Friday, February 20, 2015

Ghanchi Vaishya - घांची वैश्य

घांची (मोढ़ / मोदी / साहू / तेली / गनिगा / गान्दला ) गुजरात, राजस्थान और भारत के विभिन्न भागों में पाए जाने वाली एक वैश्य जाति है। मोढ़ घांची एक अन्य उप-जाति है घांची की तरह से साहू, तेली, गनिगा, बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पाया जाने वाला अन्य पिछड़ा वैश्य वर्ग हैं

घांची नाम भारतीय मूल का हैं, घांची लोग जो की गुजरात में तेल और घी आदि का व्यापार करते हैं. घांची लोग सामान्यतः अहमदाबाद, नवसारी, सूरत, वलसाड, बिलिमोरा में, मोढ़ घांची मूलतः मोढेरा गुजरात से निकले हुए हैं. सौराष्ट्र, अमरेली, बगासरा, बिलखा , भावनगर, जूनागढ़, कलोल, कादी, राजस्थान में, पाली, सॉजत, सुमेरपुर, जोधपुर के कुछ हिस्सों में मोढ़ घांची पाये जाते है । कर्नाटक में गनिगा, गान्दला के नाम से जाने जाते हैं.

नरेंद्र मोदी, भारत के 15 वें प्रधानमंत्री, मोढ़ घांची समुदाय के अंतर्गत आते है, उत्तर प्रदेश और बिहार में तेली जाति गुजरात की घांची जाति के समकक्ष हैं.

    19 comments:

    1. आप को यह बताना चाहता हूं कि राजस्थान में रहने वाली क्षत्रिय घांची जाति का मोद या साहू जाति से कोई सम्बन्ध नहीं है क्यू की राजस्थान की क्षत्रिय घांची जाति जो मूल-तह राजपूत जाति से ही बनी है जिसका हमारे पास लिखित सबूत भी है जबकि साहू ,मोद गनिग व् गंदला मूल तेली जाति है इस लिए आप से निवदेन है कि आप हम सभी क्षत्रिय समाज से अपनी इस ब्लॉग में जबरदस्ती तेलि या वैशय मत बनाये
      हमारी जाती एक राजपूत जाती से मिलकर क्षत्रिय घांची जाती बाबी हे जो की एक सरदार राजपूत थे जो युद्ध के समय में अग्रिम पंक्ति के सैनिक सरदार थे जो बाद में क्षत्रिय घांची बने

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    2. आप को यह बताना चाहता हूं कि राजस्थान में रहने वाली क्षत्रिय घांची जाति का मोद या साहू जाति से कोई सम्बन्ध नहीं है क्यू की राजस्थान की क्षत्रिय घांची जाति जो मूल-तह राजपूत जाति से ही बनी है जिसका हमारे पास लिखित सबूत भी है जबकि साहू ,मोद गनिग व् गंदला मूल तेली जाति है इस लिए आप से निवदेन है कि आप हम सभी क्षत्रिय समाज से अपनी इस ब्लॉग में जबरदस्ती तेलि या वैशय मत बनाये
      हमारी जाती एक राजपूत जाती से मिलकर क्षत्रिय घांची जाती बाबी हे जो की एक सरदार राजपूत थे जो युद्ध के समय में अग्रिम पंक्ति के सैनिक सरदार थे जो बाद में क्षत्रिय घांची बने

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      1. बलवंत सिंह जी राम राम, राजस्थान में घांची अपने आप को क्षत्रिय मानते होंगे, लेकिन वे मूलतः तेली-वैश्य होते हैं. गुजरात के घांची, तेली, उ. प्र., बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीस गढ़ के तेली घांची वैश्य माने जाते हैं, घांची शब्द तेली का ही पर्याय वाची हैं. घांची का मतलब है, घानी या तेल निकालने वाला या तेल का व्यापार करने वाला. https://en.wikipedia.org/wiki/Ghanchi

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    3. परवीन भाई आपने लिंक में विकी पेड़िया का लिंक attached किया हैं मगर हक़ीक़त कुछ ओर है
      Modh मोदी ओर क्षत्रिय घाँची कभी भी एक हीं जाती नहि थी ओर ना होगी
      क्षत्रिय घांचियो में गोत्र चेक कर लो ओर modh मोदीयो में उनके गोत्र चेक कर लो आप हक़ीक़त सामने आजाएगी
      ओर दूसरी बात घाँचीओ में मोदीयो के साथ बेटी वहेवार नहि होता हैं

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    4. श्रीमान् प्रवीण गुप्ताजी आप निश्चय ही बहुत बहुत बधाई के पात्र हैं आपने वैश्य समाज की बहुत उपयोगी व उत्तम जानकारियां दी हैं हमारा समाज पूर्व में बहुत ही बँटा हुआ था यहां तक कि एक ही जाति के लोग भी जैसे। (साहू, ओमर, राठौर) आदि उपनाम गोत्र आदि के कारण एक दूसरे से रोटी बेटी का सम्बन्ध नहीं रखते थे पर मूलतः सभी वैश्य एक ही है समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। वैसे अब समय बदल रहा है अब वैश्य समाज के कुछ जागरूक लोग एक दूसरे के साथ रोटी बेटी का सम्बन्ध भी कर रहे हैं। कुछ सम्बन्धों का तो मैं स्वयं ही गवाह हूँ।

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    5. राजस्थान मे रहने वाली क्षत्रिय(घाँची) जाति क्षत्रिय वर्ण की जाति है यह जान लो आप और जो तुम विकिपीडिया का जिक्र कर हो न वो बकवास है क्यों की विकिपीडिया मे कोई भी कुछ भी लिख सकता है जिसको इतिहास का पता होता नही है और गूगल से कॉपी पेस्ट करते है जैसे तूने किया है
      और तू हमे जबरदस्ती वैश्य क्यों बनाना चाहता है हमे नही बनना वैश्य हम क्षत्रिय वर्ण में ही ठीक हे

      आप से नम्र निवदेन है की आप क्षत्रिय(घाँची) जाति को ओर साहू,तेली,मोढ़घाँची को मिलाने की कोशिश नही कर इनका इतिहास अलग है
      और जिन साहू मोढ़ को तू घाँची बता रहा है वो हमारे शहर मे भी रहते है फिर अलग अलग राज्य में अलग नाम से पुकारने की बात कहा से आ गयी
      हम इन्हें हिन्दू तेली नाम से पुकारते है

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      1. श्रीमान भाटी जी, बड़े भाई इतना नाराज क्यों हो रहे हो, जो आप बदतमीजी पर उतर आये हो. यह सत्य हैं की वैश्यों की कुछ जातिया किसी राज्य में वैश्य, किसी राज्य में क्षत्रिय कही जाती हैं. वैश्य की अधिकतर जातिया पहले क्षत्रिय ही थी. इन लोगो ने धर्मपरिवर्तन करने की बजाये वैश्य कर्म अपना लिया था, पर अपना धर्म नहीं छोड़ा था. आप से मैं कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा हूँ . आप कम से कम भाषा का संयम तो रखे. राजस्थान के राजपूत आप लोगो को क्षत्रिय मानते हैं क्या, आज की तारीख में क्षत्रिय जाती केवल राजपूत हैं.

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    6. मानना नही मानना वो अलग मुद्दा है आप सही कह रहे है भाटी सा हुकुम
      गुस्सा नही करे तो और क्या करें आप फिर अपना वैश्य राग अलाप रहे है यह अब भाटी सा का नही पुरे क्षत्रिय(घाँची) समाज का मुद्दा बन गया है आप फिर भी यह मानने को तैयार नही की हम मूलत क्षत्रिय ही है अलग अलग राज्यो में अलग पहचान का कोई औचित्य ही नही है

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    7. और रही बात मानने की है तो कुछ राजपूत के मानने नही मानने से क्या साबित होने वाला है
      लेकिन आप भी हमे वैश्य बताकर क्या साबित करना चाहते है
      आप को कोई गलत फहमी हुई है क्योंकि हम भी अपने जाति में घाँची लिखते है और साहू भी लिखते है पर हमारे समाज में घाँची का अर्थ होता है अपने दासो से घाणी चलवा कर अपने बंधू राजा की रुद्रमाल मंदिर बनवाने की चिन्ता दूर की इस लिये हम इसे उपाधि मानते है और साहू इस शब्द को अपनी उपजाति मानते है

      और रही बात वर्तमान में सिर्फ राजपूतो को ही क्षत्रिय की तो हमारा समाज हमेसा से क्षत्रिय ही था और सिर्फ उपाधि मिलने के कारण हम अपनी जाति क्षत्रिय(घाँची) लिखते है
      और हमारा समाज को उपाधि मिली 10वी शताब्दी मे और उस समय में राजपूत शब्द था ही नही तब हमने क्षत्रिय(घाँची) शब्द अपना लिया और राजपूत शब्द प्रचलित नही था इसलिये हमने राजपूत नही लिखा

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    8. क्या क्षत्रिय घाँची समाज जनेऊ पहनते हैं?

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    9. वैसे एक सवाल और- क्या क्षत्रिय घाँची समाज जनरल कास्ट है । दक्षिण भारत की वानिया-तेली , वानिया चेट्टीयार और वानिया क्षत्रिय दोनों होते हैं । चोल ,पाण्ड्य,पल्लव ,चेर,नायक इत्यादि राजवंश वानिया क्षत्रिय है । इनको कभी बुरा नहीं लगता पर आप लोगों को बुरा क्यों लग जाता है?

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    10. दक्षिण भारत के वानियार-तैलिक राजवंश  :

      1.चोल वानियाकुल राजवंश :
      शासनकाल - (848-1279) 431वर्ष तक
      क्षेत्रफल - 36 लाख वर्ग किलोमीटर (13,89,968 sq mi)

      (सीमा - वर्तमान में  भारत, श्रीलंका, बंग्लादेश, बर्मा, थाईलैण्ड, मलेशिया, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मालदीव ) 

      इन्होंने हिन्दु धर्म को विदेशों में फैलाया।

      @@@@@@@

      2. चालुक्य तैलव - तेली राजवंश (पश्चिमी) -
      शासनकाल - 479 वर्ष तक
      क्षेत्रफल - 11लाख वर्ग किमी

      1) वातापी के चालुक्य शासक
      (550-753) 203 वर्ष

      2) कल्याणी के चालुक्य वंश
      (973-1189)226 वर्ष

      3) उचेहरा (खोह) के चालुक्य वंश-
      (1331-1381) 50 वर्ष

             .........&&&&&.......

      4) वेंगी का पूर्वी चालुक्य राजवंश (पूर्वी) -
      शासनकाल - (615 -1118ई.) 503 वर्ष

      @@@@@@@

      3.पल्लव वानियार् राजवंश  :
      शासनकाल - (275-901) 626वर्ष

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      4.पाण्ड्य राजवंश के शासक :
      शासनकाल - (575- 1618) 1043 वर्ष

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      5.मदुरै के नायक राजवंश -
      शासनकाल - (1528- 1736) 208 वर्ष

      6.तंजावर के नायक राजवंश
      शासनकाल -(1532–1673) 141 वर्ष

      @@@@@@@@@

      7.चेर(केरलपुत्र) वानियार राजवंश-
      शासनकाल -  कुल 1112वर्ष तक;

      810वर्ष (430ई.पू. -380 इसवी )
      तथा 302 वर्ष (800 ई. -1102ई.)

      क्षेत्रफल - केरल,दक्षिणी तमिल तथा कर्नाटक का दक्षिणी हिस्सा तक ।

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      8.कडवा राजवंश-(1216-1279)

      9.मज़ावर राजवंश-(3री सदी ई.पूर्व)

      10.मलयमान राजवंश-( 2सदी से 3सदी )

      11.संभुवरया राजवंश-(1236-1375ई.)

      12.अदियमान राजवंश-(3सदी पू.-1ई.)

      13.विजयनगर साम्राज्य (1336-1646ई.) यादवों के समय, सेनानायक बनकर मोर्चा सम्भालने में वानियार/तैलिक अग्रणी थे ।इस समय दक्षिण में सबसे ज्यादा सामंत व जमींदार भी तेली/वानियार ही थे ।
      @@@@@.......&.....@@@@@

        1947 के समय दक्षिण के पाँचों राज्यों (तमिलनाडू , केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना ) में 50% से ज्यादा जमींदार वानियार क्षत्रिय ( यानि तैलिक ) थे।

      बौध्दधर्म तथा कूंग-फू को एशिया में फैलाने वाले 22 वर्षिय पल्लव राजकुमार भगवान् बोधिधर्म [जो बौध्दधर्म के 28वें कुलपिता थे ] एवं सम्राट राजेन्द्र चोल इंडोनेशिया ,मलेशिया सहित सात समुंदर पार जाकर हिन्दु धर्म को फैलाने वाले, तेली थे ।

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    11. वैसे एक सवाल और- क्या क्षत्रिय घाँची समाज जनरल कास्ट है । दक्षिण भारत की वानिया-तेली , वानिया चेट्टीयार और वानिया क्षत्रिय दोनों होते हैं । चोल ,पाण्ड्य,पल्लव ,चेर,नायक इत्यादि राजवंश वानिया क्षत्रिय है । इनको कभी बुरा नहीं लगता पर आप लोगों को बुरा क्यों लग जाता है?

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      1. वानिया तेली, वानिया चेट्टियार, वानिया क्षत्रिय बेसिकली एक ही जातिया हैं, यह जातिया क्षेत्र के हिसाब से अपने को क्षत्रिय या वैश्य बताने लगी. कुछ यह भी रहा हैं की, युद्ध के समय में शस्त्र उठा लिए, शान्ति काल में व्यापार अपना लिया, व्यापार करने वाली जाति कोई भी हो उसे वानिया या बनिया कहा गया हैं. अधिकतर वैश्य-बनिया जाति की पूर्व काल में वैश्य ही थी.

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    12. आप सहीं कह रहे हो गुप्ता जी, मैं भी यही सोचता था कि एक ही जातियाँ क्षत्रिय और वैश्य कैसे हो जाते हैं ? आप इसी प्रकार से अपना लेख जारी रखे ।हमारी आपको आपके प्रयास के लिए शुभकामनाएँ !

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    13. तेरे को जो लिखना है वो लिख गुप्ता जी आप भी कुछ भी लिख दो हम क्षत्रिय(घाँची) कल भी क्षत्रिय थे और आज भी क्षत्रिय है और रहेगे और तुम वैश्य व तेली लोग हमे क्यों वैश्य बनाने पर तुले हो क्या अपनी वेश्या समाज की जनसंख्या को ज्यादा बताने के लिए हमे क्षत्रिय(घाँची)समाज को भी क्षत्रिय वर्ण से वेश्य वर्ण में लिखदोगे

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    14. और तू ishwarsahu तुजे क्या पंचायती है बीच में हम क्षत्रिय(घाँची)राजस्थान के लोग मोदी या साहू जाति को अपनी जाति कभी नही मानते हैं और रही बात हमे बुरा लगने की तो तेरे जैसे चन्द लोगो के कहने से हम वैश्य नही होंगे हम क्षत्रिय है और क्षत्रिय ही रहेंगे

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    15. और तू ishwarsahu तुजे क्या पंचायती है बीच में हम क्षत्रिय(घाँची)राजस्थान के लोग मोदी या साहू जाति को अपनी जाति कभी नही मानते हैं और रही बात हमे बुरा लगने की तो तेरे जैसे चन्द लोगो के कहने से हम वैश्य नही होंगे हम क्षत्रिय है और क्षत्रिय ही रहेंगे

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