Wednesday, July 4, 2018

वैश्य समुदाय का मतिभ्रम

ये लेख मैं बहुत दिनों से लिखना चाह रहा था, पर लिख नहीं पाया था. हमारा समाज बहुत बड़ा हैं, करीब २० करोड़ के आसपास जनंसख्या होगी. इनमे अधिकतर तो वैश्य जातिया ही हैं, वे जातिया भी हैं, जो हैं तो वैश्य पर आजकल वे अपने आप को क्षत्रिय बताने लगी हैं.  हमारा वैश्य समाज आज के दिनों में बहुत बड़े मतिभ्रम का शिकार हैं.और ये  भ्रम करीब करीब सभी वैश्य जातियों में हैं. इसी मतिभ्रम के कारण दुसरे वर्णों और जातियों के लोग वैश्यों के बारे में और उनकी जातियों के बारे में, इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानते हैं.सबसे बड़ा भ्रम तो ये हैं, की अधिकतर अग्रवाल, माहेश्वरी, मारवाड़ी समुदाय के लोगो में यह भ्रम हैं की हम लोग ही वैश्य या बनिए हैं, वैश्यों की दूसरी जातियों को ये लोग वैश्य मानते ही नहीं. यह भ्रम इन लोगो का दूर होना चाहिए. वैश्यों में ३५४ के करीब जातिया हैं, जिनका उल्लेख मैंने अपनी पिछली विभिन्न पोस्ट  में किया हैं, उनकी जानकारी आप लोग मेरी इस ब्लॉग में गहराई में जाकर ले सकते हैं. बहुत से वैश्य, जैन समुदाय को वैश्य नहीं समझते हैं, जबकि जैन समुदाय में हम लोगो का रोटी - बेटी का सम्बन्ध हैं. सभी जैन वैश्य हैं, सभी वैश्य जैन नहीं हैं. दुसरा भ्रम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की जाति के बारे में हैं. श्री मोदी जी मोड़ मोदी वनिक समुदाय से आते हैं, जिन्हें मोड़ घांची या तेली - साहू भी कहा जाता हैं, यह समुदाय गुजरात का प्रमुख वैश्य समुदाय हैं. अग्रवालो को इस बात का बहुत बड़ा अहंकार हैं की  हम ही वैश्यों में सबसे बड़ी जाति हैं, जबकि सभी वैश्य जातिया बराबर हैं, कोई छोटी बड़ी नहीं हैं. हम लोगो को यह उंच नीच छोड़कर, सभी वैश्य जातियों में आपस में रोटी - बेटी का सम्बन्ध बनाना चाहिए. एक बात और आती हैं, हम लोग अपना इतिहास भूलते जा रहे हैं, हमारे पूर्वजो, राजा - महाराजो को दूसरी जातियों और वर्णों ने अपना बताना शुरू कर दिया हैं, उत्तर भारत की एक लड़ाकू जाति तो हर किसी राजा महाराजा को अपना बताने पर तुली हुई हैं. वैश्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक,गुप्त मौर्य, गुप्त वंश, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, समुद्रगुप्त, हर्षवर्धन, हेमू इन सबको वह अपना बताने पर तुली हुई हैं. ये  सब हमारे गौरव हैं, हमारे पूर्वज हैं.हमें अपनी पत्र पत्रिकाओं में अपना इतिहास, व पूर्वजो का उल्लेख करना चाहिए. अपने कार्यक्रमों में इन पूर्वजो के चित्र लगाने चाहिए व इनकी महिमा का बखान करना चाहिये, वरना भूल जाओ अपने इतहास को, आने वाले समय में महाराजा अग्रसेन आदि को भी वे लोग अपना बताने लगेगे. सभी वैश्य एक हो, आपस में वैवाहिक सम्बन्ध बनाए, अपनी अपनी जाति की पत्रिकाए निकाले. अपने पूर्वजो का बखान करे. तभी सभी वैश्य जातिया ऊपर उठ पाएगी, सभी वैश्य एक हो इसी में ही देश, धर्म, और वैश्य समुदाय का उत्थान हैं, वन्देमातरम.....
  

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