Pages

Wednesday, June 21, 2023

AGROHA AGRAWAL गुमशुदा शहर अग्रोहा और अग्रवाल समुदाय से इसका संबंध

AGROHA  AGRAWAL गुमशुदा शहर अग्रोहा और अग्रवाल समुदाय से इसका संबंध


भारत में सत्य और मिथकों के बीच फ़र्क़ करना हमेशा मुश्किल रहा है। इतिहास और किवदंतियां, ख़ासकर समुदायों से संबंधित मुद्दे आपस में इतने गडमड हो जाते हैं कि इन्हें जानना बहुत ज़रुरी हो जाता है। ऐसी ही एक कहानी है सरस्वती नदी के किनारे बसे प्राचीन रहस्मयी शहर और इसके साथ सम्पन्न व्यापारी अग्रवाल समाज के संबंधों की।

इस मामले में शहर के इतिहास से संबंधित लोक-कथा की सच्चाई गुमशुदा शहर की खुदाई के बाद पता चली।

पड़ौस की छोटी-सी परचून की दुकान से लेकर बजाज और मित्तल जैसे उद्योगपति या फिर ओला के भावेश अग्रावल जैसे नये उद्यमी, सूची बहुत लम्बी है… भारतीय व्यापार में अग्रवाल समुदाय का दबदबा रहा है। इस समुदाय की उत्पत्ति को लेकर एक लोक-कथा है जिसका संबंध राजा अग्रसेन नामक शासक से है। 


इस पौराणिक कथा के अनुसार पांच हज़ार साल पहले अग्रसेन नाम के एक परोपकारी राजा थे जो अग्रेय नामक जनपद (गणराज्य) पर शासन करते थे और उनकी राजधानी अग्रोदका में हुआ करती थी। वह बहुत समझदार थे। उनके साम्राज्य में जो भी बसना चाहता था वह उसे मकान बनाने के लिए ईंटें और कारोबार करने के लिए पूंजी देते थे। जल्द ही अग्रोहा सफल व्यापारियों का एक समृद्ध शहर-राज्य बन गया। लोगों का ये भी मानना है कि राजा अग्रसेन ने ही आगरा शहर बसाया था जिसे उस समय आगरावती कहा जाता था। इसके अलावा लोगों का ये भी मानना है कि नयी दिल्ली में कनाट प्लेस के पास सीढ़ियों वाला कुआं “अग्रसेन की बावड़ी” भी उन्होंने ने ही बनवाई थी।

लोक-कथा के अनुसार राजा अग्रसेन के 18 पुत्र थे और इनमें से हर एक ने एक उप-कुटुंब बनाया था जिसे हम आज अग्रवालों के गोत्र के नाम से जानते हैं। इनमें मित्तल, जिंदल, गोयल और गर्ग शामिल हैं। माना जाता है कि अग्रसेन साम्राज्य सदियों तक ख़ुशहाल रहा था लेकिन फिर हमलों की वजह से अग्रवाल समुदाय के लोग देश के विभिन्न इलाक़ों में चला गया और इस तरह इस साम्राज्य का पतन हो गया।

ये वो लोक कथा है जो मुंह-ज़बानी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रह है। लेकिन इसे लोकप्रियता और स्वीकारिता तब मिली जब सन 1871 में हिंदी साहित्य के महान रचनाकार भारतेंदु हरीशचंद्र (1850-1885) ने “अग्रवालों की उत्पत्ति” नामक एक निबंध लिखा। इस निबंध के बाद अग्रवाल समाज के आरंभिक इतिहास और इसकी उत्पत्ति से संबंधित कथाओं की सत्यता पता करने के लिये पुरातात्विक साक्ष खोजने की जिज्ञासा पैदा हुई।


अग्रोहा के पुरातात्विक टीले | हरियाणा पर्यटन

शुरु शुरु में अग्रोहा शहर के संभावित स्थान के बारे में कोई एक राय नहीं बन पाई थी। कुछ लोगों का दावा था कि ये राजस्थान या पंजाब में रहा होगा जबकि अन्य का कहना था कि हो सकता है ये आगरा के पास रहा हो । सन 1888-89 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को दिल्ली से क़रीब 190 कि.मी. दूर हिसार ज़िले में अग्रोहा गांव में कई टीले मिले जो 650 एकड़ ज़मीन पर फैले हुए थे। ये गांव सूखी नदी घग्गर के तट पर था। यहां सन 1888-89, सन 1938-39 और सन 1979-85 के बीच तीन चरणों में खुदाई हुई।

खुदाई में पुरातत्वविदों को जो मिला वो चकित करने वाला था। टीलों की हर खुदाई में मानों एक नया साक्ष मिला हो। खुदाई में मिली कलाकृतियों की मदद से पुरातत्वविदों और इतिहासकारों ने कहानी की कड़ियां जोड़ीं जिससे बड़े व्यापारिक शहर अग्रोदका के बारे में जानकारी मिली। खुदाई में एक योजनाबद्ध शहर के बारे में पता चला जहां एक ख़ंदक, ऊंची दीवारें और चौड़ी सड़कें हुआ करती थीं। यहां चौथी-पांचवी सदी(ई.पू.) से लेकर 15वीं सदी तक लोग रहा करते थे। ये शहर तक्षशिला और मथुरा के महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर सरस्वती नदी के तट पर स्थित था।


नक़्शे में अग्रोहा 

खुदाई में पता चला कि अग्रोदका का अस्तित्व शायद हड़प्पा सभ्यता के पहले से था। यहां खुदाई में स्लेटी रंग के मिट्टी के बर्तन, बौद्ध स्तूप तथा मौर्य और शुंग के समय की मूर्तियों के अवशेष मिले। यहां लगातार लोगों के रहने से पता चलता है कि उस समय इस स्थान का कितना महत्व रहा होगा। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद यहां अग्र अथवा अग्रका क़बीले का शासन हो गया होगा। अग्रोहा में कई सिक्के मिले हैं जिन पर अगोदके अगका जनपद अंकित है। इससे पता चलता है कि अग्रस जनपद कितना समृद्ध था जिसका उल्लेख लोक कथाओं में है।

बाद में इस क्षेत्र पर कुषाण राजवंश और फिर गुप्त राजवंश का शासन हो गया। इस दौरान यहां हिंदू, बौद्ध तथा जैन धर्म ख़ूब पनपे। इसके बिखराव का कारण सरस्वती नदी का पानी सूखना था जिसकी वजह से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस क्षेत्र के पतन का कारण मुसलमानों के आक्रमण नहीं थे जैसा कि लोक कथाओं में कहा जाता है।


अग्रसेन की बावली, नई दिल्ली 

शहर का अंतिम ज्ञात उल्लेख 14वीं सदी में तुग़लक़ के शासनकाल से मिलता है। मोरक़्क़ो के यायावर इब्न बतूता ने अपने यात्रा-वृतांत में एक कहानी का उल्लेख किया है जो उन्हें ख़ुरासान के छात्रों ने सुनाई थी। कहानी में बताया गया कि कैसे तुग़लक़ के शासनकाल में अकाल के दौरान उन्हें वीरान अग्रोहा शहर मिला। वे (छात्र) जब एक घर में दाख़िल हुए तो उन्होंने देखा कि एक आदमी आग में एक इंसान का पांव भूनकर खा रहा था। ज़ियाउद्दीन बरनी ने “तारीख़-ए-फ़ीरोज़ शाही” में लिखा कि फ़ीरोज़ शाह तुग़लक़ ने वीरान अग्रोहा में इमारतों और मंदिरों को गिराकर इसके मलबे से नया हिसार शहर बनाया था।

हो सकता है कि अग्रवाल इस गुमशुदा शहर के मूल निवासी हों और सैकड़ों सालों के बाद आज भी जिनके ज़हन में इसकी यादें ताज़ा हों। अग्रवाल समाज के प्रयासों से अग्रोहा में फिर ख़ुशहाली आ रही है। यहां राजा अग्रसेन, महालक्ष्मी देवी के मंदिर तथा स्कूल-कॉलेज हैं जो संपन्न अग्रवाल समाज ने बनवाये हैं।

हो सकता है कि भविष्य में और खुदाईयों के बाद राजा अग्रसेन के रहस्य पर से पर्दा उठे । उनके बारे में और जानकारियां मिलें लेकिन इसके लिये हमें इंतज़ार करना होगा।

SABHA: hindi.livehistoryindia.com/story/history-daily/agroha-haryana

Saturday, June 10, 2023

ERIKA GUPTA NATIONAL KARATE CHAIMPIAN

ERIKA GUPTA NATIONAL KARATE CHAIMPIAN



दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में कराते एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ऑल इंडिया कराते चैम्पियनशिप शाजापुर,मध्यप्रदेश की एरिका गुप्ता स्वर्ण पदक जीतकर नई नेशनल चेम्पियन बन गई हैं।इस प्रतियोगिता में शाजापुर की ऐरिका गुप्ता ने इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए पंजाब,अंडोमान निकोबार एवं पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

SABHAR: NARSINGH SENA 

JHARKHAND VAISHYA SAMMELAN

JHARKHAND VAISHYA SAMMELAN 


 

Monday, June 5, 2023

BAJAJ GROUP - A PRIDE OF VAISHYA COMMUNITY

BAJAJ GROUP - A PRIDE OF VAISHYA COMMUNITY 

दो-तीन पहिया वाहनों की सबसे बड़ी एक्सपोर्टर, इसके पास एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल | Largest exporter of two-three wheelers, it has Asia's largest sugar mill

मेगा एम्पायर 70 देशों में चलती हैं बजाज की गाड़ियां:दो-तीन पहिया वाहनों की सबसे बड़ी एक्सपोर्टर, इसके पास एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल


साल था 2019, एक मीडिया ग्रुप का अवॉर्ड शो चल रहा था। मंच पर गृहमंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और तत्कालीन रेलमंत्री पीयूष गोयल थे। मंच के नीचे पहली पंक्ति में बैठे बजाज ग्रुप के मालिक रहे राहुल बजाज ने गृहमंत्री से सवाल किया कि ऐसा माहौल क्यों है कि लोग अब सरकार से सवाल पूछने से डरते हैं?

इस वाकये को लेकर राहुल बजाज को हर तरफ सराहा गया। आज बात उसी बजाज ग्रुप की, जिसके ट्रेडमार्क में शामिल है गांधी जैसी तपस्या और मारवाड़ी जैसा बिजनेस माइंड। जिसके फाउंडर के नाम पर बसा है मुंबई में जे बी नगर। जिसने मिडिल क्लास परिवारों को दोपहिया चेतक पर बैठने का मौका दिया।

बजाज ग्रुप की फिलहाल 40 कंपनियां हैं। भारत में यह तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप है। इसका मार्केट कैप है 9 लाख करोड़ रुपए है। थ्री व्हीलर गाड़ियां बनाने में बजाज ऑटो भारत में नंबर एक पर है। इसका मार्केट शेयर 34.97% है। यह टू व्हीलर और थ्री व्हीलर बनाने में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। ऑटोमोबाइल के अलावा यह फाइनेंस, होम अप्लायंसेस, इंश्योरेंस, आयरन एंड स्टील और इलेक्ट्रॉनिक के सेक्टर में मौजूद है।

आज के मेगा एम्पायर में हम जानेंगे इसी बजाज एम्पायर के बारे में


शुरुआत: बजाज ग्रुप की नींव गांधी के ‘पांचवें बेटे’ ने रखी थी

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से यह पता लगता है कि राजस्थान के मारवाड़ी बनिया समुदाय से आने वाले जमनालाल को उनके दूर के रिश्तेदार बछराज बजाज ने गोद लिया था। ये परिवार महाराष्ट्र के वर्धा में रहता था। इसलिए वर्धा से ही जमनालाल ने अपने व्यापार को चलाया और बढ़ाया। 1915 में उन्होंने बछराज के बिजनेस को अपनाया और उसी साल बछराज फैक्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्टर करवाया।

आगे चलकर 1926 में जमनालाल बजाज ने 'बजाज कंपनी समूह' की स्थापना की थी। फिर 1931 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक शुगर मिल की स्थापना की। इसका नाम रखा हिंदुस्तान शुगर मिल्स लिमिटेड। यह समूह की पहली प्रमुख कंपनी थी, जिसका 1988 में नाम बदलकर बजाज हिंदुस्तान लिमिटेड कर दिया गया।

आज यह एशिया की सबसे बड़ी शुगर कंपनी है। जमनालाल बजाज के पांच बच्चे थे। कमलनयन उनके सबसे बड़े पुत्र थे। फिर तीन बहनों के बाद राम कृष्ण बजाज उनके छोटे बेटे थे। बजाज परिवार को करीब से जानने वाले कहते हैं कि जमनालाल को महात्मा गांधी का 'पांचवा बेटा' भी कहा जाता था। इसी वजह से उस वक्त नेहरू भी जमनालाल का सम्मान करते थे।

शख्सियत: पूर्व पीएम नेहरू ने रखा था राहुल नाम

जून 1938 में जन्मे राहुल बजाज की भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से काफी घनिष्ठता रही। एक चर्चित किस्सा यूं है कि जब राहुल बजाज का जन्म हुआ तो इंदिरा गांधी कांग्रेस नेता कमलनयन बजाज (राहुल के पिता) के घर पहुंची और उनकी पत्नी से शिकायत की कि उन्होंने उनकी एक कीमती चीज ले ली है।

ये था नाम 'राहुल' जो जवाहर लाल नेहरू को बहुत पसंद था। उन्होंने इसे इंदिरा के बेटे के लिए सोच रखा था, लेकिन नेहरू ने यह नाम अपने सामने जन्मे कमलनयन बजाज के बेटे को दे दिया। कहा जाता है कि बाद में इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी के बेटे का नाम राहुल इसी वजह से रखा था कि ये नाम उनके पिता को बहुत पसंद था।

वैसे आगे चलकर राहुल बजाज वही शख्स बने जिन्होंने देश को बजाज चेतक (स्कूटर) और फिर बजाज पल्सर (बाइक) जैसे प्रोडक्ट दिए। इन्हीं दो प्रोडक्ट की वजह से और उनके ब्रांड की विश्वसनीयता से बजाज 1965 में तीन करोड़ के टर्नओवर से 2008 में करीब दस हजार करोड़ के टर्नओवर तक पहुंचाया।


कामयाबी: चेतक स्कूटर ने बजाज को घर-घर तक पहुंचाया

बजाज पहले मुख्य रूप से थ्री-व्हीलर्स का काम करती थी। इसकी नींव राहुल के पिता कमलनयन बजाज ने रखी थी। 1972 में बजाज ऑटो ने ‘चेतक’ ब्रांड नाम का स्कूटर इंडियन मार्केट में उतारा। इस स्कूटर ने बजाज को देश के कोने-कोने और घर-घर में पहचान दिलाई।

बजाज चेतक के लिए कंपनी ने मार्केटिंग स्ट्रैटजी के तौर पर ‘हमारा बजाज’ स्लोगन तैयार किया। इस स्लोगन ने कई पीढ़ियों तक लोगों के मन पर राज किया। आज भी इसे हिंदुस्तान के सबसे सफल मार्केटिंग कैंपेन में से एक माना जाता है।

बजाज, स्कूटर कंपनी से बनी मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी

2000 में बजाज ऑटो ने अपनी इमेज का पूरा मेकओवर किया। राहुल बजाज की इसमें अहम भूमिका रही और एक स्कूटर बनाने वाली कंपनी को एक मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी बनाया। चेतक जहां शादी-शुदा या परिवार के लोगों की पसंद वाला स्कूटर था, वहीं कंपनी ने पल्सर जैसा मोटरसाइकिल ब्रांड खड़ा किया जो युवाओं के बीच पसंद की गई। कंपनी ने इसे ‘इट्स अ ब्यॉय’ टैगलाइन के साथ बाजार में उतारा।

बजाज भारत में दो-तीन पहिया गाड़ियों की सबसे बड़ी एक्सपोर्टर

बजाज की नीति हमेशा से ही विस्तार की रही है और राहुल बजाज का मानना था कि देश कोई भी हो अगर वहां बिजनेस के अवसर हैं, तो हमें जरूर उतरना चाहिए। यही वजह है कि आज बजाज ऑटो नॉर्थ अमेरिका के मेक्सिको से श्रीलंका तक फैला है। मेक्सिको में बजाज की पल्सर दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक है। बजाज के तीन पहिया ऑटो को वहां की भाषा में ‘मोटोकारोस’ कहते हैं। यह वहां मार्केट लीडर है।

वहीं कोलंबिया में तो बजाज की पल्सर और तीन पहिया ऑटो दोनों ही सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट हैं। यहां तक कि अफ्रिका जैसे देशों में भी बजाज का दबदबा है। वहां बजाज की बॉक्सर सबसे ज्यादा बिकने वाली मोटरसाइकिल में शामिल है।

यूरोप के ऑस्ट्रिया में केटीएम बाइक वहां की बीएमडब्लू बाइक से ज्यादा बिकती है। वैसे केटीएम में बजाज की 48% हिस्सेदारी है और मोटोजीपी में केटीएम की टीम भी शामिल है। एशिया के इजिप्ट में भी बजाज पल्सर सबसे ज्यादा बिकने वाली मोटरसाइकिल में शामिल है। बजाज की तीन पहिया भी वहां बिक्री के मामले में पीछे नहीं जिसको इजिप्ट की लोकल भाषा में टुकटुक कहते है।

वहीं इंडोनेशिया के जकारता में तो बजाज के तीन पहिया ऑटो करीब 40 साल से चल रहे है। बजाज के लिए इन सब देशों से इतर सबसे बड़ा मार्केट श्रीलंका है। श्रीलंका में बजाज के दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया भी काफी लोकप्रिय हैं। और यही सब कारण है जो भारत में बजाज को दोपहिया और तीन पहिया गाड़ियों का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बनाता है।

बजाज इलेक्ट्रिकल्स की पहुंच भी विदेशों तक

बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने भारत के 7 राज्यों के शहर और गांवों तक बिजली पहुंचाने का भी काम किया है। इसके साथ मुंबई में मौजूद बांद्रा वर्ली सी लिंक और वानखेड़े स्टेडियम के लाइटिंग सिस्टम को अपडेट करने में भी मुख्य भूमिका निभाई है। यहीं नहीं बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने तो ओमान के भी तीन फुटबॉल स्टेडियम में लाइटिंग लगाने का काम किया है।

साभार : दैनिक भास्कर 

RACHIT SINGHAL - RPPL KARTING SUPER SERIES CHAMPIANSHIP WINNER

RACHIT SINGHAL - RPPL KARTING SUPER SERIES CHAMPIANSHIP WINNER 

रचित सिंघल ने जीता पहला RPPL कार्टिंग सुपर सीरीज चैंपियनशिप खिताब, अगले रेसिंग स्टार की तैयारी शुरू - rachit singhal wins rppl karting superseries finale in chicane circuit hyderabad to become next racing star


भारत में मोटोस्पोर्ट्स का दायरा समय के साथ बढ़ रहा है और साथ ही साथ लोगों में इसकी रुचि भी काफी बढ़ रही है। मोटोरस्पोर्ट्स की एक ऐसी ही विधा 4 स्ट्रोक कार्टिंग है, जिसे इंडिया में हैदराबाद के पॉपुलर बिजनेसमैन अखिल रेड्डी की रेसिंग प्रमोशंस प्राइवेट लिमिटेड (RPPL) ने इस साल अप्रैल में लॉन्च किया है और इसका फिनाले 4 जून को हैदराबाद स्थित चिकन सर्किट में हुआ। रचित सिंघल ने पहला आरपीपीएल कार्टिंग सुपर सीरीज जीतकर भारत के अगले रेसिंग सुपरस्टार बनने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। हैदराबाद में रचित सिंघल द्वारा जीती गई कार्टिंग सुपर सीरीज से पहले चेन्नै, बेंगलुरु, केरल, मुंबई और दिल्ली में रोमांचक 5-लैग्ड कॉम्पिटिशन हुआ था।

इससे पहले रेसिंग प्रमोशन प्राइवेट लिमिटेड ने इंडियन रेसिंग लीग का सफल आयोजन किया था। अब हैदराबाद के पॉपुलर चिकन सर्किट में कार्टिंग सुपरसीरीज के सफल समापन के साथ ही भारत में मोटरस्पोर्ट्स कल्चर को और बढ़ा दिया गया है। रविवार को चिकन सर्किट पर 4-स्ट्रोक कार्टिंग सुपर सीरीज के फिनाले के दौरान आयोजकों और दर्शकों के साथ ही इसमें हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों और उनकी फैमिली का उत्साह देखने लायक था।


हैदराबाद के चिकन सर्किट में आरपीपीएल 4 स्ट्रोक कार्टिंग सुपर सीरीज

भारत में अगले रेसिंग टैलेंट की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने के उद्देश्य से फोर-स्ट्रोक कार्टिंग सुपरसीरीज का आयोजन किया गया था। इसमें हिस्सा लेने वाले ड्राइवरों (14 साल और उससे ज्यादा उम्र) ने अपने शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों को आकर्षित किया और मोटरस्पोर्ट्स के प्रति अपने जुनून को शोकेस किया। इस कॉम्पिटिशन के हर स्टेज पर चेन्नई में ईसीआर स्पीडवे, बेंगलुरु में मेको कार्टोपिया, केरल में स्पीडवे त्रिशूर, मुंबई में अजमेरा इंडीकार्टिंग और गुरुग्राम, दिल्ली में कार्टोमेनिया (F11 कार्टिंग) समेत देशभर के पॉपुलर कार्टिंग ट्रैक पर लोगों को गजब का एक्सपीरियंस मिला और इससे मोटरस्पोर्ट्स को काफी बढ़ावा मिला।

हैदराबाद के चिकन सर्किट में आयोजित ग्रैंड फिनाले में हर स्टेज के टॉप 6 फाइनलिस्ट को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिला। वहीं, रचित सिंघल कॉम्पिटिशन के दौरान असाधारण प्रतिभा, सटीकता और रणनीतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कार्टिंग सुपरसीरीज फाइनल के चैंपियन के रूप में उभरे।

आरपीपीएल के चेयरमैन अखिल रेड्डी कहीं जरूरी बातें

आरपीपीएल के चेयरमैन और एमडी अखिल रेड्डी ने पहले आरपीपीएल कार्टिंग सुपर सीरीज चैंपियनशिन के सफल आयोजन पर खुशी जताते हुए कहा कि हमें कार्टिंग सुपरसीरीज और युवा रेसिंग टैलेंट्स को उनके कौशल और मोटरस्पोर्ट्स में उनके करियर की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण प्लैटफॉर्म उपलब्ध कराकर बेहद गर्व है। आरपीपीएल भारत में रेसिंग टैलेंट्स को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है रचित सिंघल की जीत हमारे देश में मौजूद क्षमता और प्रतिभा का एक वसीयतनामा है।

साभार : नवभारत टाइम्स 

Friday, June 2, 2023

BANIA THE GREAT

#BANIA THE GREAT


 

VAISHYA GOURAV - HARISHANKAR VISHNU SHANKAR JAIN

VAISHYA GOURAV - #HARI SHANKAR VISHNU SHANKAR JAIN

साल 1992 में जब बाबरी ढांचा तोड़ दिया गया तब श्री रामलला की पूजा बंद हो गई थी क्योंकि पूरे परिसर को ही सील कर दिया गया था । उसके पहले बाबरी ढांचे के अंदर मौजूद श्री रामलला की पूजा हो रही थी । ये वरिष्ठ वकील हरि शंकर जैन ही थे जिन्होंने इस बात को समझा कि अगर वो जगह सील हो गई और श्रीराम लला की पूजा बंद हो गई तो हमारा दावा उस जमीन पर कमजोर हो जाएगा इसलिए हरि शंकर जैन सुप्रीम कोर्ट गए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि हिंदुओं को श्रीराम लला के पूजा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है क्योंकि भगवान श्री राम ना सिर्फ हिंदुओं के आराध्य है बल्कि भारत के संविधान के पन्नों पर भी भगवान श्री राम का चित्र अंकित है । उनकी जोरदार अपीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट को श्रीराम लला की पूजा कि इजाजत देनी पड़ी और जन्मभूमि की सील को हटाया गया तथा दोबारा श्री राम जन्मभूमि की पूजा शुरू हुई । ये पूजा 30 सालों से लगातार होती रही । इस बात का केस पर बहुत प्रभाव पड़ा और हिंदुओं का पक्ष अत्यंत मजबूत हो गया जिसके बाद श्री राम जन्म भूमि मामले में अंतत: हिंदुओं की विजय हुई ।


#हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन.. हिन्दू धर्म और विरासत के लिए लड़ने वाली पिता-पुत्र की जोड़ी

-ठीक ऐसा ही 30 साल बाद हुआ जब ज्ञानवापी ढांचे के अंदर वजूखाने में शिवलिंग की प्राप्ति हुई । पूरा देश भावुक हो उठा... लोगों ने अपने घरों में दीप जलाए कि महादेव स्वयं साक्ष्य बनकर प्रकट हो गए हैं । लेकिन उस दिन शिवलिंग प्राप्त होने के तुरंत बाद सुबह 10 बजे ही विष्णु शंकर जैन हिंदू पक्ष के सभी वकीलों के साथ अदालत गए और फौरन शिवलिंग के साक्ष्य को सील करने का आदेश प्राप्त किया । जिसके बाद उस कथित मस्जिद के वजूखाने को सील कर दिया गया और अब तक वो सील ही है । ये हिंदू पक्ष की पहली बड़ी और महान विजय है जिसका श्रेय इस पिता पुत्र की जोड़ी को जाता है । अब जरा सोचिए क्या दिलचस्प संयोग है हरि शंकर जैन ने 1992 में जन्मभूमि की सील हटवाकर जिहादियों के होश उड़ा दिए थे और 2022 में विष्णु शंकर जैन ने ज्ञानवापी में सील लगवाकर जिहादियों के होश उड़ा दिए । हर हर महादेव ।

- सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हरि शंकर जैन का जन्म 27 मई 1954 को हुआ था और उनके बेटे विष्णु शंकर जैन का जन्म 9 अक्टूबर 1986 को हुआ था । जो लोग ज्योतिष में रुचि रखते हैं उनके लिए एक और खास बात दोनों पिता पुत्र का लकी नंबर 9 है । यानी अगर दोनों की जन्म तारीख को जोड़ें तो 9 अंक आता है । एक खास बात और दोनो के नाम एक दूसरे का पर्यावाची है हरि और विष्णु । पहले दोनों ने श्री राम का केस लड़ा जो विष्णु के अवतार हैं और अब दोनों भगवान शंकर का केस लड़ रहे हैं यानी पिता पुत्र ने अपने नाम को सार्थक कर दिया है ।

-साल 1976 में हरिशंकर जैन ने लॉ प्रैक्टिस शुरू की थी । पहले लखनऊ कोर्ट फिर हाईकोर्ट और फिर हरि शंकर जैन सुप्रीम कोर्ट के वकील बन गए । उधर विष्णु शंकर जैन ने भी साल 2010 में कानून की पढ़ाई पूरी कर ली और तब से पिता का साथ देने लगे ।
 
-2016 में विष्णु शंकर जैन सुप्रीम कोर्ट के भी वकील बन गए । राम जन्म भूमि के केस में ही विष्णु शंकर जैन पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट के रूप में पेश हुए । दोनों पिता पुत्र श्री राम जन्मभूमि केस की लीगल टीम का हिस्सा रहे ।
 
-भोपाल में हुए अपने एक भाषण में विष्णु शंकर जैन ने बताया कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार यानी मुसलमानों ने एक तरह से हरि शंकर जैन के सामने ब्लैंक चेक रख दिया था ... यानी मुंह मांगा पैसा ले लो और हमारी तरफ से केस लड़ो लेकिन हरि शंकर जैन ने ऐसे प्रस्ताव को ठुकरा दिया और धर्म के साथ अपनी अंतरात्मा के साथ खड़े हुए ।

-एक और प्रसंग का वर्णन करते हुए विष्णु शंकर जैन ने बताया कि एक बार उनके पिता की हालत काफी खराब थी उनको अस्थमा का अटैक आया था... वेंटिलेटर नहीं मिल रहा था... अचानक हरि शंकर जैन ने अपने बेटे को बुलाया । विष्णु जैन को लगा कि पिता जी कोई जरूरी बात बताना चाहते हैं जो उनकी सेहत के विषय में है । लेकिन हरि शंकर जैन ने यूपी के किसी केस में कागज लगाने के लिए कहा कि ये जरूरी काम कर लो नहीं तो हिंदू पक्ष का केस गिर जाए । धन्य है ऐसे महापुरुष जिनको जीवित देखने का सौभाग्य हम सभी 100 करोड़ हिंदुओं को प्राप्त हुआ है । मैं तो कहूंगा ये मनुष्य रूप में साक्षात महादेव के रुद्रगढ़ है जो धरती पर मलेच्छों को धूल चटाने के लिए अवतरित हुए हैं ।
 
विष्णु शंकर जैन ने ज्ञानवापी केस में अपनी तार्किक क्षमता का जबरदस्त परिचय दिया है । दरअसल 1991 के वर्शिप एक्ट को लेकर मुस्लिम पक्ष पूरे देश में उछल कूद मचा रहा था कि ज्ञानवापी की कथित मस्जिद का कैरेक्ट चेंज नहीं कर सकते हैं । लेकिन विष्णु जैन ने ये कहकर पूरा मामला ही पलट दिया कि पहले ये तय होना जरूरी है कि आखिर ज्ञानवापी का असली कैरेक्टर क्या है ? उन्होंने ये दावा किया कि ज्ञानवापी के मामले में तो 1991 का एक्ट उनके फेवर में है । इस दलील के बाद मुस्लिम पक्ष की पूरी जमीन ही खिस गई । आप सोचिए ये बात इतनी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि 1990 से बनारस के वरिष्ठ वकील विजय शंकर रस्तोगी ज्ञानवापी का केस लड़ रहे हैं लेकिन वर्शिप एक्ट की ही वजह से केस पेंडिंग पड़ा है । आज इस लेख के माध्यम से मैं विजय शंकर रस्तोगी जी को भी उनकी सनातन सेवाओं के लिए प्रणाम करता हूं।

-दोनों जैन पिता पुत्र अब तक 102 केस लड़ चुके हैं जो सनातन धर्म की अस्मिता से जुड़े हुए हैं । 1990 से ही मथुरा का केस हरिशंकर जैन लड़ रहे हैं । कुतुब मीनार और कुव्वत उल इस्लाम कथित मस्जिद का केस भी हरिशंकर जैन ने फाइल किया हुआ है । जब अखिलेश राज में सपा सरकार ने आतंकवादियों के केस वापस लेने की कोशिश की तब भी हरिशंकर जैन ने ही केस लड़ा था और अखिलेश सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार लगी थी ।

-दोनों पिता पुत्र कई हिंदू संगठन भी चलाते हैं । विष्णु शंकर जैन हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस के प्रवक्ता हैं । हरिशंकर जैन भगवा रक्षा वाहिनी के संस्थापक हैं। हरिशंकर जैन हिंदू साम्राज्य पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं । हरिशंकर जैन कट्टर हिंदुत्ववादी हैं । 31 जुलाई 2017 को हरिशंकर जैन ने ट्विटर पर लिखा था... चरमपंथ को धारण करके ही कोई कम्युनिटी अपने धर्म को बचा सकती है । सहिष्णुता अभिशाप और अधार्मिकता है कठोरता और चरमपंथ धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक है