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Friday, July 3, 2026

SANJAY AGRAWAL - AU SMALL FINANCE BANK

SANJAY AGRAWAL - AU SMALL FINANCE BANK

संजय अग्रवाल ने उधार के पैसे से फाइनेंस का एक छोटा-सा काम शुरू किया था. धीरे-धीरे कंपनी बड़ी होती चली गई. आज वह कंपनी एक बैंक में बदल चुकी है, जिसकी मार्केट कैप लगभग 50,000 करोड़ है.


सफलता की ये कहानी है एक ऐसे साधारण-से लड़के की, जो 8वीं कक्षा में फेल हो गया था. जैसे-तैसे करके आगे बढ़ा और बाद में दो बार चार्टर्ड अकाउंटेंड (CA) की परीक्षा में फेल हो गया. फिर नौकरी भी की. लेकिन इंसान की मेहनत और जिद के सामने पूरी कायनात झुक जाती है. इस लड़के ने भी कायनात को अपने पक्ष में लाकर खड़ा कर दिया. इसने एक फाइनेंस कंपनी की स्थापना की, जो आज 49,698 करोड़ की मार्केट कैप वाले नामी बैंक में बदल चुकी है. कहानी के मुख्य पात्र का नाम है संजय अग्रवाल

संजय अग्रवाल राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर में पैदा हुए थे. शुरुआती पढ़ाई का अहम पड़ाव कक्षा आठवीं होती है, मगर वे उसमें फेल हो गए. बाद में उन्होंने 2 बार सीए की परीक्षा में भी असलता का सामना किया. हालांकि तीसरी बार कड़ी मेहनत के बूते वे सीए की मेरिट लिस्ट में जगह पा गए. नौकरी की, मगर रास नहीं आई. 1996 में संजय अग्रवाल ने 5 लोगों से पैसा लेकर एक एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) की स्थापना की. इसका नाम था एयू फाइनेंशियर्स (AU Financiers). यह वही कंपनी है, जिसे आज आप एयू स्माल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) के नाम से जानते हैं.

एक स्कैम ने डरा दिया निवेशकों को, अटक गया काम
उधार के पैसों से शुरू की गई एक छोटी-सी एनबीएफसी एक बैंक में बदल गई. मगर इन दोनों के बीच 28 साल का लंबा और दिलचस्प सफर भी है. NBFC की स्थापना के बाद काम चलना ही शुरू हुआ था कि 1997 में 1200 करोड़ रुपये का चैन रूप भंसाली स्कैम (Chain Roop Bhansali scam) सामने आया. इस स्कैम के बारे में एक अलग आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे. अभी इतना समझ लीजिए कि इस स्कैम ने NBFCs से लोगों का भरोसा डिगा दिया था. हालात ऐसे हो गए थे कि लोग NBFC के नाम से दूर भागने लगे थे. ऐसे में संजय अग्रवाल की एयू फाइनेंशियर्स के लिए भी बड़ी समस्या पैदा हो गई.

एक तरफ धंधे का बैंड बजा हुआ था और उधर उनकी बहन अरुणा कैंसर से जूझ रही थी. सन 2000 में वे अपनी बहन को इलाज के लिए लंदन चले गए. लंदन जाना उनकी लाइफ में एक टर्निंग पॉइंट लेकर आया. संजय अग्रवाल ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए अपनी बहन को कैंसर से बचा लिया और जयपुर लौट आए. लौटने के बाद उन्होंने फाइनेंसिंग बिजनेस को नए स्तर पर ले जाने की कोशिशें शुरू कर दीं. 2003 में एचडीएफ (HDFC) ने एयू फाइनेंशियर्स से पार्टनरशिप कर ली.

HDFC से पार्टनरशिप से बदल गई तस्वीर
एक रोचक जानकारी यह भी है कि AU सोने का सिंबोलिक नाम है. लेटिन भाषा के औरम (Auram) से बना है. इस शब्द के पहले दो अक्षरों का इस्तेमाल करके सोने को एक सिंबल दिया गया है. HDFC ग्राहकों के लिए एयू (संजय अग्रवाल की कंपनी) सोने की खरीद-बेच का साधन बन गया. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में महज 18 फीसदी सालाना ब्याज पर वाहनों के लिए लोन 24 घंटों के भीतर पास होने लगा. कंपनी लगातार अच्छा काम कर रही थी.

बिजनेस जगत का एक नियम है कि जब भी कोई नई कंपनी अच्छा काम करती है तो बड़े निवेशकों की निगाहों में चढ़ ही जाती है. संजय अग्रवाल की कंपनी पर मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट इक्विटी की नजर पड़ी. मोतीलाल ने एयू फाइनेंशियर्स में 20 करोड़ रुपये का निवेश किया.

2017 का 19 अप्रैल हमेशा रहेगा याद
जून 2011 तक एयू ने 7 राज्यों में मौजूद अपनी 150 ब्रांच से 1,25,000 ग्राहकों को 1508 करोड़ का लोन बांट दिया था. कंपनी ने व्हीकल लोन के लिए सुजुकी और टाटा मोटर्स के साथ पार्टनरशिप की, तो हाउसिंग लोन के लिए नेशनल हाउसिंग कंपनी के साथ. एयू और आगे बढ़ी तो 250 करोड़ रुपये का निवेश आ गया. निवेश करने वालों में वारबर्ग पिन्कस, क्रिस कैपिटल और आईएफसी शामिल थे.

सितंबर 2013 तक कंपनी ने 4200 करोड़ रुपये का लोन लोगों तक पहुंचा दिया था. संजय अग्रवाल लगातार मेहनत करते रहे और फिर कायनात उनके आगे नतमस्तक हो गई. 2015 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने फाइनेंस के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी घोषणा की. बैंकिंग सेक्टर के लिए एक नई कैटेगरी बना दी गई- स्माल फाइनेंस बैंक. तब एयू एकमात्र ऐसी NBFC थी, जो लाइसेंस पाने में कामयाब रही. 2017 के अप्रैल महीने की 19 तारीख को संजय अग्रवाल जीवनभर नहीं भूलेंगे, क्योंकि इसी दिन एयू स्माल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) बना.

IPO आया तो टूट पड़े थे लोग
2017 में कंपनी 1912.51 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई. लोगों को इतना भरोसा था कि यह 53 गुना सबस्क्राइब हुआ. इस तरह नवम्बर 2017 में यह एक शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक बन गया. मार्च 2018 में इस बैंक ने 11 राज्यों में 306 ब्रांच खोल दीं और 292 एटीएम लगा दिए. कुछ ही समय में यह फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनी बन गई. यह एक ऐसा ग्रुप है, जहां पहुंच पाना हर कंपनी के लिए मुमकिन नहीं. आज एयू स्माल फाइनेंस बैंक की 21 राज्यों में उपस्थिति है और इसकी 2383 ब्रांच हैं. बैंक के पास 1.1 करोड़ ग्राहक हैं.

प्राइवेट कमर्शियल बैंकों को आने लगा पसीना!
AU Small Finance Bank में सेविंग अकाउंट पर ही 7.25 फीसदी का ब्याज मिलता है. 7 जून 2024 को रिवाइज की गई FD की दरों के हिसाब से 18 महीनों की एफडी पर 8.24 फीसदी (एनुएलाइज्ड) ब्याज दर प्राप्त होती है. वरिष्ठ नागरिकों को इसी अवधि के लिए एफडी पर 8.77% ब्याज मिलता है. ज्यादा ब्याज दरों के चलते ही, एफडी कराने के लिए इन दिनों लोग स्माल फाइनेंस बैंकों का रुख करते हैं. ऐसे में अगर यह कहा जाए कि एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज कमर्शियल बैंकों के माथे पर भी पसीना आने लगा है, तो गलत नहीं होगा.

विदेशी संस्थागत निवेशकों का अटूट भरोसा
चूंकि अब यह एक लिस्टेड कंपनी है तो इसका शेयरहोल्डिंग पैटर्न आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. इस पैटर्न में खास बात यह है कि इसमें विदेशी निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. वे 39.36 फीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा किए बैठे हैं, जबकि इसके प्रोमोटर्स के पास केवल 25.45 फीसदी हिस्सेदारी ही है. घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी बैंक पर पूरा भरोसा टिकाए हुए हैं. उनकी हिस्सेदारी 22.79 प्रतिशत है. प्रोमोटर्स में संजय अग्रवाल के पास 17.58 फीसदी की हिस्सेदारी है.

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