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Friday, November 10, 2017

SHRIPRAKASH LOHIYA - श्रीप्रकाश लोहिया

19 वर्ष की उम्र में विदेशी धरती पर शून्य से शुरुआत कर ऐसे बनाया 67,000 करोड़ का साम्राज्य


एक बहुमुखी व्यक्तित्व वाले प्रवासी भारतीय ने भारतीय उद्यमिता के उत्साह और जोश में और भी वृद्धि की है। 2017 मेें फोर्ब्स पत्रिका के प्रकाशन के वक्त 5 बिलियन डाॅलर की संपत्ति के साथ वे विश्व के 288वें धनकुबेरों की सूची में शामिल थे। मगर फोर्ब्स के ही रियल टाईम डेटा के अनुसार उनकी संपत्ति 2017 में ही 6.3 बिलियन डाॅलर हो गई। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि श्री प्रकाश लोहिया हैं, जिनकी गिनती इण्डोनेशिया के चौथे सबसे रईस इंसान के रूप में होती है।


विश्व के वृहत्तम पाॅलिस्टर निर्माता कंपनी इण्डोरामा कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री लोहिया जब 1975 में अपने पिता मोहन लाल लोहिया के साथ इण्डोनेशिया की धरती पर अपने सपनों को पूरा करने आए थे तो उन्हें भी गुमान न था कि सफलता उनका इस कदर स्वागत करेगी। इण्डोरामा दो शब्दों के मेल से बनी है इण्डो इण्डोनेशिया को प्रतिक करता है जबकि रामा भगवान श्री राम को प्रस्तुत करता है। कंपनी तेजी से अफ्रिकी देशों में विस्तार कर रही है। हाल ही में उन्होंने नाइजिरिया में एक उर्वरक कंपनी स्थापित किया है। इण्डोरामा का लक्ष्य अफ्रिका महादेश में साल 2020 तक 2 बिलियन डाॅलर का निवेश बढ़ाकर 4.2 बिलियन डाॅलर करना है। इसी कड़ी में उन्होंने सेनेगल में सबसे बड़ा उर्वरक सयंत्र स्थापित किया है। मैक्सिको में भी उन्होंने औद्योगिक ईकाई की स्थापना की है।

कैसे हुई शुरुआत

कोलकत्ता में जन्में श्री प्रकाश लोहिया की यह यात्रा 40 साल पूर्व तब शुरु हुई थी जब 19 वर्ष की अवस्था में उन्होंने इण्डोनेशिया का रुख किया। उन्होंने साल 1971 में वाणिज्य की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। साल 1973 में पिता संग इण्डोनेशिया की धरती पर कदम रखा। नए देश में नई संभावनाओं को देखते हुए उनके पिता ने एक रासायनिक वस्त्र उद्योग की आधारशिला रखी। शुरुआत के कुछ वर्षों तक उन्होंने इंडस्ट्री को चलाया और 1976 में सूत निर्माण की प्रक्रिया शुरू की। इण्डोरामा सिंथेटिकस के बैनर तले उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को बाज़ार में उतारा।

दरअसल इस फर्म की शुरुआत एक सूत कताई ईकाई की रूप में हुई थी और समय के साथ-साथ कंपनी इण्डोनेशिया की सबसे बड़ी टेक्सटाईल कंपनी बन गई। उन्होंने अपनी उत्पादन ईकाई का विस्तार इण्डोनेशिया के बाद उजबेकिस्तान और थाईलैण्ड तक पहुँचाया। 1980 के दशक के अंत में मोहन लाल लोहिया ने कंपनी को भविष्य में परिवार के विवादों से बचाने के लिए अपने तीन बेटों के बीच विभाजित कर दिया।

अधिग्रहण के जरिए नए क्षेत्रों में बढ़ाया कारोबार


साल 1990 में कंपनी के कार्यक्षेत्र में विविधता करते हुए श्री प्रकाश ने पाॅलीथिन और टेराफेटलेट का उत्पादन शुरु किया जिससे कोक और पेेप्सी जैसे पेयपदार्थ का बोतलबंद किया जाता है। 2006 में इण्डोरामा सिन्थेटिक्स अफ्रिकी देशों में निवेश करना शुरु किया। उन्होंने नाइजिरिया की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एलमा पेट्रोकैमिक्ल्स का 225 मिलियन डाॅलर में अधिग्रहण कर अपना दायरा बढ़ाया। अपनी सफलता के रथ पर सवार श्री प्रकाश लोहिया की कंपनी इण्डोरामा कार्पोरेशन पेट्रोकैमिकल्स में 2 बिलियन डाॅलर के निवेश के साथ पश्चिमी अफ्रिकी देशों में इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विदेशी निवेशक बन गयी।

64 की उम्र में भी वह सक्रिय रुप से अपनी कंपनी का संचालन देखते हैं। 57 फैक्ट्रीयों के साथ वर्तमान में 21 देशों में फैली इस कंपनी का सालाना टर्नओवर 10 बिलियन डाॅलर (67,000 करोड़ रूपये) के करीब है। हाल ही में उन्होंने ड्यूपाॅन्ट के साथ भी साझा व्यपार के समझौते किए हैं।

प्रकाश लोहिया ने कंपनी का भाग अपने बेटे अमित को सौंप दिया है। जो अभी सिंगापुर में रहते हैं। परंतु नाइजिरिया ईकाई का संचालन वे स्वयं करते हैं। वार्टन स्कूल आॅफ बिजनेस से ग्रेजुएट अमित को फोब्स पत्रिका ने ‘प्रिंस आॅफ पाॅलिस्टर’ कहा है। श्री प्रकाश के छोटे भाई आलोक भी इण्डोनेशिया के रईसों में एक है।

सामाजिक कार्यों में भी दिल खोल कर लेते हैं हिस्सा

श्री प्रकाश लोहिया इण्डोनेशिया के सामाजिक क्षेत्र के लिए भी बहुत कुछ कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज और पर्यावरण के क्षेत्र में भी उन्होंने काफी योगदान दिया है। कई स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्र खोलने में आर्थिक सहायता प्रदान की है।

श्री लोहिया कला के भी एक दिलेर कद्रदान हैं। उनके पास दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह भी है जिसमे 16वीं सदी का ‘बाईबल’ और 18वीं सदी का लिखा गया ‘कुरान’ है। उनके पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा लिथोग्राफ का संग्रह है। जिनमें कुछ तो 17वीं सदी के हैं। उन्होंने 75 मिलियन डाॅलर से 245 वर्ष पुराने ‘मेफेयर मेंशन’ का जिर्णोद्धार कराया। इसके लिए कई इतिहासकार, कलाकार और शिल्पकारों को लगाया गया। उनके इस कार्य के लिए उन्हें ‘मेफेयर का महाराज’ भी कहा जाता है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा 2012 में उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान से भी नवाजा गया था।

एक प्रवासी भारतीय द्वारा विदेशों में अपनी सफलता का परचम लहराना पूरे देश के लिए एक गर्व का विषय है। अपनी मेहनत और लगन से श्री प्रकाश लोहिया ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया। उनकी कामयाबी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो किसी भी उद्यमिता के पहल से घबराते हैं।

साभार: 
hindi.kenfolios.com/sri-prakash-lohia-indorama-corporation/

by Amit Kumar,11/11/2017