Friday, October 20, 2017

THE DIAMOND KING - NEERAV MODI - नीरव मोदी

पढ़ाई छोड़ लौटे भारत, 19 की उम्र में कारोबारी दुनिया में रखा कदम, आज हैं सबसे रईस जौहरी


यह कहानी है उस शख्स की जिनके नाम से हम अपरिचित हैं लेकिन देश की आभूषण इंडस्ट्री में उनकी तूती बोलती है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं देश की डायमंड इंडस्ट्री में सबसे बड़े नाम नीरव मोदी की। एक समय राजा-महाराजा, रानियों के गले, बाजूओं और मुकुट को सुशोभित करने वाले हीरे आजकल हर ज्वैलरी की दूकान में मिलने लगे हैं। यह इकॉनमी का असर है। पूरी दुनिया में हीरे की बढ़ती डिमांड जा रही और इसी डिमांड को पूरा करते हैं नीरव मोदी जैसे डायमंड मर्चेन्ट।

कौन हैं नीरव मोदी


46 साल के नीरव मूल रुप से गुजरात के रहने वाले है, जिनकी प्राइमरी शिक्षा बेल्जियम में हुई। उनके गुजराती पिता हीरे के व्यापार से जुड़े थे और इसी धंधे को नीरव मोदी ने पेशा बनाया। नीरव देश ही नहीं, दुनिया के पहले डायमंड बिजनेसमैन हैं, जो अपनी डिजाइंड ज्वैलरी का ब्रांडनेम भी है। लेकिन गुजरात के इस हीरे व्यापारी को शोहरत तब मिली जब क्रिस्टी ज्वैलरी आॅक्शन (2010) में नीरव मोदी की कंपनी फायर स्टार डायमंड का गोलकोंडा नेकलेस 16.29 करोड़ रुपए में बिका और नीरव मोदी ब्रांड को ग्लोबल पहचान मिली। उनके एक और हार ने तहलका तब मचाया जब उसकी कीमत 50 करोड़ रुपये लगाई गई, नीरव मोदी ने अपने ही नाम से 25 बड़े लग्जरी स्टोर दिल्ली से हांगकांग और मुंबई से लेकर न्यूयार्क में खोला है। 2016 की फोब्स सूची के मुताबिक 11,237 करोड़ की संपत्ति के मालिक नीरव देश के सबसे रईस लोगों की गिनती में 46वें पायदान पर खड़े हैं।

कैसे हुई सफ़र की शुरुआत

नीरव मोदी हीरा व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। किशोर उम्र में वे पढ़ाई के लिए व्हॅार्टन स्कूल (यूएस) गए थे, पर 1990 में मामा मेहुल चौकसी का बुलावा आ गया। मात्र 19 साल की उम्र में वह अपने मामा मेहुल चौकसी के पास हीरे के व्यापार का गूढ़ मंत्र सीखने मुंबई पहुंच गए थे। गीतांजलि ग्रुप के सीएमडी मेहुल चौकसी देश में तब ज्वैलरी फैक्ट्री लगा रहे थे। नीरव ने पढ़ाई को अलविदा कहा और गीतांजलि ग्रुप में ज्वैलरी मैन्यूफैक्चरिंग व मार्केटिंग के नुस्खे सीखे।

कारोबारी बारीकियों को सीखने के बाद उन्होंने डायमंड उद्योग में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने का निर्णय लिया और स्थापित की फायर स्टार डायमंड। उन्हाेंने अमेरिकन ज्वैलर्स को लूज डायमंड्स सप्लाय से कारोबार की शुरुआत की पर लक्ष्य था, अपना लग्जरी डायमंड ज्वैलरी ब्रांड बनाना। 1999 में नीरव ने खुद कुछ बड़ा करने की ठानी। उन्होंने दुनिया के नायाब हीरों की खोज शुरू कर दी। सिएरा लियोन से लेकर रूस तक के हीरे की खदानों से उन्होंने हीरे जुटाए और बन गए रेयर डायमंड के सबसे बड़े जौहरी।

खुद के नाम ही है एक ब्रांडनेम


नीरव की कंपनी का नाम यूँ तो फायरस्टार डायमंड के नाम से है पर उनके द्वारा तैयार किये गए डिज़ाइन्स नीरव मोदी के नाम से ही बिकते हैं। लोग उनके द्वारा तैयार किये डिज़ाइन को ख़ास तौर पर पसंद करते हैं और उनकी कीमत भी करोड़ों में होती है। आर्ट व म्यूजिक के शौकीन नीरव अपनी ज्वैलरी खुद डिजाइन करते हैं। उनके कारीगर इस डिजाइन से प्रोटाेटाइप बनाते हैं और अंतिम मैन्यूफैक्चरिंग नीरव के अप्रूवल के बाद ही होती है।

बड़े- बड़े सेलेब्स और बिज़नेसमैन हैं ग्राहक


मौजूदा समय में मुंबई में रह रहे मोदी दुनिया के बड़े डायमंड मार्केट में अपने ज्वेलरी की नुमाइश लगाते हैं। यहां खरीदारों की पहली शर्त यह होती है कि वह कोई खरबपती हो। नीरव मोदी ब्रांड ज्वैलरी की मूल्य रेंज 10 लाख से 50 करोड़ है। उनके ग्राहक हैं दुनिया के रईस और सेलिब्रिटीज। इसकी पुष्टि इसी बात से हो जाती है कि भारत के ही टॉप 10 अमीरों में से 6 उनके नियमित ग्राहक हैं। बॉलीवुड के भी बड़े-बड़े नामचीन कलाकार उनकी ज्वेलरी के मुरीद हैं। उनकी कंपनी फायर स्टार की दुनियाभर में ऑफिस हैं। कंपनी का मौजूदा टर्नओवर 10 हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है।

नीरव चाहते तो उनके पास पिता का बना बनाया कारोबार था लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अपना नाम बनाया और आज देश के सबसे बड़े जौहरी की फेहिस्त में शामिल हैं।

साभार: 


hindi.kenfolios.com/nirav-modi-diamond-merchant/by Sandeep Kapoor10/20/2017

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