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Monday, February 28, 2022

ROHAN AGRAWAL A SUPER TRAVELLER

ROHAN AGRAWAL A SUPER TRAVELLER

देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने पैदल निकल पड़े रोहन अग्रवालदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए महाराष्ट्र के कामठी नागपुर निवासी रोहन अग्रवाल 20 वर्ष निकले हैं। अब तक 17 राज्यों की पैदल और लिफ्ट लेकर यात्रा कर चुके हैं।


भारत देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए महाराष्ट्र के कामठी नागपुर निवासी रोहन अग्रवाल 20 वर्ष निकले हैं। अब तक 17 राज्यों की पैदल और लिफ्ट लेकर यात्रा कर लोगों को प्लास्टिक का उपयोग कम करने अथवा बंद करने की बात समझाने की कोशिश कर चुके हैं।


रोहन अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के प्रथम चरण में जब लाकडाउन लगा तो वे काफी डर गए थे। इस दौरान वे तीन महीने तक घर से ही नहीं निकले। इस अवधि में उन्होंने विभिन्ना धर्म के गुरुओं, आराध्य एवं महापुरुषों के बारे में अध्ययन किया।

सभी के जीवन में उन्हें एक ही चीज देखने को मिली कि मानवता की सेवा के लिए देश-दुनिया का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने भी ठान लिया कि भारत को प्लास्टिक मुक्त बनाने पूरे देश का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगे।

25 अगस्त 2020 को उन्होंने वाराणसी से अपनी यात्रा प्रारंभ की। उस समय वे 18 वर्ष के थे और बीकाम सेकेंड ईयर के छात्र थे। अब 17 राज्य घूम चुके हैं। कोरोना संक्रमण काल में भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोरोना से डर नहीं लगता। उनके पिता जूस बेचते हैं। माता और एक छोटी बहन है।

धमतरी में वे 21 जनवरी की रात पहुंचे। रात्रि विश्राम के बाद 22 जनवरी की सुबह कांग्रेस नेता आनंद पवार, युकां नेता गौतम वाधवानी, तुषार जैस, रेहान विरानी ने उनका स्वागत किया। अब तक वे उत्तर प्रदेश,राजस्थान,हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना का भ्रमण कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा जाएंगे। प्रतिदिन 40 किलोमीटर का सफर तय करते हैं।

पैदल चलने के अलावा बीच-बीच में किसी से लिफ्ट ले लेते हैं, लेकिन बस, ट्रेन और फ्लाइट में सफर नहीं करते। जहां पर शाम होती है ,वहां के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, पुलिस स्टेशन, सामुदायिक भवन में रात गुजार लेते हैं। जगह नहीं मिलती तो किसी के घर के बरामदे में भी सो जाते हैं।

डाकू ने पकड़ा, लेकिन बाद में खाना खिलाया और 1000 रुपये दिए

रोहन अग्रवाल ने बताया कि यात्रा के दौरान वे उत्तरप्रदेश के चंबल घाटी के बीहड़ इलाकों से होकर गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें एक डाकू ने पकड़ लिया। उसने बंदूक टिकाकर उसके बैग की तलाशी ली और पैसे मांगें। नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। तभी उन्हें बौद्ध धर्म में कहा गया है कि अपनी बात लोगों को समझाने की कोशिश करनी चाहिए। तब उसने डाकू से कहा कि फांसी देने वालों की भी अंतिम इच्छा पूछी जाती है।

आप मेरी बात पांच मिनट सून लीजिए। डाकू ने गुस्से में कहा कि बोलो क्या बोलना है। इसके बाद उसने डाकू को अपने यात्रा का उद्देश्य बताया। इसके बाद डाकू प्रभावित हो गया। डाकू ने उसे खाना खिलाया और 1000 रुपये नकद दिए। साथ उस खतरनाक इलाके से सुरक्षित स्थान तक भी पहुंचाया।

2500 लेकर निकले थे, साइबेरिया तक जाने की इच्छा

वाराणसी से 2500 रुपये लेकर भारत भ्रमण में निकले हैं। रास्ते में लोग उनकी मदद कर देते हैं। छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा जाएंगे। इसके बाद देश के पूर्वोत्तर राज्यों का भ्रमण कर लोगों को प्लास्टिक के प्रति जागरूक करेंगे।

भारत भ्रमण पूरा होने के बाद बांग्लादेश, म्यामांर जैसे देशों की यात्रा करेंगे। उनकी इच्छा साइबेरिया तक जाने की है। परिवार वालों की इच्छा नहीं थी कि वह इतनी कम उम्र में भारत भ्रमण पर निकले। डेढ़ साल में दो बार अपने घर भी जा चुका है।

Wednesday, February 23, 2022

KSHITIJ AGRAWAL - TEKILA GLOBAL SERVICES

KSHITIJ AGRAWAL - TEKILA GLOBAL SERVICES 

अमेरिका में नौकरी करने गए युवक ने कैसे बना ली दो सौ करोड़ की कंपनी, पढ़ें बरेली के युवक की कहानी


अमेरिकी में भारतीय मेधा का परचम लंबे समय से लहरा रहा है। सिलिकान वैली में भारतीयों का वर्चस्व जगजाहिर है लेकिन एक भारतीय युवा ने देश में ही रहकर अमेरिका के कारोबार जगत में अपनी पकड़ बनाई है।

अमेरिकी में भारतीय मेधा का परचम लंबे समय से लहरा रहा है। सिलिकान वैली में भारतीयों का वर्चस्व जगजाहिर है, लेकिन एक भारतीय युवा ने देश में ही रहकर अमेरिका के कारोबार जगत में अपनी पकड़ बनाई है। खुद पढ़ सकें, इसलिए बरेली की गलियों में कभी ट्यूशन पढ़ाकर शुरुआत करने वाले क्षितिज अग्रवाल आज दो सौ करोड़ की एक कंपनी के मालिक हैैं। स्वावलंबन की सफल यात्रा मेें क्षितिज ने कई पड़ाव देखे, लेकिन हार नहीं मानी।

आर्थिक दुश्वारियों को पार कर इंजीनियर बने क्षितिज भी अन्य युवाओं की तरह नौकरी करने लगे थे। 25 हजार रुपये से शुरुआत की, लेकिन यह उनका लक्ष्य नहीं सिर्फ पड़ाव था। कुछ समय बाद ही खतरा उठाया और बड़े कारोबारी बन गए। इस वक्त वह करीब दो सौ करोड़ के टर्नओवर वाली टेकिला ग्लोबल सर्विसेज के स्वामी हैं। साहूकारा के मूल निवासी क्षितिज की कहानी उन्हीं मध्यमवर्गीय युवाओं की तरह है, जो पढ़ाई के दिनों में संसाधनों की कमी से जूझते हैं।

सातवीं कक्षा में थे, तब पिता के कारोबार में घाटा होने से मां कोचिंग पढ़ाने लगीं। क्षितिज भी खुद पढ़ते, इसके बाद मोहल्लेे के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च पूरे करते। उन दिनों को याद करते हैं कि महीने में मिलने वाले एक हजार रुपये से पिता पर बोझ नहीं पडऩे देता था। इसी तरह 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली। वर्ष 2004 में श्रीराममूर्ति कालेज में बीटेक में प्रवेश के लिए रुपये नहीं थे। साढ़े तीन लाख रुपये का लोन लिया, तब पढ़ सका।


सुबह छह से रात 10 बजे तक : लोन निपटाने के लिए क्षितिज ने शहर के दो कोचिंग संस्थानों में पार्ट टाइम पढ़ाना शुरू किया। वह बताते हैं कि सुबह छह बजे उठकर अपने कालेज जाने की तैयारी करता। शाम पांच बजे वहां से खाली होने के बाद दोनों कोचिंग में पढ़ाता, ताकि लोन की किस्त दे सकूं। रात 10 बजे के बाद घर आना होता था।

ऐसे बढ़ाए कदम : वर्ष 2008 में उन्हें कंप्यूटर क्षेत्र की कंपनी आइबीएम में बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी मिली और पुणे चले गए। वेतन 25 हजार रुपये प्रति माह था। वहां से अमेरिका भेज दिया गया, तीन वर्ष वहीं रहे। वर्ष 2011 में कंपनी के लिए बड़ी डील कराई तो लगा कि यह काम अपने लिए करना चाहिए। अमेरिका से लौटने के बाद उसी वर्ष क्षितिज ने तय कर लिया कि नौकरी नहीं करेंगे, दूसरों को रोजगार देंगे।

दो साथियों संग शुरुआत : क्षितिज बताते हैं कि उस समय सेल्सफोर्स नई तकनीक मानी जाती थी। मैंने पुणे के दो साथियों को इसकी बारीकियां बताईं। वहीं से टेकिला ग्लोबल सर्विसेज कंपनी शुरू कर दी। हमारी सेल्सफोर्स डेवलपमेंट कंपनी को पहली डील अमेरिका से मिली। कहते हैं कि पहली ही बार में इतने रुपये मिले कि नौकरी से पांच वर्ष में नहीं कमा पाते। यहीं से ऊर्जा मिली। क्षितिज ने पुणे में कंपनी का पहला कार्यालय शुरू किया। इस समय भारत व अमेरिका के करीब तीन सौ लोग उनकी कंपनकें लिए काम करते हैं।

अपने शहर के युवाओं को घर में नौकरी : क्षितिज जिस अमेरिका में नौकरी करने गए थे, आज उसी देश के युवाओं को नौकरी दे रहे हैं। कंपनी के आठ प्रमुख पदों पर सात अमेरिकी हैं। वह कहते हैं कि अपने शहर के इंजीनियरकों के लिए वहीं अवसर उपलब्ध कराऊंगा। इसके लिए बड़ा प्रोजेक्ट बनाया है, जिसमें सौ युवाओं को शामिल करूंगा। उनकी कंपनी इस समय भी सेल्सफोर्स की निश्शुल्क शिक्षा देती है। यह क्लाउड आधारित साफ्टवेयर डेवलपमेंट तकनीक है। जिसे किसी भी कंपनी द्वारा कस्टमाइज किया जा सकता है।

SABHAR : DAINIK JAGRAN 

NAANU GUPTA - VIJAY SALES

NAANU GUPTA - VIJAY SALES 

मात्र 10 वीं पास हरियाणा के इस युवक ने खड़ा कर दिया बिजनेस साम्राज्य, विजय सेल्स के हैं आज 75 शोरूम


यदि कुछ कर दिखाने का जुनून हो तो आसानी से सफलता को हासिल किया जा सकता है। आप सभी ने विजय सेल्स का नाम तो सुना ही होगा। ये कंपनी आज कई बड़े शहरों में अपना विस्तार कर चुकी है। इस कंपनी के आज 75 से ज्यादा स्टोर्स भी हैं और इस कंपनी को इन ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय जाता है नानू गुप्ता। नानू ने ही कड़े संघर्ष के बाद अपनी इस कंपनी को खड़ा किया है।

कैथल के रहने वाले हैं नानू

नानू गुप्ता हरियाणा के कैथल के रहने वाले हैं जिन्होंने विजय सेल्स को बहुत छोटे से ही शुरू किया था लेकिन आज अपनी कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने के जुनून के कारण ही वे सफलता के मुकाम को हासिल कर चुके हैं। नानू ने ज्यादा पढ़ाई भी नहीं की है और काम की तलाश में उन्होंने अपना घर भी छोड़ दिया था। लेकिन आज वे एक सफल बिज़नसमैन के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। आइए जानते हैं।


काम की तलाश में छोड़ दिया था घर

कड़ी मेहनत और जुनून से वाकई जिंदगी में हर मुकाम को हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही कुछ कहानी है विजय सेल्स के मालिक नानू गुप्ता की जो आज अनेकों युवाओं के लिए भी उनके रोल मॉडल बन चुके हैं। लेकिन नानू के लिए ये सफर आसान नहीं था। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस सफलता को हासिल किया है। नानू मूल रूप से हरियाणा के कैथल के रहने वाले हैं। नानू का परिवार भी खेती बाड़ी पर ही आधारित था। लेकिन नानू हमेशा से ही कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे।

10वीं तक ही पढ़ाई की थी

हालांकि उन्होंने सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ाई की थी और महज 18 वर्ष की उम्र में काम की तलाश में मुंबई आ गए थे। 1954 में नानू मुंबई आए थे। मुंबई आकर नानू ने सेल्समैन के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। यहाँ लगभग एक दशक तक नानू ने काम किया था। लेकिन अब नानू ने खुद का कुछ करने का मन बनाया।

शुरू किया इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का बिज़नस

एक सेल्समैन के तौर पर काम करने के बाद नानू ने इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। हालांकि ये वो समय था जब टीवी भारत में इतना ज्यादा प्रचलन में नहीं था। लेकिन नानू अपने जुनून के बूते आगे बढ़ना चाहते थे। इसके लिए नानू ने मुंबई के माटुंगा में ही किराए की दुकान लेकर अपना स्टोर शुरू कर दिया। खास बात ये थी उस वक़्त उनके पास सिर्फ 2500 रूपये ही थे।

30 रूपये दुकान का किराया दिया

वहीं वे हर महीने 30 रूपये दुकान का किराया भी दिया करते थे। नानू को बिज़नस को कोई अनुभव भी नहीं था लेकिन कुछ करने की चाह उनके मन में जरूर थी। शुरुआत में नानू ने पंखे, ट्रांज़िस्टर और सिलाई मशीन की रिटेलिंग से ही अपने बिज़नस को शुरू किया था। अपने इस स्टोर के खुलने के बाद नानू ने एक साल बाद ही अपनी कंपनी को भी रजिस्टर करा लिया था।

डिस्प्ले सिस्टम से बनाई अपनी पहचान

शुरुआत में नानू ने अपने स्टोर को विजय टेलीविज़न स्टोर का नाम दिया था लेकिन बाद में इसका नाम विजय सेल्स रख दिया गया था। नानू ने अपने बिज़नस का नाम भी अपने भाई के नाम पर ही रखा क्यूंकि वे उनसे बेहद प्यार करते हैं। 1972 में नानू ने ब्लैक एंड व्हाइट टीवी बेचने शुरू किए जो लोगों को खूब पसंद आ रहे थे। नानू की दुकान भी अब अच्छी ख़ासी चल रही थी। इसके बाद नानू ने रंगीन टीवी बेचना भी शुरू कर दिया। 1986 में विजय सेल्स का पहला बड़ा स्टोर बांद्रा में खुला था।

ये आइडिया भी काम कर गया

हालांकि हमेशा से ही नानू दूर की सोचते थे। नानू ने ही सबसे पहले डिस्पले सिस्टम को शुरू किया था। वे चाहते थे कि उनके प्रॉडक्ट की पूरी रेंज उनके ग्राहक अच्छे से देख पाएँ। ऐसे में उनका ये आइडिया भी काम कर गया और धीरे धीरे अब विजय सेल्स के और भी स्टोर खुलने लगे थे। डिस्प्ले सिस्टम को पहली बार विजय सेल्स द्वारा ही शुरू किया गया था।

नानू ने हार नहीं मानी

हालांकि इस बिज़नस को ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए नानू के रास्ते में कई मुश्किलें भी आई लेकिन नानू ने हार नहीं मानी। 2007 में इस तरह का बिज़नस काफी बढ़ने लगा था। रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप्स भी इस बिज़नस में अलग अलग तरीके से अपनी पैठ बना रहे थे। लेकिन नानू की रणनीति बिल्कुल ही अलग थी। जिस समय इन कंपनियों ने बाज़ार में कदम रखा तब विजय सेल्स के 14 स्टोर्स खुल चुके थे।

कड़ी महनत कभी भी विफल नहीं होती

हालांकि शुरुआत में इन बड़ी कंपनियों का प्रभाव भी बढ़ गया था जिसके बाद नानू के पास विजय सेल्स को बेचने के प्रस्ताव आने लगे। लेकिन नानू का मानना है कि कड़ी महनत कभी भी विफल नहीं होती है। ऐसे में उन्होंने अपने बिज़नस को बेचने के बजाए उसे नए तरीके से चलाने के बारे में सोचा। नानू ने ही ईएमआई पर लोगों को प्रॉडक्ट देने भी शुरू किए थे। उस समय ये सिस्टम भी बाज़ार में नहीं चलता था। इससे भी उनके बिज़नस को नई ऊँचाइयाँ मिली। आज के समय में इस कंपनी के पुणे, दिल्ली, सूरत जैसे बड़े बड़े शहरों में 75 से भी ज्यादा स्टोर्स हैं। वहीं इस कंपनी का टर्नओवर भी 3250 करोड़ से ज्यादा पहुँच चुका है। आज हर कोई नानू के जज़्बे और हुनर की तारीफ भी कर रहा है।

SABHAR : - citymailharyana.com

Tuesday, February 22, 2022

Monday, February 21, 2022

ALOK MITTAL - IPS, AWARD WINNER

ALOK MITTAL - IPS 



केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा के सीआइडी चीफ आलोक मित्तल को उनकी केंद्र में उत्कृष्ट इंटेलिजेंस सेवाओं के लिए असाधारण आसूचना कुशलता पदक-2021 के लिए चयनित किया है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने इसकी सूचनार्थ आलोक मित्तल को एक पत्र भी लिखा है। साथ ही केंद्रीय गृह सचिव ने आलोक मित्तल को गृहमंत्री अमित शाह की ओर से बधाई प्रेषित की हैं। हरियाणा काडर में 1993 बैच के आइपीएस अधिकारी आलोक मित्तल ने सीबीआइ, एनआइए में भी अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी ने देश भर में 1993 बैच के 20 आइपीएस अधिकारियों को केंद्रीय सेवाओं में बतौर अतिरिक्त महानिदेशक के पद भी मनोयन को मंजूरी दे दी है। इनमें भी हरियाणा से एकमात्र अधिकारी आलोक मित्तल शामिल हैं। हरियाणा पुलिस विभाग में आलोक मित्तल पहले ही अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सीआइडी के पद पर काम कर रहे हैं मगर अब वे केंद्र सरकार की सेवाओं में भी इसी पद पर प्रतिनियुक्ति पर जा सकेंगे। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रधान अशोक बुवानीवाला ने भी अलोक मित्तल को बधाई दी 

AYUSH AGRAWAL - CMA TOPPER

 AYUSH AGRAWAL - CMA TOPPER



CMA TOPPERS JAIPUR - ANCHAL GUPTA & TANU JINDAL

 CMA TOPPERS JAIPUR - ANCHAL GUPTA & TANU JINDAL 



Saturday, February 19, 2022

Friday, February 18, 2022

क्या आपको सेठ का मतलब भी पता है..

क्या आपको सेठ का मतलब भी पता है..



क्या आपको सेठ का मतलब भी पता है.. सेठ बना है श्रेष्ठ धातु से.. सेठों को महाजन और लाला भी कहते हैं.. महाजन का अर्थ है जो जनों में श्रेष्ठ अर्थात महान हो..
अरे सेठ तो जमनालाल बजाज जैसे होते हैं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया । ये रहते गांधी जी के साथ थे लेकिन अपने धन से मदद गरम दल वालों की करते थे ताकि उनपे धन की कमी न हो
😊
सेठ हनुमान प्रसाद पोद्दार जैसे होते हैं जिन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर जैसी कल्याणकारी प्रेस बनाई जिसने बिना किसी लाभ के भागवत भगति का प्रसार किया । और इसके अलावा इन्होंने अपने धन से क्रांतिकारियों को गोली और कारतूस खरीदने में मदद की
😊
जब अलग देश की उठी तो इसी गीता प्रेस की कल्याण पत्रिका पुरजोर आवाज़ में कहती थी " जिन्नाह चाहे दे दे जान नहीं मिलेगा पाकिस्तान ।" इसी गीता प्रेस से सितंबर अक्टूबर 1947 में "हिन्दू क्या करें ?" इन अंकों में हिंदुओं को आत्म रक्षा के उपाय बताए जाते थे ।
सेठ घनश्याम दास बिड़ला जैसे होते हैं जिन्होंने भारतवर्ष में सनातन धर्म के भव्य मंदिर बनवाये। जिन्होंने कृष्ण जन्मभूमि धाम मंदिर का निर्माण करवाया। जिन्होंने भारत की पवित्र नदियों पर घाट बनवाये और अपने बनवाये हर स्थान पर केवल हिंदुओं के लिए बड़ा बड़ा और स्पष्ट अक्षरों में खुदवा दिया।
स्वतंत्रता के क्रांतिकारियों में लाल-बाल-पाल के लाला लाजपत राय को कौन नहीं जानता । लाला तो लाला लाजपत राय थे जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को धन की कमी न हो इसके लिए पहला राष्ट्रवादी बैंक पंजाब नेशनल बैंक बनाया था । जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
जगत सेठ की उपाधि पाने के लिए भामाशाह से काम करने पड़ते हैं । हर व्यापारी या बाबा सेठ नहीं होता ।
😊
~प्रखर अग्रवाल
🙂

SETH HANUMAN PRASAD PODDAR - GITA PRESS FOUNDER

SETH HANUMAN PRASAD PODDAR - GITA PRESS FOUNDER

हरिद्वार में विश्व का सबसे बड़ा भारत माता मंदिर है.. जिसमें गीताप्रेस के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार जी का चित्र लगा है और उनका इतिहास भी बताया है.. जो है-

 
आध्यात्मिक विभूति तथा 'गीताप्रेस गोरखपुर के संस्थापकों में से एक शरर हनुमान प्रसाद पोद्दार ने युवावस्था में देश की स्वाधीनता के आंदोलन में सक्रिय भाग लेकर जेल में यातनाएं सहन की थीं।
17 सितंबर, 1892 को राजस्थान के रतनगढ़ में लाला भीमराज अग्रवाल के पुत्र के रूप में जन्में हनुमान प्रसाद पोद्दार जी व्यापार के सिलसिले में पिता के साथ कोलकाता में रहते थे। लोकमान्य तिलक और अन्य विभूतियों के लेखों से बहुत प्रभावित होकर वे कोलकाता के क्रांतिकारियों के संपर्क में आये। श्रीमद्भगवद्गीता का उन पर अमिट प्रभाव था। साहित्य संवर्धिनी समिति के ओर से उन्होंने 'गीता' प्रकाशन करवाया, जिसके मुख पृष्ठ पर भारत माता के हाथ मे खड़ग लिए हुए चित्र का प्रकाशन किया गया। कोलकाता के प्रशाशन ने गीता के इस संस्करण को जब्त कर लिया।
 
सन् 1914 में कोलकाता की रोडा एंड कम्पनी द्वारा जर्मनी में मंगवाए गए शस्त्रों की पेटियां गायब हो जाने के बाद हड़कम्प मच गया था। कोलकाता प्रशासन ने छानबीन की तो पता चला कि युवा क्रांतिकारियों ने 202 पेटियों में से 80 माउजर पिस्तौलें व 46 हजार कारतूस गायब कराए हैं। पता चला कि कुछ कारतूस व पिस्तौलें पोद्दार जी के ठिकाने ' बिरला श्राप एण्ड कम्पनी, की गद्दी पर पहुंचाये गये थे। 20 जुलाई को पुलिस ने कम्पनी कार्यालय पर छापा मारा तथा हनुमानप्रसाद पोद्दार, ज्वालाप्रसाद कानोडिया, ओंकारमल सर्राफ और फूलचन्द चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर अनेक वर्षों तक जेल व नजरबंदी में रखा गया। जेल से मुक्त होने के बाद यहाँ सन् 1926 में भक्त जयदयाल गोयन्दका के सहयोग से कल्याण' पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया। गीता प्रेस की गोरखपुर में स्थापना कर जीवन के अंतिम क्षणों तक धार्मिक साहित्य के सम्पादन व प्रकाशन में लगे रहे। उन्होंने सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की। 22 मार्च, 1971 को पोद्दार जी ने महासमाधि ली।


RAVI GUPTA IPS - RASHTRAPATI VISHIST SEWA MEDAL

RAVI GUPTA IPS - RASHTRAPATI VISHIST SEWA MEDAL


मध्यप्रदेश शासन के अति महानिदेशक(IPS )श्री रवि कुमार गुप्ता जी को राष्ट्रपति जी द्वारा विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त होने पर
बधाई
व शुभकामनाएं|



SHILPI GUPTA IAS - SHIVPURI DM

SHILPI GUPTA IAS - SHIVPURI DM

शिल्पी_गुप्ता जी बनी शिवपुरी मध्यप्रदेश की कलेक्टर, वैश्य समाज को अपनी बेटी पर गर्व है आपको बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ।


JAYDAYAL GOENAKA HAWELI CHURU

 JAYDAYAL GOENAKA HAWELI CHURU 


राजस्थान के शेखावाटी के चूरू में स्थित हिंदुओं की सबसे बड़ी धार्मिक प्रेस "गीताप्रेस गोरखपुर" के संस्थापक "सेठ जयदयाल गोयन्दका जी" के पुरखोंकी हवेली.. इसी हवेली में सेठ जी का जन्म हुआ था और इसी हवेली में उन्हें भगवान के दर्शन हुए थे। ये अग्रवालों की अनुपम धरोहर है..



MAHARAJA AGRASEN AIRPORT HISAR

 MAHARAJA AGRASEN AIRPORT HISAR


हरयाणा में हिसार शहर के हवाई अड्डे के नाम महाराजा अग्रसेन के नाम पर हुआ... जय महाराजा अग्रसेन...

हिसार ऐतिहासिक शहर है यही महाराजा अग्रसेन की राजधानी थी.... और यहीं अभी राखीगढ़ी संभयता मिली थी जिसने वामपंथियों की आर्य और द्रविड़ की विभाजन कारी थ्योरी को ध्वस्त कर दिया था..


DOUSAR VAISHYA CHOWK, NAGPUR

DOUSAR VAISHYA CHOWK, NAGPUR

दोसर वैश्य चौक मेट्रो स्टेशन,नागपुर*

यह हमारे समाज के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि हमारे श्री दोसर वैश्य समाज के नाम पर नागपुर मेट्रो के एक स्टेशन का नामकरण किया गया है,जो कि हमारे समाज के भवन के पास स्थित दोसर वैश्य चौक के समीप ही है । यह पहली बार हुआ है कि किसी मेट्रो स्टेशन का नाम किसी समाज के नाम पे रखा गया है ,यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है ।



 

Thursday, February 17, 2022

SETH GHANSHYAM DAS BIDLA - A GREAT INDUSTRIALIST

SETH GHANSHYAM DAS BIDLA - A GREAT INDUSTRIALIST


घनश्यामदास बिड़ला की कहानी आज़ाद भारत के औद्योगिकीकरण की कहानी है। एक दौर में बिड़ला और टाटा ही हिन्दुस्तान के व्यवसायिक क्षितिज पर आलोकित सितारे थे। 1857 में जब भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम हुआ तो लगभग उन्हीं दिनों उनके दादा शिवनारायण बिड़ला ने राजस्थान के पानी से उठकर मुंबई में कारोबार जमाया, लेकिन चार साल बाद ही उनके पिता बलदेवदास बिड़ला ने मुंबई के बजाए कलकत्ता को अपनी व्यवसायिक गतिविधियों का केंद्र बना लिया।



30 वर्ष की आयु होने तक खुद घनश्यामदास बिड़ला का औद्योगिक साम्राज्य अपनी जड़े जमा चुका था। स्वदेशी के इस सच्चे समर्थक के लिए व्यापार राष्ट्र निर्माण का ही माध्यम था। व्यापार में भी सच्चरित्रता तथा ईमानदारी उनके लिए सर्वोपरि थे। वे सच्चे अर्थों में गांधीवादी थे। महात्मा गांधी के हरेक आंदोलन में उन्होंने आर्थिक योगदान दिया। हिंदुस्तान टाइम समूह की स्थापना के लिए भारत का मीडिया जगत उन्हें हमेशा याद रखेगा । अनेक उद्योगों के साथ-साथ देशभर में अनेक शिक्षण संस्थाओं की उन्होंने स्थापना की। अपने पुश्तैनी घर पिलानी में भारत के सर्वश्रेष्ठ निजी तकनीकी संस्थान बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान पिलानी की स्थापना की।

Wednesday, February 16, 2022

BHANSALI VAISHYA SAMAJ

BHANSALI VAISHYA SAMAJ 















CHITTODA MAHAJAN VAISHYA

CHITTODA MAHAJAN VAISHYA 

श्री वैश्य चित्तौड़ समाज का इतिहास 1670 वर्ष पुराना है। जाति का मूल चौहान वंश है और चौहान वंश का मूल अग्निवंश था। चौहान वंश में एक राजा चतुरभुज (अग्निपाल) थे। उसके बाद 131 राजाओं ने शासन किया। 40वीं शताब्दी में राजा नरपाल और राजा चतुरपाल का शासन था। राजा चतुरपाल के परिवार में हरिभान जी नाम का एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जो सांभर के राजा थे। राजा हरिभान जी का विवाह सोलह रानियों के साथ हुआ था। इन सोलह रानियों से 27 पुत्र उत्पन्न हुए। इन रानियों के सत्ताईस पुत्र (राजकुमार) चित्तौड़ समाज के उद्गम थे। और चित्तौड़ समाज के 27 गोत्र आजकल उपयोग में हैं। 16 रानियों और उनके 27 पुत्रों का विवरण इस प्रकार है:-

QueensNo of sonsName of sons

Queens
No of sons
Name of sonsSolanky ji 3 1. Shri Achal Das Ji
2. Shri Gajadhar Ji
3. Shri Hathi Ji
Rathor ji 1 Shri Som Pal Ji
God ji 2 1. Shri Bahadir Ji
2. Shri Jog Raj Ji
Jadun Ji 0 Not Available
Kachh Bai Ji 5 1. Shri Kalu Ji
2. Shri Chatra Som Ji
3. Shri Surat Pal Ji
4. Shri Jeev Raj Ji
5. Shri Peechan Ji
Puwar Ji 2 1. Shri Kam Pal Ji
2. Shri Sod Dev Ji
Gohal Ji 4 1. Shri Panna Ram Ji
2. Shri Fadak Dev Ji
3. Shri Shesh Mal Ji
4. Shri Bhadhya Ram Ji
Besh Ji 0 Not Available
Rawree Ji 0 Not Available
Dhidhali Ji 0 Not Available

विक्रम संवत 319 में ये 27 कुंवर (राजकुमार) अपने मूल जन्म स्थान को छोड़कर अपने राज्य के विस्तार के लिए आगे बढ़ते हैं। वे चित्रकूट (गंगा के घाव) में पहुँचते हैं जहाँ नीला सवेदी नाम की एक ब्राह्मण महिला रहती थी। वह साधना (साधना) में थी। एक दिन इन कुंवरों (राजकुमार) ने ब्राह्मण साध्वी को गंगा में नहाते हुए देखा था। उसने इन राजकुमारों को देखा और उन्हें दंडित किया। उन सभी को पत्थर की मूर्तियों में बदल दिया गया। 85 वर्षों की लंबी अवधि तक वे पत्थर की मूर्तियों में बने रहते हैं। संवत 404 में अचानक भगवान और देवी शिव-पार्वती चित्रकूट (मृत्युलोक की यात्रा) पर पहुंचते हैं। देवी पार्वती ने इन शीलखंड (पत्थर की मूर्तियों) को देखा और भगवान शिव से इनका इतिहास पूछा। उसी स्थान पर गुरु नरहरि भी रहते थे जो साधना (साधना) में थे। गुरु नरहरि इन पत्थर की मूर्तियों के इतिहास की व्याख्या करते हैं कि ब्राह्मण साध्वी ने राजकुमारों को कैसे दंडित किया। तब देवी पार्वती ने भगवान शिव से पुनर्जीवित होने के लिए आग्रह किया। देवी पार्वती की प्रार्थना पर वे गंगा में स्नान करते हैं और मूर्तियों पर गंगा का जल छिड़कते हैं। एक ही बार में सभी राजकुमार पुनर्जीवित (पुनरजीवत) हो जाते हैं। भगवान शिव और देवी पार्वती उन्हें आशीर्वाद दें कि आज से आप सभी बनिक (महाजन) बनेंगे, जाओ और व्यापार शुरू करो। अब वे केवल कुंवर हैं राजकुमार नहीं। वे सभी चित्रकूट में व्यापार में व्यस्त हो गए। बनिक व्यवसाय के कब्जे के कारण, सभी कुंवरों का नाम चित्रा कोटा महाजन रखा गया। चित्तौड़ समाज का यह प्रथम चरण था। इस तरह सभी कुंवर चौहान वंश को छोड़कर संवत 404 में चित्र कोटा महाजन बन गए थे। कुछ समय बाद इन 27 कुंवरों का विवाह राजा इंद्र के 27 फेज (अप्सरा) के साथ हुआ। बाद में ये 27 फेज चित्तौड़ समाज के 27 गोत्र और कुल-देवी में प्रसिद्ध हुए। अपनी पत्नियों (अप्सराओं) के साथ 27 कुंवरों का विवरण इस प्रकार है: -

Chitrakut

Prince NameWife Name

Shri Aas Karan ji Smt Moran Mata
Shri Achal Das ji Smt Rohini
Shri Bahadur ji mt Dhanna
Shri Banne Singh ji Smt Dharang
Shri Bhadhya Ram ji Smt. Kaneshwari
Shri Chatru Som ji Smt Jageshwari
Shri Deep Singh ji Smt Dhameri
Shri Fadak Dev ji Smt Kesar
Shri Gaja Dhar ji Smt Vaman Devi
Shri Genda ji Smt Dhanes

In such a manner 27 gotra were famed in Chittora Samaj as detailed below:-

Name of GotraMata (Kuldevi)Date of poojan/Puja

Name of Gotra
Mata (Kuldevi)
Date of poojan/PujaAchlawat Rohini Saptmi (7 of Pakhwada)
Gujar Vaman Devi Ashthmi ( 8th Day)
Hatwar Khad Bhawan Ashthmi ( 8 th Day)
Sakrodiya lateron Thikardiya Chosar Dashmi ( 10th Day)
Ved Dhanna Puji Ashthmi (8th Day)
Jundliya,Dundliya,Gundliya Matra Puji Ashthmi (8th Day)
Valas Sonam Puji Navami ( 9th Day)
Chatra Soma Jageshwari Chaudas (14 th Day)
Surat Monwas Ashthmi ( 8th Day)
Jav eya Deen Mani Ashthmi ( 8th Day)

ऐसे में चित्रकूट महाजन ने 3 साल का लंबा समय चित्रकूट में गुजारा। वे अपने गृह नगर/गांव वापस नहीं जाना चाहते थे। इसलिए वे सभी पालनपुर (गुजरात) पहुंच गए और 300 साल की लंबी अवधि तक बने रहे। बाद में विक्रम संवत 725 में वे पालनपुर छोड़ कर चित्तौड़ (राजस्थान) पहुँचे और अपना जीवनयापन किया। उस समय मोर्य वंश के राजा भुनांग चित्तौड़ के शासक थे। इस बीच जब चित्तौड़ में हमारे चित्तौड़ समाज के लोग रह रहे थे तो हमारे समाज बंधु श्री टोडु राम जी झिता लाल जी बगड़िया ने माघ शुक्ल नवमी सामवत् 989 पर चार धाम यात्रा की। जब वे अपने निवास चित्तौड़ वापस आ रहे थे तो वे रुक गए। दिल्ली में और यज्ञ किया। चित्तौड़ में वे सभी 12.5 महाजनों के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था करते हैं और चित्तौड़ के सभी महाजनों को पीतल के बर्तन वितरित करते हैं। संवत 999 में फाल्गुनी बुड़ी पंचमी श्री टोडर मल जी ने यज्ञ किया, जिसमें सभी 12.5 जाति के महाजनों को सामूहिक भोज के लिए आमंत्रित किया गया। उस समय से सभी 12.5 नयत महाजन अपना "अप्सी भोजन ववर" नियम चुनते हैं। संवत 1364 में राजा लक्ष्मण सिंह चित्तौड़ / चित्तौड़ गढ़ के शासक थे। उनकी रानी पद्मावती थीं जो एक फे (अप्सरा) की तरह बहुत सुंदर थीं। रानी पद्मावती बादशाह अल्लाहुद्दीन ने चित्तौड़गढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह पर हमला कर दिया 

Chittor Garh

यह लड़ाई 12 साल तक जारी रही। इस युद्ध में राजा लक्ष्मण सिंह और उनके पुत्रों की मृत्यु हो गई। अदिसी का इकलौता बेटा जीवित था। वे अपने समुदाय के लोगों और अन्य राज्य किरायेदार के साथ विकारम संवत 1376 में चित्तौड़गढ़ छोड़ गए। युद्ध के समय श्री शेषमल चित्रकोटा महाजन राजा लक्ष्मण सिंह जी के सचिव (कामदार) थे। इसके कारण चित्रकूट महाजनों के सैकड़ों लोग श्री शेषमल जी के युद्ध में मारे गए। शेष चित्रकूट महाजनों ने 750 बैलगाड़ियों के साथ संवत 1376 में चित्तौड़गढ़ छोड़ दिया। इनमें से 125 बैलगाड़ियां मेवाड़ उदयपुर में, 225 मालवा की ओर देवास, सोनकच्छ, शेष 350 बैलगाड़ी बूंदी कोटा की ओर शुरू की गईं। वे बूंदी साम्राज्य (बूंदी राज्य) के गांवों खेरुना और एस्टोली में बस गए थे। बूंदी राज्य के शासक राजा हाड़ा रामदेव जी थे।

उस समय सभी चित्रकूट महाजनों (चित्तौरा) ने एक टका टका राशि एकत्र की और सभी लोगों के उपयोग के लिए खेरुना और अस्तोली के मुख्य मार्ग में एक बावरी (कुंड) का निर्माण किया। बाद में यह बावरी (कुंड) "टका बावरी" द्वारा प्रसिद्ध था। उसके बाद चित्तौड़ समाज के लोग अपना अलग व्यवसाय/व्यवसाय विकसित करते हैं और बूंदी और अन्य राज्यों के विभिन्न गांवों को निवास और व्यापार के लिए चुनते हैं। ऐसे विवरण अभी भी "जगा बुक" में सुरक्षित हैं। विभिन्न गोत्रों के लोगों को भी "जग बुक" से अपना विवरण मिल सकता है। वास्तव में चित्रकूट महाजन चित्तौड़गढ़ से आए थे इसलिए इन्हें "चित्तौरा महाजन" कहा जाता था। वे सभी चित्तौड़गढ़ के वैष्णव धर्म के थे। लेकिन बाद में हमारे कुछ लोगों ने "जैन और वैष्णव" जैसे अलग धर्म को चुना। चित्तौड़गढ़ छोड़ने के बाद हमारे जाति के साथी बूंदी और कोटा जिले में निवास और व्यवसाय के लिए निम्नलिखित गाँव / कस्बे / शहर का चयन करते हैं। ऐसे गांवों के नाम इस प्रकार हैं।

Bundi
Kheruna
Astoli
Seelor
Matunda
Onkar Pira
Jhar
Jawati
Khatkad
Ganoli
Barana
Manoli
Chharakwada
Jakhana
Pipliya
Jaithal
Karwala
Jaloda
Kapren
Keshawrai Patan
Darakpira
Baniyani
Saweli

Gudhli
Teerath
Bajad
Dablana
Bambori
Hindoli
Seetapura
Khurad
Barudhan
Namana
Andher
Loyacha
Laxmipura
Aamthune
Kalyanpura
Dhaneshwar
Dabi
Palaka
Lambakhoh
Garadada
Ulera
Gudha Nathawatan
Neem ka khera

Kota
Sakatpura
Nanta
Ganwari
Koela
Anta
Palaytha
Mahuaa
Arandkheda
Gandifali
Mandana
Mandliya
Kasar
Girdharpura
Medpura
Sarola Kanla
Gehukheri
JhalaraPatan
Bijoliya
Kuaa khera
Neemadi
Tilsawa
Begu
Amar Garh

Kota district :-(Rajasthan State)
Kota
Mandana
Mandliya
Bundi district:
Bundi
Uleda
Neem ka Kheda
Namana
Barudhan
Laxmi Pura
Taleda
Ganoli
Jhali ji ka Barana
Kesho Rai Patan
Kapren
Jakhana
Jaloda
Chharakwada
Garadada
Baran District:-
Baran
Koela
Anta
Bhilwada District:-
Bhilwada
Bijolian
Udaipur District:-
Udaipur
Aayad
Bhuwana
Palodara
Jawar Mines
AAkola
Banswada
Madhya Pradesh state ( detail lists are not available will be edited on availibility):-
Indore
Ujjain
Sonkutchh
Bhopal
Burhanpur
Pani Gaon
Kampel
Barotha

List of Following cities and their villages are not available with us if provided by any of us will be edited:-
Pune
Mumbai
Gujrat
Nagpur
Delhi