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Friday, April 28, 2023

OSWAL VAISHYA GOTRA & KULDEVI - ओसवाल समाज की कुलदेवियाँ और गोत्र:


#OSWAL VAISHYA GOTRA & KULDEVI - ओसवाल समाज की कुलदेवियाँ और गोत्र:

#ओसवाल समाज की* कुलदेवियाँ और गोत्र:

*1.अधर माता (Adhar Mata)*
अरणोदा, अलंजडा, अलावत, अहकासा, आलावात, उपट, कक्का, कपासिया, करणिया, करणाणी, कायेल, काला परमार, कावा, कूंकड़, केनिया, केलण, कोकलिया, खीर, खुरदा, गडिय़ा, गपालिया, गांग, गादवाना, गांधी सहस्रगुणा, गिडिया, गेढवाड़, गोड, गोडवाल, गोडवालिया, गोडी, गोप, गोसलिया, गंग, गांगरिया, घुरिया, चापड़, चोभावत, चौहाणा, चौधानी, छाहड़, जपाला, जागा, झोडोलिया, टोगिया, टोडरवाल, डीडू, डोड, डांगी, थरावट, दरड़ा, दुगसा, दुगविया, दुधेडिय़ा, दुधोडिय़ा, देवानंद साका, देशलाणी, धाधु, धारिया वलाह,धुरिया, नपाणी, निवणिया, निवेणिया, पटवा गांग, परमार, पालावत, पूर्ण,बंब, बरड़, बरडिय़ा, बड़दिया, बड़ोदिया, बलदोटा, बाबेल, बीजल, बिसलाणी, बुरड़, बौरड़, बांभी, भड़, भाटिया, भाटी, भावराणी, भूवाणी, *मरड़ोचा*, मरूथलिया, मालदे, मुलाणी, मोहिवाल, मोनानी, वरदिया, वीजल, विरावत, सहस्त्रगुणा, सुघड़ा, हरिगा, हिराणी।

*2.अम्बा माता (Amba Mata)*
अजमेरा, अथगोता, अम्बागोत्र अम्बिका, आच्छा (बागरेेचा), उदेश, ऊपरगोठा,कछीनागड़ा, कडक़, कड़बड़ा, कबदी, कावेडिय़ा, कूकड़सांड, कोठिया, कोरा, खांपडिय़ा, खाबडिया, खारा, खारिवाल, गोतम गोता, गोपाल गोता, घरवेला, जागरवाल, जालोरा बागरेचा, जिरावला, जोगड़ेचा, जोधावत, सालेचा, झामड़, झावड़, टड्डा, ठाकुर, डागलिया, डोसी, ढड्ढा, ढेढिया, तिलोरा, तेलहरा, ददा, दट्टा, दातीवाडिय़ा, दिखल, दोषी, धरकट, धर्म, धोखा, नागदार सोलंक, नागसेठिया, नागौतरा, नाणगोता, निवाणी, नेनगोता, पामेचा, पाटणिया सालेचा, पिथलिया डोसी, पूनमिया सालेचा, पोलावट, पंचलोढा, फितुरिया, बग, बनावत, बडेरा, बागड़ेचा, बालुकिया, मांडोत, लुक्कड़, लुकद, सियाल, सबिया, संचेती, सालेचा, साव, सियाल सांड, सिरोहिया, सुभद्रा, सोनाड़ा, सोनी बागरेचा, सोलंकी लुंकड़, संघी बागरेचा, संघी मेहता, सांड, सालेचा, सुडाला, हरखावत पामेचा, हंस, श्रीपति।

*3.आशापूरा माता (Ashapura Mata)* अग्नीगोत्र, अरडक़, अलमेची, आईडी, आंचलिया, आपागोत, आयट, आबेड़ा,आशद, आशापुरा, ईसरा, कछोल, कटारिया, कणीवत, कपूर, कमाणी,कमेडिया, कयाणी, करणा, कवाड़, कागोत, कांठेड, काठेलवाल, कावलेचा, काशरिया, कूदणेचा, कूलामोर, कूकल, कूकूरोल कवाड़, कुवाडिया, कोंच, कोटेचा, कोंद, खखड़, खड़बड़, खटबड़, खटोल, खटोर, खाटेड, खांटोड, खाबिया, खुटोल, खेतलाणी, खेतसी दुग्गड़, गांधीराय, गांधी मेहता, गुजराणी, गेलड़ा, गोगड़ पीपाड़ा, गोंद, गोदा, गोरवाल, चहुआण, चंडालिया लूंगा, चापरवाल, चालूका, चिरडकिया,चीपा, चौहान, चौवडिय़ा, चिंप, छाजोड़, छावड़ा, जैसलमेरिया, जिन्नाणी, जिलाणी, टापडिय़ा, टिमरेचा, डफरिया, डागा, डीया, डोडियालेचा, ताला, तालेरा, तालेड़ा, तुला, तुंड, दुग्गड़, दुदचैना, देवड़ा, नारायण गौत्र, नाहटा कटारिया, पारखविंद, पावेचा कटारिया, पूजाणी, फलौदिया तुंड, बलिया, बलाहा, बाबेल, बाबेला, बालौत, बीहल, बेडा, बोलिया, बोकड़िया, भटावीर, भलभला, भालडिय़ा, भाभु, राजाणी, रामसेण, रायभंडारी, रिहड़, लेरखा, वागेटा, संकलेचा, संकवाल, सफला, सांचा संगी, सांचौरा, सामरिया, सुखलेचा, सुखाणी, सुगड़, सुगड़ा,, सेमरा, सोनगरा, संडासिया, सांडिया, सापद्राह, हरसोरा, हाडा कटारिया, हाला खंडी।

*4.केलपूज माता (Kelpuj Mata)*
बंड, बरमेचा, बांठिया, मलावत, मोदी बरमेचा, ललवाणी, हरखावत बाठिया खाबीया

*5.खींवज माता (Khimaj Mata)*
तलेसरा, पगारिया, मेड़तवाल, कास्टिया, गिरिया, चिरपुरा, चूड़ावत।

*6.गाजर माता (Gajar Rohini Mata)*
करल, गगोलिया, गुंदेचा, डाबड़ा, बागाणी।

*7.जमवाय माता (Jamwai Mata)* गांगोलिया, जाभरी।

*8.झंकार माता (Jhankar Mata)*
जलवाणी, पांच सौ बोहरा।

*9. नागणेशी माता (Nagnechi Mata)*
ईशपगोत्र, उहावता, ओटावत, खोखड़, गोगादे, गोलिया, घाघरिया, घुलुंडिया, घियानक्षत्र, घिया गलुंडिया, घेमावत घोघल, जोधा, धवेचा, धोधड़, नसोलिया नक्षत्र, पड़ाइया, पुष्करणा, बिदायी, मोहनोत, राठौड़, राणावत, रातडिय़ा, संघोई, हथुंडिया, हथुंडिया राठौड़|

*10.पद्मावती माता (PadmavatiMata)*
पल्लीवाल।

*11.पाडलमाता (Padal Mata)*
टाक

*12.बड़वासन माता(Badwasan Mata)*
लोढ़ा

*13.ब्रह्माणी माता (Brahmani Mata)* आडवाणी,ओडाणी,करड़, करोलीवाल, कलसोणिया, कांदली, गुर्जरगोता, गुर्जर, गेवाल, नागरिक, बैंगाणी, लुणिया।

*14. बाण माता (Ban Mata)* एणिया,कपोल,काकोल,काजोत,केलवा,खेतसी नीसर, गहलोत, गुगलिया, गेलतर, गौत्तम, गोदारा, गोराणा, टिबाणी तिवड़किया, निसक, पीपाणा।

*15.बीसल माता (Bisal Mata)*
आढ़ा

*16.बीसहत्थ माता (BeesHath Mata)* कोचर,कोचरमूथा,जालोरी कोचर, जिवाणी, रूपाणी।

*17. भवानी माता (Bhawani Mata)* नाहर

*18. भंवाल माता (Bhunwal Mata)*
काजलोत,काजल,चामड़,चावा,छाजेड़,नखा,रूठिया।

*19.रुद्र माता (Rudra Mata)* आछरिया,आगरिया,खरभंसाली,खजांची मुगड़ी,चंडालिया भंसाली,चील मेहता,चील।

*20.लेकेक्षण माता (Likasan Mata)*
खमेसरा,खींवसरा।

*21.लोदरमाता (Lodar Mata)* 

आघडिण,आघरिया,कछवाह,कांधल,जडिया तेलवाणी,पावेचा राखेचा, बद्धाणी, भूरा भंसाली, भंसाली, भंसाली खड़, भंसाली राय, भंसाली ईसरा, राखेचा,राय भंसाली, सोलंकी, सोलंकी सेठिया।

*22.सच्चियाय माता(Sachchiyay Mata)*

अछूणता-अघूणता,अटकलिया,अनबिंध (पारख), अब्बाणी, अभ्राणी, अरडक सोनी, आईचियाण, आकतरा, आच्छा (कर्णावट), आडेचा, आदित्यनाग, आभड़, आमड, आर्य, आववाडिया, आसाणी, इडलिया, इरोढा, इलदिया, इसराणी, ऊजोत, ऊएश, ऊकेश, ऊडक़ भूरि, उदेचा, उदावत, उणावत, उधावत, ओस्तवाल, ओसवाला।

ककड़, ककोल, कजारा, कटारा, कर्पदशाखा, कठोतिया, कठोरिया, कान्यकुब्ज, कनौजिया, ककरेचा, कपूरिया, कमटिया, कर्पद, करचू, कर्णी, कर्णाट, करणोत, कर्णावट, करमोत, करवा, करेलिया, कलटोदी, कटरोही, काला, कवाडिय़ा, कस्तुरिया, काकेचा, कागड़ा, कागला, कांच, काजलिया, काजाणी, काटी, कातरेला, कानूंगा-भटनेरा, कापूरित, कावरिया, काविया, काम, कामसा, कामाणी, काला, कावडिय़ा, कावसा, काश्यप, कात्ररैला, कांकरिया, कांकरेचा, कागलोत, कांगसिया, कांच, किलोल, किस्तुरिया, कूकड़ (चौपड़ा), कूकम, कुचेरिया, कुंडिया, कूपावत, कूबडिय़ा, कूबडिय़ा आमड़, कूबडिय़ा बाफना, कूबेरिया,कूमट, कूमकूम, कुरकुचिया, कूरा, कूलधर, कूलधरा, कूलहट, कुशलोत, कूहाड़, कूकड़सांड, कूकड़ा, कूकूरोलचौपड़ा, कुंपावत, कुमटिया, केकडिय़ा, केदार, केदारा,केलाणी, केशरिया, केशरिया सामसुखा, कोकड़ा, कोटडिय़ा, कोटी, कोटीचा, कोटरिया, कोस्टागार, कोणेजा, कोनेरा, कोलोरा,कोसिया। 

खरभंडारी, खजांची श्री श्रीमाल, खजांची चोराडिय़ा, खजांची लघुश्रेष्ठी, खंडेलवाल, खंडिया, खपाटिया, खरभंडारी, खारड़, खालिया, खेड़वाड़, खींचा, खीलोला, खुमणिया, खुमाणा, खेतपालिया, खोखरा, खोका, खोड़वाड़, खोडिया, खोडीवाल, खोना, खोपर।

गज्जा, गज्जा पटवा, गटाघट, गटिया, गड़वाणी, गणधर चौपड़ा, गणधर गांधी, गड़वाली, गरूड़, गलाणी, गलूंडिया, गसणिया, गहियाला, गागा, गादिया, गांधी संचेती, गांधी दुदिया, गांधी श्रेष्ठी, गांधी बाफना, गिंगा, गुजराणी नागड़ा, गुगलिया चोरडिय़ा, गुगलेचा, गुलगुलिया, गुडक़ा, गुणिया, गुमलेचा, गुंदिया, गहलोत, गोखरू, गोगड़भद्र, गोरीवाल, गोरेचा, *गोलेछा*, गोसलाणी, घरघटा, घीया गुगलिया, घुणिया, घेवरिया,घोगड़, घोड़ावत, घंटेलिया।

चगलाणी, चतर, चतुर, चतुर मूथा, चन्द्रावत ,चपलोत, चमकिया, चम्म, चरड़, चवला, चवहेरा, चंद्रावत, चंडालेचा, चंदावत, चित्तोड़ा, चित्तोड़ा बलाह, चित्तोड़ा श्रेष्ठी, चित्तौड़ा गोलछा, चित्तौड़ा लघुश्रेष्ठी, चिंचट, चिचड़ा, चितोडिय़ा, चिपड़, चुंगा, चैनावत, चोखा, चौपड़ा कंकुं, चौपड़ा गणधर, चोमोला, चोरडिय़ा, चोरवाडिय़ा, चोरबेडिय़ा, चौववहेरा, चौमोला, चौसरिया, चौधरी तातेड़, चौधरी बाफना, चौधरी बलाह, चौधरी मोरख, चौधरी कुलहट, चौधरी वीरहट, चौधरी भूरी, चौधरी संचेती, चौधरी गुलेछा, चौधरी श्रेष्ठी, चौधरी भद्र, चिंपड़।

छाछा, छाडौत, छगलाणी, छजलाणी, छजलाणी, छतीसा, छलाणी, छतरिया, छरिया, छाड़ोत, छालिया, छावत, छोरिया, जगावत, जडिय़ा, जमघोटा, जलघड़, जस्साणी, जागड़ा, जाटा, जाडेचा, जबक, जालोत, जालोरा कन्नोजिया, जालोरी कुलहट, जावलिया चौपड़ा, जिंद, जिंदल, जिनोत, जिमणिया भटनेेंरा,जिमणिया चौरडिय़ा, जूनीवाल, जेनावत, जोखेला, जोगड़, जोटा, जोधावत श्रेष्ठी, जोहरी चोरडिय़ा, जोगड़ बाफना, जोगड़ा सिंघी, झाबक, झाटा।

टाटिया बाफना, टाटिया धारीवाल, टिकायत, टिकोरा, टोडियानी, टगा, टाकलिया, टांक, टिवाणी, टिहुयाण, डूंगराणी, ढाकलिया, ढाबरिया, ढेलडिया। तप्तभट्ट, तरवेचा, तल्लाणी, तलोवड़ा,ताकलिया, तातेड़, तातहड़, तारावल, तुंड, तुलाहा, तुहियाण, तेजाणी संचेती, तेजाणी पारख, तोलिया, तोसटिया, तोडिय़ानी, तोलावत, तोलरिया, तोडिय़ान, तुलावत, थनावट, थम्बोरा, थामरेचा, थुला, 

दक, दफतरी-चोरडिय़ा, दफतरी बाफना, दस्सानी, दसोरा, दाखा, दातारा, दादलिया, दानेसरा,दालिया, दुद्धाणी, दुधिया, देदाणी, देपारा, देलणिया, देवराजोत, देवसयाणी, देसरला, देशलहरा, दोलताणी, दोसाखा, धतुरिया, धनन्तरी, धंदाणी, धनेचा, धाकड़, धारीवाल, धातुरिया, धाधलिया, धानेवा, धाया, धापिया, धारिया, विरहट, धारोडिय़ा, धारोला, धावड़ा, धीरौत, धुगोता, धुपिया, धांधल।

नखरा, नंनक, नरसिंगा, नक्षत्रगोत्रा, नागडोला, नागड़ा, नागड़ा तातेड़, नागड़ा गुलेछा, नागर, नागौरी कुम्भट, नागौरी चोरडिय़ा, नागौरी श्रेष्ठी, नाचाणी, नाणीश, नाथावत, नानघाणी, नानेचा, नापड़ा, नामाणी, नार, नारेलिया, नावटा, नाबरिया, नावसरा, नाहटा बाफना, नाहरलाणी, निबोलिया, निलडिय़ा, निवाटा, निशानिया, नेरा, नोपता विरहट, नोपता गदेहिया, नोपोला, नांदेशा।

पंचाणीस, पंचवया, पंचीसा, पछोलिया, पटलिया, पटवा, बाफना, पटवा श्रेष्ठी, पटवा लघुश्रेष्ठी, पटवा कनौजिया, पटवा धारीवाल, पटवा गजा, पटवा वढेर, पटवारी, पटौत, पारडिय़ा, पहाडिय़ा, पाटणिया, पातावत, पानगडिया, पानौत, पारख अणविद, पालखिया, पाखा, पालगौता, पालकिया, पालावत, पाटणिया चोरडिय़ा, पाटणिया भद्र, पालणेचा, पाटोलिया, पाटौत, पारणिया, पालडिय़ा, पालणिया, पालणी, पालेचा, पिथलिया चौरडिय़ा, पुकारा, पुंगलिया, पुजारा, पूनमिया वीरहट, पूनोत गोधरा, पूरणिया, पैथाड़ी, पैपसरा, पैतिसा, पोखरणा, पौपाणी, पौपावत, पोलडिय़ा, पोसालिया, पंचविशा, पांचौरा, पांचौली, पंसारी,

पांचावत, पांडुगोता, फौफलिया, फूलगरा, बाघचार, बडज़ात्या, बपनाग, बड़बड़ा, बड़भट्टा, बच्छावत, वनावल, बनावत, बलवरा, बलिया, बलाई, बलोटा, बहुल, बहुफना, बाकुलिया, बांका, बागडिय़ा बाखेटा, बाखोटा, बाघमार, बाघ, बातोकड़ा, बादलिया, बादौला, बायना, बाफना, बापावत, बालड़ा, बाला, बालोटा, बालिया, बालौत, बाबरिया, बाहतिया, बिनायकिया, विषपहरा, बीजाणी, बीजोत, बुच्चा, बुच्चाणी, बूबकिया, बैगलिया, बैताला ,बैद, बैदमेहता, बौक, बोकडिय़ा, बौराना, बांदोलिया।

भक्कड़, भडग़तिया, भटारखिया, भटनेरा, भटनेरा चौधरी, भटेवरा, भद्र, भमराणी, भलगट, भलमेचा, भलल, भाद्रगोता, भानावत, भाभू पारख, भाभू बाफना, भाला, भावड़ा, भावसरा, भिन्नमाला कर्णावट, भिन्नमाला श्री श्रीमाल, भिणटिया, भिमावट, भुवाता, भूरंट, भूराश्रेष्ठी, भूरी, भूषण, भूरट, भूतिया, भूतेड़ा, भोजाणी, भोजावत, भोपावत, भोपाला, भंडलिया, भंडारा, *भंडारी* डीडू, भांडावत भद्र, भूगरवाल, 

मक्कड़, मखेलवाल, मखाणा, मकाणा, मगदिया, मच्छा, मणियार, मन्नी, मंदिरवाला, ममहिया,मरडिय़ा, मलेचा, मखाणी, मल्ल, मरुवा, मरोथिया, मसाडिय़ा कुल्हट, मसाणिया चोरडिय़ा, महतियाण, महाजन, महाजनिया, महिवाल, माडलिया, मांडोत, मादरेचा, मारू, मालखा, मालकस, मालतिया, माला, मालावत, मालौत, माहलाणी, मीठा, मीणीयार, मीनाग्राह,मीनारा, मीठडिय़ा बाफना, मीठडिय़ा सोनी, मुकिम, मुगड़ी, मुमडिय़ा, मुर्गीपाल, मुर्दिया, मुसलिया, मेघाणी, मेड़तिया, मेहजावत, मोतिया विरहट, मोतिया संचेती, मोदी गणधर, मौरख, मोरचिया, मौराक्ष, मौल्लाणी, मंडोवरा, मंत्री, मांडलेचा, मुगडिय़ा।

यौद्धा बाफना, यौद्धा डीडू, रणजीत, रणछोड़, रणधीरा बाफना, रणधीरा श्रेष्ठी, रणधीरोत, रणसोत, रणशौभा, रत्ताणी, रतनपुत्र, रतनपुरा बुच्चा, रतनसुरा, राक्यान, राकावाल, राखडिय़ा, राठी, राडा, राज बोहरा, राज कोष्ठागार, राज सदा, राजौत, राणौत, रामपुरिया, रामाणी, रायजादा, राय सोनी, राय चौरडिय़ा, राय तातेड़, राय सच्ची, रावत, रिहड़, रिकब, रूणवाल, रूपावत, रूपछरा, रूह, रेड़, रांका, 

लखावत, लघु कम्भट, लघु खंडेलवाल, लघु चमकिया, लघु चिंचट, लघु चुंगा, लघु नाहटा, लघु चौधरी, लघु पारख, लघु पोकरणा, लघु भूरट, लघु रांका, लघु राठी, लघु समदडिय़ा, लघु संचेती, लघु सुखा, लघु सोढ़ती, लघु संचेती, लघु हिंगण, लघु श्रेष्ठी, लहरिया, लाखाणी, लाडवा, लाडलखा, लाभाणी, लालन, लाला, लालौत, लाहौरा, लिंगा, लुटंकण, लुणा, लुणावत गधैया, लुणेचा, लेहरिया, लोकड़ी, वसहा वडेर, वद्र्धमान, वलाह, वर्षाणी, विद्याधर, विरहट, वितरागा, वैद्य, वैद्य गांधी, वैद्य मेहता।

शाह बोथरा, शुरुलिया, शिगाल, शूरमा, शूरवा, सेठ, सिसोदिया, संकवालेचा, श्रृंखला, सेखाणी, सगरावत, संचौपा, सदावत, सदाणी, सम्भूआता, सरा, सराफ चोरडिय़ा, सराफ नाबरिया, सलघणा, सहजाणी, सहलोत चौरडिय़ा, सहलोत बाफणा, साखेचा, साघाणी, साढा, साढेराव, सादावत, सानी,सामड़ा, समुरिया,+ सारूलिया, सालीपुरा, सावा, सावनसुखा, सामसुखा, सावरिया, साहिब गोता, साहिला, सिखरिया, सिंघी भूरी, सिंघी डीडू, सिंघी लघुश्रेष्ठी, सिंघी भद्र, सिंघूड़ा, सिपाणी, सिलरेचा, सुखिया, सुचली, सुधा, सुधेचा, सुरती, सुरपुरिया, सुराणिया, सुसाणी, सुरिया, सुखा, सेठिया रांका, सेठिया वैद्य, सेणा, सेमलाणी, सेवदिया, सेजावत, सोजतवाल, सोजतिया, सोढ़ाणी, सोबारा, सोजावत, सोनी चोरडिय़ा, सोनी संचेती, सोनी श्री श्रीमाल, सोनी बाफना, सोनी घर, सोनेचा, सुमारिया, सोसलाणी, संघवी, सांभर, सांभरिया, सिंघड़, सिहावट, सिहावत, श्रवणी, श्राफ, श्रीधर, श्रेष्ठी, हरसोत, हरिया, हाकड़ा, हाकम, हागा, हाडा लघुश्रेष्ठी, हाडेरा, हिरणा, हिराणी, हीरावत, हुकमिया, हूना, हुब्बड़, हुल्ला,हंसा, हिंगड़, हिंडिया।

*23.सुषमा माता(Sushma Mata)* उस्तवाल।

*24.सुसवाणी माता(Suswani Mata)* भणवट सुराणा, भालावत, राय सुराणा, सुराणा, सांखला सुराणा।

*25.सुंधा माता (Sundha Mata)*
आडपावत, आचू, आयडिय़ा, काग, कामटाणी, कूलेरिया, कूलहण, चोयल, नागल, नागा, पिछोलिया, बरहुडिया, बूहड़, लुणावत आयरिया।

*26.हिंगलाज माता (Hinglaj Mata)* अघोडिय़ा, कीरी, कोकूपोत्रा, गाला,गं गवाल, घंदे,छछा, छोगाला, जाड़ेचा, जेजटोटिया, ठीकरिया, डोडेचा, भाखरिया, भुगड़ी, महीपाल,तब पुनहानी, मेहर, लूंग, लूंगावत, राणोत।

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Thursday, April 27, 2023

GARG GOTRA KULDEVI - गर्ग गोत्र की कुलदेवी केसर माता

GARG GOTRA KULDEVI - गर्ग गोत्र की कुलदेवी केसर माता

भारत में प्रत्येक हिन्दू परिवार में उनकी कुलदेवी माता होती है। तीज त्यौहार और विवाह के शुभ अवसर पर कुलदेवी माता की पूजा की जाती है। परिवार में नया सदस्य आने पर शक्ति की जात लगाई जाती है।माता के देवस्थान पर जा कर बच्चों के बाल उतारे जाते हैं।

अग्रवाल जाति की विभिन्न गोत्र की अलग- अलग शक्ति कुलदेवी माताजी हैं।

अग्रवाल जाति की गर्ग गोत्र में कुलदेवी केशरशक्ति माताजी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से अग्रवाल भाई-बंधु अपनी कुलदेवी माताजी के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें तो मैं अपना यह प्रयास सफल मानूँगी।

।।बोलो जय शक्ति केशर माताजी की।।

केशर माताजी की प्रचलित कथा :-

राजस्थान में एक स्थान है, मनोहपुर। बहुत समय पहले वहां के दीवान थे- प्रकाश चंद्र गर्ग। पहले के समय में राजाओं के मध्य युद्ध आम बात हुआ करती थी। ऐसी ही युद्ध की संकट की घड़ी में दीवान प्रकाश चंद्र गर्ग अपने प्राण बचाते हुए म्हार कलां नामक छोटे गांव में पहुंच गए। उसी समय देवगढ़ के राजकुमार अपने विवाह के काफिले सहित उधर से लौट रहे थे। दीवानजी ने उनसे भेंट की और अपनी रक्षा करने की विनती की व शरण मांगी।राजकुमार ने क्षत्रिय धर्म निभाते हुए शरण में आये दीवानजी को शरण में लिया और उनके प्राणों की रक्षा करने का वचन दिया।

अचानक ही मनोहरपुर की सेना ने देवगढ़ के राजकुमार की सेना पर हमला कर दिया। राजकुमार के काफिले में ज्यादा सैनिक नहीं थे। युद्ध कुछ दिनों तक चलता रहा। लड़ते-लड़ते राजकुमार वीरगति को प्राप्त हुए। उसके पश्चात् रानी केशर कुंवर ने अपने पति के वचन की रक्षा हेतु तलवार उठाई और घोड़े पर सवार हो युद्ध किया। अंत में विजय रानी केशर कुंवर की हुई। तत्पश्चात् रानी ने अपने पति के शव के साथ शक्ति होने का निर्णय लिया।उन्होंने जौहर व्रत धारण किया और पति का सिर अपनी गोद में रख चिता में प्रवेश किया। दीवानजी ने रानी केशर कुंवर के सामने हाथ जोड़ कर कहा -"माता! मेरे लिए क्या आदेश है?" तब केशर कुंवर ने दीवानजी को कुल वृद्धि का आशीर्वाद दिया। दीवानजी ने शक्ति माताजी से कहा कि मेरे वंशज आपकी पूजा-आराधना करेंगे। मेरे वंशज दुनिया के किसी भी कोने में हों, प्रथम जात -जड़ुला आपके इसी स्थान पर आकर उतारेंगे। वैवाहिक कार्य में सबसे पहले आपका आव्हान किया जायेगा।

मान्यता है कि रानी केशर कुंवर के साथ पांच अन्य रानियां भी शक्ति हुई थी। उनके नाम इस तरह हैं :-

1.सोनी देवी (भांजा बहु)
2.परमी देवी
3. गुलाब बाई
4.मनेऊ बाई
5.छमु बाई
6. सुनी बाई

तब से गर्ग गोत्री दीवानजी के वंशज शारदीय नवरात्रि में नवमी के दिन महारकलां में आकर केशर माताजी के मन्दिर में रातिजगा करते हैं ,मेहँदी के थापे लगाते हैं। माता से अपने परिवार की कुशल मंगल के लिए मन्नत मांगते हैं व आशीर्वाद लेते हैं।अगले दिन दशहरे पर जड़ुले वाले बालकों के बाल उतारे जाते हैं। बाल माताजी के स्थानक पर उतारने के पश्चात् बाल भांजा बहु के स्थानक जो पास में ही है, वहां चढ़ाये जाते हैं। फिर माताजी को घुघरी और कसार का भोग लगा कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। माता केशर देवी के स्थानक पर आकर जो कोई भी पूरी आस्था व श्रद्धा से मनौती मानता है, माता उसे अवश्य पूरा करती है।

केशर माता की स्तुति

सुन मेरी माता म्हार वासिनी, कोई तेरा पार न पाया है।
पान सुपारी ध्वजा नारियल तेरी भेंट चढ़ाया है।।
केसरिया बाना तेरे अंग बिराजे,
केसर तिलक लगाया है।। सुन मेरी....
नंगे - नंगे पावों तेरे दर पर आया है।
आसोज शुक्ल नवमी रात जगाया है,
फिर दशमी को जड़ुला उतरवाया है।।सुन मेरी....
ऊँचे ऊँचे पर्वतों बीच बन्यो देवरो थारो,
धुप दिप नैवेद्य आरती कसार घुघरी का भोग लगाया है।
जो कोई म्हार वासिनी की आरती नित्य गावे,
मन इच्छा फल पाया है।। सुन मेरी माता....

केशर माताजी की आरती

ॐ जय केसर माता, मैया जय केसर माता।
अपने भक्तजनों की दूर करे विपदा।। ॐजय केसर माता
अवनि अनंतर ज्योति अखण्डित,मण्डित चहुकुंकुमा।
दुर्जन दलन खड्ग की,विधुतसम प्रतिमा।।ॐजय केसर माता
भरकत मणि मंदिर अति मन्जुल,शोभा लखि न परे।
ललित ध्वजा चहुँ ओरे,कंचन कलश धरे।।ॐ जय केसर माता
घण्टा घनन घड़ावल बाजत, शंख मृदंग धुरे।
भक्त आरती गावे,वेद ध्वनि उचरे।।ॐ जय केसर माता
सप्त मातृ का करें आरती,सुरगण ध्यान धरे।
विविध प्रकार के व्यंजन,श्रीफल भेंट धरे।।ॐ जय केसर माता
संकट विकट विदारिणी,नाशनी हो कुमति।
सेवक जन निज मुख से मृदुल करण सुमति।।ॐ जय केसर माता
अमल कमल दल लोचनी,मोचनी त्रम तापा।
दास आयो शरण आपकी,लाज रखो माता।।ॐ जय केसर माता
श्री मातेश्वरीजी की आरती जो कोई नर गावे।
सकल सिद्धि नव निद्धि,मनवांछित फल पावे।।ॐ जय केसर माता

कुलदेवी केशर माता तक पहुंचने का रास्ता


जय श्री खुराल केशर माताजी

गर्ग गोत्री अग्रवाल समाज की कुलदेवी केशर माताजी राजस्थान के म्हार कलां में विराजित हैं।बस द्वारा उन तक कैसे पहुंचें, आइये देखते हैं :-

1.दिल्ली से जाना हो तो अजित गढ़( राजस्थान) वाले शाहपुरा तक आइये। दिल्ली से शाहपुरा की दूरी 200 km है। शाहपुरा से अजीतगढ़ तक का सफर 24 km है। अजीतगढ़ से म्हार कलां की दूरी 4 km है।

2.जयपुर से म्हार कलां जाना हो तो पहले चोमू आइये। जयपुर से चोमू की दूरी 31km है। चोमू से सामोद 6km दूरी पर है। सामोद से म्हार कलां 4km है।

3. रींगस से जाना हो तो रींगस और श्री माधोपुर आइये। दोनों के बीच की दूरी12km है।श्री माधोपुर से अजीतगढ़ की दूरी 35km है। अजीतगढ़ से म्हार कलां सिर्फ 4 km है।

4. सीकर से महारकलां रींगस हो कर पहुंचा जा सकता है।रींगस से श्री माधोपुर ,फिर अजीतगढ़ और म्हार कलां।

IPS Arun Bothra - INDIA CARES

IPS Arun Bothra - INDIA CARES

आईपीएस अरुण बोथरा की कहानी | IPS Arun Bothra Biography in Hindi


आईपीएस अरुण बोथरा की कहानी

आईपीएस अरुण बोथरा, इन्हे एक आईपीएस ऑफिसर कहें या एक सोशल वर्कर या एक भला इंसान. इन्हें जो भी कहे इनके लिए कम ही होगा. लोग अलग-अलग सपनो के साथ मेहनत करते है और आईपीएस बनते है, लेकिन अरुण बोथरा जी लोगों की मदद करने के लिए आईपीएस बने. उनका मानना है कि, यदि उनके काम से किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर भी खुशी आ जाती है तो उन्हे बहुत सुकून की प्राप्ति होती है. ऐसे ही अनकहे किस्से है आईपीएस अरुण बोथरा जी के, जिन्हें आप सोशल मीडिया या न्यूज चेनल के माध्यम से सुनते रहते है. आज हम इस लेख में जानेंगे, कुछ अरुण बोथरा जी के जीवन के बारे में और कुछ उनके द्वारा किए गए कुछ खास कार्यों के बारे में, तो चलिए शुरू करते है.


अरुण बोथरा जी ने मूल रूप से जयपुर राजस्थान से है और उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा भी वहीं से पूरी की. अपने जज़्बे से लोगों को प्रेरित करने वाले आईपीएस अरुण बोथरा जी ने अपनी स्नातक(BA) की पढ़ाई राजस्थान के श्रीगंगानगर से पूरी की. उसके बाद वहीं से 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी बने.

वर्तमान में अरुण बोथरा जी ओडिशा सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई यूटिलिटी के सीईओ और कैपिटल रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट के प्रबंध निदेशक हैं. उनके पास सीएमडी, ओडिशा राज्य सड़क परिवहन निगम का अतिरिक्त प्रभार भी है. बोथरा आईजी क्राइम से लेकर सीबीआई तक में अहम ओहदों पर पोस्टेड रह चुके हैं.

आईपीएस अरुण बोथरा का निजी जीवन | IPS Arun Bothra family


आईपीएस अरुण बोथरा का विवाह डॉक्टर कीर्ति सिंघवी से हुआ है, उनकी पत्नी भी उनके सोशल वर्क मे उनकी मदद करती है. दम्पत्ति के दो बेटे है.

आईपीएस अरुण बोथरा का कार्य | IPS Arun Bothra Professional Work

बोथरा साहब ने शुरुआत मे अन्य सरकारी अफसर जैसी अपनी नौकरी करना शुरू किया, उन्होंने पहले दिन से ही डट कर अपना काम करने की ठान ली थी. लेकिन वे हमेशा से चाहते थे कि एक आईपीएस ऑफिसर के तौर पर वे जितना हो सके लोगों की मदद कर पाएं.

2017 में अरुण बोथरा जी उड़ीसा में क्राइम डिपार्टमेंट मे IG थे उस वक्त उन्हें उड़ीसा पुलिस का ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट संभालने का मौका मिला, तब पहली बार उन्हें लगा की सोशल मीडिया बड़ी महत्वपूर्ण चीज है, इससे कई लोगों की मदद की जा सकती है।.

2009 मे अरुण जी ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाया था पर उसे कभी इस्तमाल नहीँ किया था. उड़ीसा पुलिस के ट्विटर अकाउंट पर कई लोग अपनी शिकायत और अपील किया करते थे, जिससे वे डायरेक्ट उन लोगों की मदद कर पाते थे. इससे लोग उड़ीसा पुलिस और उनकी तारीफ करने लगे, तब उन्होंने सोचा, “क्यूँ न में ये अपने निजी अकाउंट(@arunbothra) से भी शुरू करू ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद हो सके.

IPS Arun Bothra with Parents

आईपीएस अरुण बोथरा के सामाजिक कार्य | IPS Arun Bothra Social Work

क्राइम IG की पोस्ट के बाद अरुण बोथरा जी दूसरी पोस्ट पर पहुँच गए, वहाँ उन्हे पहले बस कंपनी मिली, उसके बाद बिजली कंपनी मिली. वहाँ भी इन्होंने वही काम शुरू रखा, वहाँ भी लोगों की खूब मदद की. यही सिलसिला चल ही रहा था कि देश मे कोविड -19 की वजह से लॉक डाउन लग गया, उसकी वजह से अरुण साहब के पास मदद के लिए ओर ज्यादा संदेश आने लगे, तो उन्होंने जितना होता था उतना लोगों की मदद की. उन्होंने अपना DM शुरू कर दिया ताकि लोग सीधे उनसे संपर्क कर सके.

बहुत लोग उनसे मदद के लिए सीधे संपर्क करने लगे, फिर कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने उनसे कहा कि हम भी आपके साथ मिलकर लोगों की मदद करना चाहते है, ऐसे करते हुए वे 1 से 4 और फिर सेकड़ों कार्यकर्ता उनसे जुड़ने लगे. ऐसे ही किसी की सलाह से उन्होंने एक ट्विटर पर ग्रुप की शुरुआत की जिसका नाम रखा ‘इंडिया केयर्स‘.

आज देश के 29 राज्यों में 3 हजार से भी ज्यादा वॉलंटियर्स हैं जो ‘इंडिया केयर्स’ से जुड़े हुए है. इस ग्रुप मे मदद के संदेश (जो लोगों से मिलते थे) भेजे जाते थे, तब जो भी मदद कर सकता था वह खुद ही आगे आकर मदद कर देता था.

बोथरा कहते हैं “ऑफिस का काम रात में 8 बजे तक निपट जाता है. इसके बाद इस काम में लग जाता हूं. मैसेज चेक करता हूं. रिप्लाई करता हूं. इस काम मे रात के 2 बज जाते हैं. लेकिन इससे जो सुकून मिलता है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता“.

SABHAR : dilsedeshi.com/biography/ips-arun-bothra-biography-in-hindi

MANOJ MODI - RELIANCE MASTER MIND

MANOJ MODI - RELIANCE MASTER MIND

अंबानी ने एम्प्लॉई को 1500 करोड़ का घर गिफ्ट किया:रिलायंस में 43 साल से काम कर रहे मनोज, कंपनी के मास्टर माइंड हैं


रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने हाल ही में अपनी कंपनी में 43 साल से काम कर रहे एम्प्लॉई के लिए 1500 करोड़ रुपए का घर खरीदा है। ये एम्प्लॉई मनोज मोदी हैं जो न सिर्फ मुकेश अंबानी के राइट हैंड माने जाते हैं, बल्कि उनके करीबी दोस्त और क्लासमेट भी हैं।

दोनों ने मुंबई के यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ कैमिकल टेक्नोलॉजी में एक साथ पढ़ाई की थी। मुकेश अंबानी ने जब रिलायंस में काम शुरू किया, तो उन्होंने मनोज को भी अपने साथ बुला लिया। मनोज मोदी रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1980 से काम कर रहे हैं। मुकेश अंबानी बिजनेस से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए सबसे ज्यादा भरोसा मनोज मोदी पर करते हैं।

मनोज मोदी को अंबानी परिवार में काफी सम्मान दिया जाता है और वो बच्चों के लिए मेंटर के तौर पर काम करते हैं। 2016 में मनोज मोदी की बेटी की शादी मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर से ही हुई थी। मनोज मोदी 2007 में रिलासंस रिटेल (Reliance Retail ) के सीईओ बनाए गए, वो अंबानी परिवार की तीनों पीढ़ियों के साथ काम कर चुके हैं।

22 मंजिला बिल्डिंग में 7 फ्लोर पार्किंग के लिए

प्रॉपर्टी वेबसाइट मैजिक ब्रिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक मनोज को गिफ्ट में मिले घर का नाम 'वृंदावन' है। 1500 करोड़ रुपए की कीमत वाला ये घर नेपियन-सी रोड पर बना है और ये इलाका मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में से एक है।

22 मंजिला बिल्डिंग 1.7 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बनाई गई है और इसका हर फ्लोर 8000 वर्ग फीट में फैला है। घर के डिजाइनर तलाटी एंड पार्टनर्स LLP हैं। बिल्डिंग के 7 फ्लोर सिर्फ कार पार्किंग के लिए रिजर्व हैं। घर के 3 तरफ से समुद्र का नजारा देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर का फर्नीचर भी बेहद खास है, जिसे इटली से मंगाया गया है।

रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के डायरेक्टर हैं मनोज

इस समय मनोज मोदी रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के डायरेक्टर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं। मनोज ने अंबानी परिवार की तीनों पीढ़ियों के साथ काम किया है। उन्होंने रिलायंस में धीरुभाई अंबानी के नेतृत्व में काम शुरू किया था। फिर मुकेश अंबानी और उनके बेटे-बेटियों ईशा-आकाश-अनंत अंबानी के साथ भी काम कर रहे हैं।

RIL के चेयरमैन मुकेश अंबानी और डायरेक्टर मनोज मोदी

रिलायंस के मास्टर माइंड हैं मनोज

कंपनी में मनोज को मास्टर माइंड कहा जाता है। मनोज मोदी मुकेश अंबानी के हजीरा पेट्रोकेमिकल, जामनगर रिफाइनरी, टेलीकॉम बिजनेस और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स संभाल चुके हैं। मनोज मोदी ने जामनगर रिफाइनरी में काम के दौरान कॉन्ट्रैक्टरों और व्यापारियों के बीच जबर्दस्त डीलिंग की थी।

इस प्रोजेक्ट के बाद ही मनोज मोदी मुकेश अंबानी के चहेते बन गए थे। रिलायंस की जियो सर्विस के पीछे भी मनोज मोदी का दिमाग रहा है। मनोज ने फेसबुक इंक के साथ 5.7 अरब डॉलर की डील में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

Wednesday, April 26, 2023

RAMJANMBHUMI - वैश्य कुल से जुड़े रामजन्मभूमि के दिग्गज

#RAMJANMBHUMI - #वैश्य कुल से जुड़े रामजन्मभूमि के दिग्गज

वैश्य कुल में जन्म ले कर सर्वसमाज एवं हिंदू दर्शन के लिए समर्पित इन विभूतियों का ह्रदय से अभिनंदन ।

१) अधिवक्ता श्री आलोक कुमार जी - International Working President, Vishwa Hindu Parishad ( VHP)


आलोक कुमार जी मूल रूप से यूपी, बदायूं जिले के बिसौली गांव निवासी हैं. 4 सितंबर 1952 को जन्मे कुमार दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं. वह छात्र संघ राजनीति में सक्रिय रहे हैं. वर्ष 1973 से 1974 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। 1993 से 1995 के बीच दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे हैं.
 
२)श्री चम्पत राय -


चंपत राय बंसल जी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 18 नवंबर 1946 को रामेश्वर प्रसाद बंसल और सावित्री देवी के परिवार में हुआ था। पिता रामेश्वर प्रसाद जीवन के शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य रहे। कुछ समय बाद चंपत राय भी संघ से प्रभावित हुए और संघ के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। इसके बाद वह धामपुर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर बन गए। चंपत राय जी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए गए आंदोलन से लेकर राम मंदिर के निर्माण के अब तक के सफर में चंपत राय जी का अहम योगदान रहा है।

VASVI KHETAN - उम्र 13 साल, फिर भी हॉर्स राइडिंग में 58 मेडल

VASVI KHETAN - उम्र 13 साल, फिर भी हॉर्स राइडिंग में 58 मेडल

खुद्दार कहानीउम्र 13 साल, फिर भी हॉर्स राइडिंग में 58 मेडल:3 साल की उम्र से घुड़सवारी शुरू की; अब ओलिंपिक में देश के लिए गोल्ड का सपना

एक रोज की बात है। दिल्ली की एक हॉर्स राइडिंग एकेडमी में बड़ी बेटी अन्विका घुड़सवारी सीखने जाती थी। उस रोज छोटी बेटी वास्वी भी ऐसे ही चली गई। इसके पापा भी साथ में थे। जैसे ही वास्वी ने घोड़ा देखा, वो भी इस पर चढ़ने की जिद करने लगी। मना करने पर रोने लगी। सभी शॉक्ड थे कि जिस उम्र में बच्चा किसी जानवर को देखकर डरता है, भागता है, ये उसे दौड़ाना चाहती है। जबकि उस वक्त वास्वी महज 3 साल की थी। इसके पापा को भी डर था कि इतनी छोटी बच्ची… घुड़सवारी करेगी, गिर जाएगी, हाथ-पैर टूट जाएंगे।

वास्वी इतना रोने लगी कि एकेडमी की इंस्ट्रक्टर को इसे घोड़े पर बैठाना ही पड़ा। जब इसने हॉर्स राइडिंग शुरू की तो साथ के लोग भी दंग रह गए। इतनी छोटी बच्ची घोड़ा दौड़ा रही है। जिस उम्र में बच्चे खिलौने के साथ खेलते हैं, ये घोड़े के साथ खेल रही है। उसी वक्त से इसे हॉर्स राइडिंग का चस्का लग गया। आज 13 साल की उम्र में ही वास्वी हॉर्स राइडिंग में 58 से अधिक मेडल अपने नाम कर चुकी है। अब ये इंटरनेशनल हॉर्स राइडिंग टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए बेल्जियम जा रही है। सपना है कि 2026 में होने वाले यूथ ओलिंपिक और एशियन ओलिंपिक में देश के लिए गोल्ड लेकर आएं।’

दिल्ली का न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाका। शाम के करीब 4 बज रहे हैं। 13 साल की वास्वी खैतान अपनी मां दीपिका के साथ बेल्जियम जाने की तैयारी कर रही हैं। परसों इनकी फ्लाइट है। दीपिका बताती हैं, ‘पिछले हफ्ते ही हम दोनों जर्मनी से लौटे हैं। वहां एक टूर्नामेंट था। अब इसी हफ्ते FEI (फेडरेशन इक्वेस्ट्रिया इंटरनेशनल) की तरफ से होने वाले इंटरनेशनल हॉर्स राइडिंग टूर्नामेंट में वास्वी पार्टिसिपेट करने जा रही है।’

ये 13 साल की वास्वी खैतान हैं, जो हॉर्स राइडिंग करती हैं। साथ में इनकी मां दीपिका खैतान हैं।

एक टूर्नामेंट में वास्वी हॉर्स राइडिंग कर रही हैं।

... वास्वी स्टडी भी करती हैं?

मेरे इस सवाल पर वास्वी मुस्कुराने लगती हैं। दीपिका कहती हैं, ‘इसका जिस तरह से हॉर्स राइडिंग को लेकर डेडिकेशन है, हम चाहकर भी स्टडी के मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। ये सिर्फ और सिर्फ हॉर्स राइडिंग ही करना चाहती है। अभी ये हॉर्स राइडिंग कैटेगरी के शो जंपिंग पार्ट को खेलती है।

हालांकि हम चाहते हैं कि ये कम-से-कम बेसिक स्टडीज पूरी कर ले। अभी वास्वी UK के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रही है। पिछले साल ही इसका एडमिशन हुआ है।’

वास्वी अपनी मां को रोकते हुए कहती हैं, ‘मुझे तो पढ़ने का मन ही नहीं करता है। सिर्फ और सिर्फ हॉर्स राइडिंग...। अब यही मेरा करियर, जिंदगी… सब कुछ है। मैं अब तक 5 दर्जन के करीब मेडल नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर जीत चुकी हूं।'

वास्वी दीवार पर टंगे मेडल्स को दिखा रही हैं। इसके बारे में बता रही हैं।

वास्वी आगे कहती है, 'जब UK, जर्मनी… जैसे देशों में मैं हॉर्स राइडिंग करती हूं, जीतती हूं, मेडल लेती हूं, तो वहां के लोग, कोच हाथ मिलाते हुए कहते हैं- हाय, यू फ्रॉम इंडिया… (तुम इंडिया से हो, तुमने कॉम्पिटिशन जीता है।), तब वाकई में दिल को बहुत सुकून मिलता है। सब कुछ भूल जाती हूं। फिर ऐसा लगता है कि मैं अपने देश के लिए कुछ कर रही हूं।

फिलहाल मेरा पूरा फोकस 2026 में होने वाले यूथ ओलिंपिक और एशियन गेम्स के लिए हैं। चाहती हूं कि हॉर्स राइडिंग में देश के लिए गोल्ड जीत कर लाऊं। इसी की तैयारी कर रही हूं। हर रोज सुबह 4 बजे से ही राइडिंग प्रैक्टिस के लिए चली जाती हूं।’

इतना कहते हुए वास्वी मिरर के सामने खड़ी हो जाती हैं। अपने बालों को ठीक करते हुए हेलमेट पहनने लगती हैं। मानो वो खुद पर गर्व कर रही हों।


वास्वी अपने बालों को ठीक कर रही है। वो हॉर्स राइडिंग के वक्त इस्तेमाल होने वाले हेलमेट को पहनकर दिखा रही है।

जब वास्वी अपने बारे में बता रही हैं, तो दीपिका की आंखों में मां की ममता दिखाई दे रही है। वो कहती हैं, ‘12 साल के बच्चे का अपने देश में भी नहीं, दूसरे देश के बोर्डिंग स्कूल में एडमिशन करवाना, हर 6 हफ्ते में इसे वहां से यहां लाना-ले जाना, हॉर्स राइडिंग की ट्रेनिंग के लिए 3 हफ्ते जर्मनी में एक छोटे से कमरे में रहना...। इस तरह की कई चुनौतियां फेस करनी पड़ती हैं, लेकिन वास्वी के जज्बे को देखकर हम ये तकलीफ भूल जाते हैं।

जब मैं वास्वी को जर्मनी छोड़कर इंडिया आती हूं, तो कई रात नींद नहीं आती है। एक फोन कॉल के लिए रात-रातभर जगी रहती हूं। आप मां का दिल तो जानते ही हैं…।’

हमारी बातचीत के बीच ही वास्वी के पापा वेदांत खैतान आते हैं। वेदांत नोएडा में एक स्कूल चलाते हैं।

तस्वीर में वास्वी अपने पापा वेदांत खैतान के साथ हैं।

वेदांत बताते हैं, ‘हम चाहते हैं कि हमारे तीनों बच्चे जो करना चाहते हैं, करें। पहले बड़ी बेटी हॉर्स राइडिंग करती थी, लेकिन बाद में उसका मन स्पोर्ट्स से हट गया, अब वो 11th में है।

अब वास्वी का सपना हॉर्स राइडिंग में ही करियर बनाने का है। हमें कई बार डर भी लगता है, जब ये राइडिंग के दौरान घोड़े से गिर जाती है, चोट लग जाती है। ये खुद भी मायूस हो जाती है, लेकिन जब खुद से वास्वी उठकर घोड़े पर जा बैठती है, तो फिर हमें खुशी होती है।’

... तो आपकी फैमिली में पहले से भी कोई हॉर्स राइडिंग करता रहा है?


इस तस्वीर में वास्वी अपने मम्मी-पापा, बहन अन्विका और भाई रूद्रव के साथ हैं।

वेदांत कहते हैं, ‘हम लोग मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। आज से करीब 100 साल पहले मेरे दादा-परदादा कोलकाता चले आए थे और फिर जब मैं 11 साल का था, तो दिल्ली। कोलकाता में हॉर्स राइडिंग का कल्चर बहुत ज्यादा रहा है। लोग शौकिया हॉर्स राइडिंग करते हैं।

मेरे घर में भी अमूमन हर किसी का शौक हॉर्स राइडिंग का रहा है। मेरे नाना नेशनल लेवल पर हॉर्स राइडिंग कर चुके हैं, लेकिन जिस लेवल पर वास्वी राइड कर रही है, अभी तक किसी ने नहीं किया। अब वास्वी इंटरनेशनल लेवल पर हॉर्स राइडिंग कर रही है। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली वास्वी इंडिया की पहली लड़की है।’

वेदांत इंडियन पेरेंट को एक मैसेज भी देना चाहते हैं। वो कहते हैं, 'जब आप विदेश जाएंगे, तो देखेंगे कि वहां के बच्चे अपने मन मुताबिक काम करते हैं। अपना करियर बनाते हैं, लेकिन इंडिया में ऐसा नहीं है। हर कोई चाहता है कि उसका बेटा-बेटी डॉक्टर, इंजीनियर, लॉयर बने, लेकिन स्पोर्ट्स, म्यूजिक, फिल्म इंडस्ट्री... हर सेक्टर में दर्जनों लोग हैं, जिन्होंने अपने मन की सुनी और अपनी पहचान बनाई।

सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, एमएस धोनी... जैसे प्लेयर्स को स्पोर्ट्स से ही तो पहचान मिली है। दुनिया इन्हें भगवान मानती है। हम माता-पिता को अब इन चीजों को समझना चाहिए। पैसा सिर्फ बिजनेस या किसी व्हाइट कॉलर जॉब में ही नहीं, खुद के पैशन को फॉलो करने में भी है।'

पिता वेदांत के साथ वास्वी।

वास्वि का कभी किसी और फील्ड में इंटरेस्ट नहीं दिखा?

मेरे इस सवाल पर वेदांत मुस्कुराने लगते हैं। वो वास्वी के माथे पर हाथ फेरते हुए कहते हैं, 'हमने ट्राय किया, दीपिका भी चाहती थीं कि हॉर्स राइडिंग एक खतरनाक खेल है, किसी दूसरे स्पोर्ट्स में वास्वी खुद को एक्सफ्लोर करे। हमने कई गेम्स ट्राय भी किए, लेकिन वास्वी ने सभी को दो-तीन महीने में ही छोड़ दिया।

इसके पैशन को देखते हुए ही हमने इसे विदेश भेजने का फैसला किया। दरअसल, इंडिया में हॉर्स राइडिंग को लेकर न तो ज्यादा स्कोप है और न ही कल्चर। जितने भी बेहतर घोड़े होते हैं, सभी जर्मनी के होते हैं। अच्छे कोच का इंडिया में मिलना भी मुश्किल है। इसलिए हमें वास्वी को इतनी कम उम्र में विदेश भेजना पड़ा। इन सारी चीजों में खर्च भी बहुत होता है। वास्वी अब तक जर्मनी, UK समेत कई देशों में हुए अलग-अलग लेवल के हॉर्स राइडिंग टूर्नामेंट में दर्जनों मेडल जीत चुकी है।

लेख साभार : दैनिक भास्कर 

Tuesday, April 25, 2023

OSWAL BOTHRA VAISHYA - बोथरा गौत्र

#OSWAL BOTHRA VAISHYA  - बोथरा गौत्र 
इस गोत्र का इतिहास देलवाड़ा से प्रारंभ होता है। देलवाड़ा पर चौहान वंश के भीमसिंह का राज्य था। इतिहास के अनुसार वह 144 गांवों का अधिपति था। उसकी एकाकी पुत्री जालोर के राजा लाखणसिंह को ब्याही गई थी। वह ससुराल में पारस्परिक द्वन्द्व के कारण अपने पुत्र सागर को लेकर पीहर आ गई थी। भीमसिंह ने अपना राज्य दोहित्र सागर को सौंप दिया। सागर के चार पुत्र थे- बोहित्थ, माधोदेव, धनदेव और हरीजी ! सागर राजा की मृत्यु के बाद बड़े पुत्र बोहित्थ ने देलवाड़ा राज्य की बागडोर अपने हाथ में ली। वह धर्मपरायण राजा था। विहार करते हुए प्रथम दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि वि. सं. 1197 में देलवाड़ा पधारे। गुरुदेव की दिव्य साधना का वर्णन जब राजा बोहित्थ के कानों से टकराया तो वह उनके दर्शन करने के लिये उत्सुक हो उठा। वह दूसरे ही दिन सपरिवार गुरुदेव के दर्शनार्थ पहुँचा। पहले प्रवचन से ही वह अत्यन्त प्रभावित हो उठा। वह प्रतिदिन प्रवचन श्रवण करने आने लगा। मन में पैदा हो रही जिज्ञासाओं का समाधान करने लगा। दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि ने जैन धर्म का रहस्य समझाते हुए आत्म-कल्याण की प्रेरणा दी। फलस्वरूप उसने जैन धर्म स्वीकार कर लिया। गुरूदेव ने बोहित्थरा गोत्र की स्थापना की। गुरुदेव ने कहा- तुम्हारा आयुष्य अल्प है, अतः आत्म-साधना में प्रवृत्त हो जाओ। बोहित्थ का परिवार विशाल था। उसने चार विवाह किये थे, जिनसे 35 संतानों का जन्म हुआ था।
बोथरा गोत्र का गौरव

चित्तौड़ राज्य पर जब यवनों का आक्रमण हुआ तब चित्तौड़ के राजा रायसिंह ने राजा बोहित्थ को सहायता हेतु बुलाया। बोहित्थ समझ गये कि गुरुदेव की भविष्यवाणी के अनुसार मेरा आयुष्य पूरा होने जा रहा है। उन्होंने अपना राज्य बड़े पुत्र श्री कर्ण बोथरा को सौंपा और स्वयं चौविहार उपवास कर युद्ध भूमि में उतर पड़े। शत्रु को तो भगा दिया पर स्वयं अपने प्राण न बचा सके। समाधि पूर्वक मृत्यु प्राप्त कर वे बावन वीरों में एक हनुमंत वीर बने। पुनरासर में उनका भव्य मन्दिर बना हुआ है। श्री कर्ण बोथरा के चार पुत्र थे- समधर, उद्धरण, हरिदास एवं वीरदास! श्रीकर्ण ने कई राज्यों पर विजय प्राप्त कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। एक बार शत्रुओं को युद्ध में परास्त कर वापस लौट रहा था कि उसे पता चला कि बादशाह का खजाना उधर से जा रहा है। पिताजी के साथ बादशाह का जो वैर था, उसके कारण वह बदला लेने के लिये क्रुद्ध हो उठा। उसने बीच में ही आक्रमण कर खजाना लूट लिया। इस बात का पता जब बादशाह गौरी को चला तो उसने विशाल सेना लेकर युद्ध किया। उस युद्ध में श्री कर्ण बोथरा मृत्यु को प्राप्त हो गया। देलवाड़ा का राज्य गौरी के हाथ में चला गया। श्री कर्ण बोथरा की पत्नी रत्नादे अपने पुत्रो के साथ पीहर खेडीपुर जाकर रहने लगी।

श्री पद्मावती देवी ने उसे स्वप्न में आदेश दिया कि कल आचार्य भगवंत कलिकाल केवली श्री जिनेश्वरसूरि द्वितीय यहाँ आ रहे हैं। उनके पास जाओ। और अपने श्वसुर का अनुकरण करते हुए उनसे जैनधर्म स्वीकार करो। दूसरे दिन सुबह अपने चारों पुत्रो के साथ गुरु भगवंत के पास पहुँची। गुरुदेव की देशना सुनकर सभी बोध को प्राप्त हुए। गुरुदेव ने ओसवाल जाति में सभी को सम्मिलित करते हुए जैन धर्म में दीक्षित किया। बोथरा गोत्र का विस्तार किया। बाद में परिवार की ओर से शत्रुंजय तीर्थ का छह री पालित संघ निकाला। स्वर्ण मोहर और रजत के थालों की प्रभावना करने के परिणाम स्वरूप बहु फलिया कहलाये। बहु फलिया अर्थात् बहुत फले। क्रमशः बहु का बो और बो का फो अपभ्रंश होने से फोफलिया भी कहलाने लगे। समधर बोथरा के पुत्र तेजपाल बोथरा ने वि. सं. 1377 में दादा जिनकुशलसूरि का पाटण नगर में पाट महोत्सव आयोजित किया था। जिसमें उस समय में तीन लाख रूपये का व्यय हुआ था। उन्होंने पाटण में जैन मंदिर व जैन धर्मशाला का निर्माण करवाया। शत्रुंजय गिरिराज पर कई बिम्बों की प्रतिष्ठा दादा जिनकुशलसूरि द्वारा संपन्न करवाई। बोथरा गोत्र की उत्पत्ति के विषय में एक और वृत्तांत भी उपलब्ध होता है। उसके अनुसार चौहान राजा सागर के पुत्र बोहित्थ को सांप ने डस लिया था। बहुत उपाय किये पर वह ठीक नहीं हो पाया। दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि की कृपा से वह स्वस्थ बना। परिणाम स्वरूप वि. सं. 1170 में उसने जैन धर्म स्वीकार किया था। उनके वंशज बोहित्थरा ( बोथरा ) कहलाये। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान बीकानेर के ग्रंथागार में उपलब्ध हस्तलिखित गुटका में इग्यारे सतरौ लिखा है। जिसका अर्थ 1170 होता है। जोधपुर के श्री केशरियानाथ मंदिर स्थित ज्ञान भंडार के एक गुटके में बोथरा गोत्र की उत्पत्ति का संवत् स्पष्ट रूप से 1117 दिया है। लेकिन यह सही प्रतीत नहीं होता। क्योंकि उस समय दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि का जन्म नहीं हुआ था। बोथरा गोत्र के उद्भव का संवत् 1170 या 1197 सही प्रतीत होता है। कालांतर में बोथरा गोत्र की लगभग 9 शाखाऐं हुई। श्री बच्छराज जी से बच्छावत बोथरा, पातुजी से पाताणी या शाह बोथरा, जुणसीजी से जूणावत बोथरा, रतनसीजी से रताणी बोथरा, डूंगरसीजी से डूंगराणी बोथरा, चाम्पसिंहजी से चांपाणी बोथरा, दासूजी से दस्साणी बोथरा, मुकनदासजी से मुकीम बोथरा व अजबसीजी से अज्जाणी बोथरा। राव बीकाजी ने श्री बच्छराज जी बोथरा के सहयोग से ही 15वीं शताब्दी में बीकानेर की नींव रखी थी। व राज्य संचालन के लिये श्री बच्छराज जी बोथरा को अपना प्रधानमंत्री बनाया था। बोथरा गोत्र के इतिहास में कर्मचंद बोथरा का नाम आदर के साथ लिया जाता है। वे बीकानेर राज्य के प्रधानमन्त्री रहे। बाद में सम्राट् अकबर की सभा में भी मंत्री पद पर नियुक्त हुए। दादा जिनचन्द्रसूरि के परम भक्त श्री कर्मचन्द बोथरा के पुरूषार्थ से ही सम्राट् अकबर अहिंसा की ओर आकृष्ट हुआ तथा दादा जिनचन्द्रसूरि का भक्त बना। खरतरगच्छ में बोथरा गोत्र में बहुत ही दीक्षाऐं संपन्न हुई हैं। खरतरवसहि सवा सोम टूंक के प्रतिष्ठाकारक आचार्य भगवंत श्री जिनराजसूरि बीकानेर निवासी बोथरा गोत्र के रत्न थे जिन्होंने नौ वर्ष की उम्र में दीक्षा गहण की थी। जैसलमेर में तपागच्छीय मुनि श्री सोमविजयजी महाराज के साथ शास्त्रर्थ किया था, उसमें विजयी बन कर खरतरगच्छ की यश पताका फहराई थी। श्री सिद्धाचल की पावन भूमि पर सवा सोमा नी टूंक अर्थात् खरतरवसही टूंक की प्रतिष्ठा वि. 1675 में आपके करकमलों से संपन्न हुई थी, जिसमें लगभग 700 प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया था।

Bikaji left Jodhpur with 14 warriors including Bachhrajji. His Coronation function was arranged in Ratighati in 1541, and started the construction of Fort. He established Bikaner in 1545. Bachharajji created a new city named Bachhasar. The Family of Bachharajji named Bachhavat. Bachharajji was father of 3 sons named Karamsee, Varsingh and Narsingh.

Daverajji was named by Dasuji. Family of Dasuji named Dassani. Rao Karanseeji appointed Kararmseeji his Minister. Karamseeji created a new city named Karamseesar. He also built a grand Jain temple of Lord Neminath in Bikaner in 1570. It is situated near the temple of Bhandashah. He arranged a Sangh of Shatrunjaya. He offered a golden coin with a plate full of 5 kg. cipher to all jains of the Sangh and who met in the way.

Bothra Rai Bahadur Seth Lakshmichand – Katangi (C.P.)

He came from Deshnokh and settled in Katangi. He had been the member of District Board and president of many departments of Balaghat for 40 years. He built a Jain temple in Balaghat. Government of India honuored him with the title of “Rai-Bahadur” in V. 1957.

Bothra Seth Kodamal Nathmal – Kalingpong

He was originaly resident of Lunkaransar. His ancestors came from Marwar and settle there before 450 years. His business was flourished in Nepal, Bhutan and Tibbat.

Bothra Rooplalji – Faridkot

Lala Rooplalji born in V. 1939. He was President of Jain Sabha Pharidkot, and vice President of Temperence Society.

Bothra Lala Harbhajanlal – Faridkot

He was the Vice-President of Faridkot Municipality and ‘Chaudhary of Faridkot.’

Bothra Yogi Harakchand

He was born at Punrasar in 1904. He got education in Calcutta. Though he was an scholar of English language even then he studied Sanskrit, Prakrit and Jainology. He was greatly influenced by Mahatama Gandhi and started wearing Khadi. In 1947 he renounced his family and went to Pavapuri for Meditatio. He used to wear only one piece of cloth. He died on 30th March 1989.

Bothra Mehta Balvantsinghji – Udaipur

His father Mehata Gopalsinghji was Hakim in the Udaipur State. His son Balvantsingh was Hakim of Magra and Khervada.

Mehta Shri Manoharsinghji - Udaipur

He was born in 1919. His father was Mehta Balvant Singhji. Once Maharana Sajjansinghji went to a School for inspection. There he was impressed with Mehta Manoharsingh. On the very day Maharana sent Manoharsingh to the Settlement Officer for training. He was appointed Hakim of Rajnagar at the age of 16 years. He was then transferred to Sadri. Jahajpur, Chitore, and Girva respectively. When ever any revolt arose he was sent there to help restore peace.

Bothra Jitendra Khemchand – Ranjangaon

He was born on 01-08-1968. He was Railway Magistrte Raipur (Civil Judge). Now he is Civil Judge Class II and Judicial Magistrate Durg.

Mehta Shri Gopalsinghji –Udaipur

He was appointed as the Manager of Panarva after passing M.A. Then of became guardian of Rao Raoji of Javas in Mayo College. He became Thakur.

SHRI BABOSA MAHARAJ - चूरु में बाबोसा महाराज

#SHRI BABOSA MAHARAJ - चूरु में बाबोसा महाराज

#कोठारी माहेश्वरी वैश्य समाज में प्रगट बाबोसा जी महाराज 

भगवान श्री “बाबोसा महाराज” को भगवान श्री “बालाजी महाराज” या “हनुमान जी” के अवतार के रूप में पूजा जाता है. भगवान श्री बाबोसा महाराज का मुख्य मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के चूरु शहर में स्थित है. यह “चूरु धाम” है.



बाबोसा धाम, दिल्ली-बीकानेर रेलवे लाइन पर स्थित है और नई दिल्ली से लगभग 256 किमी दूर है. आज यह स्थान दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए गहन भक्ति का केंद्र है. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस स्थान पर उनकी हर इच्छा पूरी होती है. आज के आर्टिकल में हम आपको बताएंगे बाबोसा महाराज के बारे में सबकुछ…

बाबोसा महाराज को वास्तव में “कलि-युग अवतारी” माना जाता है. इस कलियुग में हमारा दार्शनिक ज्ञान बहुत कम हो गया है और हम केवल उन्हीं बातों पर विश्वास करते हैं जो हमारी आंखों के सामने होती हैं. इसके अनुसार बाबोसा महाराज हम भक्तों को नंगी आंखों के सामने दर्शन देते हैं. उनके भक्त भी उन्हें अलग-अलग रूपों में देखते हैं. कोई उन्हें भगवान श्री कृष्ण के रूप में पूजता है, कोई उन्हें भगवान श्री विष्णु के रूप में देखता है, कोई उन्हें बजरंग बली या भगवान हनुमान जी के रूप में देखता है. भक्त आमतौर पर उनके इन्हीं रूपों में पूजा करते हैं.

बहुत से लोग इस महान ईश्वरीय शक्ति द्वारा किए गए असंख्य चमत्कारों की बात करते हैं.,अपार आस्था के साथ उनकी पूजा करने वाले भक्तों ने कष्टों के समय उनकी दिव्य कृपा को महसूस किया है, बाबोसा उनकी पूजा करने वाले सभी वरदानों को प्रदान करते हैं. भक्तों को चमत्कारिक रूप से उनकी प्रार्थना के लिए तैयार और तत्काल प्रतिक्रिया मिलती है.

बाबोसा मंदिर का इतिहास || Babosa Maharaj Mandir History

बाबोसा महाराज का जन्म भारत के राजस्थान राज्य के चुरूर गांव में माहेश्वरी वैश्य  कोठारी कुल में हुआ था. उनके पिता का नाम घेवरचंद कोठारी और माता का नाम छगनी देवी कोठारी था. माता छगनी-देवी भगवान श्री हनुमान जी की परम भक्त थीं. एक दिन, अपने भक्तों की प्रार्थना से प्रेरित होकर, वीर बजरंग बली ने खुद को छगनी-देवी के सामने प्रस्तुत किया और उनसे एक इच्छा मांगी. छगनी-देवी ने उनके जैसा उज्ज्वल और बुद्धिमान पुत्र मांगा.

इस घटना के 9 महीने बाद छगनी देवी ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, जिसका नाम पन्ना रखा गया. पन्ना भगवान हनुमान का बहुत बड़ा भक्त था और बचपन में ही उसने बड़ी लीलाएं दिखानी शुरू कर दी थीं. लोग पन्ना की शक्ति को पहचानने लगे और वह उस क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध हो गया. लगभग 18 वर्ष की आयु में, पन्ना ने पृथ्वी लोक को छोड़ दिया और स्वर्ग-लोक (स्वर्ग) में चला गया.

स्वर्गलोक में भी पन्ना भगवान श्री हनुमान जी की ही भक्ति में लीन था. मिंगसर शुक्ल पंचमी के दिन हनुमान जी ने पन्ना को अपनी शक्तियां और वरदान दिए थे. हनुमान जी ने पन्ना का राजतिलक (राज्याभिषेक) किया और कहा कि लोग उन्हें उनके नाम से भी जानेंगे. उसी दिन से पन्ना को बाबोसा महाराज या बालाजी बाबोसा महाराज के नाम से जाना जाने लगा.

बाबोसा महाराज का जन्म “माघ शुक्ल पंचमी” या “बसंत पंचमी” को हुआ था, “भाद्रव शुक्ल पंचमी” को स्वर्ग-लोक के लिए सेवानिवृत्त हुए थे और उनका राज्याभिषेक “मिंगसर शुक्ल पंचमी” पर हनुमान जी द्वारा किया गया था.

बाबोसा महाराज के चमत्कार || Miracles of Babosa Maharaj

प्रचलित प्रथा और प्रचलित मान्यता के अनुसार चूरु धाम के बाबोसा मंदिर में नारीयल बांधने से मनोकामना पूर्ण होती है और वह पूर्ण होती है. भगवान श्री बाबोसा महाराज की शक्ति से असाध्य रोग दूर होते हैं, भूत-प्रेत और तंत्र-मंत्र के कारण होने वाली समस्याएं दूर होती हैं.

आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, हर प्रकार की समस्याओं का निवारण होता है. इस मंदिर से शुद्ध आरती जल (पावन जल), आरती राख (भभूति), और सुरक्षा कवच (तांती) के रूप में एक पवित्र धागा है. भक्तों का दावा है कि उन्होंने इन तीन चीजों के इस्तेमाल से चमत्कार का अनुभव किया है.

बाबोसा महाराज और मंजू बाईसा || Babosa Maharaj and Manju Baisa

बाबोसा दरबार का मुख्य फोकस है – जब कीर्तन के दौरान बाबोसा महाराज चमत्कारिक रूप से गुरु मां श्री मंजू बाईसा के शरीर में प्रवेश करते हैं. भक्त तब भगवान श्री बालाजी बाबोसा महाराज को ‘बाला रूप’ (हनुमान चेहरा) में देख सकते हैं. वे सीधे बाबोसा महाराज को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जो उनके सामने हैं.

ऐसा लगता है कि कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान हनुमान जी अपने भक्तों पर कृपा करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं. इस चमत्कारी नजारे को देखने के लिए श्रद्धालु घंटों इंतजार करते हैं. उनकी गहन भक्ति के कारण, बाबोसा महाराज की शक्तियां केवल श्री मंजू बाईसा के लिए उपलब्ध हैं.

बाबोसा मंदिर दर्शन का समय और मंदिर के बंद होने और खुलने का समय || Babosa Mandir Darshan Time & Mandir Close & open time

बाबोसा धाम मंदिर का सर्दियों में खुलने का समय 5:30 सुबह से 11:30 बजे सुबह तक होता है और शाम को 3:30 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक होता है. बाबोसा धाम मंदिर खुलने का समय गर्मियों में सुबह 4:30 बजे से लेकर सुबह 11:30 बजे तक होता है और शाम को 4:00 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक होता है

बाबोसा महाराज मंदिर कैसे पहुंचे || How to Reach Babosa Mandir

अगर बाबोसा धाम के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले आपको चूरु आना पड़ेगा और वहा से बालाजी बाबोसा मंदिर पास में ही पड़ता है, वहां से आप ऑटो रिक्शा करके और आपने पर्सनल गाड़ी से श्री बाबोसा धाम चूरु तक पहुंच सकते हैं.

बाबोसा धाम का सबसे नियरेस्ट रेलवे स्टेशन चुरु ही है, वहां से आप आसानी से ऑटो रिक्शा करके अपनी पर्सनल गाड़ी से बाबोसा मंदिर तक पहुंच सकते हैं.

अगर आप बस के माध्यम से आना चाहते हैं तो आपको चुरु के लिए पूरे राजस्थान से कहीं से भी आसानी से बस मिल सकती है. वहां से आप चूरु के लिए आ सकते हैं और वहां से नजदीक में ही मंदिर पड़ता है, वहां जाकर दर्शन कर सकते हैं.

Monday, April 24, 2023

RAHUL GARG - MOGLIX FOUNDER - A UNICORN STARTUP

RAHUL GARG - MOGLIX FOUNDER - A UNICORN STARTUP

मोग्लिक्स के यूनिकॉर्न बनने की कहानी:IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, 5 साल गूगल में नौकरी, फिर बनाई 21 हजार करोड़ की कंपनी


ऐसे देश में जहां उद्यम पूंजी धन की बड़ी गुड़िया ओला से क्रेड तक चमकदार उपभोक्ता तकनीक स्टार्टअप का पीछा करती है, मोग्लिक्स एक अपवाद है। अनिवार्य रूप से एक औद्योगिक सामान बाजार, रतन टाटा और टाइगर ग्लोबल समर्थित मोग्लिक्स भारत का पहला बन गया भीतरी प्रदेश गेंडा इस साल की शुरुआत में, व्यापार करने और महामारी के दौरान चिकित्सा आपूर्ति उपलब्ध कराने की चुनौतियों से आकार लिया। उद्यम के पीछे एकमात्र संस्थापक 42 वर्षीय है राहुल गर्ग जिसने अपनी गद्दीदार नौकरी छोड़ दी गूगल एशिया - जहां उन्होंने बिताया पांच साल AdX के प्रमुख के रूप में भारत, समुद्र और कोरिया - अपने उद्यमशीलता के सपनों को पंख देने के लिए। आज, Moglix 500,000 से अधिक SME और 3,000 विनिर्माण संयंत्रों के साथ काम करता है भारत, सिंगापुर, la ब्रिटेन, और संयुक्त अरब अमीरात।

गर्ग के मुताबिक, बी2बी मैन्युफैक्चरिंग ने लंबे समय से कोई इनोवेशन नहीं देखा था। गर्ग ने तकनीक के साथ इस क्षेत्र की फिर से कल्पना करने के लिए कदम रखा। आज, Moglix कुछ सबसे बड़ी निर्माण कंपनियों के साथ काम करता है और उनकी खरीद आवश्यकताओं के लिए एक ही स्थान पर समाधान बन गया है।
 
शीर्ष की यात्रा
 
रतन टाटा के साथ राहुल गर्ग

फरीदाबाद में पले-बढ़े गर्ग ने स्नातक किया इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से ईट कानपुर के साथ अपना करियर शुरू करने से पहले इत्तीम सिस्टम्स बेंगलुरु में। उन्होंने मार्केटिंग और एडटेक कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया आईएबी, सिंगापुर। एक एमबीए प्रतिष्ठित से डिग्री यह हो in हैदराबाद इसके बाद गूगल एशिया के साथ पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। यहां अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विज्ञापन पर उद्यमों के साथ सहयोग किया और खरोंच से $ 2 बिलियन का व्यवसाय बनाने में मदद की। गर्ग के नाम वायरलेस कम्युनिकेशन में 16 टेक्नोलॉजी पेटेंट भी हैं।

2015 तक, गर्ग स्टार्टअप इकोसिस्टम में आगे बढ़ने के लिए तैयार थे और अपनी तरह के एक विनिर्माण क्षेत्र के स्टार्टअप मोग्लिक्स को लॉन्च करने के लिए तैयार थे। उनकी फरीदाबाद जड़ों ने उन्हें देश के विनिर्माण क्षेत्र के लिए अवसरों की नई लहर और इसके सामने आने वाली चुनौतियों का एक दृष्टिकोण दिया। आज, Moglix 40 से अधिक उत्पाद श्रेणियों के साथ औद्योगिक आपूर्ति के लिए एक मंच है और 25,000 से अधिक पिन कोड प्रदान करता है। कंपनी का लगभग 65% व्यवसाय से आता है टियर II और तृतीय शहर, यह भारत का पहला भीतरी प्रदेश गेंडा बना रहा है। कंपनी के अब शहरों में कार्यालय हैं जैसे प्रयागराज, कानपुर, और लखनऊ इसके अलावा चेन्नई और नोएडा.
 
निर्माताओं के लिए अलीबाबा

मोग्लिक्स के लिए गर्ग का नजरिया साफ था। वह चाहते थे कि यह औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र के लिए अलीबाबा जैसा हो। कंपनी की पसंद से सीड फंडिंग जुटाने में कामयाब रही एक्सेल वेंचर पार्टनर्स और बीज प्लस. हालांकि, गर्ग ने बिना किसी सह-संस्थापक के इसे अकेले ही अलग करने का फैसला किया। फोर्ब्स के साथ एक साक्षात्कार में गर्ग ने कहा,

"मैंने पहले (सह-संस्थापकों के साथ) दो बार कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए. इसलिए, इस बार मैं दृढ़ था कि मैं अभी शुरुआत करूंगा और देखूंगा कि आगे क्या होता है। यह एक सचेत विकल्प था और शुक्र है कि मैं तीसरी बार भाग्यशाली रहा।”

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सफलता ने मार्ग प्रशस्त किया मोग्लिक्स बिजनेस और कंपनी के पास अब अपनी छतरी के नीचे एक उद्यम खरीद कार्यक्षेत्र है। Moglix Business 500 से अधिक बड़ी निर्माण कंपनियों की जरूरतों को पूरा करता है और उन्हें खरीद अनुकूलन समाधानों की एक श्रृंखला प्रदान करता है। इसने जैसे उत्पादों के साथ अनुबंध प्रबंधन में भी विविधता लाई है मैं बिल्ली और सी-सहूलियत और इन उत्पादों का उपयोग बड़ी वैश्विक निर्माण कंपनियों द्वारा अपनी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए किया जा रहा है।
 
राहुल गर्ग अपनी टीम के साथ

इस अवसर पर बढ़ रहा है

एक स्टार्टअप संस्थापक के रूप में, गर्ग कहते हैं कि अपने आप को ऐसे लोगों के साथ घेरना महत्वपूर्ण है जो आपकी दृष्टि में विश्वास करते हैं और गतिशील गतिशीलता के अनुकूल हैं। वह निर्णय लेने में तेज है और तेज-तर्रार वातावरण में काम करने के लिए खुद को लगातार प्रशिक्षित कर रहा है। विनिर्माण को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए, गर्ग का मानना ​​​​है कि इस क्षेत्र को पूरी तरह से फिर से परिभाषित करना आवश्यक है और यही मोग्लिक्स ने किया है। फोर्ब्स इंडिया के एक लेख के अनुसार, की दूसरी लहर COVID-19 महामारी भारत में कंपनी ने ऐसे समय में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करने के लिए कदम उठाया जब राष्ट्रीय राजधानी हांफ रही थी।

गर्ग ने खुद महामारी से अपनों को खो दिया था। उन्होंने फोर्ब्स को बताया,

“जब आप इतने कम उम्र के लोगों को खो देते हैं, तो यह बहुत कठिन होता है। हमें पता था कि हमें अभिनय करना है। मुझे ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और बेड के लिए बहुत सारे कॉल आ रहे थे।”

Moglix ने आपूर्ति बढ़ाने में मदद की पीपीई किट और N95 मास्क देश भर में महामारी की पहली लहर के दौरान भी। गर्ग और उनकी टीम ने ऑक्सीजन सांद्रता के निर्माताओं के साथ काम किया और अधिक सांद्रक खरीदने के लिए चीन और जर्मनी के लिए चार्टर उड़ानें भी भेजीं।

Moglix ने यूके में उद्यमों को पीपीई की आपूर्ति करने के लिए यूके में अपने विस्तार को भी तेज किया क्योंकि वे सुरक्षित कार्यस्थल बनाने की तलाश में थे। पिछले कुछ महीनों में, Moglix ने दुनिया भर के 20 से अधिक देशों में PPE की आपूर्ति की है, जिनमें से 5 मिलियन अकेले भारत के 230 से अधिक शहरों में वितरित किए गए हैं।

एक नेता के रूप में, गर्ग अपने कर्मचारियों को खुद के बेहतर और अधिक नवीन संस्करणों की खोज करने के लिए अपने जुनून का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनका मानना ​​​​है कि एक नेता वह है जो अपनी टीम को प्राथमिकता देता है और दूसरों को अपनी क्षमता को विकसित करने और अनलॉक करने का अधिकार देता है।

 राहुल ने IIT कानपुर से इंजीनियरिंग और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से MBA की पढ़ाई की। 5 साल गूगल में जॉब किया। प्रोडक्ट मैनेजमेंट के फील्ड में उनके नाम 16 यूएस पेटेंट हैं।

2015 में उन्होंने नौकरी छोड़कर मोग्लिक्स की शुरुआत की। आज मोग्लिक्स एशिया की सबसे बड़ी B2B ई-कॉमर्स कंपनियों में शुमार है।आज बातें मोग्लिक्स की शुरुआत, जर्नी और कामयाबी के शिखर तक पहुंचने की। तो चलिए शुरू करते हैं…

कुशान: मोग्लिक्स की शुरुआत कब और कैसे हुई। इस नाम के पीछे क्या सोच थी?

राहुल गर्ग: दुनिया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रही है। लोग सबकुछ ऑनलाइन खरीदना चाहते हैं। मैं हमेशा सोचता था कि मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रचर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए भी ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदने की सुविधा होनी चाहिए। इसी सोच के साथ 2015 में मैंने मोग्लिक्स की शुरुआत की।

इसका नाम ‘जंगल बुक' के ‘मोगली' करैक्टर के ऊपर है। यह मोगली की जर्नी को बताता है कि कैसे उसने तमाम मुश्किलों का सामना किया और सबके लिए इंस्पिरेशन बना। उसी तरह की जर्नी बिजनेस की भी होती है। यहां भी ढेर सारी दिक्कतें आती हैं, कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमने कंपनी का नाम मोग्लिक्स रखा।

कुशान: मोग्लिक्स अपने कॉम्पिटिटर्स से कैसे अलग है?

राहुल गर्ग: इंडिया में काफी पहले से लोग होलसेल मार्केट में प्रोडक्ट खरीदते रहे हैं। हमारी कोशिश सिर्फ ऑनलाइन प्रोडक्ट सेल करने की नहीं है। हमारा कॉम्पिटिशन खुद से है कि हम कैसे ऑफलाइन से ऑनलाइन बिहैवियर चेंज कर पा रहे हैं।

हमारी कोशिश है कि टेक्नोलॉजी के जरिए लोग प्रोडक्ट सर्च करें, ऑर्डर करें और फिर हम डिलीवरी करें। जैसे कंज्यूमर्स के लिए जरूरत की चीजें ऑनलाइन खरीदना बिहैवियर बन गया है, उसी तरह बिजनेसेस का भी बिहैवियर डेवलप हो ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदने की।


कुशान: मोग्लिक्स ने पिछले कुछ सालों में तेजी से ग्रो किया है। आपने कस्टमर्स और बिजनेसेस को अट्रैक्ट करने के लिए क्या स्ट्रैटेजी अपनाई?

राहुल गर्ग: हम अपने बिजनेस के बारे में तीन तरीके से सोचते हैं। पहला वैल्यू प्रोवाइड करना, दूसरा रेवेन्यू जेनरेट करना और तीसरा हम किस स्केल पर बिजनेस कर रहे हैं। हम जिस सेक्टर में काम कर रहे हैं, उसका स्केल बहुत बड़ा है।

मैन्यूफैक्चरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर देश की GDP का करीब 20% है। बड़ा सेक्टर होने का फायदा हमें मिला। साथ ही हमारे बिजनेस को आगे बढ़ाने में GST का भी बड़ा रोल रहा। GST लागू होने के बाद ज्यादातर बिजनेस डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने लगे, डिजिटल बिल जेनरेट होने लगे, उससे भी हमारी ग्रोथ हुई।

कुशान: आपने शुरुआती इन्वेस्टर्स का भरोसा कैसे हासिल किया?

राहुल गर्ग: ज्यादातर स्टार्टअप और फाउंडर्स को शुरुआती दिनों में फंड रेज करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन्वेस्टर्स का भरोसा हासिल करना काफी चैलेंजिंग काम है।

हालांकि मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि बिजनेस शुरू करने से पहले मेरे पास 15 साल का एक्सपिरियंस था। गूगल जैसी बड़ी कंपनी में पांच साल काम कर चुका था। इन्वेस्टर्स को लगता था कि मैं बिजनेस को अच्छे से आगे ले जा सकता हूं। इसलिए उन लोगों ने मुझ पर भरोसा किया।

भरोसे की बदौलत ही हमें पहला फंड मिला था। फिर हम आगे बढ़ते गए।

कुशान: भारत में E-कॉमर्स का ट्रेंड कैसा है? क्या आप फ्यूचर में रिटेल कस्टमर्स को भी सर्व करना चाहेंगे?

राहुल गर्ग: देखिए हमारा प्लेटफॉर्म तो लार्ज और स्मॉल बिजनेसेज के लिए है, लेकिन हमारे कई प्रोडक्ट रिटेल कस्टमर्स भी खरीदते हैं। जैसे MCB का इंडस्ट्री में भी यूज होता है और घर में भी। इसी तरह दूसरे प्रोडक्ट्स भी हैं।

रिटेल कस्टमर्स को लगता है कि उन्हें यहां होलसेल प्राइस पर प्रोडक्ट मिल जाता है, इसलिए वे हमारी साइट से खरीदते हैं। हालांकि वे टारगेट कस्टमर नहीं हैं, हमारा कोर सेगमेंट बिजनेसेज ही हैं।


कुशान: B2B स्पेस में ई-कॉमर्स वेबसाइट चलाने की यूनिक प्रॉब्लम्स क्या हैं? उसे कैसे डील करना चाहिए?

राहुल गर्ग: सबसे बढ़ा डिफरेंस है कि कंज्यूमर जब कुछ खरीदता है, तो वह खुद एक डिसिजन लेता है, खुद ही ऑर्डर करता है। उसे किसी से पूछना नहीं पड़ता है या किसी को बताना नहीं पड़ता है कि उसने डिसिजन क्यों लिया।

जबकि B2B में ऑर्डर करने का एक प्रोसेस होता है। एक अप्रूवल चेन होती है। उसके आधार पर ही ऑर्डर होता है। मसलन आप क्या खरीद रहे हैं? किस दाम पर खरीद रहे हैं? उसकी डिलीवरी कब होगी?

लास्ट ईयर आपने किस प्राइस पर और कहां से खरीदा था। इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए हमने टेक्नोलॉजी के जरिए एक प्लेटफॉर्म बनाया है। जहां लोग एक दूसरे से बात करके, कोलैबोरेट करके प्रोडक्ट ऑर्डर कर सकें।

कुशान: क्या कभी ऐसा कोई वक्त आया, जब आपको लगा कि बस अब बहुत हुआ? उस मुश्किल वक्त से आप कैसे निकले?

राहुल गर्ग: अब तक की जर्नी में कई मुश्किलें आईं, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि हम थक गए या हार मान लिया। हम लगातार काम करते रहे। कोरोना से तीन महीने पहले किसी को पता नहीं था कि क्या होने वाला है। फिर भी हमने कोरोना में कई सारी चीजें सीखीं।

अगर मैं लीडरशिप की बात करूं, तो आपको हमेशा उस चीज पर फोकस करना चाहिए, जो आपके कंट्रोल में है। जो चीजें आपके कंट्रोल में नहीं हैं, उनसे घबराना नहीं चाहिए। आपको यह सोचना है कि मुझे क्या करना चाहिए, जिससे एक कदम आगे बढ़ूं, और मुश्किल को हल कर पाऊं।


कुशान: ऐसी तीन बिजनेस और पर्सनल लर्निंग्स, जो यंग एंटरप्रेन्योर्स के लिए काम की हों?

राहुल गर्ग: पहली लर्निंग- एंटरप्रेन्योरशिप कोई फैशन वाली चीज नहीं है कि सब कर रहे हैं, तो आपको भी करना है। यह गलत मोटिवेशन हो सकता है। अगर हम डेटा देखें, तो भारत में पिछले 15 साल में एक लाख से ऊपर स्टार्टअप्स बने हैं और तकरीबन 100 यूनिकॉर्न। इसका हिट रेट देखेंगे तो यह IIT JEE के 15 साल में रैंक हंड्रेड वाला नंबर हो जाएगा।

मैं यही कहूंगा कि लोग एंटरप्रेन्योर्स बनने के सपने देखें, लेकिन उसके लिए सही वजह और सही तैयारी भी होनी चाहिए।

दूसरी लर्निंग- एक एंटरप्रेन्योर की जर्नी लंबी होती है। इसमें वक्त ऊपर-नीचे चलता है। आप लगे रहेंगे, डटे रहेंगे तो वक्त नीचे कम जाएगा, ऊपर ज्यादा। यह जर्नी 5-10 साल या पूरी जिंदगी चलती रहती है। किसी प्रोफेशनल करियर में आप दो साल बाद बोल सकते हैं कि मजा नहीं आ रहा। आप जॉब बदल सकते हैं, पर एंटरप्रेन्योरशिप में ऐसा नहीं हो सकता।

तीसरी लर्निंग- यह सेल्फ-डिस्कवरी की जर्नी है। आप जॉब में सोच सकते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा है, पर यहां आपके पास जिम्मेदारी होती है। आपके साथ इन्वेस्टर्स, कस्टमर्स और इम्पलॉइज जुड़े होते हैं। आप यह नहीं कह सकते कि मैं खुद के लिए कर रहा हूं।

कुशान: हम आपकी पर्सनल लाइफ के बारे में जानना चाहते है। आपकी हॉबीज और पैशन क्या हैं, जो आपको लगातार इंस्पायर करते हों?

राहुल गर्ग: मुझे बचपन से ही स्पोर्ट्स का शौक है। फुटबॉल, बैडमिंटन, बास्केटबॉल खेलना पसंद है। खेल ऐसी चीज है जो आपको टीमवर्क, इक्वलिटी और पैशन जैसी चीजें सिखाती हैं। इसमें कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। इससे ही लीडर्स भी बनते हैं।

दूसरा, एजुकेशन में मेरी खासी दिलचस्पी है। मुझे MBA किए 12 साल हो गए थे। पिछले साल मैंने फिर से पढ़ाई शुरू की, एक एडवांस कोर्स किया। कई लोग कहते हैं कि पढ़ाई से ज्यादा आदमी काम से सिखता है, यह काफी हदतक सच है, लेकिन मेरा मानना है कि हम दोनों से सिखते हैं।

पढ़ाई से नई नॉलेज मिलती है। अगर हम इस नॉलेज का इस्तेमाल करना सिख लेते हैं, तो बहुत अच्छी बात है।

आखिर में मैं बताना चाहूंगा कि मैं एक टर्म को लेकर बहुत पैशनेट हूं। वह है- ‘वेल्थ, वर्क, हेल्थ, लाइफ, कंटिन्यू’। मुझे लगता है वर्क और लाइफ दोनों के लिए हेल्थ भी बहुत जरूरी है।