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Sunday, September 16, 2018

13 Marwaris vaishya Who Are Ruling The World Of Online Business Today

Marwaris vaishya as we know are famous for their great trading abilities and have always proven themselves to be successful businessmen.

Here is a list of 13 such Marwari businessmen who are presently ruling the world of online business.

1. Sachin Bansal & Binny Bansal – Founder, CEO of Flipkart



This Bansal duo founded India’s largest eCommerce platform flipkart.com in the year 2007. Flipkart deals with a variety of products such as books, electronics, clothing and many more.

2. Mukesh Bansal – Founder, CEO of Myntra


Mukesh Bansal, along with Ashutosh Lawania and Vineet Saxena founded Myntra.com, one of the most popular Indian e-commerce company dealing with fashion and casual lifestyle products, in 2007. In the year 2014, Myntra.com merged with Flipkart.com for better business prospects.

3. Rohit Bansal – Co-founder & COO of Snapdeal


Rohit Bansal, together with Kunal Bahl founded Snapdeal.com, another online marketplace in the year 2010.

4. Peeyush Bansal – Founder of Lenskart


Peeyush Bansal, along with Amit Chaudhary and Sumeet Kapahi founded Lenskart.com, an Indian eye-wear online portal in the year 2010. Lenskart deals with a variety of products ranging from, prescription eyeglasses to contact lenses and sunglasses.

5. Manmohan Agarwal – Founder, CEO of Yebhi


Manmohan Agarwal, along with Nitin Agarwal and Rajul Jain founded yebhi.com, an online shopping eCommerce website in the year 2009.

6. Dinesh Aggarwal – Founder, CEO of IndiaMART


Dinesh Agarwal founded indiamart.com in the year 1996. IndiaMART is an online B2B marketplace that matches buyers and suppliers.

7. Bhavish Aggarwal – Founder, CEO of Ola Cabs


Bhavish Aggarwal, along with Ankit Bhati founded OlaCabs in the year 2010 in Bangalore, Karnataka. Olacabs is an online cab assembler and is one of the most rapidly growing taxi hiring firms right now. Here, Taxis can be booked through the OlaCab website, app or through phone calls.

8. Gaurav Aggarwal – CEO of Savaari Car Rentals


Gaurav Aggarwal, started the Savaari Car Rentals in 2006 with the aim of providing rental car services to the customers 24×7 at reasonable rates.

9. Sandeep Aggarwal – Founder & CEO of ShopClues


Sandeep Aggarwal, along with Sanjay Sethi founded the famous shoplcues.com, an online retail website in the year 2011.

10. Manu Agarwal – Founder of Naaptol


Manu Agarwal founded naaptol.com in the year 2008 with the purpose of product research and price comparison of various products. Naaptol also deals with the trading of different departments of products like apparels, electronics, furniture, kitchen appliances, etc.

11. Ritesh Agarwal – Founder & CEO of OYO Rooms


Ritesh Agarwal, founded the Oyo Rooms, a technology driven chain of standardized budget hotels in the year 2013. Oyo Rooms has more than 200 hotels under its brand.

12. Deepinder Goyal – Founder, CEO of Zomato


Deepinder Goyal, in 2008 founded Zomato, an online restaurant search and discovery service, providing information on qualitative restaurants, cafes, nightlife, home delivery and dining-out in various cities of India as well as 21 other countries.

13. Ashish Goel – CEO of Urban Ladder


Ashish Goel, along with Rajiv Srivatsa founded urbanladder.com, an online furniture selling website in the year 2012. Urban Ladder deals with a wide range of products including sofas, beds, wardrobes, dining and many more categories of furniture.

So, whether you are a Marwari vaishya or not, get inspired from these successful and renowned Marwari businessmen and start planning for your own business venture today!

लेख साभार: technoflix.com/13-marwaris-who-made-it-big-in-todays-business-scenario

by Swasti Pujari

Entertainment Social Media Technology

मारवाड़ियो वैश्यों द्वारा संचालित टॉप १०० कंपनी




Monday, August 27, 2018

PANKAJ MALU - पंकज मालू

कोलकाता के पंकज मालू ने तो अपने कम्प्यूटर के बिजनेस में कमाल ही कर दिया। अपनी सीए की लगी-लगाई नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कुछ साल पहले दोस्त से उधारी में कम्प्यूटर सेट और बिना किराए का ऑफिस लेकर बिजनेस में हाथ डाला। आज उनकी 'क्रिएटिव फिंगर्स' कंपनी का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ हो चुका है।


पंकज मालू की कंपनी से इस समय पांच सौ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। पिछले साल कंपनी का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपए रहा था। वह इसे बीस करोड़ तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं।

हमारे देश में कंप्यूटर और आईटी इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। हर किसी के लिए कंप्यूटर एक ऐसी जरूरत बन गया है, जिसका उपयोग पढ़ाई से लेकर ऑफिस तक में हो रहा है। ऐसे में इस इंडस्ट्री का हिस्सा बन कर कमाई का एक बड़ा सोर्स खड़ा किया जा सकता है। इसे ही मद्देनजर रखते हुए कोलकाता के पंकज मालू ने तो अपने कम्प्यूटर के बिजनेस में कमाल ही कर दिखाया है। उन्होंने खुद का कारोबार शुरू करने के लिए अपनी सीए की नौकरी छोड़ दी। अपने मित्र से कम्प्यूटर उधार लेकर इस धंधे में हाथ डाला और चार साल के भीतर वह खुद तो करोड़पति बने ही, सौ और लोगों को रोजगार भी दे दिया है। 

पिछले साल ही उनकी कंपनी का टर्नओवर 5 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका था। आज आईटी सेक्टर में कंप्यूटर इंडस्ट्री से जुड़ा ये सबसे किफायती बिज़नस है। इसमें कैपिटल अमाउंट कम निवेश करना पड़ता है। इस बिज़नस को अच्छे से चलाने के लिए लोकल मार्किट से अच्छी क्वालिटी के कंप्यूटर पार्ट्स लेकर खुद असेम्ब्ल कंप्यूटर बनाए जा सकते हैं। अब तो कंप्यूटर पार्ट्स ऑनलाइन भी मँगाए जा सकते हैं।

कम्प्यूटर के बिजनेस में पंकज मालू की सफलता की यह दास्तान शुरू होती है साल 2005 से। पंकज बताते हैं कि उन्होंने लगभग तेरह साल पहले एक दोस्त नितिश थापा से कंप्यूटर उधार लेकर अपनी 'क्रिएटिव फिंगर्स' कंपनी की शुरुआत की। उधार इसलिए लेना पड़ा कि उनके पास उस समय पैसे नहीं थे। उन्होंने कम्प्यूटर तो उधार ले लिया, अब काम शुरू कैसे करें, क्योंकि दूसरी सबसे बड़ी जरूरत किसी ऐसे ठिकाने की थी। इसमें भी दोस्तों से ही मदद मिली। बिना किराए का एक ऑफिस मिल गया। काम चल निकला। पहले हफ्ते सिर्फ साढ़े छह सौ रुपए का एक अदद ऑर्डर मिला। 

वह पूरी मेहनत के साथ अपनी कंपनी का ऑनलाइन प्रोमोशन करने लगे। क्लाइंट तेजी से बढ़ने लगे। बिजनेस उछलने में सबसे ज्यादा कारगर साबित हुए विदेशी ग्राहक। पहले साल तो कंपनी का टर्नओवर चार लाख रुपए ही रहा लेकिन चौथे वर्ष तक यह 2.5 करोड़ रुपए पहुंच गया। पांचवें साल एक वक्त ऐसा भी आया, जब मंदी के कारण उनका बिजनेस लड़खड़ाने लगा। काम ठप होने का डर सताने लगा लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। काम पर जमे रहे। वर्ष 2012 आते-आते उम्मीदें एक बार फिर परवान चढ़ने लगीं। दो-तीन साल के भीतर ही बिजनेस में पचीस प्रतिशत तक उछाल आ गया।

पंकज मालू की कंपनी से इस समय पांच सौ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। पिछले साल कंपनी का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपए रहा था। वह इसे बीस करोड़ तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। फिलहाल वह अपनी कंपनी की दस प्रतिशत मालिकाना हक साझा करने के साथ ही बिजनेस में इजाफे के लिए दो करोड़ रुपए जुटाने में व्यस्त हैं। वह बताते हैं कि आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में कम्यूटर मॉर्केट तेजी से ग्रोथ कर रहा है। एक मार्केट रिसर्च कंपनी के आकलन के मुताबिक वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) बाजार में अमेरिकी कंपनी एचपी इंक 22.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर रही है। पिछले साल की चौथी तिमाही में पूरी दुनिया में पीसी के शिपमेंट में भारी इजाफा हुआ है। हांगकांग की कंपनी लेनोवो पीसी के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 22 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथे नंबर से छलांग लगाकर दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। कम्प्यूटर बाजार में इस उछाल के पीछे खास वजह आज हर किसी के लिए कंप्यूटर नेटवर्किंग की बढ़ती जरूरत रही है। इन्टरनेट का यूज़ दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा है।

पंकज मालू का कहना है कि ऐसे में साइबर कैफ़े खोलना भी एक अच्छा बिज़नस प्लान साबित हो रहा है। साइबरकैफ़े में आप इन्टरनेट की सुविधा के साथ ही प्रिंटर, फैक्स और फोटो स्टेट की सुविधाएं भी दी जाने लगी हैं। इससे ग्राहक तेजी से बढ़ने लगते हैं। ब्लॉग्गिंग भी अब कम्प्यूटर इंडस्ट्री के रूप में स्टेबलिश हो रही है। ऐसे लोगों के लिए कम्प्यूटर की डिमांड बहुत बढ़ गई है। 

इधर के वर्षों में लैपटॉप की भी डिमांड तेजी से बढ़ी है लेकिन स्थायी जरूरतों में आज भी कम्प्यूटर ही नंबर वन चल रहा है। कम्प्यूटर का बिजनेस शुरू करने के लिए अब तो केंद्र सरकार भी प्रोत्साहित कर रही है। मेरा समय और तरह का था, जब मदद के नाम पर सिर्फ दोस्त मिले। अब कोई कम्प्यूटर कारोबार करना चाहे तो दो-ढाई लाख रुपए की शुरुआत में जरूरत पड़ती है। बैंक से 6.29 लाख रुपए तक लोन मिल रहा है। एक साल कम से कम लगभग छह सौ कंप्यूटर सेट बेचकर करीब तीन लाख रुपए तक की शुद्ध बचत हो सकती है।

साभार: hindi.yourstory.com/read/83ddf1253c/business-started-by-th

Friday, August 24, 2018

SHREE AGRASEN INTERNATIONAL HOSPITAL- श्री अग्रसेन इंटरनैशनल अस्पताल

अग्रवालों का अब तक का सबसे बडा सेवा कार्य





श्री अग्रसेन इंटरनैशनल अस्पताल।यह अग्रवालों द्धारा किया गया अब तक का सबसे बडा जनहित कार्य है । यह अस्पताल दिल्ली के रोहिणी के सैक्टर-22 में बना है, जो ढाई एकड के क्षेत्र में फैला है । इसे कल से चालू कर दिया जायेगा । इसमें करीब पाँच हजार सदस्य जुडे हुये जिनमें 80 % प्रतिशत हरियाणा से आये अग्रवाल है ।इसे बनाने में पाँच सौ करोड रूपये की लागत आई है ।

यहां पर महाराजा अग्रसेन जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है । आशा करता हूँ कि ये आम जनता के काम आये.

साभार: 
Aggarwal Smaj, फेसबुक वाल से साभार.

Sunday, August 19, 2018

स्वतंत्रता सेनानी लाला हुकुमचंद जैन

हुकुमचंद जैन का जन्म 1816 में हांसी (हिसार) हरियाणा के प्रसिद्ध कानूनगो परिवार में श्री. दुनीचंद जैन के घर हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा हांसी में हुई थी। जन्म जात प्रतिभा के धनी हुकुमचंद जी की फ़ारसी और गणित में रुचि थी। अपनी शिक्षा व प्रतिभा के बल पर इन्होंने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र के दरबार में उच्च पद प्राप्त कर लिया और बादशाह के साथ इनके बहुत अच्छे सम्बन्ध हो गये।

1841 में मुगल बादशाह ने इनकों हांसी और करनाल जिले के इलाकों का कानूनगो व प्रबन्धकर्त्ता नियुक्त किया। ये सात साल तक मुगल बादशाह के दरबार में रहे, फ़िर इलाके के प्रबन्ध के लिए हांसी लौट आये। इस बीच ब्रितानियों ने हरियाणा प्रांत को अपने अधीन कर लिया। हुकुमचंद जी ब्रिटिश शासन में कानूनगो बने रहे, पर इनकी भावनायें सदैव ब्रितानियों के विरुद्ध रहीं।

1857 में जब प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा तब लाला हुकुमचंद की देशप्रेम की भावना अंगडाई लेने लगी। दिल्ली में आयोजित देशभक्त्त नेताओं ने इस सम्मेंलन में, जिसमें तांत्या टोपे भी उपस्थित थे, हुकुमचंद जी उपस्थित थे। बहादुर शाह से उनके गहरे सम्बन्ध पहले से ही थे अत: इन्होंने ब्रितानियों के विरुद्ध युद्ध करने की पेशकश की। इन्होंने सबको विश्‍वास दिलाया की वे इस संग्राम में अपना तन मन और धन र्स्वस्व बलिदान करने को तैयार है। इनकी इस घोषणा से बहादुर शाह ने भी हुकुमचंद जी को विश्‍वास दिलाया कि वे अपनी सेना, गोला-बारुद तथा हर तरह की युद्ध सामग्री सहायता स्वरुप पहुँचायेगे। हुकुमचंद जी इस आश्‍वासन को लेकर हांसी आ गये।

हांसी पहुँचते ही इन्होने देशभक्त्त वीरों को एकत्रित किया और जब ब्रितानियों की सेना हांसी होकर दिल्ली पर धावा बोलने जा रही थी, तब उस पर हमला किया और उसे भारी हानि पहुँचाई। हुकुमचंद व इनके साथियो के पास जो युद्ध सामग्री थी वह अत्यंत थोडी थी, हथियार भी साधारण किस्म के थे, दुर्भाग्य से जिस बादशाही सहायता का भरोसा इन्होंने किया था वह भी नही पहुँची, फ़िर भी इनके नेतृत्व में जो वीरतापूर्ण संघर्ष हुआ वह एक मिशाल है। इस घटना से ये हतोत्साहित नहीं हुए, अपितु ब्रितानियों को परास्त करने के उपाय खोजने लगे।

लाला हुकुमचंद जी व उनके साथी मिर्जा मुनीर बेग ने गुप्त रुप से एक पत्र फ़ारसी भाषा में मुगल सम्राट को लिखा, (कहा जाता है कि यह पत्र खून से लिखा गया था) जिसमें उन्हें ब्रितानियों के विरुद्ध संघर्ष में पूर्ण सहायता का विश्‍वास दिलाया, साथ ही ब्रितानियों के विरुद्ध अपने घृणा के भाव व्यक्त्त किये थे और अपने लिये युद्ध सामग्री की मांग की थी। हुकुमचंद जी मुगल सम्राट के उत्तर की प्रतीक्षा करते हुए हांसी का प्रबन्ध स्वयं सम्हालने लगे। किन्तु दिल्ली से पत्र का उत्तर ही नहीं आया। इसी बीच दिल्ली पर ब्रितानियों ने अधिकार कर लिया और मुगल सम्राट् गिरफ़्तार कर लिये गये।

15 नवम्बर 1857 को व्यक्तिगत फ़ाइलों की जांच के दौरान लाला हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग के हस्ताक्षरों वाला वह पत्र ब्रितानियों के हाथ लग गया। यह पत्र दिल्ली के कमीश्नर श्री सी.एस. सॉडर्स ने हिसार के कमिश्नर श्री नव कार्टलैन्ड को भेज दिया और लिखा की - घ्इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाये।

पत्र प्राप्त होते ही कलेक्टर एक सैनिक दस्ते को लेकर हांसी पहुँचे और हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग के मकानों पर छापे मारे गये। दोनों को गिरफ़्तार कर लिया गया, साथ में हुकुमचंद जी के 13 वर्षीय भतीजे फ़कीर चंद को भी गिरफ़्तार कर लिया गया। हिसार लाकर इन पर मुकदमा चला, एक सरसरी व दिखावटी कार्यवाही के बाद 18 जनवरी 1858 को हिसार के मजिस्ट्रेट जॉन एकिंसन ने लाला हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग को फ़ांसी की सजा सुना दी। फ़कीर चंद को मुक्त कर दिया गया।

19 जनवरी 1858 को लाला हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग़ को लाला हुकुमचंद के मकान के सामने फ़ांसी दे दी गई। क्रूरता और पराकाष्ठा तो तब हुई जब लाला जी के भतीजे फ़कीर चंद को, जिसे अदालत ने बरी कर दिया था, जबरदस्ती पकड़ कर फ़ांसी के तख्ते पर लटका दिया गया। ब्रितानियों की क्रोधाग्नि इतने से भी शान्त नहीं हुई। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिये ब्रितानियों ने इनके रिश्तेदारों को इनके शव अन्तिम संस्कार हेतु नहीं दिये गये, बल्कि इनके शवो को इनके धर्म के विरुद्ध दफ़नाया गया। ब्रितानियों ने लाला जी की सम्पत्ति को कौड़ियों के भाव नीलाम कर दिया था।

Thursday, August 16, 2018

स्वतन्त्रता प्रेमी वीर बालक : अमर शहीद उदयचन्द जैन

स्वतन्त्रता प्रेमी वीर बालक : उदयचन्द जैन 

15 अगस्त, 1947 भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है, चूँकि इसी दिन देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ था; पर इसके लिए न जाने कितने बलिदानियों ने अपने जीवन को होम कर डाला। ऐसा ही एक वीर बालक था उदयचन्द, जिसने 16 अगस्त, 1942 को आत्माहुति देकर स्वतन्त्रता की यज्ञ ज्वाल को धधका दिया।

1942 में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन जोरों पर था। हजारों लोगों ने सत्याग्रह कर जेल स्वीकार की। कुछ लोगों को अंग्रेजों की पुलिस घर से ही उठाकर ले गयी। मध्य प्रदेश के मण्डला जिला कांग्रेस के तत्कालीन जिलाध्यक्ष पण्डित गिरजाशंकर अग्निहोत्री को भी पुलिस ने 9 अगस्त, 1942 को रक्षा अधिनियम के अन्तर्गत बन्द कर दिया।

यह समाचार सुनते ही बाजार स्वयंस्फूर्त ढंग से बन्द हो गये। अगले दिन से सभी विद्यालयों में भी हड़ताल हो गयी। मण्डला के आसपास के क्षेत्र में लोगों ने टेलीफोन की तारें काट दीं, रेल की पटरियाँ उखाड़ दीं, कई पुलों को ध्वस्त कर दिया। इससे बाहर की पुलिस मण्डला शहर में नहीं आ सकी।

उन दिनों रेडियो पूरी तरह सरकारी कब्जे में था, वहाँ से निष्पक्ष समाचार प्राप्त करना असम्भव था। अतः लोग बर्लिन रेडियो सुनते थे। यद्यपि उसे सुनने पर भी प्रतिबन्ध था; पर लोग चोरी छिपे उसे सुनकर समाचारों को कानाफूसी द्वारा सब ओर फैला देते थे। दो चार दिन की शान्ति के बाद 15 अगस्त, 1942 को पूरे मण्डला शहर में पुलिस की गाड़ियाँ घूमने लगीं। पुलिसकर्मी घरों व बाजार से लोगों को सन्देह के आधार पर ही पकड़ने लगे।

इससे जनता में आक्रोश फैल गया। लोग डरने की बजाय सड़कों पर निकल आये और शासन के विरुद्ध नारे लगाने लगे। ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ ‘वन्दे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से आकाश गूँजने लगा। लोग शहर के एक प्रमुख चौराहे पर आ गये। इनमें युवकों की संख्या बहुत अधिक थी। पुलिस अधिकारी ने संख्या बढ़ती देख और पुलिस बुला ली।

धीरे-धीरे दोनों ओर से तनाव बढ़ने लगा। कमानियाँ गेट और फतह दरवाजा स्कूल के पास पुलिस ने मोर्चा लगा लिया। 17 वर्षीय मन्नूमल मोदी हाथ में तिरंगा लेकर एकत्रित लोगों को सम्बोधित करने लगे। इस पर पुलिस अधिकारियों ने आगे बढ़कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लोग डरने की बजाय और जोर से नारे लगाने लगे। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

इस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए। कुछ युवकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसी बीच कक्षा 11 के छात्र उदयचन्द ने तिरंगा सँभाल लिया। उसने सबसे पथराव न करने और शान्तिपूर्वक नारे लगाने को कहा। पुलिस अधिकारी ने उससे कहा कि भाग जाओ, अन्यथा गोली मार देंगे। इस पर उदयचन्द ने अपनी कमीज फाड़कर सीना खोल दिया और कहा मारो गोली।

पुलिस अधिकारी भी काफी गरमी में था। उसने गोली चलाने का आदेश दे दिया। पहली गोली उदयचन्द के सीने में ही लगी। खून से लथपथ वह वीर बालक धरती पर गिर पड़ा। पुलिस वाले उसे उठाकर अस्पताल ले गये, जहाँ सुबह होते-होते उस वीर ने प्राण त्याग दिये। अगले दिन उसकी शवयात्रा में पूरा शहर उमड़ पड़ा। उसके बलिदान से केवल मण्डला ही नहीं, तो पूरे मध्य प्रदेश में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन और प्रबल हो गया। जहाँ उस वीर को गोली लगी, उसे आजकल ‘उदय चौक’ कहा जाता हैं.

साभार: राजेश लालवानी की फेसबुक वाल से.....

Sunday, August 5, 2018

वैश्य समाचार -VAISHYA NEWS


साभार: दैनिक भास्कर 

SUNEEL KUMAR GUPTA, Business Expert, Economist, Philanthropist






Sunil Kumar Gupta is a Fellow Member of the Institute of Chartered Accountants of India (ICAI), Life Member of the Indian Council of Arbitration and Full Member of the Institute of Certified Public Accountants of Uganda (CPA-U).

Sunil is an entrepreneur par excellence, philanthropist and a great visionary. He is the Leader of Indo European Business Forum (IEBF) and also the Founder Chairman of SARC & Associates, Chartered Accountants and SARC Foundation and Life Trustee of Rashtriya Antyodaya Sangh, a Public Charitable Trust. He has over 32 years of experience in diverse fields such as Corporate planning, Financing, Taxation, Banking, Education, Investments, Oil & Gas and in project implementations.

An award winning entrepreneur, Sunil believes strongly in Entrepreneurship and recognizes it as the strongest pillar of an empowered economy. He is an angel investor and promotes entrepreneurship across the globe. His role in promoting entrepreneurship and in nation building is evident from his highly recognized and much appreciated business shows – “Business Inside” on national channel DD National (Doordarshan) and “Big Business Ideas” on Zee Business. The shows were centered on educating the youth about the schemes/initiatives of the government as a step towards nation building. The episodes were focused on MSME sector for public at large and some episodes were dedicated to “Make in India”, “Start-Up India, “Stand-Up India, “Mudra Yojana” along with “Credit Guarantee Fund” and many more. Through his shows he had persuaded the youth to enter the entrepreneurial segment with government’s help and support. Both the shows garnered more than eight crore viewership in 104 weeks of their telecast and were among the highest rated TRP shows.

Sunil has also authored some well appreciated books. His bestsellers being:

‘Make in India- A Compendium of Business Opportunities & Laws in India’, the book is a detailed compilation of various business and investment opportunities in India. Also, the book covers the schemes and initiatives showcasing the country as one of the most attractive business destination. The book also caters to the other important segments like Ease of Doing Business, FTP, FDI, State policies, Entry Modes and Funding options and gives a brief overview of Indian demography and economic profile.

‘Window to Success-An Insight into MSME Sector’ This book has been structured to provide the valuable information about MSME sector. It provides vast detail of various government/semi-government/financial institution schemes available for MSME sector. The book covers all major funding and other schemes available to the existing MSMEs and the ones proposed to be incorporated.

‘North East – The Land of Rising Opportunities’ This book provides on overview on how North Eastern Region is an attractive destination for various foreign, domestic investors, entrepreneurs and professionals. Compiled from various Government resources, the book is designed as a business advisor-cum-guide for all those who believe in the incredible growth story of India and aspire to benefit from the boundless business opportunities available in the promising land of a liberalized economy.

Continuing with his deliberate efforts to educate the countrymen, he has written various blogs and articles on Central and State Government’s schemes to provide better understanding of steps taken by government which can be read at https://sunilkumargupta.com/blog/
One Nation-One Tax: Goods and Services Tax (GST);
Companies Amendment Act 2017-Another big move for ease of doing business;
Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY): A Dream Weaver for Everyone’s Home and many more.
Ease of Doing Business (EODB) in India: India on Course For a Big Leap as Top Investment Destination in the World

Sunil has been a crucial part of various international delegations and has participated in various international conferences. In 2012, he also accompanied Former Hon’ble President of India as a part of the business delegation to Seychelles and South Africa, addressing different bilateral issues.

As an economist, philanthropist and Leader of Indo-European Business Forum, Sunil has organized several international and national networking meets and conferences to provide a platform for better business and networking opportunities, formulation of cross border policies and agreements, awareness on various initiatives and policies. Till date Sunil has hosted as much as 27 events in presence of some most prestigious and high power personalities including, Rt. Hon’ble Baroness Sandip Verma of the House of Lords; Ministers, top industrialists and bureaucrats from across the world.

List of international delegations and conferences organized by Sunil Kumar Gupta:
Roundtable Conference on Investment Opportunities in Uganda at SARC Tower, New Delhi on 12th March, 2018
Global Business Pinnacle 2018 at SARC Auditorium, New Delhi on 24th February, 2018
Business Networking Meet on ‘Investment opportunities available in India’ at Boothroyd Room of Portcullis House, London on 17th November, 2017
Global Business Meet on ‘Invest in New India’ held on 17th November, 2017 at The House of Lords, Westminster, London
Business Networking Meet held on 10th November, 2017 at SARC Auditorium, New Delhi
Business Networking Meet of Indo European Business Forum (IEBF) held on 25th November, 2016 at ‘Magnolia’ Habitat World, at India Habitat Centre
Global Business Meet and IEBF Excellence Awards 2016 at Lords Cricket Ground, London on 16th November, 2016
Business Networking Meet on 25th November, 2016, at Indian Habitat Centre, New Delhi
Global Business Meet on ‘Make in India’ & IEBF Excellence Award-2015 at House of Lord, Westminster on 5th October, 2015
‘Role of Chartered Accountants on Make in India’ at Aroma Hotel, Chandigarh, on 1st December, 2015
Global Business Meet & IEBF Excellence Award-2014 at House of Lord, Westminster on 24th September, 2014
India-UK partnering for Sustainable growth at India Habitat Center, New Delhi, India on 1st September, 2013 & release of the Book “BIG Business Guru”
Indo-UK business conference at Clement House, London School of Economics on 31st January, 2013
Business Partnering conference 2013 at India Habitat Center, New Delhi on 9th January, 2013
Reception of Hon’ble Chief Minister of Odisha Mr. Naveen Patnaik, on 28th May, 2012
Opportunities in Infrastructure Investment in India and its Challenges on 28th March, 2012
Face of Indian Banking in UK on 23rd September, 2011
IEBF in association with the BIF organized an event on Film and Media on 16th March, 2011
IEBF in association with CII and CBC on 10th November, 2010
Incredible India, 16th August, 2010
Business India Forum on 22nd July, 2010
Delegation to India on 8th January, 2010
The Netherlands: the stepping stone in the Continental Europe for Indian Business on 8th December, 2009
UK-India Business Relationship Conference, London Chamber of Commerce & Industry on 4th July 2008
Trade Mission to UK-Invitation to UK Entrepreneurs and Indian Law firms on 2nd September, 2008
Judicial Reforms in India on 31st October, 2008
Government of Madhya Pradesh (MP), India and IEBF from 25th – 27th October, 2007

साभार:  sunilkumargupta.com/about

GITA MITTAL CHIEF JUSTICE - J&K HIGHCOURT

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साभार: जागरण 

Saturday, August 4, 2018

Friday, July 20, 2018

ATUL AGRAWAL, PREET SHAH - अतुल अग्रवाल, प्रीत शाह CA टोपर

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अतुल अग्रवाल 


इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने मई-जून में हुई फाइनल, फाउंडेशन व सीपीटी परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं। फाइनल के नतीजे मौजूदा स्कीम व रिवाइज्ड स्कीम के आधार पर जारी किए गए हैं। सीए फाइनल की मौजूदा स्कीम में ऑल इंडिया टॉपर जयपुर के अतुल अग्रवाल बने हैं। उन्होंने 77.25 फीसदी के साथ ऑल इंडिया टॉप किया है। उन्हें 800 में से 618 अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं दूसरे स्थान अहमदाबाद के आगम संदीपभाई दलाल ने 76.88 फीसदी अंक प्राप्त किए। जबकि तीसरे स्थान पर सूरत के अनुराग बागरिया रहे। 800 में से 597 अंक पाकर उन्होंने 74.63 फीसदी अंक प्राप्त किए। सीए फाइनल रिवाइज्ड स्कीम में सूरत के प्रीत प्रीतेश शाह ने 67.75 फीसदी के साथ ऑल इंडिया टॉप किया है। उन्होंने 800 में से 542 अंक प्राप्त किए। दूसरे स्थान पर बंगलूरू के अभिषेक नागराज ने 67.38 फीसदी अंक पाए हैं। तीसरे स्थान पर उल्लाहस नगर की समीक्षा अग्रवाल ने 65.50 अंक प्राप्त किए। फाउंडेशन के रिजल्ट में दिल्ली की स्वाति ने 400 में से 332(83 फीसदी) अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया टॉप किया है। जबकि रायपुर के आयुश अग्रवाल ने 82.75 फीसदी के साथ दूसरा स्थान व हल्द्वानी की स्वलेहा साजिद ने 81.75 फीसदी अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। फाउंडेशन का रिजल्ट 19.24 फीसदी रहा। इसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 21.86 फीसदी रहा, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 17.59 फीसदी है। सीपीटी की परीक्षा में कुल 54,474 परीक्षार्थी बैठे, इनमें से कुल 15,284 ने परीक्षा पास की। इसका पास प्रतिशत 28.06 फीसदी रहा। सीपीटी में 6,916 लड़कियां पास हुईं, जबकि 8368 लड़के पास हुए हैं। 

सीए की फाइनल रिवाइज्ड स्कीम में ग्रुप-1 में 2289 छात्र बैठे थे जिसमें से 286 पास हुए हैं।इस तरह से इस ग्रुप का पास प्रतिशत 11.36 फीसदी रहा। वहीं ग्रुप-2 में 1208 छात्रों ने परीक्षा दी जिसमें 96 पास घोषित किए गए हैं। इस ग्रुप का पास प्रतिशत 7.95 रहा। जबकि बोथ ग्रुप(दोनों ग्रुप में से किसी एक में पास) में सफल होने वाले छात्रों का पास प्रतिशत 9.83 फीसदी रहा है। इसी तरह से फाइनल की मौजूदा स्कीम के नतीजों में ग्रुप-1 के तहत 16.01 फीसदी छात्र सफल रहे हैं, ग्रुप-2 में 13.59 फीसदी व बोथ ग्रुप का पास प्रतिशत 9.09 फीसदी रहा है। 



Friday, July 13, 2018

SANJNA SANGHI - संजना संघी

संजना सांघी जाने-माने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के संग बॉलीवुड डेब्यू करने जा रही हैं। संजना को फिल्म 'द फॉल्ट इन आवर स्टार्स' में सुशांत के अपोजिट रोल में कास्ट किया गया है। बता दें कि 'द फॉल्ट इन आवर स्टार्स' एक हॉलीवुड फिल्म है जिसका हिंदी रीमेक बनाया जाएगा। यह फिल्म फॉक्स स्टार स्टूडियो के बनैर तले बनेगी और इसका निर्देशन मुकेश छाबड़ा करेंगे। अमेरिकन फिल्म 'द फॉल्ट इन आवर स्टार्स' जॉन ग्रीन के इसी नाम के नावेल पर बनी थी। इस नावेल में कैंसर पीड़ित दो प्रेमियों की कहानी बयां की गई है। अगर संजना की बात करें तो वह दिल्ली की रहने वाली हैं और फिलहाल 21 साल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं बॉलीवुड की नई एक्ट्रेस संजना सांघी के बारे में। (All Photos: Instagram) 

संजना बॉलीवुड में पूरी तरह से नई नहीं हैं। वह साल 2011 में आई फिल्म 'रॉकस्टार' में नजर आ चुकी हैं। 


'रॉकस्टार' में संजना ने नरगिस फाखरी की बहन का किरदार निभाया था। 
साल 2017 में रिलीज हुई फिल्म 'हिंदी मीडियम' में भी संजना नजर आई थीं। 


इसके अलावा वह फिल्म 'फुकरे रिटर्न्स' में भी सपोर्टिंग किरदार प्ले कर चुकी हैं। 


मालूम हो कि संजना ने कई ऐड फिल्मों में भी काम किया है।
'द फॉल्ट इन आवर स्टार्स' के डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि उनकी संजना से पहली मुलाकात फिल्म 'रॉकस्टार' के सेट पर हुई थी। 
मुकेश के मुताबिक संजना 'द फॉल्ट इन आवर स्टार्स' में अपने रोल के लिए एकदम परफेक्ट हैं। 


संजना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। 
संजना के फैंस को उनकी आने वाली फिल्म का इंतजार है। 



MUKESH AMBANI - मुकेश अम्बानी एशिया के सबसे अमीर

साभार: दैनिक भास्कर 

Thursday, July 5, 2018

DIVAN TODARMAL - दीवान टोडरमल, वैश्य गौरव

विश्व की सबसे महंगी जगह सरहिंद( फतेहगढ़ साहिब) पंजाब में है। इस स्थान पर गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादों  और माता गुजरी जी का अंतिम संस्कार हुया था। 

दीवान टोडर मल धनी जैन वैश्य  व्यापारी, ने सिर्फ 4 स्केयर मिटर जगह 78000 सोने के सिक्के जमीन पर बिछा कर , 13 दिसम्बर 1705 में मुगल स्म्राजय द्वारा दीवारों में जिंदा गाड़ कर मार दिये गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे सपुत्रों जोरावर सिंह(6 वर्ष) और फतेह सिंह (9 वर्ष) तथा उनकी माता गुजर कौर के अंतिम संस्कार के लिए ये जगह मुगल सल्तनत से खरीदी थी।

हवेली टोडरमल 
टोडरमल जैन की धार्मिक सहिष्णुता और उदारता की प्रेरणास्प्रद कहानी ............(श्री प्रवेश शास्त्री करेली )

2016 में महावीर जयंती के दिन मुझे पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में स्थित गुरु ग्रन्थ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी में एक अन्ताराष्ट्रीय सम्मेलन में जैनदर्शन पर व्याख्यान देने हेतु जाने का अवसर प्राप्त हुआ| फतेहगढ़ साहिब पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिला का मुख्यालय है। यह जिला सिक्‍खों की श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है।

पटियाला के उत्‍तर में स्थित यह स्‍थान ऐतिहासिक और धार्मिंक दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण है। सिक्‍खों के लिए इसका महत्‍व इस लिहाज से भी ज्‍यादा है कि यहीं पर गुरु गोविंद सिंह के दो बेटों को सरहिंद के तत्‍कालीन फौजदार वजीर खान ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था। उनका शहीदी दिवस आज भी यहां लोग पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। फतेहगढ़ साहिब जिला को यदि गुरुद्वारों का शहर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहां पर अनेक गुरुद्वारे हैं जिनमें से गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब का विशेष स्‍थान है।

वहां के जागरूक शोधअध्येताओं ने मुझसे जैनदर्शन पर बहुत अभिरुचि प्रगट की ,वे मुझे वहां के उस प्रसिद्द गुरूद्वारे ले गए जहाँ गुरु गोविन्द सिंह जी के दोनों पुत्रों को वहां के नवाब ने दीवार में जिन्दा चुनवा दिया था |

इसी सन्दर्भ में उन्होंने वहां के दीवान टोडरमल जैन की उदार दृष्टि की जो कथा सुनाई वह मुझे पता ही नहीं थी , उन्होंने बताया कि -

तीन सौ वर्ष पहले सरहिंद में गुरु गोबिंद सिंह जी के दो पुत्रों को दीवार में चिनवाने के बाद उनके व दादी मां के पार्थिव शरीरों को अंतिम संस्कार के लिए नवाब जगह नहीं दे रहा था , उसने शर्त रखी कि अंतिम संस्कार के लिए जितनी जगह चाहिए उतनी जगह स्वर्ण मुहरें बिछा दो , वहां के सुप्रसिद्ध नगर सेठ टोडरमल जैन ने यह जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली, और स्वर्ण मुद्राएँ बिछा दीं , नवाब का लालच बढ़ गया और फिर उसने कहा कि स्वर्ण मुद्राएँ खड़ी करके बिछाओ लिटा का नहीं, टोडरमल जी ने फिर भी शर्त मान ली और खड़ी स्वर्ण मोहरें बिछा दीं और अंतिम संस्कार हेतु जगह ली |
नवाब से स्वर्ण मोहरें बिछाकर भूमि प्राप्त करने वाले दीवान टोडरमल जैन का नाम भी तीर्थ भूमि सरहिंद से जुड़ा है। सामाना में जन्मे व माता चक्रेश्वरी देवी के उपासक टोडरमल जैन जमीनी मामलों के जानकार होने के कारण सरहिंद के नवाब वजीर खां के दरबार में दीवान के पद पर असीन हुए। उन्होंने नवाब से सोने की मोहरों के बदले भूमि लेकर उन तीनों महान विभूतियों का स्वयं अंतिम संस्कार किया। उसी स्थान पर फतेहगढ़ साहिब में गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप बना हुआ है जिसके बेसमैंट का नाम सिख समाज ने स्मृति स्वरूप दीवान *टोडरमल जैन हाल* रखा है।

उसके बाद वे वहां स्थित जैन मंदिर ले गए जहाँ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ जी की अधिष्ठात्री चक्रेश्वरी देवी का एकमात्र ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर, सरहिंद शहर के चंडीगढ़ रोड पर स्थित है। यहां 12वीं सदी से लगातार माता जी के श्रद्धालु विशेषत: खंडेलवाल बंधु अपनी कुलदेवी के रूप में माता जी की पूजा-अर्चना के लिए आते रहे हैं।पास में ही तीर्थंकर आदिनाथ का एक सुन्दर श्वेताम्बर मंदिर भी है|

उन्होंने बताया कि12वीं शताब्दी में मारवाड़ में भीषण अकाल के कारण पंजाब की ओर लोगों ने पलायन किया। जैन खंडेलवाल परिवारों का एक जत्था कांगड़ा में विराजित भगवान ऋषभ देव के दर्शनों के लिए बढ़ रहा था जो सरहिंद में एक रात्रि के लिए रुका। अगली सुबह अधिष्ठात्री कुलदेवी की पूजन शिला वाली बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी। दूसरी रात्रि भी वहीं रुकना पड़ा, तब आकाशवाणी सुनाई दी-मेरा स्थान आ गया है। मेरा भवन यहीं बनवाया जाए। भक्तों ने वहीं पर मंदिर बनवाया और स्वयं भी सरहिंद एवं पंजाब के अन्य शहरों में बस गए परन्तु सरहिंद में माता चक्रेश्वरी देवी के इस स्थान पर निरंतर आते रहे।

मैंने वहां देखा कि तीर्थ परिसर में विशाल धर्मशाला, विश्राम घर, खुले लॉन, भोजनशाला आदि की सुचारू व्यवस्था है। अपने गौरवपूर्ण व स्वर्णिम इतिहास तथा श्रद्धा का व्यापक आधार होने के कारण माता चक्रेश्वरी देवी के इस स्थान को अब अखिल भारतीय जैन तीर्थ होने का भी गौरव प्राप्त है।वहीँ दीवार पर बने टोडरमल जी के दो चित्र भी इस लेख के साथ संलग्न हैं |

इस पूरी कहानी से यह पता चलता है कि जैन समाज अपने से अन्य धर्म और धार्मिकों के प्रति कितनी उदार दृष्टि रखता आया है | जैनों द्वारा इस प्रकार की धार्मिक सहिष्णुता के हजारों किस्से हैं | आज सिर्फ आवश्यकता है उनके इन सार्वजनीन सार्वभौमिक कार्यों को उजागर करने की ,क्यों कि उदारता की एक परिभाषा अपने दान को उजागर नहीं करने की भी रही है ,शायद इसीलिए भी इस प्रकार की नज़ीर दुनिया के सामने नहीं आ पातीं ।

आज साम्प्रदायिक द्वेष के काँटों भरे पेड़ों को ज्यादा सींचने के दुर्भाग्यपूर्ण माहौल के बीच इस प्रकार के उदाहरणों को प्रेरणा एवं सामाजिक सौहार्द के लिए सामने रखना ज्यादा आवश्यक हो गया है ।

साभार: प्रस्तुति - प्रवेश शास्त्री, करेली #9425070265

अग्रवाल राज


साभार: मरुधर के स्वर, पत्रिका, जमशेदपुर 

Wednesday, July 4, 2018

ANSHUMAN GUPTA - पान की दुकान चलाते हैं पिता, बेटे ने अमेरिका में किया नाम रोशन

बिहार से ताल्लुक रखने वाले इंडियन इंस्टीच्युट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे के एक छात्र ने अमेरिका के सैनडिएगो शहर में चल रहे रोबोसब प्रतियोगिता में भारत का नाम रोशन किया है। इस प्रतियोगिता में भारत सहित 11 अन्य देश अमेरिका, कनाडा, जापान, चीन, रूस आदि शामिल थे। इस प्रतियोगिता में भारत को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। भारत की तरफ से अंशुमन गुप्ता के नेतृत्व में 7 इंजीनियरों की टीम ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था। अंशुमन बिहार के शहर ‘गया’ के रहने वाले हैं।


भारतीय टीम की बनाई गई पनडुब्बी ‘मत्स्या’ ने सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए इस प्रतियोगिता में जीत दर्ज की है। एक खबर के मुताबिक इन प्रतिभागियों को स्वचालित पनडुब्बी बनाना था। मानक के हिसाब से इन पनडुब्बियों को समुद्री वातावरण में विभिन्न रंगों के गुब्बारों की पहचान कर उसे छूना था। साथ में इस प्रतियोगिता की यह शर्त भी थी कि इन पनडुब्बियों को कुछ सामग्री एक स्थान से दसूरे स्थान पर पहुचना होगा।

टीम में अंशुमन के अलावा तुषार शर्मा, अंगिता सुधाकर, हरि प्रसाद, जयप्रकाश और संदीप शामिल थे।


अंशुमन के पिता चलाते हैं पान की दुकान तो मां हैं गृहणी, अंशुमन का घर का नाम सोनू है। सोनू के पिता सुनील कुमार गुप्ता की गया में ही पान की दुकान है जबकि मां मीना गुप्ता गृहणी हैं। अंशुमन ने गया कैंट एरिया के डीएवी से दसवीं की परीक्षा पास की थी। क्रेन स्कूल से उसने 11 वीं और 12 वीं की परीक्षा पास की थी। अपने बेटे के इस उपलब्धि से प्रसन्न माता पिता का कहना है कि अंशुमन बचपन से ही मेधावी छात्र था।

अपने माता-पिता और भाई के साथ अंशुमन।

तीन भाईयों में एक अंशुमन का बड़ा भाई अभिराज भी इंजीनियर है। अंशुमन ने भारतीय पनडुब्बी ‘मत्स्या’ के बारे में बतायाः “हमारा लक्ष्य भारत को यांत्रिकीकरण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। भविष्य में इस तरह की पनडुब्बी भारतीय नेवी की मदद कर सकती है। समुद्र में जिस स्थान पर इंसान का पहुंचना मुश्किल है, वहां इस तरह की स्वचालित पनडुब्बी कई तरह का काम कर सकती है, जिससे देश रक्षा के क्षेत्र में और आगे बढ़ सकता है।”


साभार: दैनिक भास्कर , topyaps.com/iit-bombay-underwater-vehicle-matsya

वैश्य समुदाय का मतिभ्रम

ये लेख मैं बहुत दिनों से लिखना चाह रहा था, पर लिख नहीं पाया था. हमारा समाज बहुत बड़ा हैं, करीब २० करोड़ के आसपास जनंसख्या होगी. इनमे अधिकतर तो वैश्य जातिया ही हैं, वे जातिया भी हैं, जो हैं तो वैश्य पर आजकल वे अपने आप को क्षत्रिय बताने लगी हैं.  हमारा वैश्य समाज आज के दिनों में बहुत बड़े मतिभ्रम का शिकार हैं.और ये  भ्रम करीब करीब सभी वैश्य जातियों में हैं. इसी मतिभ्रम के कारण दुसरे वर्णों और जातियों के लोग वैश्यों के बारे में और उनकी जातियों के बारे में, इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानते हैं.सबसे बड़ा भ्रम तो ये हैं, की अधिकतर अग्रवाल, माहेश्वरी, मारवाड़ी समुदाय के लोगो में यह भ्रम हैं की हम लोग ही वैश्य या बनिए हैं, वैश्यों की दूसरी जातियों को ये लोग वैश्य मानते ही नहीं. यह भ्रम इन लोगो का दूर होना चाहिए. वैश्यों में ३५४ के करीब जातिया हैं, जिनका उल्लेख मैंने अपनी पिछली विभिन्न पोस्ट  में किया हैं, उनकी जानकारी आप लोग मेरी इस ब्लॉग में गहराई में जाकर ले सकते हैं. बहुत से वैश्य, जैन समुदाय को वैश्य नहीं समझते हैं, जबकि जैन समुदाय में हम लोगो का रोटी - बेटी का सम्बन्ध हैं. सभी जैन वैश्य हैं, सभी वैश्य जैन नहीं हैं. दुसरा भ्रम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की जाति के बारे में हैं. श्री मोदी जी मोड़ मोदी वनिक समुदाय से आते हैं, जिन्हें मोड़ घांची या तेली - साहू भी कहा जाता हैं, यह समुदाय गुजरात का प्रमुख वैश्य समुदाय हैं. अग्रवालो को इस बात का बहुत बड़ा अहंकार हैं की  हम ही वैश्यों में सबसे बड़ी जाति हैं, जबकि सभी वैश्य जातिया बराबर हैं, कोई छोटी बड़ी नहीं हैं. हम लोगो को यह उंच नीच छोड़कर, सभी वैश्य जातियों में आपस में रोटी - बेटी का सम्बन्ध बनाना चाहिए. एक बात और आती हैं, हम लोग अपना इतिहास भूलते जा रहे हैं, हमारे पूर्वजो, राजा - महाराजो को दूसरी जातियों और वर्णों ने अपना बताना शुरू कर दिया हैं, उत्तर भारत की एक लड़ाकू जाति तो हर किसी राजा महाराजा को अपना बताने पर तुली हुई हैं. वैश्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक,गुप्त मौर्य, गुप्त वंश, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, समुद्रगुप्त, हर्षवर्धन, हेमू इन सबको वह अपना बताने पर तुली हुई हैं. ये  सब हमारे गौरव हैं, हमारे पूर्वज हैं.हमें अपनी पत्र पत्रिकाओं में अपना इतिहास, व पूर्वजो का उल्लेख करना चाहिए. अपने कार्यक्रमों में इन पूर्वजो के चित्र लगाने चाहिए व इनकी महिमा का बखान करना चाहिये, वरना भूल जाओ अपने इतहास को, आने वाले समय में महाराजा अग्रसेन आदि को भी वे लोग अपना बताने लगेगे. सभी वैश्य एक हो, आपस में वैवाहिक सम्बन्ध बनाए, अपनी अपनी जाति की पत्रिकाए निकाले. अपने पूर्वजो का बखान करे. तभी सभी वैश्य जातिया ऊपर उठ पाएगी, सभी वैश्य एक हो इसी में ही देश, धर्म, और वैश्य समुदाय का उत्थान हैं, वन्देमातरम.....