दुर्गा प्रसाद मंडेलिया, जो कभी G.D. बाबू के बाद ग्रुप में दूसरे सबसे ताकतवर व्यक्ति थे।. दुर्गा प्रसाद मंडेलिया को घनश्यामदासजी बिड़ला का दाहिना हाथ भी कहा जाता था ।
दुर्गा प्रसाद मंडेलिया एक प्रमुख भारतीय उद्योगपति, परोपकारी और घनश्यामदासजी बिड़ला के करीबी विश्वासपात्र थे, जिन्होंने बिड़ला साम्राज्य के भीतर महत्वपूर्ण सलाहकार भूमिकाएँ निभाईं। भारतीय व्यापार जगत में एक प्रभावशाली हस्ती के रूप में जाने जाने वाले, उन्होंने Hindalco जैसी प्रमुख संस्थाओं का प्रबंधन किया और Birla Nagar Jana Seva Trust सहित कई शैक्षिक/चिकित्सा ट्रस्टों की स्थापना की। दुर्गा प्रसाद मंडेलिया के मुख्य पहलू: Birla Group में भूमिका: G.D. बिड़ला के "अंतरात्मा के रक्षक" के रूप में माने जाने वाले, वे Hindustan Aluminium Corporation (HINDALCO) के एक विश्वसनीय सलाहकार थे। औद्योगिक नेतृत्व: वे Birla औद्योगिक घरानों के लिए चुनौतियों का सामना करने में शामिल थे, जिसमें 1970 और 80 के दशक में संभावित राष्ट्रीयकरण और प्रदूषण संबंधी चिंताओं के खिलाफ बचाव करना शामिल था। परोपकार और शिक्षा: उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिलानी (1980) में Smt. Indramani Mandelia Shiksha Niket की स्थापना की और Birla Institute of Medical Research के चेयरमैन एमेरिटस थे।
उन्होंने बिड़ला ग्रुप में Parta सिस्टम की शुरुआत की। हिंडाल्को (Hindalco) उन्हीं की सोच का नतीजा था।
स्वर्गीय श्री दुर्गा प्रसाद मंडेलिया एक जाने-माने उद्योगपति और आर्थिक विशेषज्ञ थे। श्री दुर्गा प्रसाद मंडेलिया जो 95 साल की उम्र में भी पूरी तरह सक्रिय और ऊर्जावान थे, हिंडाल्को (Hindalco) उन्हीं की सोच का नतीजा था।
भारतीय उद्यमिता और मैनेजमेंट स्किल की बेहतरीन मिसाल थे । उन्हें यह खास खूबी अपने गुरु पूज्य घनश्यामदासजी बिड़ला और संगठन को संभालने की अपनी काबिलियत से मिली थी ।
उनकी सोच विश्लेषणात्मक थी , जिससे वे आसानी से और तेज़ी से फ़ैसले ले पाते थे। वे मैनेजमेंट की उस सोच के बेहतरीन उदाहरण थे जिसे उन्होंने एक किताब में शामिल अपने एक भाषण में समझाया था - यानी हर चीज़ और वजह के नियमों और कारणों को समझकर, जिस भी काम को आप संभाल रहे हैं या संभालना चाहते हैं, उसमें सफलता पाना। मंडेलियाजी का ज्ञान सिर्फ़ पारंपरिक और आधुनिक औद्योगिक मैनेजमेंट तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह उपनिषद और पुराण, तुलसीदास की रामायण, भर्तृहरि के नीतिशतक और भगवद गीता जैसे व्यापक विषयों तक फैला हुआ था। इस किताब में शामिल उनके भाषण और लेख मंडेलियाजी के धार्मिक और सांसारिक ज्ञान के साथ-साथ छह दशकों से ज़्यादा समय तक लोगों और चीज़ों को 'संभालने' के उनके अनुभव को भी दर्शाते थे।
दुर्गा प्रसाद मंडेलिया मंडेलिया, घनश्याम दास बिड़ला के सबसे बड़े "सलाहकार" और दाहिने हाथ थे, जो बिड़ला साम्राज्य के संस्थापक थे। मंडेलिया ने हिंदुस्तान एल्युमिनियम कॉर्पोरेशन (हिंडाल्को) को शुरू करने और चलाने मंm एक अहम और आगे रहने वाला रोल निभाया, जो आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी एल्युमिनियम रोलिंग और रीसाइक्लिंग कंपनी बन गई।
दुर्गा प्रसाद मंडेलिया मंडेलिया, घनश्याम दास बिड़ला के सबसे बड़े "सलाहकार" और दाहिने हाथ थे, जो बिड़ला साम्राज्य के संस्थापक थे। मंडेलिया ने हिंदुस्तान एल्युमिनियम कॉर्पोरेशन (हिंडाल्को) को शुरू करने और चलाने मंm एक अहम और आगे रहने वाला रोल निभाया, जो आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी एल्युमिनियम रोलिंग और रीसाइक्लिंग कंपनी बन गई।
1. जी.डी. बिड़ला के दाहिने हाथ सबसे बड़े राजदार: मंडेलिया ने बहुत कम उम्र में जी.डी. बिड़ला के साथ काम करना शुरू कर दिया था और आधी सदी से ज़्यादा समय तक उनके सबसे भरोसेमंद साथी के तौर पर काम किया।
2. लाइसेंस राज के दौरान जी.डी. बिड़ला ने मैक्रोइकॉनॉमिक विज़न और पॉलिटिकल कनेक्शन दिए, लेकिन मंडेलिया ने ही उन आइडिया को ज़मीन पर कई मिलियन डॉलर की फिजिकल फैक्ट्रियों में बदला। कंपनी के बीच लिंक: वे शुरुआती बिड़ला मैनेजमेंट के तरीकों के आर्किटेक्ट थे, जिसमें खास इंटरनल फंडिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया, जहाँ सिस्टर कंपनियों के बीच क्रॉस-होल्डिंग्स ने हिंडाल्को जैसे बड़े ग्रीनफील्ड वेंचर्स को फाइनेंस किया।हिंडाल्को को बनाना और बचाना रेणुकूट की स्थापना: मंडेलिया ने उत्तर प्रदेश के रेणुकूट में हिंडाल्को के बड़े, कोर एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स की स्थापना और शुरुआती कामकाज की देखरेख की—यह इलाका तब पूरी तरह से दूर था जब कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ था।1970 के दशक में नेशनलाइजेशन का खतरा: 1970 के दशक के आखिर में, सत्ता में बैठी जनता पार्टी सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य ने मिसमैनेजमेंट और बिजली का टैरिफ न चुकाने का आरोप लगाते हुए हिंडाल्को पर नेशनलाइजेशन का निशाना साधा। मंडेलिया कंपनी का ज़ोरदार बचाव करने, सरकार के इरादों को चुनौती देने और राज्य के टेकओवर को सफलतापूर्वक रोकने के लिए सुर्खियों में आए।लाइसेंस राज के मास्टर: मंडेलिया आज़ादी के बाद के भारत की घनी, दुश्मनी भरी ब्यूरोक्रेसी में पावर एग्रीमेंट, बॉक्साइट माइनिंग लीज़ और फैक्ट्री लाइसेंस हासिल करने की अपनी बेमिसाल काबिलियत के लिए मशहूर हुए। मैनेजमेंट स्टाइल: "द पार्टा सिस्टम" मंडेलिया ने बिरला के पारंपरिक "पार्टा" सिस्टम को फॉर्मल बनाने में बहुत मदद की थी—यह एक रोज़ का, सख्त फाइनेंशियल रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क था। मॉडर्न कंप्यूटर और ERP सिस्टम से बहुत पहले, यह तरीका हिंडाल्को जैसी कॉम्प्लेक्स इंडस्ट्रियल यूनिट्स के रोज़ के प्रॉफिट, लॉस और कैश फ्लो का सही हिसाब लगाता था। इस लोकल अकाउंटिंग स्ट्रैटेजी से सीनियर लीडरशिप को लगभग रियल-टाइम में ऑपरेशनल कमियों का पता लगाने में मदद मिली। 4. विरासत और मॉडर्न इवोल्यूशन आज, डी.पी. मंडेलिया ने हिंडाल्को को एक ग्लोबल मेटल्स टाइटन बना दिया है। ग्लोबल स्टैंडिंग: 2007 में नोवेलिस और 2020 में एलेरिस जैसे बड़े एक्विजिशन के बाद, हिंडाल्को फ्लैट-रोल्ड प्रोडक्ट्स में ग्लोबल लीडर बन गया। स्ट्रेटेजिक बदलाव: आगे बढ़ते हुए, कंपनी ऑफिशियली एक लेगेसी, अपस्ट्रीम रॉ मेटल सप्लायर से एक इंजीनियरिंग-लेड सॉल्यूशन प्रोवाइडर में बदल गई है, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों, हाई-स्पीड रेल और ग्रीन पैकेजिंग के लिए कस्टम कंपोनेंट्स डिजाइन करती है। क्या आप हिंडाल्को के नेशनलाइजेशन पर 1978 के पॉलिटिकल शोडाउन के बारे में खास डिटेल्स जानना चाहेंगे, या आप उनके द्वारा लागू किए गए ट्रेडिशनल "पार्टा" फाइनेंशियल सिस्टम को करीब से देखना चाहेंगे? हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड: लीडिंग एल्युमिनियम और कॉपर प्रोड्यूसर एक ग्रीनर, स्ट्रॉन्गर, स्मार्टर दुनिया बनाने के अपने मकसद से गाइडेड, हिंडाल्को ने सस्टेनेबिलिटी को अपने ऑपरेशन की बैकबोन बनाया है।
वे बड़े भारतीय व्यवसायों तथा कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों के विस्तार में एक अहम ताकत थे। उनके जीवन और विरासत की मुख्य बातें: व्यवसाय और नेतृत्व: वे बिड़ला ग्रुप की कई औद्योगिक इकाइयों के मुख्य प्रमोटर थे और 1945 से 1991 तक ग्वालियर चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रहे। वे फेडरेशन ऑफ़ मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संस्थापक अध्यक्ष भी थे। परोपकार और शिक्षा: अपनी पत्नी इंद्रमणि मंडेलिया के साथ मिलकर, उन्होंने राजस्थान के पिलानी में मंडेलिया संस्थानों की स्थापना की, जिनका ध्यान समग्र शिक्षा और सामाजिक विकास पर था। दर्शन और लेखन: पूज्य घनश्यामदासजी बिड़ला के मार्गदर्शन में, उन्हें आधुनिक कॉर्पोरेट प्रबंधन और उपनिषद व भगवद गीता जैसे पारंपरिक भारतीय धर्मग्रंथों, दोनों का गहरा ज्ञान था।
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