प्रदान करना चाहती हैं, लेकिन उसी आतिथ्य और गुणवत्ता के साथ।

साभार: 
hindi.kenfolios.com

Saturday, June 9, 2018

JEE Advanced 2018 ; Pranav Goyal secured rank 1, फिर से वैश्य प्रतिभाओं का जलवा

फिर से वैश्य प्रतिभाओं ने अपना जलवा दिखाया हैं, राष्ट्रीय स्तर पर टॉप ४, दिल्ली और रूडकी IIT में सभी टोपर वैश्य समुदाय से है, बधाई हो. इसे कहते हैं प्रदर्शन, बिना किसी आरक्षण के और भीख के, तभी तो कहा जाता हैं, की अक्ल बड़ी या भैंस, कोई नहीं कर सकता हैं मुकाबला हमारा. तुम लगे रहो आरक्षण मांगने में, हम आगे निकलते जायेंगे. दिमाग तो कोई नहीं छीन सकता हमारा. देख ले ये सरकारे भी. सभी दल देख ले. और वे भी देख ले जिन्हें आरक्षण की भीख चाहिए. अब भी संभल जाओ. गर्व हैं हमें इन बच्चो पर. ये तो नाम उनके हैं जिनके सर नेम लिखे हैं, बहुत से लोग वे भी होंगे जिनके सर नेम नहीं लिखे हैं.

NEW DELHI: The Joint Entrance Examination (JEE) Advanced 2018 results have been declared today on the official website jeeadv.ac.in.


Pranav Goyal is the top ranker in Common Rank List (CRL) in JEE (Advanced) 2018 by obtaining 337 marks out of 360 marks. Meenal Parakh is the top ranked female with CRL 6. She scored 318 marks.

K V R Hemant Kumar Chodipilli is the topper from IIT-Kharagpur region. His rank is 7.

Vineetha Vennela from IIT- Kharagpur region is first among girls. Her rank is 261.

In 2018, a total of 11,279 seats are being offered in the IITs. This year, 800 supernumerary seats have been created specifically for female candidates in the IITs in order to improve the gender balance in IITs.

A Total number of 1,55,158 candidates appeared in both papers 1 and 2 in JEE (Advanced) 2018. A total of 18,138 candidates have qualified JEE (Advanced) 2018. This is more than 1.6 times the number of seats that are being offered.

Of the total qualified candidates, 2076 are females.

Highlights of the JEE Advanced 2018 Results 

1) Total number of qualified boys: 16062 
2) Total number of qualified girls : 2076 
3) Total number of qualified general (GE) candidates : 8794 
4) Total number of qualified OBC candidates : 3140 
5) Total number of qualified SC candidates : 4709 
6) Total number of qualified ST candidates : 1495

Zone wise male-female topper

Institute Male (CRL) Female (CRL)

IIT Bombay 

Rishi Agarwal (8) 
Missula Meghana (8)

IIT Delhi 

Sahil Jain (2) 
Meenal Parakh (6)

IIT Guwahati 

Prashant Kumar (150)
Pranjal Singh (3189)

IIT Kanpur 

Aayush Kadam 
Harshita Boonlia

IIT kharagpur 

K V R Hemant 
Kumar Chodipilli Vineetha Vennela (261)
IIT Madras Mavuri Siva 
Krishna Manohar (5) Narukulla Chaya 
Sai Nikhita (153)

IIT Roorkee 

Pranav Goyal (1) 
Vrinda Jindal (137)

Following are the top category rankers 

Category Name Place Rank


OPEN (CRL) Pranav Goyal Panchkula 1
OPEN (CRL) Sahil Jain Kota 2
OPEN (CRL) Kalash Gupta
New Delhi 3
OPEN (CRL) Meenal Parakh Kota 1 (Girls)
OBC‐NCL Mavuri Siva 
Krishna Manohar
Vijayawada 1
SC Aayush Kadam Kota 1
ST Jatoth Shiva Tarun Hyderabad 1
CRL‐PwD Manan Goyal
Patiala 1
OBC‐NCL‐PwD Vijendra Kumar Jehanabad 1
SC‐PwD Raushan Kumar
Vaishali 1

Following are the top five candidates in every zone

Zone Name CRL



Bombay 

RISHI AGARWAL 8
Abhinav Kumar 12
Saumya Goyal 13
Anuj Srivastava 25
Parth Laturia 29


Delhi 

SAHIL JAIN 2
Kalash Gupta 3
Pawan Goyal 4
Meenal Parakh 6
Lay Jain 9


Guwahati 

PRASHANT KUMAR 150

Rishi Ranjan 280
Punit Shyamsukha 294
Dibyojeet Bagchi 325
Chaitnya Shrivastava 413


Kanpur

 AAYUSH KADAM 78

Samyak Jain 147
Himansh Rathore 165
Pranshu S Negi 190
Vaidic Jain 197


Kharagpur
 K V R HEMANT 

KUMAR CHODIPILLI
Nimay Gupta 48
Aayush Agarwal 60
Sarthak Behera 82
Debajyoti Kar 92


Madras 

MAVURI SIVA KRISHNA

MANOHAR
Gosula Vinayaka
Srivardhan
Ayyapu Venkata Phani
Vamsinath
Basavaraju Jishnu 15
Mekala Anmol Reddy 26


Roorkee 

PRANAV GOYAL 1
Neel Aryan Gupta 10

Tarush Goyal 16
Shivam Goel 18
Raaghav Raaj Kuchiyaa 27





Wednesday, June 6, 2018

PALLAV NADHANI - पल्लव नधानी - वैश्य गौरव

16 वर्ष की उम्र में जिज्ञासावश शुरू किया बिज़नेस, आज बराक ओबामा जैसी हस्तियाँ हैं इनके क्लाइंट्स

युगांतरकारी घटनाएं कौन सी होती है? क्या यह दिशा बदलने वाले किसी आइडिया से पैदा होती है या कि किसी ऐसी विचार-क्रांति से जो अलग लगते क्षेत्रों को नूतन ढंग से संयोजित करने में? इसका उत्तर शायद हाँ ही है। किन्तु बक़ौल पल्लव नधानी, युगांतरकारी घटनाएं वह होती हैं जो मानवता को बदलने की ताकत रखती हैं। वह इस ढंग से सिर्फ तथ्यों को परिभाषित नहीं करते बल्कि उस पर अमल करना जानते हैं। इन सब के चलते फ्यूज़न चार्ट्स के संस्थापक पल्लव 30 वर्ष से कम उम्र के फ़ोर्ब्स की अचीवर्स की सूची में शामिल हुए। 


भागलपुर के एक मारवाड़ी परिवार में पल्लव का जन्म हुआ था। उनके घर में लग्ज़री के नाम पर एक मात्र चीज़ कम्प्यूटर था, जिसे उनके पिता अपने प्रोजेक्ट के अकाउंट के लिए उपयोग में लाते थे। कम्प्यूटर होने की वजह से उन्हें दोस्तों में खास जगह मिली हुई थी क्योंकि उस समय घर में कम्प्यूटर होना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

1997 में पल्लव के पिता ने एक कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की थी। जिसमे ट्रेनिंग के लिए उनके रिश्तेदारों के बहुत से बच्चे आये थे। रात में जब सब सो जाया करते थे तब पल्लव उनकी कम्प्यूटर की किताबें लेकर पढ़ा करते और सीखने की कोशिश करते। दो साल के अंदर ही वह सेंटर बंद हो गया। फिर वे बेहतर संभावनाओं को तलाशने कोलकाता आ गए। कोलकाता में पल्लव को ला-मार्टिनेयर स्कूल में दाखिला मिल गया। यहाँ शहर के बेहतरीन बच्चे पढ़ने आया करते थे।

उनके जैसा दिखने के लिए, पहनने के लिए उन्हें मिलने वाली जेब-खर्च पड़ने लगी। अपनी जेब-खर्च बढ़ाने के मकसद से पल्लव ने एक वेबसाइट पर इनोवेटिव आइडियाज के लेख लिखे जो काफी पसंद किये गए। पहले दो आर्टिकल के लिए उन्हें 2000 डॉलर मिले जो उनके लिए काफी था।

पल्लव का तीसरा आर्टिकल उनके लिए गेम चेंजर साबित हुआ। उन्हें डेवलपर से काफी सराहना मिली। यह आइडिया उन्हें तब मिली जब उन्हें स्कूल असाइनमेंट के लिए बार-बार एक्सेल में चार्ट बनाना पड़ता था जो उन्हें पसंद नहीं था। तब उन्होंने इंटरेक्टिव चार्टिंग सॉल्युशन बनाने के बारे में सोचा। उस पर लिखे आर्टिकल से उन्हें 1500 डॉलर मिले और साथ ही साथ काफी सराहना भी मिली।

17 वर्ष की उम्र में पल्लव ने 2001 में फ्यूज़न चार्ट्स की स्थापना की। शुरुआती समय कठिनाई से भरा था। बहुत सारे ग्राहक भारत के बाहर से होते थे और उन्हें राज़ी करने के लिए तरह-तरह के प्रेजेंटेशन, कॉल भी किये जाते थे। तीन साल तक पल्लव अकेले ही प्रोडक्ट डेवलपमेन्ट, वेबसाइट निर्माण, सेल्स और मार्केटिंग, कस्टमर सपोर्ट के मोर्चे संभाले हुए थे। साल 2005 में उन्होंने अपना पहला ऑफिस खोला। दो साल के अंतराल में 20 लोगों की टीम तैयार हो गई। अब पल्लव को अनुभवी सलाह की जरुरत महसूस हुई क्योंकि उन्हें सरकारी नियमों और बैंकिंग व फाइनेंस की ज्यादा जानकारी नहीं थी और उन्हें विदेशी ग्राहकों से भी डील करना था। इस परेशानी को हल करने के लिए उन्होंने अपने पिता की मदद ली। आज उनके पिता उनकी कंपनी में सीएफओ के पद पर आसीन हैं।



पिता और बेटे के साझे निरीक्षण में उनकी कंपनी के कर्मचारी की संख्या 20 से बढ़कर 50 हो गई और उनका बिज़नेस लगातार बढ़ने लगा। 2011 में फ्यूज़न चार्ट्स का ऑफिस बेंगलुरु में खोला गया। वर्तमान में फ्यूज़न चार्ट्स में 80 कर्मचारी और 25,000 ग्राहक हैं जिनमें लिंक्ड-इन, गूगल, फेसबुक, फोर्ड जैसी कंपनियां भी शामिल है। कंपनी ने धीरे-धीरे अपने पांव-पसारे और दुनिया के करीब 120 फार्मास्युटिकल से लेकर एफएमसीजी तक और शिक्षण संस्थानों से लेकर नासा तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस कंपनी ने विश्व स्तर के प्लेटफॉर्म पर भी अपना सिक्का जमाया। 2010 में इनके द्वारा डिज़ाइन किये हुए डिजिटल डैशबोर्ड को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चुना। फ्यूज़न चार्ट्स ऐसी पहली भारतीय स्टार्ट-अप कंपनी है जिन्होंने ओबामा प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

महज 30 साल के पल्लव नधानी के बिज़नेस ने आज 47 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। उनकी कंपनी पैसे जुटाने में विश्वास नहीं करती। पहले ही दिन से बिज़नेस ने लाभ ही कमाया है और खुद पल्लव का अपना ही पैसा बिज़नेस में लगा है। 

हम देख सकते हैं कि अगर जिज्ञासु दिमाग पूरी लगन से आगे बढ़े तो सफलता हमेशा क़दम चूम लेती है। बहुत बार कठिन परिस्थितियां भी आई पर उन सब बाधाओं को पार कर वे आगे बढ़ते गए। उनका मूलमंत्र है “आगे बढ़ते रहो’। हथियार डाल देने से बेहतर यह होता है कि आप धीरे-धीरे ही सही बढ़ते रहें, अपने लक्ष्य की ओर।

साभार:
hindi.kenfolios.com/started-business-16-satisfy-curiosity-now-clients-like-barack-obama

by Anubha TiwariJuly 3, 2017

Sunday, June 3, 2018

लिंगायत वैश्य - LINGAYAT VANI

The Lingayat Banias        number     nearly  800000 persons in the Central Provinces, being numerous in Wardha, Nagpur and all the Berar Districts. A brief account of the Lingayat sect has been given in a separate article. The Lingayat Banias form a separate endogamous group, and they do not eat or intermarry either with other Banias or with members of other castes belonging to the Lingayat sect. But they retain the name and occupation of Banias. They have five subdivisions, Pancham, Dikshawant, Chilli- want, Takalkar and Kanade. The Pancham or Pancham- salis are the descendants of the original Brahman converts to the Lingayat sect. They are the main body of the community and are initiated by what is known as the eight- fold sacrament or esJita-varna.

The Dikshawant, from diksha or initiation, are a subdivision of the Panchamsalis, who apparently initiate disciples like the Dikshit Brahmans. The Takalkar are said to take their name from a forest called Takali, where their first ancestress bore a child to the god Siva. The Kanade are from Canara. The mean- ing of the term Chilliwant is not known ; it is said that a member of this subcaste will throw away his food or water if it is seen by any one who is not a Lingayat, and they shave the whole head. The above form endogamous sub- castes. The Lingayat Banias also have exogamous groups, the names of which are mainly titular, of a low-caste type. Instances of them are Kaode, from kawa a crow, Teli an oil-seller, Thubri a dwarf, Ubadkar an incendiary, Gudkari a sugar-seller and Dhamankar from Dhamangaon. They say that the maths or exogamous groups are no longer regarded, and that marriage is now prohibited between persons having the same surname. It is stated that if a girl is not married before adolescence she is finally expelled from the caste, but this rule has probably become obsolete. The proposal for marriage comes from either the boy's or girl's party, and sometimes the bridegroom receives a small sum for his travelling expenses, while at other times a bride- 1 See article Bairagi for some notice of the sect. price is paid. At the wedding, rice coloured red is put in the hands of the bridegroom and juari coloured yellow in those of the bride. The bridegroom places the rice on the bride's head and she lays the juari at his feet.

A dish full of water with a golden ring in it is put between them, and they lay their hands on the ring together under the water and walk five times round a decorative little marriage-shed erected inside the real one. A feast is given, and the bridal couple sit on a little dais and eat out of the same dish. The remarriage of widows is permitted, but the widow may not marry a man belonging to the section either of her first husband or of her father. Divorce is recognised. The Lingayats bury the dead in a sitting posture with the lingam or emblem of Siva, which has never left the dead man during his lifetime, clasped in his right hand. Sometimes a platform is made over the grave with an image of Siva. They do not shave the head in token of mourning.

Their principal festival is Shivratri or Siva's night, when they offer the leaves of the bel tree and ashes to the god. A Lingayat must never be without the lingam or phallic sign of Siva, which is carried slung round the neck in a little case of silver, copper or brass. If he loses it, he must not eat, drink nor smoke until he finds it or obtains another. The Lingayats do not employ Brahmans for any purpose, but are served by their own priests, the Jangams,^ who are recruited both by descent and by initiation from members of the Pancham group. The Lingayat Banias are practically all immigrants from the Telugu country ; they have Telugu names and speak this language in their homes. They deal in grain, cloth, groceries and spices.