Pages

Showing posts with label वैश्य समाज के बारे में कुछ जानकारी. Show all posts
Showing posts with label वैश्य समाज के बारे में कुछ जानकारी. Show all posts

Monday, December 17, 2018

वैश्य समाज के बारे में कुछ जानकारी

वैश्य समाज के बारे में कुछ जानकारी,,,,,

वैश्य समाज के बारे में मुझे जानकारी देने को आवश्यता नही है ,,,

दुनियां जानती है वैश्य समाज के बारे में ,,,,,

फिर भी वैश्य समाज से अंजान या जलने वाले या घृणा करने वाले लोगों को बता रहा हूँ ये समाज के बारे में कुछ भ्रांतियां है जिन्हें दूर करना चाहता हूँ ,,,

जो लोग समाज के बारे में भ्रांतियां फैलाते है वो या तो वैश्य समाज की शख्सियत , कामयाबी से जलते है या फिर अंजान बने रहना चाहते है ,,


उन्हें बता हूँ वैश्य समाज कभी भी किसी भी समाज का अहित नही चाहता है वो सबको सम्मान देता है सभी को अपनी तरफ सुखी देखने की कामना करता है ये वो ही समाज है जो सबसे कम धन होने के बाबजूद भी अपने खर्चो में फिजूल खर्ची को खत्म करके सभी वर्गों के हितों के लिए कुछ न कुछ करता है ये वही समाज है जिसने अपने साथ-2 सभी के लिए ऐसी परम्पराए विकसित की है जिससे सभी की रोजी रोटी सुचारू रूप से चल सके ,,, फिर भी सभी ये कहते है कि वैश्य समाज ने हमारे लिए क्या किया है अरे मूर्खो ,,,,,

जो पंडित ये समझते है कि हम पूज्यनीय है तो ये मत भूलो की आज भी तुम्हारा कोई आदर कर रहा है तो वो सिर्फ वैश्य समाज की बजह से , जो तुम अहंकार दिखाते हो जरा सा ज्ञान होने का उससे ज्यादा ज्ञान तो एक तुच्छ से तुच्छ व्यक्ति भी लिए फिरता है तुम्हे लेकिन जो तबज्जो मिलती है वो सब वैश्य समाज की बजह से ,,,,, वो तुम्हे अपने से भी श्रेष्ठ रखता है ,,,अन्य जातियां भी तभी तुम्हारा सम्मान करती है न तो तुम्हे कौन पूछता था ,,, वैश्य समाज ने ही हर जाति के उत्तान के लिए कुछ न कुछ परम्पराए बनाई है जैसे विवाह के अवसर पर दूल्हे की हजामत के लिए नाई , मिट्टी के बर्तनों के लिए कुम्हार,,,,हवन पूजन के लिए पंडित, काजी, ,,,,बैंड बाजे के लिए मुसलमान, खाने के लिए हलवाई, हर वर्ग को उन्नति में लाने के लिए कुछ न कुछ अवश्य रखा है फिर भी चंद चोर नेताओ , कर्मचारियों , विशेषकर फिल्म जगत के लोगों ने इस समाज के बारे में उल्टा सीधा चित्रण किया है जिसके परिणामस्वरूप ही आज हर समाज वैश्य वर्ग को घृणा की दृष्टि से देखता है बिना कुछउसके बारे में इतिहास जाने ,,,,

वो वर्ग ऐसा वर्ग है जो अपनी मेहनत - की एक-एक पाई पाई को इकट्ठा करके करोड़ो का चंदा किसी को भी दान में देता है ,,,,,,वैश्य समाज को मुझे परिचय देने की आवश्यकता नही है वो किसी परिचय का मोहताज नही है तमाम कुप्रथाओ को खत्म करने में हमेशा अग्रणी ,,,,,,,,

देश आजादी से लेकर आज तक वैश्य समाज ने जो योगदान दिया है वो अविस्मरणीय है ,,, देश आजादी में क्रांति के लिए धन बल जुटाने सेठ जमुनालाल बजाज , बिरला परिवार , देश आजादी की लड़ाई में भी वैश्य समाज के प्रमुख क्रांतिकारियों का अभूतपूर्व योगदान रहा है जिसे भुलाया नही जा सकता जैसे - लाला लाजपत राय , मनमंथ गुप्ता, महात्मा गांधी, श्यामलालगुप्ता पार्षद इतियादी अनेक ऐसे जांबाजों हुए है जिनका महत्वपूर्ण योगदान है ,,,,

वैश्य समाज के संस्कारों के बारे में बात करे तो इसके कहने ही क्या है ,,,,,

बड़े से बड़े उधोयपतियों को देख लो एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अमबानी से लेकर , सुनील भारती मित्तल , वेदान्ता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल , आदित्य बिड़ला ग्रुप के मालिक इतियादी में से किसी को भी देख लो अहंकार,अभिमान छू कर भी नही गुजरा है ,,,

हमेशा राष्ट हिट में कुछ न कुछ बड़ा करते रहते है 

जैसे अगर सुनील मित्तल एयरटेल के मालिक की बात करें तो बिज़नेस यूनिवरसिटी के लिए 7000 करोड़ का चंदा देना , अनिल अमबानी का 

Bsuiness स्कूल के लिए 10000 करोड़ देना , अनिल अग्रवाल का 20000 करोड़ का दान करना अनेकों ऐसे उदाहरण है दान पुण्य के कार्यों के किस्सों में तो ये समाज अग्रणी है ही ये समाज दिखावा के लिए दान नही करता है ना ही राजनीति करने के लिए राजनीति से इस वर्ग का कोई लेना देना नही है ,,,,

इसका जीता जागता उदाहरण है मिस्टर मुकेश अमबानी एशिया के डब्से धनाढ्य व्यक्ति अपनी बेटी के शादी समारोह में सपरिवार गरीबों को , दिव्यांगों को अपने हाथों से भोजन करा रहे है इनका राजनीति से कोई लेना देना नही है ये इनके माता पिता के संस्कार है जो इनमे झलक रहे है वार्ना अपने सुना ही होगा ,,,,की पैसा , पद ,या प्रतिष्ठा अगर बढ़ती है तो इंसान का अहंकार भी बढ़ता है पर वो इन पर फिट नही बैठता है मित्रो,,,,,,, ये है हमारा वैश्य समाज और उसके संस्कार सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आज तक के,,,,