Monday, December 26, 2011

गनिगा (गान्दला), कर्णाटक की प्रमुख वैश्य जाति

Ganiga

Ganiga or Gandla is the name given to oil pressers in the [[India] From ancient time in India, vegetable oils were obtained by crushing oilseeds in village , using an oil-press - or ghana. A ganiga is a person who extracts oil using a ghana. This is a prominent vaishya community of karnatak, & south India.

In Sanskrit literature of about 500 BC there is a specific reference to an oil-press, or Ghanis , although it was never described (by Monier-Williams, M. 1899. A Sanskrit-English dictionary, Delhi, India, Motilal Banarsidass. Reprinted 1963).]n Mysore district Ganiga People speak Kannada,, Tulu, or Telugu as their mother tongue.

Ganiga people mainly live in different parts of Karnataka and Andhra Pradesh. In South Karnataka Ganiga people mainly speak Tulu. Ganiga people are living the following districts of Karnataka, India - Bijapur, BagalkotBelgaum, Bangalore, Bhadravati,Chikamaglur,Chintamani, Gulbarga, Hassan, Haveri, KGF, Kolar, Mulbagal, Mandya, Mysore, Shimoga, Tumkur, Tiptur Udupi, Uttara Kannada.

Besides Karnataka, Ganiga community settled in some parts of Mumbai, Chennai, Delhi,Goa, Hyderabad and many other cities in India.

In oveseas countries members of Ganiga Community have settled in the USA, Canada and UAE.

A majority of Ganiga community continue to remain backward economically due to mechanisation of oil crushing which slowly took away their livelihood in the 1950s. Deprived of this age old profession continued for generations, Ganiga community found their way in business such as setting up of shops, hotels etc. Enterprising Ganiga entrepreneurs set up many Udupi Hotels in Bangalore and other promiment cities in Karnataka. Others took up odd jobs to meet both the ends. Having been remained econmically backward even after 60 years of independence due represenations were made from time to time to the successive Governments. 

2 comments:

  1. bhai g apne bahut sare rajao ko baniya ghoshit kiya hai , jaise Shrikrishan g k pita ko bhi apne baniya likha hai , jabki sabhi jante hai ki vah yadav the . baton ko bada chadakar pesh karne se vishwaniyata khatam hoti hai . apne yadin hamare bahut sare logo ko vaishya ghoshit kiya hai to unke sabut pesh nahi kiye hai .

    sunil Kumar Jain

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    1. सुनील जी आप भी तो खुद बनिया - वैश्य हो. श्रीकृष्ण जी के पिता नन्द राय जी वैश्य थे यह बात विष्णु पुराण में भी आयी हैं. और नन्द राय जी गोऊ पालक और कृषक थे. वैद्क काल से ही गोऊ पालन, व्यवसाय, खेती बाड़ी ये वैश्य के स्वाभाविक कर्म कहे गए हैं. जैसा कि भगवान श्री कृष्ण जी ने गीता में कहा हैं.रही बात और राजाओं कि मौर्य वंश चंद्रगुप्त से शुरू होता हैं. गुप्त या गुप्ता उपनाम केवल और केवल वैश्यों के लिए प्रयुक्त होता हैं. जैसा कि विष्णु पुराण में एक श्लोक में कहा भी गया हैं. ब्राह्मण शर्मास्य, क्षत्रिय वर्मस्य, वैश्य गुप्तस्य. चंद्रगुप्त को मौर्य उपाधि चाणक्य ने दी थी, क्योंकि उसकी माँ का नाम मुरा था. बिन्दुसार उसका बेटा व अशोक उसका पोत्र था. रही बात गुप्त वंश के सम्राटों कि यह तो ऐतिहासिक तथ्य हैं कि गुप्त वंश के सम्राट वैश्य थे. उनका गोत्र धारण था. और धारण गोत्र अग्रवालो के १८ गोत्रों में से एक गोत्र हैं. हर्षवर्धन और यशोवर्धन के बारे में इतिहास में स्पष्ट वैश्य लिखा गया हैं. और सम्राट हेमू विक्रमादित्य तो रौनियार - दौसर वंश के थे. जो कि वैश्य जातिया हैं. ये सभी वृत्तान्त मैंने अपने विभिन्न पोस्ट में डाले हुए हैं. आप कृपया ध्यान से पढ़िए. और ये भी एक सत्य हैं कि वैश्यों कि अधिकतर जातिया पहले क्षत्रिय थी. परशराम जी के समय में उन्होंने शस्त्र छोड़कर व्यवसाय अपना लिया था...

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