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Saturday, June 13, 2026

RAHUL BAJAJ - A GREAT PERSON

RAHUL BAJAJ - A GREAT PERSON

भारत के उद्योग जगत में कई बड़े नाम हुए। कुछ ने अपने कारोबार से पहचान बनाई। कुछ ने अपनी संपत्ति से सुर्खियां बटोरीं। लेकिन एक नाम ऐसा था जिसने अपनी बेबाकी से अलग पहचान बनाई। यह नाम था राहुल बजाज का। वह सिर्फ स्कूटर बेचने वाले उद्योगपति नहीं थे। वह उन चुनिंदा लोगों में थे जो सत्ता के सामने भी सच बोलने का साहस रखते थे। यही वजह थी कि उन्हें कारोबारी दुनिया का सबसे बेबाक चेहरा कहा जाता था। लेकिन सवाल यह है कि आखिर करोड़ों की कंपनी चलाने वाला व्यक्ति खुद को सत्ता विरोधी क्यों कहता था? यह कहानी सिर्फ एक उद्योगपति की नहीं है। यह उस शख्स की कहानी है जिसने उद्योग, राजनीति और समाज तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग छाप छोड़ी।


जब एक नाम के पीछे छिपी थी नेहरू परिवार की दिलचस्प कहानी

राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को हुआ था। उनके जन्म से जुड़ी एक कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है। कहा जाता है कि उस समय इंदिरा गांधी ने राहुल की मां से मजाक में शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि आपने मेरी एक कीमती चीज ले ली। वह चीज कोई गहना नहीं थी। वह था "राहुल" नाम। दरअसल पंडित जवाहरलाल नेहरू को यह नाम बहुत पसंद था। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए सोचा था। लेकिन यह नाम पहले कमलनयन बजाज के बेटे को मिल गया। वर्षों बाद इंदिरा गांधी ने अपने पोते का नाम भी राहुल रखा। इस तरह एक नाम ने दो प्रभावशाली परिवारों को जोड़ दिया।

आजादी की विरासत से निकला उद्योग जगत का योद्धा

राहुल बजाज सिर्फ एक कारोबारी परिवार में पैदा नहीं हुए थे। वह स्वतंत्रता सेनानी और गांधीजी के करीबी सहयोगी रहे जमनालाल बजाज के पोते थे। उनके घर में व्यापार के साथ राष्ट्रसेवा की भी परंपरा थी। यही कारण था कि राहुल बजाज के विचार सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने देश, उद्योग और समाज को हमेशा एक साथ देखने की कोशिश की। बचपन से ही उन्हें अनुशासन और नेतृत्व की शिक्षा मिली। शायद यही वजह थी कि आगे चलकर वह भारतीय उद्योग जगत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हुए।

हार्वर्ड से लौटे युवक ने संभाली कंपनी की कमान

दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद राहुल बजाज ने कानून की शिक्षा भी ली। इसके बाद वह अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल पहुंचे। उस दौर में विदेश जाकर पढ़ाई करना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने परिवार के कारोबार में कदम रखा। वर्ष 1968 में महज 30 साल की उम्र में उन्हें बजाज ऑटो का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया। उस समय उन्हें देश के सबसे युवा सीईओ में गिना गया। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह युवा आगे चलकर भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास बदल देगा।

‘हमारा बजाज’ आखिर कैसे बन गया देश की पहचान?

एक समय था जब भारतीय सड़कों पर सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला वाहन बजाज चेतक था। यह सिर्फ एक स्कूटर नहीं था। यह मध्यम वर्ग के सपनों का साथी था। शादी हो, नौकरी हो या परिवार की जिम्मेदारी, हर जगह चेतक मौजूद था। फिर आया वह विज्ञापन जिसने इतिहास रच दिया। "हमारा बजाज" सिर्फ विज्ञापन नहीं रहा। वह भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया। लाखों लोग इस जिंगल को गुनगुनाने लगे। कई लोगों के लिए यह देशभक्ति गीत जैसा बन गया। राहुल बजाज ने समझ लिया था कि ब्रांड सिर्फ उत्पाद से नहीं बनता। वह लोगों की भावनाओं से बनता है।

लाइसेंस-परमिट राज से टकराने का साहस

सत्तर और अस्सी का दशक भारतीय उद्योग के लिए आसान नहीं था। हर काम के लिए सरकारी अनुमति जरूरी होती थी। उत्पादन बढ़ाने के लिए भी लाइसेंस चाहिए था। इसी व्यवस्था को लाइसेंस-परमिट राज कहा गया। उस समय स्कूटर खरीदने वालों को वर्षों इंतजार करना पड़ता था। राहुल बजाज ने इस व्यवस्था का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा था कि अगर लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए जेल भी जाना पड़े तो मैं तैयार हूं। यह बयान उस दौर में बहुत बड़ा माना गया। क्योंकि ज्यादातर उद्योगपति सरकार से टकराने से बचते थे। राहुल बजाज अलग थे। वह मानते थे कि उद्योग को बढ़ने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

जब सत्ता के सामने बोल दिया सबसे बड़ा सच

राहुल बजाज का सबसे चर्चित बयान वर्ष 2019 में आया। एक कार्यक्रम में उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह के सामने कहा कि उद्योगपति सरकार की आलोचना करने से डरते हैं। उनके इस बयान ने पूरे देश में बहस छेड़ दी। बहुत से लोग चुप रहे। लेकिन राहुल बजाज ने वही कहा जो वह महसूस करते थे। दिलचस्प बात यह थी कि उन्होंने यह बात किसी राजनीतिक विरोध के लिए नहीं कही थी। वह उद्योग जगत के माहौल पर अपनी चिंता जता रहे थे। इसी कारण उन्हें बेबाक उद्योगपति कहा गया। वह सत्ता के विरोधी नहीं थे। वह सवाल पूछने के समर्थक थे।

सुधारों का समर्थन भी किया और विरोध भी

राहुल बजाज को अक्सर गलत समझा गया। कुछ लोग उन्हें सुधार विरोधी कहते थे। जबकि सच्चाई इससे अलग थी। उन्होंने लाइसेंस राज का विरोध किया था। लेकिन 1990 के दशक में जब आर्थिक उदारीकरण आया तो उन्होंने कुछ नीतियों पर सवाल उठाए। उनका मानना था कि भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के सामने अचानक नहीं छोड़ना चाहिए। पहले उन्हें मजबूत बनाना जरूरी है। उनके विचार हमेशा भारतीय उद्योग के हितों पर आधारित रहे। वह हर नीति को देशी उद्योग के नजरिए से देखते थे।

कारोबार को करोड़ों से हजारों करोड़ तक पहुंचाने वाला नेतृत्व

जब राहुल बजाज ने कंपनी की कमान संभाली तब कारोबार सीमित था। लेकिन अगले चार दशकों में उन्होंने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बजाज चेतक की सफलता के बाद कंपनी ने मोटरसाइकिल बाजार में कदम रखा। फिर आई बजाज पल्सर। इस बाइक ने युवाओं के बीच नई पहचान बनाई। धीरे-धीरे बजाज ऑटो देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हो गई। कारोबार करोड़ों से बढ़कर हजारों करोड़ तक पहुंच गया। यह सिर्फ व्यापारिक सफलता नहीं थी। यह दूरदृष्टि और नेतृत्व का परिणाम था।

प्रेम विवाह जिसने बदल दी जिंदगी

राहुल बजाज अक्सर अपनी सफलता का श्रेय पत्नी रूपा बजाज को देते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी शादी उस दौर की चर्चित प्रेम कहानियों में से एक थी। मारवाड़ी कारोबारी परिवार और महाराष्ट्रियन ब्राह्मण परिवार का मिलन आसान नहीं था। दोनों परिवारों की सोच अलग थी। लेकिन राहुल और रूपा ने सभी चुनौतियों का सामना किया। राहुल मानते थे कि उन्होंने जीवन और नेतृत्व की कई महत्वपूर्ण बातें अपनी पत्नी से सीखी थीं। यही कारण था कि वह सार्वजनिक मंचों पर भी उनका सम्मान करने में कभी संकोच नहीं करते थे।
आखिर क्यों याद रखा जाएगा राहुल बजाज को?

12 फरवरी 2022 को राहुल बजाज ने अंतिम सांस ली। उनके जाने के साथ भारतीय उद्योग जगत का एक बेबाक अध्याय समाप्त हो गया। लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उन्हें सिर्फ एक सफल उद्योगपति के रूप में याद नहीं किया जाएगा। उन्हें उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिसने सत्ता से सवाल पूछने का साहस दिखाया। जिसने भारतीय उद्योग को नई पहचान दी। जिसने "हमारा बजाज" को घर-घर पहुंचाया। और जिसने साबित किया कि कारोबार में सफलता और विचारों की स्वतंत्रता साथ-साथ चल सकती है। शायद यही वजह है कि राहुल बजाज आज भी सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि एक विचार के रूप में याद किए जाते हैं।


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