TANYA MITTAL - SARI KRASH OF INDIA
प्रिय मित्रो यह चिटठा हमारे महान वैश्य समाज के बारे में है। इसमें विभिन्न वैश्य जातियों के बारे में बताया गया हैं, उनके इतिहास व उत्पत्ति का वर्णन किया गया हैं। आपके क्षेत्र में जो वैश्य जातिया हैं, कृपया उनकी जानकारी भेजे, उस जानकारी को हम प्रकाशित करेंगे।
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Saturday, August 30, 2025
Saturday, August 23, 2025
HISTORY OF KESHARWANI VAISHYA - केसरवानी वैश्य का इतिहास
HISTORY OF KESHARWANI VAISHYA - केसरवानी वैश्य का इतिहास
केसरवानी वैश्य की जन्म भूमि भारत वर्ष के उत्तर कशमीर में है, और यह जाति वतिष्ठा नदी (जो झेलम नदी के नाम से प्रसिद्ध है) के तट पर बसे हुये नगर पामपुर व उन्तीपुर और नीवा और बारामूला के निकट बसा हुआ सुपुर (शिवपुर) और श्रीनगर के पूर्व में आबाद थी पर विशेष कर शुभ नगरी शिवपुर इनके रहने का प्रतिष्ठित स्थान था, जहाँ पर इस जाति के हजार से बारह सौ कुटुम्ब बसते थे। इनका रंग गोरा, कद लम्बा, शरीर सुडौल व बलवान था और भांति-भांति के अस्त्र-शस्त्र बांधते थे और समय-समय पर अपनी साहस व शूरता का प्रकाश किया है, और धन से भी सहायता की है।
इनका मुख्य व्यवसाय केसर की खेती व उसी का व्यापार था। इनका व्यापार चीन, अफगानिस्तान, मिश्र, तिब्बत, यूनान, फारस इत्यादि देशों से और भारत के सब प्रान्तों से होता था और इसमें बड़ी सफलता प्राप्त करके बहुत धन व ऐश्वर्य कमाया था। इनका राजाओं व सरदारों व रईसों में बड़ा मान था, और पूर्ण धर्म व शुद्ध आवरण से जीवन व्यतीत करते थे। इसी व्यवसाय के कारण यह जाति केसरवानी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
कशमीर नरेश महाराज हर्षदवे के समय से महाराजा जयसिंह के राज्य तक लगभग २०० वर्ष में इनका बड़ा मान मर्यादा रहा और वैश्य कर्म-धर्म में श्रेष्ठ रहे। राजा जयसिंह का राज्य कशमीर में सम्वत् ११८५ से १२०६ तक रहा।
महमूद गजनवी का अत्याचार व आक्रमण जगत विख्यात है, जिसके कारण भारतवर्ष की प्रजा पर महान कष्ट पड़ा और बड़े-बड़े शहर, देव स्थान व मन्दिर लूटे और तोड़े गये और समय-समय और स्थान-स्थान पर घोर युद्ध हुआ, और रूधिर नदियों की प्रवाह में बहा। महमूद गजनवी का सबसे पहला आक्रमण गुजरात देश के सोमनाथ मंदिर पर सम्वत् ११८२ में हुआ। यह मन्दिर रत्न व सुवर्ण से इतना जटित व भरपूर था कि रात्रि के समय रत्न जो मूर्ति व मन्दिर में लगे थे दीपक का काम देते थे और सुवर्ण का एक घण्टा नौ मन का मन्दिर में लटकता था। इस मन्दिर को इस म्लेच्छ राजा ने खण्डित करके सारा धन व सम्पत्ति जो इसमें एकत्रित था अपने देश गजनी को ले गया और लौटते समय पंजाब में अपना एक सेनापति शासन हेतु नियुक्त कर गया, और पंजाब १५० वर्ष तक इस तरह गजनी के राज्य अधिकार में रहा।
कशमीर में कलहना पण्डित रचित राजतंरगिणी इतिहास से मालूम पड़ता है कि कशमीर देश पर महाराज जयसिंह के समय में मुहम्मद नामी गजनवी राज्य प्रतिनिधि पंजाबी में सं० ११६० में आक्रमण किया था और मुख्य कार्यकर्त्ता मंत्री भोज को मिला कर कशमीर निवासियों की सेनाओं में घोर संग्राम हुआ पर पठानों की सेना शिवपुर तक पीछा करती आई और केसरवानी नगर शिवपुर को घेर लिया। केसरवानी वैश्यों ने इस दुर्घटना से बचने के हेतु यथा शक्ति पठानों की सेना का सामना किया और कुछ काल के लिये म्लेक्षों को शिवपुर से हटा दिया। इस लड़ाई में बहुत से केसरवानियों को स्वर्ग लाभ हुआ. और जब म्लेक्ष सेना की शक्ति और बल बहुत बढ़ने लगी और भांति-भांति के अत्याचार शिवपुर निवासियों पर म्लेक्षों के द्वारा होने लगे तब शेष केसरवानियों ने अपने धर्म, पथ और मान की रक्षा के लिए शिवपुर को छोड़ने का निश्चय करके रात्रि में देहली को प्रस्थान किया। म्लेक्षराज को जब इनके शिवपुर छोड़ने की खबर लगी तब उसने अपनी सेना को इनका पीछा करने के लिए भेजा। कशमीर की सरहद पर पहुँचते-पहुँचते केसरवानियों से फिर संग्राम हुआ और बहुत से पठान मारे गये जो बाकी बचे कशमीर लौट गये और शेष केसरवानियों की गिनती बहुत थोड़ी हो गयी थी इनके साथ स्त्रियों और बालक भी थे और पंजाब निकट होने के कारण पठानों का खटका इनके हृदय में बना रहा, इस कारण देहली में बहुत काल तक न ठहर सकें और पूर्व दिशा को प्रस्थान किया। इस देहली में महाराजा पृथ्वीराज (जिनको राय पिथौरा भी कहते हैं) राज करते थे। केसरवानी वैश्य महा दुखित और पीड़ित अवस्था में १०० कुटुम्बों के लगभग गाँव-गाँव नगर-नगर घूमते फिरते प्रयाग निकटवर्ती श्री गंगा जी के तट पर बसा हुआ कड़ा मानिकपुर पहुँचे। यह नगर उस समय में बहुत आबाद था और भांति-भांति के व्यापार इसमें होते थे।
देश देशान्तर के व्यवसायी और व्यापारी इसमें एकत्रित होते थे और धन-धान्य से परिपूर्ण गंगा के दोनों सिरों पर बसा हुआ था। यहाँ के पुराने मकानों से पूर्व के चमत्कार का भली भांति ज्ञान होता है। केसरवानी वैश्य इस नगर को देखकर बहुत प्रसन्न हुये और शान्ति पूर्वक निर्वाह करने के लिए गौड़ ब्राह्मण पण्डित श्रेणीधर महाराज जी ने इनकी बड़ी सहायता की और निवास स्थान दिया और केसरवानी वैश्य और उक्त पण्डित जी का प्रेम परस्पर बढ़ा। इसी कारण पण्डित श्रेणीधर के कुटुम्बियों का केसरवानियों में बड़ा मान है।
ऊपर लिखी दुर्घटना का बोध नीचे लिखी सरल कविता से भली-भांति होता है:
सोरठा:
कशमीर शुभ ग्राम। केसरवानी तामें बसें
गजनी कियो संग्राम। द्वादस मास रणसु विते,
कवित्त:
समर में निसंक बंक वांकुरे विराजमान,
सिंह के समान सोहे सेना, बीच गज के।
बांये हाथ मोछन पै ताव देत बार-बार,
मोहम्मद शाह गजनवी कहत धर मारू मारू,
धाये शेष छानवे हृदय में विचार के।
ताके भय भांति कड़े मानिकपुर आये शेष,
पण्डित श्रेणीघर शरण ताके काल को निवारों हैं।
केसरवानी वैश्य का इतिहास
केसर की खेती
यहाँ पर थोड़ा सा केसर की खेती का हाल देना उचित जान पड़ता है। केसर की खेती बड़े आश्चर्य जनक रीति से होती है। इसके खेत पामपुर व उन्तीपुर के करेवा (ऊँची धरती) पर कछुआ के आकार तिनकोन्ने होते हैं। यह ढलवे इस वास्ते बनाये जाते है कि बरसात का पानी ठहर कर केसर के पेड़ को सड़ा न दे। केसर एक तीव्र सुगन्ध वाली व अत्यन्त तरावट देने वाली लच्छेदार वस्तु है, जो बड़े मूल्य से बिकती है। यह केसर के फूल का रेशा है, जो सांप के जीभ की नाई एक फूल में ३ या ४ होता है। फूल कार्तिक के महीने में फूलने लगते हैं। खेतीहार इनको काटते जाते हैं पर यह फिर उसी जगह पर निकलते जाते हैं।
इसका बीज बोया नहीं जाता। इसके अतिरिक्त पेड़ एक बार लगाने से पुश्तहापुश्त (५० से १०० वर्ष तक) बना रहता है। इसकी जड़ २ से ३ फीट गहरी नीचे धरती में फैली रहती है और पेड़ ऊपर को लता की नाई फैलता है। इसका फल, फूल के रेशा (केसर) सब ही बड़ी उपयोगी वस्तु है। परन्तु केसर को हकीम, वैद्य, डाक्टर सब दवा के काम में लाते हैं। दुर्भाग्यवश अब इसकी खेती विशेषतः मुसलमानों के हाथों में आ गई है।
केसरवानियों का दूसरे नगरों में फैलना
केसर बनिज कशमीर तक ही रही क्योंकि कड़े माणिकपुर आने पर यह लोग अपने सुभीते के अनुसार भांति-भांति के व्यापार करने में लगे। कुछ दिन में यहाँ इनकी एक बड़ी बस्ती हो गई। इनमें से कुछ लोग गंगा जी के दूसरे किनारे पर घर बना कर बस गए। यह स्मरण रहे कि गंगा इस पार कड़ा दारानगर है और उस पार कड़ा मानिकपुर बसा है। धीरे-धीरे कुछ लोग प्रयाग, मिर्जापुर व बनारस आये, कुछ व्यापार की खोज में फतेहपुर, कानपुर, लखनऊ इत्यादि नगरों में पहुँचे और जहाँ जिनका ठिकाना लगा वहाँ बस गये। इसी भांति देहातों में पहुँचे और मण्डियों में अनेक प्रकार का व्यापार करने लगे। कड़े से निकट होने के कारण प्रयाग, मिर्जापुर व बनारस में इनका अच्छा सिलसिला जम गया और इन नगरों में धीरे-धीरे इनकी बड़ी बस्ती हो गई। प्रयाग, बनारस, मिर्जापुर, फतेहपुर, कानपुर इत्यादि से बांदा, गाजीपुर, जौनपुर, गोरखपुर, इटावा, फैजाबाद, फरूखाबाद, बरेली, बलिया इत्यादि गये और इसी भांति इस प्रान्त के और नगरों में और रीवां के रियासत की ओर (हनुमान) गए और बिहार (गया व पटना इत्यादि) व बंगाल, मुर्शिदाबाद, वर्धमान, कलकत्ता इत्यादि व मध्यप्रदेश के सूबे (जबलपुर, सागर व नागपुर इत्यादि) में फैले। अब कुल गिनती केसरवानियों की सम्पूर्ण भारतवर्ष में 700000 के लगभग है।
Gulhare Vaishya
Gulhare Vaishya
"गुलहरे बनिया" से आपका मतलब गुलहरे वैश्य समाज से है, जो कि बनिया या वैश्य समुदाय की एक उपजाति है। यह समाज मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में पाया जाता है और खुद को एक अत्यंत पिछड़े समुदाय के रूप में देखता है, जिसके लिए उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किए जाने की मांग भी की है।
वैश्य समाज की उपजाति:
गुलहरे वैश्य समाज, वैश्य वर्ण की एक शाखा है, जो पारंपरिक रूप से व्यापारी वर्ग का हिस्सा है।
पिछड़ापन और मांग:
इस समुदाय ने खुद को वैश्य जातियों में अत्यंत पिछड़ा हुआ बताया है और खुद को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करने की मांग भी की है, जैसा कि Jagran की एक रिपोर्ट में बताया गया है।
कलहार वैश्य से संबंध:
कुछ स्रोतों के अनुसार, गुलहरे वैश्य समाज, कलहार वैश्य की एक उपजाति है, जिन्हें पिछड़े वर्ग में शामिल किया जा चुका है, जबकि गुलहरे वैश्य अभी भी वंचित हैं।
आयोजन:
गुलहरे वैश्य समाज द्वारा होली मिलन जैसे विभिन्न सामाजिक समारोहों का आयोजन भी किया जाता है, जैसा कि हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट में उल्लिखित है।
संक्षेप में, "गुलहरे बनिया" एक विशिष्ट वैश्य उपजाति का नाम है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ापन महसूस करती है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है।
Friday, August 22, 2025
Thursday, August 21, 2025
Satish Golcha Appointed Delhi Police Commissioner
Satish Golcha Appointed Delhi Police Commissioner
,कौन हैं सतीश गोलचा? जो सीएम रेखा गुप्ता पर हमले के एक दिन बाद बने दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर - who is ips satish golcha appointed delhi police commissioner
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस का 26वां पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। साल 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ने एसबीके सिंह का स्थान लिया है। सिंह ने अपने पूर्ववर्ती संजय अरोड़ा की सेवानिवृत्ति के बाद 31 जुलाई को कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार संभाला था। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश गोलचा अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालेंगे। बता दें कि दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को ऐसे समय में बदला गया है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर 'जन सुनवाई' के दौरान हमला किया गया था। नए पुलिस आयुक्त से उम्मीद है कि वे शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री पर हमले की घटना ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कहा, 'आईपीएस सतीश गोलचा को दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है। वर्तमान में दिल्ली जेल के महानिदेशक के रूप में कार्यरत गोलचा इस पद को कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से अगले आदेश तक संभालेंगे।' गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के साथ की गई है। आदेश की प्रति दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।
कौन हैं सतीश गोलचा?सतीश गोलचा वर्तमान में तिहाड़ जेल के महानिदेशक हैं। उन्होंने एक मई, 2024 को यह पदभार ग्रहण किया था। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने विशेष पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था), दिल्ली पुलिस में विशेष आयुक्त (खुफिया) और अरुणाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहित महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस में पुलिस उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त के रूप में भी काम किया है।
Monday, August 11, 2025
आपको मारवाड़ी होने पर गर्व क्यों है
आपको मारवाड़ी होने पर गर्व क्यों है
आपको मारवाड़ी होने पर गर्व क्यों है? क्या आपको लगता है कि मारवाड़ी संस्कृति भारत के अन्य समुदायों की तुलना में अनोखी है?
मैं मारवाड़ी नहीं, बल्कि बंगाली हूँ, लेकिन मेरा मारवाड़ी लोगों से काफ़ी मेलजोल रहा है। उनके समूह का एक हिस्सा जो राजस्थान के मुरवाड़ से बाहर रहता है, उनका जीवन व्यवस्थित, मानक और धार्मिक है। मैंने देखा है कि ओडिशा में, वे दो बैनरों के अंतर्गत आते हैं, राजस्थान परिषद और हरियाणा परिषद; दोनों ही अग्रसेन परिषद के अंतर्गत हैं, यानी वे महाराजा अग्रसेन को उचित सम्मान देते हैं। अग्रसेन महाभारत काल के ऐसे ही एक राजा हैं, जिनका आज भी अनुसरण किया जाता है। महाराजा अग्रसेन से लेकर अब तक के समय में कई कालखंड बीत गए। मारवाड़ी लोगों के दिलों में आज भी शाही करिश्मा जगमगाता है। यहाँ, निओदा में, गुर्जर भी अपने प्राचीन राजा मिहिर भोज का अनुसरण करते हैं।
मारवाड़ी समुदाय भी सती माँ का अनुसरण और पालन करता है, "जहाँ अग्रसेन हैं, वहाँ सतीमा है।" वे खाटू श्याम और तीज-त्योहार भी मनाते हैं।
वास्तव में यह उल्लेखनीय है कि वे जीवन की अभिव्यक्ति को उत्सव के रूप में दर्शाते हैं।
मूल राजस्थान में वे अपने जीवन को नये-नये त्यौहारों से भर देते हैं।
कहावत है, जहां बैलगाड़ी होती है, वहां मरौवारी होती है।
मैंने इसे गहराई से देखा है, अंदरूनी गाँव, जहाँ कुछ भी नहीं है, लगभग 100 साल पहले मारवाड़ी या तो एकल परिवार या कुछ ही परिवारों तक पहुँच गए थे। वहाँ केवल पत्थर, सूखा, जलवायु संकट और स्थानीय लोगों में घोर गरीबी है। बेशक, सामाजिक अन्याय भी है। इसी के सहारे वे जीवित बचे हैं।
इसे हम उनकी गहन जीवन साधना, अस्तित्व की निगरानी कह सकते हैं, मारवाड़ी समाज के कुछ लोग इसमें सफल भी हुए हैं। इसलिए उन्होंने कोई अच्छा व्यवसाय, कोई कारखाना या कुछ ऐसा ही स्थापित कर लिया है।
एक अच्छे मंदिर के निर्माण में उनकी अच्छी हिस्सेदारी है। लेकिन बड़ी चालाकी से वे राजनीतिक पहलुओं और हस्तक्षेप से बचते हैं। यह उनकी विशेषज्ञता का कमाल है। वरना वे बर्बाद हो जाते।
अन्य लोगों की तरह स्थानीय लोगों के मन में भी कई शिकायतें और आपत्तियां रहती हैं, लेकिन वे अपने भीतर विश्लेषण करते हैं, कुछ हद तक, निश्चित रूप से, वे स्वीकार करते हैं या अस्वीकार करते हैं।
वे व्यक्तिगत सुधार में जितने तेज़ हैं, सामाजिक बदलाव में उतने नहीं। केवल अपने एनजीओ और अन्य माध्यमों से ही वे इसमें भाग लेते हैं। यह उनके व्यवसाय के लिए सुविधाजनक है। स्थानीय विधायक या सांसद वगैरह बनने की उनकी महत्वाकांक्षा बहुत कम है।
हम कालाबाज़ारी व अन्य मामलों में उनकी संलिप्तता देख सकते हैं। इसके लिए भी उन्हें नैतिक समर्थन मिलता है। उनके रिकॉर्ड में प्रवर्तन, आयकर वगैरह में घोटालों के बहुत गंभीर मामले दर्ज हैं।
आप क्या कहते हैं, या तो वो या कोई भी भाग लेगा, सिस्टम में कमी है। वरना बंजर हो जाएगा।
मैंने देखा है कि राजनेता जैसे सामाजिक संगठन कभी-कभी उन्हें ऐसा करने का प्रस्ताव देते हैं।
लेकिन गर्मी और ठंड में वे अद्वितीय हैं।
भारत में वे श्रीमद्भागवतम् के एकमात्र संरक्षक हैं। इसके अलावा, हमें गुजराती और अन्य भाषाएँ भी मिल सकती हैं, लेकिन मुख्य हिस्सेदारी उन्हीं की है। इसलिए, हालाँकि वे सभी का संरक्षण करते हैं, फिर भी वे भगवान कृष्ण के अनुयायी हैं। कभी-कभी, मेरे मन में ऐसा आता है कि पूरा हिंदू धर्म मारवाड़ी पर बहुत अधिक निर्भर है।
लेकिन वे तपस्या और तप के लिए नहीं हैं, वे तो दान के लिए हैं।
मैंने 1971 और 1972 के बाद के नक्सलवादी आंदोलन के कुछ हिस्से देखे हैं, 1961 और 1962 के बंगाल के खाद्य आंदोलन के बारे में सुना है, 1971 के बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम को देखा है, ज़्यादातर मारवाड़ी चुप रहे। उस समय और युद्ध समाप्ति के बाद भी उन्होंने सिर्फ़ व्यापार किया। वे इसे बड़ी सहजता से बताते हैं।
वे सामाजिक कठोरता की बजाय घर के आराम को ज़्यादा महत्व देते हैं। वे निवेश करना पसंद करते हैं, जहाँ से लाभ मिल सके।
लेख साभार : नारायण विश्वासदास
अधिकांश मारवाड़ी बनिया परिवार इतने अमीर क्यों हैं?
अधिकांश मारवाड़ी बनिया परिवार इतने अमीर क्यों हैं?
मैं अमीर तो नहीं हूं, लेकिन इतना तो ठीक हूं कि मेरा परिवार 30% कर स्लैब में आता है, हालांकि इस साल मैं 20% कर स्लैब में आऊंगा।
अधिकांश मारवाड़ी परिवारों के अमीर होने के कुछ ही कारण हैं, हालाँकि ये बहुत ही बुनियादी बातें हैं जिनका पालन हर कोई कर सकता है।आपको किसी मारवाड़ी को व्यापार सिखाने की जरूरत नहीं है।
हममें से ज़्यादातर लोग बिज़नेस में हैं। मुझे इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं थी कि मुझे अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी मिलेगी या नहीं, क्योंकि शुरुआत से ही मुझे पता था कि मैं अपनी खुद की कंपनी शुरू करूँगा।
अधिकांश मारवाड़ी ऐसे व्यवसायों में हैं जो सीधे तौर पर व्यवसाय से संबंधित हैं जैसे सीए, सीएस, एमबीए आदि।
हममें से ज़्यादातर लोग किसी खास वस्तु की लागत का हिसाब कुछ ही मिनटों में लगा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हम बहुत होशियार हैं, लेकिन ज़्यादातर हम यही करते हैं। लागत और व्यापार हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग है।
हमारे व्यावसायिक जीवन में लेखाशास्त्र बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
हममें से ज़्यादातर लोग संयुक्त परिवारों में रहते हैं। मैं अपनी शादी के बाद अपने माता-पिता के साथ रहूँगी। इससे काफ़ी खर्च बच जाएगा और साथ ही मैं अपने माता-पिता के साथ रह पाऊँगी ताकि ज़रूरत पड़ने पर मैं उनकी देखभाल कर सकूँ। इसलिए यहाँ अलगाव कोई समस्या नहीं है।
भारत में, मारवाड़ी लोग कर और कानूनी अनुपालन के मामले में नैतिक माने जाते हैं। इससे हमें बैंकों से कम दरों पर ऋण लेने में बहुत मदद मिलती है। वर्तमान में मेरे पिता की फर्म में 9% प्रति वर्ष की दर से क्रेडिट स्कोर है, जो उसी बैंक के अन्य ग्राहकों की तुलना में बहुत कम है।
निजी खर्च ज़्यादा नहीं हैं। हम निजी खर्चों के अलावा घर में पैसा नहीं लाते।
हम अपनी आय के बारे में बहुत गुप्त रहते हैं। मेरे माता-पिता को मेरी वास्तविक आय के बारे में कुछ नहीं पता। दरअसल, मेरे पड़ोसियों को भी यह पता नहीं था कि हम मध्यम वर्ग से काफ़ी ऊपर हैं, जब तक कि मेरे परिवार में मेरी बहन की शादी नहीं हो गई।
निजी जीवन में, मैं कमाता हूँ, बचाता हूँ और निवेश करता हूँ। मेरे तीनों बैंक खातों में 50,000 रुपये से ज़्यादा का बैंक बैलेंस नहीं है, लेकिन निवेश की रकम कहीं ज़्यादा है क्योंकि जैसे ही मैं कमाता हूँ, उसका सीधा निवेश हो जाता है, चाहे वो फिक्स्ड डिपॉज़िट ही क्यों न हो। मैं अपने पास पैसे नहीं रखता।
इसलिए, ये कुछ ऐसी बातें हैं जिनका पालन हमारी संस्कृति में किया जाता है। और किसी न किसी तरह, ये बातें ज़्यादातर परिवारों में आम हैं, जहाँ आय ठीक-ठाक है।
लेख साभार आदित्य मूंदड़ा
मारवाड़ियों बनियों से कौन से जीवन मूल्य सीखे जा सकते हैं?
मारवाड़ियों बनियों से कौन से जीवन मूल्य सीखे जा सकते हैं?
एक ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करते समय मुझे कुछ मारवाड़ियों से बातचीत करने का अवसर मिला, जिनके पास शोरूम, निर्माण व्यवसाय, पेट्रोल पंप आदि थे। यहां कुछ चीजें हैं, जिन्होंने मुझे बहुत प्रभावित किया।उनके पास हमेशा कई व्यवसाय होते हैं, कम से कम वे यह तो सुनिश्चित करते हैं कि परिवार का कोई और सदस्य उन्हें संभाले। मान लीजिए आपके पास मारुति सुजुकी का शोरूम है, आपके भाई के पास हीरो मोटोकॉर्प का शोरूम है, आपके चचेरे भाई का कंस्ट्रक्शन का व्यवसाय है वगैरह।
संयुक्त परिवार व्यवस्था, जहाँ हर किसी का अपना व्यवसाय होता है, उनके लिए बहुत कारगर साबित होती है। निर्माण व्यवसाय में लगा व्यक्ति अपनी कंपनी के लिए टेंडर पास करता था और दूसरी कंपनियों से संपर्क बनाने में भी मदद करता था (हमें हर तिमाही 100 गाड़ियाँ बेचने में मदद करता था)। परिवार के भीतर का यह घनिष्ठ नेटवर्क बहुत मददगार साबित होता है।
मारवाड़ी परिवारों में अरेंज मैरिज से अधिकतर मामलों में स्वाभाविक रूप से व्यवसाय में विविधता आती है।
वे स्थानीय संस्कृति में पूरी तरह डूब जाते हैं। शिलांग में भी आपको मारवाड़ी मिल जाएँगे। वे स्थानीय भाषा धाराप्रवाह सीखते हैं, स्थानीय लोगों से बातचीत करके उन्हें और बाज़ार को समझते हैं, और मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को बहुत गंभीरता से लेते हैं।
वे पैसे और अपने ग्राहकों का सम्मान करते हैं। आप मारवाड़ी को उनके हाथों से पैसे लेने के तरीके से पहचान सकते हैं। वे किसी चीज़ को बनाने के महत्व और पोर्टफोलियो को बड़ा बनाने के लिए उसे फिर से निवेश करने के महत्व को समझते हैं।
वे बहुत चौकस होते हैं। अलग-अलग संस्कृतियों वाले लोगों के बीच रहने से उन्हें बाज़ार के बारे में एक बाहरी व्यक्ति जैसा नज़रिया मिलता है और उन्हें पता होता है कि क्या करना है। वे बिना नाम जाने ही एमबीए की सारी शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं।
वे लोगों के साथ अच्छे से पेश आते हैं और संख्याओं में भी माहिर होते हैं (जैसे "परसूट ऑफ़ हैप्पीनेस" में विल स्मिथ)। उनके परिवार का कोई सदस्य हमेशा हिसाब-किताब संभालता रहता है और कॉमर्स या फाइनेंस में एमबीए की पढ़ाई पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है। जहाँ ज़्यादातर भारतीय पढ़ाई-लिखाई यूँ ही करते रहते हैं और किसी का भी किसी भारतीय कंपनी में शामिल होने से बड़ा कोई मकसद नहीं होता, वहीं मारवाड़ियों के लिए किसी कोर्स में शामिल होने से पहले किसी व्यवसाय में शामिल होने/शुरू करने का दृढ़ इरादा उनकी ओर से एक अलग ही तरह का समर्पण और दृष्टिकोण लेकर आता है।
Sunday, August 10, 2025
गुजराती और मारवाडी बनियों में क्या समानता है?
गुजराती और मारवाडी बनियों में क्या समानता है?
गुजराती और मारवाड़ी, दो वैश्य समुदाय जिनमें बहुत सी समानताएं हैं, क्योंकि वे रंगीन राज्यों से आते हैं ।
1. सामुदायिक जीवन

हम साथ खाते हैं, साथ सोचते हैं, बड़े समूहों में साथ रहते हैं और एक-दूसरे से कुछ ज़्यादा ही प्यार करते हैं। हमारे लिए तो बस समूहों में घूमना-फिरना ही सब कुछ है।
2. सबसे रंगीन शादियाँ जो आपने कभी देखी होंगी...

बेशक, हमारा। सजावट से लेकर कपड़ों, चमक-दमक और खाने तक। इस मामले में कोई भी हमारा मुकाबला नहीं कर सकता!
3) शाकाहार में हमारा विश्वास


हमें अपने शाकाहारी व्यंजन दिल से बहुत पसंद हैं, ज़ाहिर है क्योंकि हम उन्हें बहुत अच्छी तरह बनाते हैं! हमारे घर आइए और आपको यहाँ उपलब्ध विविध प्रकार के भोजन देखकर आश्चर्य होगा, वह भी पूरी तरह से शाकाहारी!
4)हमारे बेहतरीन कपड़ों की बात करें!

वे खूबसूरत मिरर लहंगे , बैकलेस चोली और चटक रंगों में खूबसूरत लहरिया , हम जानते हैं कि उन्हें कैसे चमकदार और खूबसूरत बनाया जाए!
5. उद्यमिता हमारे खून में तैरती है

कोई तो कारण होगा कि क्यों कुमार एम. बिड़ला और मुकेश अंबानी जैसे लोग फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में अक्सर शामिल होते हैं!
6. लंबे समय तक चलने वाले त्यौहार समारोह...

हमारे यहाँ एक दिन के कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि एक-दो हफ़्ते तक चलने वाले धमाकेदार उत्सव होते हैं जिनका हम बेसब्री से इंतज़ार करते हैं! नवरात्रि के दौरान गरबा और अन्य सामूहिक लोक नृत्य तो ज़रूर देखने लायक होते हैं!
7) हमारे पूर्वज भी यही भाषा बोलते थे
मारवाड़ी और गुजराती एक ही पश्चिमी-इंडो आर्यन भाषा से आती हैं! बस इसका विश्लेषण किया गया है।
8) हम असली खोजकर्ता हैं!
ज़ाहिर है, हम वहीं जाते हैं जहाँ काम के अवसर होते हैं। चाहे वो किसी अनजानी और अनजानी जगह पर ही क्यों न हो। अगर हमें कोई संभावना नज़र आती है, तो हम वहाँ चले जाते हैं!
Friday, August 8, 2025
GUJRAT PATEL CASTE HISTORY - पटेलों का इतिहास
GUJRAT PATEL CASTE HISTORY - पटेलों का इतिहास
पटेल मुख्यतः गुजराती हैं और गुजराती भाषा बोलते हैं। गुजरात और अपने गृहनगरों व गाँवों से उनका गहरा सामाजिक लगाव है। गुजरात और भारत के अन्य हिस्सों के अलावा, पटेल दुनिया भर में फैले हुए हैं और अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, पूर्व, मध्य और दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, सुदूर पूर्व और मध्य पूर्व जैसे देशों में सफलतापूर्वक बस गए हैं। वास्तव में, आज आपको दुनिया के लगभग हर हिस्से में कोई न कोई पटेल मिल ही जाएगा। पटेल समुदाय गुजरात की आबादी का 20 प्रतिशत है और सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में एक प्रभावशाली शक्ति है। अधिकांश पटेल हिंदू धर्म के अनुयायी हैं, जो 5000 साल पुरानी संस्कृति और सबसे प्राचीन सभ्यता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रवास करने के बावजूद, पटेलों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत को संजोकर रखा है। उन्हें अपने पैतृक मूल्यों पर गर्व है और वे पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाते हैं। तो पटेल कौन हैं? पटेल शब्द 'पटेदार' से निकला है, जो रियासतों द्वारा फसलों का हिसाब रखने के लिए रखा जाने वाला एक अभिलेखपाल होता था, जबकि 'पटे' ज़मीन का एक टुकड़ा होता है। ज़ाहिर है, उनकी पाटेदारी अब फ़सलों से आगे बढ़कर देशों और महाद्वीपों तक फैल गई है। वे काफ़ी लोकप्रिय हैं और उन्होंने सिर्फ़ पाटे से कहीं ज़्यादा कमाया है। वे भारत से हैं, मूल रूप से गुजरात राज्य से। भारत की पुरानी जाति व्यवस्था के तहत, पटेल वैश्य या व्यापारी जाति के थे। व्यापारी जाति के सदस्य होने के नाते, वे सचमुच बेचने के लिए ही पैदा हुए थे।
पटेल एक लोकप्रिय उपनाम है और विभिन्न जातियों के लोग इस उपनाम का प्रयोग करते हैं। मेहसाणा, अहमदाबाद और सूरत जैसे प्रमुख शहरों में पटेल हैं। राजपूत, गुज्जर और ख्वाजा पटेल मुख्यतः बड़ौदा जिले में पाए जाते हैं। कच्छी लेवा पटेल, जिनका मूल मुख्यतः कच्छ और चारोतार जिलों से है, पाटीदार पटेल गुजरात के खेड़ा के समृद्ध कृषि जिले से आते हैं। मटिया पाटीदार पटेल नवसारी और बारडोली तालुकाओं और भारत के अन्य भागों जैसे सूरत, इंदौर, वडोदरा, अहमदाबाद में पाए जाते हैं। दक्षिण गुजरात के कोली पटेल और ढोडिया पटेल भी पटेल को अपने अंतिम नाम के रूप में प्रयोग करते हैं। पटेल उपनाम पारसी, ब्राह्मण और गुजराती मुसलमानों में भी पाया जाता है, जो मुख्यतः भरूच, सूरत, कच्छ और मुंबई से आते हैं। लेवा पटेलों को भगवान राम के पुत्र लव (या केवल लव साम्राज्य के निवासी) का वंशज कहा जाता है, जबकि कड़वा पटेलों को भगवान राम के पुत्र कुश (या केवल कुश साम्राज्य के निवासी) का वंशज कहा जाता है। इन दोनों समूहों की अधिकांश आबादी उत्तरी गुजरात के मेहसाणा और खेड़ा ज़िलों में रहती है। लेवा पटेल और कड़वा पटेल व्यापार और कृषि में अपने उद्यमशीलता कौशल के लिए जाने जाते हैं, जिनकी गुजरात में मज़बूत पकड़ है और जिन्होंने दुनिया भर में अपना नाम बनाया है। पटेलों के विभिन्न समूहों के बीच धार्मिक और वैचारिक मतभेद हैं। उनके अपने सामाजिक समाज और विभिन्न स्थानों पर मंदिर हैं जहाँ वे रहते हैं। पटेल समुदाय अपने 'गोल' या दायरे में ही विवाह करने की सदियों पुरानी परंपरा का पालन करता था, लेकिन आर्थिक स्थिति, वैश्विक प्रभाव, साक्षरता और शिक्षा में बदलाव के साथ, अब बदलाव हो रहे हैं और पटेल तेज़ी से गोल के बाहर विवाह कर रहे हैं। लगभग 1000 ईस्वी में, अफ़गानिस्तान के राजा ने पंजाब पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया। उसने और उसके सैनिकों ने पंजाब के लोगों पर घोर अत्याचार किए। हिंदुओं को बलपूर्वक इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया गया। उन्होंने हमारी कई महिलाओं का अपहरण किया और उनके साथ बलात्कार किया, जिससे उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। कुछ महिलाओं को इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया और कुछ सैनिकों ने उनसे अपनी पारंपरिक इस्लामी पद्धति से विवाह कर लिया। अफ़ग़ान राजा और उसके सैनिकों के अत्याचारों से बचने और महिलाओं को बचाने के लिए, हमारे पूर्वजों ने पंजाब छोड़ दिया। वे गुजरांवाला जिले (वर्तमान में पाकिस्तान में) के लेआवा और कराड गाँवों के कनबी थे। ये कनबी लोग अपनी बैलगाड़ियों पर अपना सामान लेकर मारवाड़ आए थे। उस समय मारवाड़ पर परमार राजाओं का शासन था और राजा भोज की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। यही कारण था कि हमारे पूर्वज उस क्षेत्र की ओर आकर्षित हुए। उस समय मारवाड़ की आबादी बहुत घनी थी और पर्याप्त भूमि प्राप्त करना संभव नहीं था। इसलिए मारवाड़ में कुछ समय रहने के बाद, जब उन्हें पता चला कि वहाँ बहुत सी बंजर भूमि उपलब्ध है, तो वे खंभात के खेड़ा जिले के लिए रवाना हो गए और यहीं से वे गुजरात आ गए। इस समय गुजरात पर सोलंकी शासन कर रहे थे। सोलंकी राजा के अनुरोध पर,पटलाद तालुका की बंजर ज़मीन हमारे पूर्वजों को दान में दी गई थी। प्रत्येक परिवार को लगभग एक गाम (गाँव) के बराबर ज़मीन दी गई और कन्बी लोग इस ज़मीन पर बस गए। कन्बी लोग मेहनती होने के कारण इस ज़मीन पर खूब खेती करते थे और उन्हें बहुत लाभ होता था। तब यह तय हुआ कि ज़मीन के बदले में फसल का बारहवाँ हिस्सा राजा को दिया जाएगा। लेकिन प्रत्येक किसान से यह बारहवाँ हिस्सा वसूलने की लागत बहुत ज़्यादा थी, इसलिए राजा ने एक समझौता किया और प्रत्येक गाँव के लिए एक मुखिया नियुक्त किया। ये मुखिया किसानों पर नियंत्रण रखते थे और राजा के लिए उनसे फसल वसूलते थे। ज़मीन का यह समझौता मुखिया के परिवार के बुजुर्गों के पास सुरक्षित रहता था। राज्य और फसलों का रिकॉर्ड पट (रिकॉर्ड या लॉग बुक) में रखा जाता था और जो व्यक्ति इन रिकॉर्डों को दर्ज करता था और रखता था उसे "पटलिख" कहा जाता था। पटलिख का संक्षिप्त रूप पटल और फिर पटेल हो गया। लेवा गाँव से आने वाले लोग लेवा (लेवा) कानबी के नाम से जाने गए और कराड़ गाँव से आने वाले लोग कराड़वा कानबी बन गए। कराड़वा का संक्षिप्त रूप कड़वा कानबी हो गया। कड़वा कानबी गुजरात के उत्तरी भाग में बस गए और लेवा कानबी खंभात के आसपास बस गए। गुजरात में बसने वाले लोग बहुत मेहनती और बुद्धिमान थे और किसान बन गए और थोड़े समय में ही गुजरात समृद्ध होने लगा। समय के साथ, राजा और राज्य बदले और साथ ही राजाओं को दी जाने वाली फसलों का हिस्सा भी बदला। कृषि राज्यों की आय का मुख्य स्रोत थी और वे खेतों से होने वाली आय से जीवित रहते थे। इसलिए भुगतान को सभी फसलों की खेती के छठे हिस्से तक बढ़ा दिया गया। बाद में खंभात क्षेत्र मौर्यवंशियों का राज्य बन गया और किसानों से ली जाने वाली फसल हर साल अलग होती थी। यह कभी ऊंचा तो कभी नीचा होता था और राज्य की जरूरत के अनुसार तय होता था और इसलिए राज्य का यह हिस्सा चारोतर (चाड से ऊपर चढ़ो और उतार से नीचे चढ़ो) के नाम से जाना जाने लगा। चारोतर लेवा कंबी का घर है और चारोतर पाटीदार पटेलों की जड़ें गुजरात के इस बहुत समृद्ध कृषि क्षेत्र से हैं। 1300-1400 ईस्वी के बीच, दिल्ली के राजा अलाउद्दीन खिलजी और उसके सैनिकों ने गुजरात के इस हिस्से पर कब्जा कर लिया और हिंदू राजाओं के शासन को समाप्त कर दिया। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सूबाओं (लिपिकों) से कहा कि किसानों की ताकत उनके धन में है और इसलिए किसानों को पूरी तरह से कंगाल किए बिना उनसे जितना संभव हो उतना धन निचोड़ो। किसानों के लिए केवल उतना ही छोड़ो जितना वे अगले वर्ष की फसलों के लिए बो सकें। प्रत्येक किसान से पचास प्रतिशत फसल का भुगतान लिया जाता था खेती को बेहतर बनाने के लिए, उन्होंने हर गाँव से सबसे अच्छे किसान को चुना और उन्हें ज़मीन सौंप दी। बदले में, उन्होंने चुने हुए किसानों से खेती को बेहतर बनाने का आग्रह किया।उस गाँव को सुरक्षा प्रदान करें और गाँव को समृद्ध बनाएँ और राज्य को एक निश्चित नकद आधार (बंधी आवक) पर भुगतान करें। इस तरह राज्य को फसल का एक हिस्सा देने की परंपरा समाप्त हो गई और भूमि का स्थायी स्वामित्व प्रदान किया गया। जिनके पास भूमि का स्वामित्व होता था उन्हें पाटेदार कहा जाता था, जो बाद में कनबी पाटीदार और फिर पटेल बन गया। इस तरह एक बार फिर पटेल पाटीदार प्रत्येक गाँव के मालिक बन गए। तब से पटेल पाटीदार खुद को पाटीदार के रूप में बनाए हुए हैं और खेतिहर मजदूरों को काम पर रखकर खेती करते हैं।
इस प्रकार गुजरात के गाँव एक बार फिर समृद्ध होने लगे। लगभग 1600 ई. में अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त की। अकबर ने "टोडरमल" से भूमि की माप करवाई और "विंधोती" प्रणाली (भूमि कर) की स्थापना की। यही आज की "मयशूल" प्रणाली है। जब कानबी पहली बार पेटलाद तालुका, भद्रन तालुका और अन्य गाँवों में बसे पहले गाँवों में से एक से खेड़ा आए, तो उनके गाँवों में सौजित्रा, नार भद्रन, करमसाद, विरसाद, धर्मज आदि शामिल थे। धीरे-धीरे उनकी आबादी बढ़ती गई और इससे घरों और कृषि भूमि की कमी हो गई। शुरुआत में प्रत्येक परिवार के पास लगभग 5000 "विगा" ज़मीन थी, लेकिन जब वह ज़मीन अगली पीढ़ियों को हस्तांतरित होती गई, तो प्रत्येक परिवार का हिस्सा कम होता गया, जिससे परिवार और गरीब होते गए। 1820 और 1830 ई. के बीच कुछ गरीब पाटीदारों के लिए जीवनयापन करना मुश्किल हो गया, और संबंध कमज़ोर होने लगे। उस समय परिवहन के मुख्य साधन बैलगाड़ियाँ, घोड़े और ऊँट थे। चरोतार और सूरत के बीच यात्रा में 10 से 12 दिन लगते थे। (भारत में रेल सेवा पहली बार 1860 में आई थी और पहला रेल मार्ग बंबई और ठाणे के बीच था।) सूरत और चरोतार के रिश्तेदार एक-दूसरे से मिलने आते थे, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी संपर्क कम होता गया और अंततः सभी संपर्क टूट गए। शुरुआत से ही, सूरत के पाटीदारों और चरोतार के पाटीदारों के बीच विवाह बंद हो गए थे क्योंकि इसमें 20 से 25 दिन की यात्रा लग जाती थी। सूरत आए पाटीदारों ने 50 से 60 गाँव बसाए और चूँकि इस समूह की आबादी कम थी, इसलिए उन्होंने प्रत्येक गाँव में 50 से 60 घर बनाए। ज़मीन की कमी के कारण उन्होंने बड़े घर बनाए। सूरत में "खाचो" (घर के पीछे की खाली ज़मीन) जिसे "वाडो" कहा जाता था, बड़े होते थे और इसलिए हर घर में पानी के लिए अपना कुआँ होता था। उन्होंने मवेशियों के लिए घरों के साथ अस्तबल भी बनवाए थे और गोबर के लिए एक "उकार्डो" भी था। वे फसल लाने के लिए "वाडो" में एक "खारी" (सादा, साफ़ जगह) भी रखते थे। ये सभी सुविधाएँ प्रत्येक घर में शामिल थीं। चरोतार में, उन्हें इन सभी सुविधाओं के न होने की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। कंबी पाटीदार मेहनती थे और इसलिए थोड़े समय में ही आराम और खुशी से रहने लगे। परिवारों ने दक्षिण गुजरात की ओर जाने का फैसला किया और अन्य घनी आबादी वाले गाँवों से लेवा पाटीदार उनके साथ आ मिले। वे सूरत के आसपास बस गए। सूरत के आसपास के इलाके घने जंगल थे जिन्हें लेवा पाटीदारों ने साफ किया और ज़मीन पर खेती की। उन्हीं जंगलों की लकड़ी से घर बनाए गए और फिर गाँव बसाए गए। शुरुआत में खेड़ा जिले और सूरत जिले के पाटीदारों के बीच एक संपर्क था, लेकिन परिवहन के रूप में।
BANAJIGA VAISHYA BANIYA CASTE OF KARNATAK
BANAJIGA VAISHYA BANIYA CASTE OF KARNATAK
बनजिगा धार्मिक रूप से वैष्णव हैं, लेकिन वे शिव का भी सम्मान करते हैं और उनकी पूजा भी करते हैं। उनके बारे में लिखा है कि वे मूलतः बौद्ध (अर्थात् संभवतः जैन) थे, और फिर उन्होंने वैष्णव और शैव धर्म अपना लिया, और इन देवताओं के लिए कई मंदिर बनवाए। उनके गुरु, तत्ताचार्य या भट्टाचार्य परिवारों के श्री वैष्णव ब्राह्मणों के वंशानुगत प्रमुख हैं। वे तिरुपति, मेलकोट और अन्य वैष्णव तीर्थस्थलों की तीर्थयात्रा पर जाते हैं; साथ ही नानाजनागुड स्थित शिव मंदिर भी जाते हैं।
बनाजिगा लोग हिंदुओं के सभी त्योहार जैसे नववर्ष (युगादि), गौरी, गणेश, दशहरा, दीपावली, संक्रांति और होली मनाते हैं और आषाढ़ व पुष्य मास की शुक्ल पक्ष की एकादशियों और माघ माह की शिवरात्रि पर उपवास भी रखते हैं। वे अक्सर आपस में भजन समूह बनाते हैं।
मृतकों को दफनाया जाता है। दफ़नाने की रस्मों में जाति विशेष का कोई विशेष महत्व नहीं होता।
बनाजिगाओं के विभिन्न उप-विभागों में, निम्नलिखित सबसे महत्वपूर्ण हैं। वे हैं:
1. दश बानाजिगा,
2. एले बनजिगा या टोटा बनजिगा,
3. डूडी बनजिगा,
4. गज़ुला बनजिगा या सेट्टी बनजिगा,
5. पुवुलु बनजिगा,
6. नायडू बनजिगा,
7. सुकामांची बनजिगा,
8. जिदिपल्ली बनजिगा,
9. राजमहेंद्रम या मुसु कम्मा,
10. उप्पू बनजिगा,
11. गोनी बनजिगा,
12. रावुत राहुतार बनजिगा,
13. रल्ला,
14. मुन्नुतामोर पूसा,
और इसी तरह………।
दास बानाजिगा या जैसा कि वे खुद को जैन क्षत्रिय रामानुज-दास वाणी कहते हैं, कहते हैं कि वे पहले जैन क्षत्रिय थे, और रामानुजाचार्य द्वारा उन्हें वैष्णव धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। ये कर्नाटक के रामानगर जिले में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
एले बानाजिगास, जैसा कि उनके नाम से पता चलता है, पान उगाने वाले हैं।
डूडी या कपास बनजिगा कपास के व्यापारी हैं। ये कर्नाटक के कोलार और चिक्कबल्लापुर जिले में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
गज़ुलु या काँच की चूड़ियों का व्यापार करने वाले वर्ग को सेट्टी बनजिगा भी कहा जाता है। ये काँच की चूड़ियों के व्यापारी हैं। इस वर्ग के लोगों को सेट्टी की उपाधि दी जाती है।
पुवुलु या फूल विक्रेता भी गज़ुलु वर्ग के माने जाते हैं।
नायडू वर्ग को एले/तोता/कोटा वर्ग के समान माना जाता है। इनके आधार पर यह दावा किया जाता है कि ये चंद्र वंश के क्षत्रिय हैं, और संस्कृत के 'नायक' शब्द का अपभ्रंश रूप उनके लिए तब प्रयुक्त हुआ जब विजयनगर शासन के चरम पर, राजा ने अपने पूरे राज्य को नौ जिलों या प्रांतों में विभाजित किया और प्रत्येक के मुखिया के रूप में इस जाति के एक व्यक्ति को नायक की उपाधि दी (बलिजा वंश पुराणम पृष्ठ 33)।
जिदिपल्ली और राजमहेंद्रम की उत्पत्ति उनके निवास स्थानों से हुई, लेकिन बाद में वे जाति उपविभागों में दान देने लगे। बाद के विभाजन के सदस्य नेल्लोर, कुडप्पा, अनंतपुर, उत्तरी अर्काट और चिंगलपेट जिलों के अप्रवासी हैं।
रावत एक छोटा वर्ग है जो विशेष रूप से मैसूर शहर में रहता है। उन्हें ओप्पना बनजीगा भी कहा जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि उन्हें विजयनगर से मैसूर देश में उस राजा, ओप्पना, जिसका अर्थ है नियुक्ति, से कर वसूलने के लिए भेजा गया था। वे सभी सैनिक थे, और इसलिए उन्हें रावुत कहा जाता था।
Thursday, August 7, 2025
बालिजिगा, वलंजियार, बालनजी, बनानजी और बालिगा बनाजिगा वैश्य जातिया
बालिजिगा, वलंजियार, बालनजी, बनानजी और बालिगा बनाजिगा वैश्य जातिया
बलिजा भारतीय राज्यों आंध्र प्रदेश , तमिलनाडु , कर्नाटक और केरल का एक सामाजिक समूह है । कर्नाटक में इन्हें बनजीगा के नाम से जाना जाता है।
उत्पत्ति:
मध्ययुगीन युग में उपयोग में आने वाले नाम के भिन्नरूप थे बलांजा, बनांजा, बनांजू और बनिजिगा, जिनके संभावित सजातीय बालिजिगा, वलंजियार, बालनजी, बनानजी और बालिगा जैसे व्युत्पन्न हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि ये सभी व्यापारी के लिए संस्कृत शब्द वणिक या वणिज से निकले हैं।
11वीं शताब्दी की शुरुआत में, कन्नड़ और तमिल क्षेत्रों के शिलालेखों में एक व्यापारिक नेटवर्क का उल्लेख मिलता है, जिसे कभी-कभी एक संघ भी कहा जाता है, जिसे अय्यावोलु के पाँच सौ स्वामी कहा जाता है । 13वीं शताब्दी से, आंध्र प्रदेश में "वीर बलंज्य" (योद्धा व्यापारी) का उल्लेख करने वाले शिलालेख दिखाई देने लगे। वीर बलंज्य, जिनके मूल के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वे अय्यावोलु में थे, लंबी दूरी के व्यापारिक नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करते थे जो अपने गोदामों और माल की सुरक्षा के लिए योद्धाओं को नियुक्त करते थे। इन व्यापारियों के लिए बलंज्य-सेट्टी और बलिजा शब्दों का भी प्रयोग किया जाता था, और बाद के समय में नायडू और चेट्टी भी। इन व्यापारियों ने पेक्कंड्रू नामक समूह बनाए और खुद को नगरम नामक अन्य समूहों से अलग किया, जो संभवतः व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करते थे। पेक्कंड्रू समूहों में रेड्डी , बोया और नायक जैसे प्रतिष्ठित उपाधियों वाले अन्य समुदायों के सदस्य भी शामिल थे। ये पूरे दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में फैले हुए थे।
राव आदि ने उल्लेख किया है कि बलिजा में योद्धा और व्यापारिक जातियों का एक संयोजन शामिल था। विजयनगर सम्राट कृष्णदेवराय ने उन्हें राजनीतिक रूप से संगठित किया । बाद में, 15वीं और 16वीं शताब्दी में, उन्होंने तमिल क्षेत्र में उपनिवेश स्थापित किए और नायक सरदारों की स्थापना की। उस समय, बलिजा अक्सर एक व्यापक शब्द था , जिसमें बलिजा के अलावा , बोया , गोल्ला , गवरा और अन्य जातियाँ शामिल थीं। सिंथिया टैलबोट का मानना है कि आंध्र में व्यावसायिक विवरणों का जाति-आधारित विवरणों में रूपांतरण कम से कम 17वीं शताब्दी तक नहीं हुआ था।
लोगों को बलिजा के रूप में वर्गीकृत करना ब्रिटिश राज काल के जनगणनाकर्ताओं के लिए कई चुनौतियों में से एक था , जिनकी इच्छा विकासवादी नृविज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग करके एक जटिल सामाजिक व्यवस्था को प्रशासनिक सरलता में कम करना था। चेन्नई प्रेसीडेंसी में प्रारंभिक राज जनगणना प्रयासों में बलिजा उपजातियों के सदस्य होने का दावा करने वाले विभिन्न प्रकार के लोगों को दर्ज किया गया था, लेकिन ऐसा प्रतीत होता था कि उनमें बहुत कम समानता है और इस प्रकार उन्होंने प्रशासनिक इच्छा की अवहेलना की, जिसे वह एक तर्कसंगत और सुविधाजनक वर्गीकरण मानता था। जो लोग चेट्टी होने का दावा करते थे उनका व्यापार में संलग्न होने के माध्यम से एक स्पष्ट संबंध था और जो लोग खुद को कवारई कहते थे वे बलिजा के लिए बस तमिल शब्द का उपयोग कर रहे थे, लेकिन उदाहरण के लिए, लिंग ने बलिजा की स्थिति पर अपने दावे को एक सांप्रदायिक पहचान के आधार पर किया, गजुला पेशे से चूड़ी बनाने वाले थे, तेलगा का तेलुगु मूल था
ऋग्वेद काल से लेकर 18वीं शताब्दी तक के सैकड़ों प्राचीन शिलालेख और साहित्यिक ग्रंथ बलिया के प्राचीन इतिहास का खुलासा करते हैं
18वीं शताब्दी तक आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में बलिजा जाति के सैकड़ों शिलालेख पाए गए। 1730 के दशक में मदुरै के महाराजा श्री राजा विजयनगर चक्रनाधि नायर, विजयनगर राजाओं के रिश्तेदारों की "श्री वंगेस प्राक्रक" पुस्तक हैं। और उनकी विकलांगता से कुछ सौ क्वार्टरों का पता चलता है।
मदुरै, तंजावुर, जिंजी, कांडी (श्रीलंका), बारामहालु, रायुदर्गा, पेलेनहुंडा, केलाडी, बालम और विजयनगर राजाओं का इतिहास विम्सीयर राजवंश जिन्होंने 17 वीं शताब्दी तक शासन किया। इन्हें बलिजावर के नाम से जाना जाता है।
18वीं शताब्दी में बुकानन नामक एक ब्रिटिश यात्री ने "बाली जाति इतिहास" एकत्र किया था।
18वीं शताब्दी में, ब्रिटिश सर्वेक्षक कर्नल मैकेंजी ने "बाली जाति इतिहास"
19वीं शताब्दी में, ब्रिटिश सर्वेक्षक ने जाति और जनजातियों की पुस्तक में "बाली जाति इतिहास" एकत्र किया,
"बाली इतिहास", 19वीं शताब्दी में कन्नड़ में प्रकाशित
19वीं शताब्दी में छपी पुस्तक "गौरीपुत्र इतिहास - बाली इतिहास"
1905 में, तमिल में, कोयंबटूर में, तमिल और श्रीलंकाई जाति में, श्री पगदाला नरसिम्हा नायडू के सभी घरों में "बलिजा वंथा पुरम" की पुस्तक है।
"बहुविवाह - बालाजी जाति इतिहास" 1927 में मुद्रित - फूलों की स्वामियाँ - विशाखापत्तनम
बालाजी जाति इतिहास" - श्री कंठे नारायण देसाई - नेल्लोर - 1950 के दशक में मुद्रित, एक पुस्तक है जिसमें बाली, तेलंग, सिंगल और कापू राज्य को शामिल किया गया है।
1950 में मुद्रित - "बलिजा वाशीधसम" - अल्लुदुर राजमंथी नायडू - नेल्लोर
आंध्र प्रदेश जेलें'' 1964 में छपी - डस्ट गुरुमूर्ति नायडू - श्रीकाकुलम
गोदावरी जिले के बालाजी परिवारों में "बलिजा पुराण" के नाम से कुछ ताड़पत्र भी मौजूद हैं
ये सभी इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमारी जाति "बलिजाकुलम" है।
बलिजा राजवंश:
विजयनगर काल में , बलिजा को कर-संग्राहक नियुक्त किया जाता था। साम्राज्य एक विस्तारित, नकदी-उन्मुख अर्थव्यवस्था पर आधारित था, जिसमें कृषि और व्यापार दोनों से कर संग्रह बलिजा कर-कृषि द्वारा नियमित और बढ़ाया जाता था।
दक्षिण भारत के स्थानीय सैन्य सरदार, पॉलीगर , बलिजा जाति के थे । विजयनगर शासकों की नीति थी कि वे युद्ध के समय पॉलीगरों को सैनिकों से सहायता के बदले में स्थानीय प्रशासनिक अधिकार देकर अपनी शक्ति को मजबूत करते थे।
बलिजा आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में केंद्रित हैं। एकमात्र उपजाति है जिसे सेट्टी और नायडू दोनों उपाधियाँ प्राप्त हैं ।
बलिजा मुख्यतः एक योद्धा/व्यापारी समुदाय है। ऐसा प्रतीत होता है कि कापू समुदाय के कुछ वर्गों में हुए एक छोटे से सामाजिक परिवर्तन से इनका गठन हुआ है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, मूल बलिजा श्रीकाकुलम जिले के बलिजीपेटा से आकर बसे प्रतीत होते हैं। वीर बालिंग्याओं का उल्लेख काकतीय अभिलेखों में मिलता है। वे शक्तिशाली और धनी व्यापारी थे जिनका काकतीय समाज में बहुत सम्मान था। बलिजाओं की उपाधि सेट्टी थी और वे मुख्यतः कर वसूलने वाले और व्यापारी थे।
विजयनगर साम्राज्य के केंद्र में प्रमुख बलिजा शासक वंश या राजवंश निम्नलिखित हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि महान सम्राट कृष्णदेव राय बलिजा/कपू वंश के थे।
अरवेती राजवंश विजयनगर का अंतिम राजवंश था और इसके शासक रामराय विजयनगर साम्राज्य के अंतिम शासक कोटा बलिजा थे।
Maduri Nayaks
Tanjavur nayaks
सीलोन खांडी राजाओं
लेखनी
Kalyanadurg
RayaDurgam
चंद्रगिरी
Udayagiri
बलिजा जाति के वसारसी परिवार के कस्तूरी नायडू, पेडा कोनेटी नायडू ने इन प्रांतों पर शासन किया।
अधिकांश बलिजा खुद को आंध्र में कापू/तेलगा और तेलंगाना में मुन्नुरु कापू के रूप में संदर्भित करते हैं। लेकिन रायलसीमा क्षेत्र में उन्हें कापू के रूप में नहीं बल्कि बालिजा/सेटी बालिजा/बलिजा नायडू/नायडू के रूप में संदर्भित किया जाता है , यहां कापू का तात्पर्य रेड्डी के एक अन्य समुदाय से है। हालाँकि, उन्होंने जातिगत उपाधि नायडू को बरकरार रखा है
बाली शाखाएँ
सेट्टी बलिजा: ये काकतीय राजवंश के धनी और शक्तिशाली व्यापारी और सौदागर थे। कर्नाटक के बेल्लारी में केंद्रित कुछ बहुत पुराने व्यापारिक संघों का उल्लेख मिलता है। वास्तव में, इतिहासकारों का मानना है कि यह बलिजा की पहली शाखा थी।
बलिजा नायडू बलिजा नायडू शब्द बलिजा नायकुलु शब्द का व्युत्पन्न है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस उपजाति का गठन काकतीय राजवंश के काल में मुख्य रूप से बलिजा/सेट्टी व्यापारिक कारवां को डाकुओं के हमलों से बचाने के लिए हुआ था। वर्तमान अनंतपुर और नेल्लोर जिलों पर बलिजा नायडू राजाओं/परिवारों का शासन था।
विजयनगर साम्राज्य के अरावीदु राजवंश के कोटा बलिज इसी वंश से थे, इसी वंश से मदुरै नायक और तंजावोर नायक भी थे।
गजुला बलिजा /सुगवंशी बलिजा (शुद्ध) मिथक यह है कि शिव की पत्नी पार्वती ने शिव के लिए सुंदर दिखने के लिए तपस्या की थी और जो व्यक्ति गधे पर सवार होकर उनके लिए चूड़ियां लाया था, वह गजुला बलिजा का पूर्वज था।
कवराई (कवरा बलिजा नायडू या गवारा बलिजा नायडू)। दक्षिणी भारत की जातियों और जनजातियों के थर्स्टन के अनुसार, "कवारई बालिजास (तेलुगु व्यापारिक जाति) का नाम है, जो तमिल देश में बस गए हैं"। कवराई खुद को बालिजास (आग से पैदा हुआ) कहते हैं। वे नायडू, नायक्कन, चेट्टी या सेट्टी और नायक उपाधियों का उपयोग करते हैं। गजुला बालिजा कवरैस का सबसे बड़ा उप-विभाजन है। तमिल में गजुला बालिजा का समकक्ष नाम वलैयाल चेट्टी है। (तेलुगु में तमिल नाम वलैयाल का अर्थ गजुलु (चूड़ियाँ) है। गजुला बालिजास को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि वे शुरू में चूड़ियाँ बनाने और बेचने में शामिल थे, हालाँकि बाद में उन्होंने कई अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।
राजमहेंद्रवरम बलिजा या मुसु कम्मा बलिजा (महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले एक विशेष कान के आभूषण के नाम पर)
गंडावल्लू या गुंडापोडी वंडलू (माना जाता है कि मूल रूप से कोमाटिस थे)
ओड्डा (वाडा) बलिजा, विशाखापत्तनम, श्रीकाकुलम और ई.गोदावरी जिले में स्थित बलिजा की एक उपजाति है, जो समुद्री यात्रा करने वाले व्यापारियों और व्यापारियों का एक समुदाय है।
स्वर्गीय अकुला वेंकट सुब्बैया (स्वतंत्रता सेनानी - तिरूपति)।
स्वर्गीय कोडी राममूर्ति नायडू (स्वतंत्रता सेनानी - विजयनगरम)।
कन्नेगंती हनुमंथु (पलानाडु, स्वतंत्रता सेनानी ने ब्रिटिश जनरल रदरफोर्ड के खिलाफ पलांडु विद्रोह शुरू किया)
कोंड्रा पिडिथल्ली नायडू (नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित प्रसिद्ध भारतीय राष्ट्रीय सेना के सदस्य, द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों के साथ लड़े)
पोलिसेट्टी स्वामी नायडू (स्वतंत्रता सेनानी, गुडाला, पूर्वी गोदावरी जिला बोर्ड सदस्य और आयोजक)
राजनीति : लोकसभा में
नाम
खंड
दल
अन्नायगरी, साईं प्रताप
Rajampet
कांग्रेस
Badiga Ramakrishna
मछलीपट्टनम
कांग्रेस
Botcha Jhansi Lakshmi
बोब्बिली
कांग्रेस
चलपथिराव पप्पला
अनकापल्ली
तेदेपा
राजू पल्लम मंगपति मल्लीपुड़ी
काकीनाडा
कांग्रेस
वल्लभभानेनी बालाशोवरी
Tenali
कांग्रेस
Rajya Sabha
नाम
खंड
दल
चेन्नमसेट्टी रामचंद्रैया
तेदेपा
दसारी नारायण राव
कांग्रेस
Kancherla Keshava Rao
कांग्रेस
वी.हनुमंत राव
कांग्रेस
विधानसभा में
नाम
खंड
दल
ए.एस. मनोहर
चित्तूर
तेदेपा
अल्ला नानी
एलुरु
कांग्रेस
अरुणा पडाला
Gajapathinagaram
तेदेपा
Bajireddy Goverdhan
Banswada
कांग्रेस
बंडारू सत्यानंद राव
ई.गोदावरी.डीटी
तेदेपा
बोत्चा सत्यनारायण
Cheepurupalli
कांग्रेस
बुद्ध प्रसाद मंडली
अवनीगड्डा
कांग्रेस
बुरागड्डा वेदव्यास
मल्लेश्वरम
कांग्रेस
चौधरी सत्यनारायण मूर्ति
पैलेस
तेदेपा
डी. नागेंद्र
Asafnagar
तेदेपा
Dharmapuri Srinivasa Rao
निजामाबाद
कांग्रेस
धर्मश्री कारणम
जी. मदुगुला
कांग्रेस
सुंदर खुदाई
ताडेपल्ली गुडेम
पीआरपी
गंता श्रीनिवासराव
Chodavaram
तेदेपा
पुलपर्थी रामंजनेयुल
भीमावरम
कांग्रेस
Jakkampudi Ramamohan Rao
Kadiam
कांग्रेस
के मोहन राव
Patapatnam
तेदेपा
पी. नारायण स्वामी नायडू
Bhogapuram
तेदेपा
कन्ना लक्ष्मी नारायण
Pedakurapadu
कांग्रेस
Kimidi Kala Venkata Rao
वुनुकुरु
तेदेपा
कॉमरेड रामलू
मेटपल्ली
जेपी
कोंडा सुरेखा
Shyampet
कांग्रेस
कोथापल्ली सुब्बारैदु
Narasapur
तेदेपा
कोट्टू सत्यनारायण
Tadepalligudem
कांग्रेस
M.Venkata Ramana
तिरुपति
कांग्रेस
पी डोरा बाबू
Pithapuram
भाजपा
रमैया स्कूल
Giddalur
कांग्रेस
पालकोंड्रायुडु सुगावासी
Rayachoty
तेदेपा
पेरनी वेंकट रामैया
शहर
कांग्रेस
पोन्नाला लक्ष्मैया
जनगांव
कांग्रेस
रौथु सूर्यप्रकाश राव
Rajahmundry
कांग्रेस
सना मारुति
चोपडांडी
तेदेपा
Satish Paul Raj
सिरका
कांग्रेस
सीतारामु कर्री
भीमुनिपट्टनम
कांग्रेस
सुब्बा राव वरुपुला
Prathipadu
कांग्रेस
थोटा गोपाल कृष्ण
पेद्दापुरम
कांग्रेस
Thota Narsimham
Jaggampeta
कांग्रेस
Udayabhanu Samineni
Jaggayyapet
कांग्रेस
वेंकटेश्वर राव
कोठागुडम
कांग्रेस
वंगावीति राधा कृष्णन
विजयवाड़ा (पूर्व)
कांग्रेस
वट्टी वसंत कुमार
वे अभिषिक्त हैं।
कांग्रेस
जमींदारों
अनिसेट्टी बुच्ची वेंकय्या डोरा
अत्तिली: अन्नम परिवार (पश्चिम गोदावरी जिला)
बेंदामुरलंका: यल्ला परिवार (पूर्वी गोदावरी जिला)
भीमावरम: गन्नाभातुल्ला परिवार (डब्ल्यूजी जिला)
बुट्टाइगुडेम: करातम परिवार (डब्ल्यूजी जिला;
आंध्रुला संघिका चरित्र में वर्णित)
चेगोंडी हरि राम जोगय्या (धोड्डीपाटला, पश्चिम गोदावरी)
सूची: पोलिसेट्टी परिवार (ईजी डिस्ट)
धर्मावरम: कांचुमर्थी नरसैय्या नायडू और
वेंकट सीता राम चंद्र राव
धरसीपरु: दुलम परिवार (पश्चिम गोदावरी जिला)
डोन्टिहुंडम: त्रिपुराना परिवार (श्रीकाकुलम जिला)
कल्याणदुर्ग: बुटना परिवार (अनंतपुर जिला)
कामतालपल्ली: अल्लम परिवार (वीरावासरम मंडल, डब्ल्यूजीडीटी)
(लगभग 1000 एकड़)
केसिरेड्डी परिवार वेम्पाडु, पश्चिम गोदावरी
कथिरीसेटी वेंकट नरसैय्या नायडू - कथिरीसेटी परिवार (श्रीकाकुलम)
कुरासाला नागेश्वर राव - कुरासाला परिवार (पश्चिम गोदावरी जिला)
स्वर्गीय पलाचोला रामकोटैया (पोन्नुरु, गुंटूर जिला)
स्वर्गीय यालावर्ती सीतारमैया नायडू (पोन्नुरु, गुंटूर जिला)
मोथे परिवार (पूर्वी गोदावरी)
नरसंपेट: मेहबूब रेड्डी (वारंगल जिला)
नरसापुरम: पप्पुला वेंकन्ना (डब्ल्यूजी जिला)
निम्मकला परिवार (पूर्वी गोदावरी)
ओसुरी परिवार (नरसापुर, पश्चिम गोदावरी)
पल्लुरी परिवार (विजयनगरम जिला)
पैंथम परिवार (पूर्वी गोदावरी)
पप्पुला वेंकटवारा राव-(नरसापुरम-पश्चिम गोदावरी जिला)
पेनुगोंडा: जाव्वाडी परिवार (डब्ल्यूजी जिला) - कोयेतिपाडु, ओगिडी इस्टेटधार्स
पीतापुरम महाराजा: पसुपुलेटी
पोरंडला लक्ष्मी नारायण पटेल (मद्दुनुरु, करीमनगर जिला, एपी)
राऊ साहिब एरोब्रोलु श्री रामुलु नायडू (विजयवाड़ा)
सुधापलेम: सिरंगु परिवार (ईजी जिला)
सुंकु रामय्या (गणपवरम, पश्चिम गोदावरी)
ताडेपल्लीगुडेम: मेंदु पद्मनाबिया और अन्नपूर्णम्मा
Thota Family
(Thota Ramaswamy Bahadur, Late Dr. Thota Dhanapathy Rao Naidu Family).
उन्गाराला परिवार
(पूर्वी गोदावरी, काकीनाडा के स्वर्गीय डॉ. उन्गारला सीता राम स्वामी नायडू)
वेल्ला: (श्री वट्टीकुटी परिवार; ईजी जिला).
वुय्युरु संस्थानम: बोम्मदेवेरा राजस
(पश्चिम गोदावरी और कृष्णा क्षेत्र तक फैला हुआ 300 वर्षों से अस्तित्व में है)
येर्रा सूर्यम ज़मीनधर (उप्पुलुरु, पश्चिम गोदावरी)
न्यायतंत्र
नाम
पद का नाम
Hon'ble Justice Ambati Lakshman Rao
आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश
Hon'ble Justice Grandhi Bhavani Prasad
न्यायाधीश, एपी उच्च न्यायालय
माननीय श्री न्यायमूर्ति अय्यपु पांडुरंगा राव
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
आई वेंकट राव
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश
कादिम माणिक्यला राव
वरिष्ठ अधिवक्ता, एपी उच्च न्यायालय, पूर्व स्थायी बंदोबस्ती परिषद, आंध्र प्रदेश सरकार
Hon'ble Justice Mutha Gopala Krishna
पूर्व मुख्य न्यायाधीश, एपी उच्च न्यायालय
Hon'ble Justice N Vidya Prasad
प्रधान सत्र न्यायाधीश, विशाखापत्तनम
पुलिस स्टेशन गंगैया नायडू
वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय, हैदराबाद
Hon'ble Justice Ponnuri DurgaPrasad
सत्र न्यायाधीश, नामपल्ली
पी शिव शंकर
भारत सरकार के पूर्व कानून एवं कंपनी मामलों के मंत्री एवं आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
माननीय न्यायाधीश रामिनेनी रामानुजम
आंध्र प्रदेश के लोकायुक्त और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश
माननीय न्यायमूर्ति एस. राजेंद्र बाबू
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
Hon'ble Justice Thota Lakshmaiah Naidu
पूर्व न्यायाधीश
माननीय न्यायाधीश टूम मीना कुमारी
न्यायाधीश, एपी उच्च न्यायालय
माननीय न्यायाधीश तमाडा गोपालकृष्ण
न्यायाधीश, एपी उच्च न्यायालय
सशस्त्र बल और सेवा
बडिगा पोथा राजू (सेवानिवृत्त डीएसपी हैदराबाद)
BhogiReddy Prithvi Narayana (DSP Narasa Rao Pet)
ब्रिगेडियर. मेंदु अयन्ना नायडू (चेन्नई)
Brig. Puppala Raj Kumar (Hyd)
चन्नमसेट्टी चक्रपाणि (सेवानिवृत्त डीएसपी गुंटूर)
जी.पी.राव आई.ए.एस. (सेवानिवृत्त अपर सचिव, भारत सरकार
एवं पूर्व अध्यक्ष, ए.पी.ई.आर.सी.)
गैंड्रोथु वेंकटेश्वर राव (डीएसपी विशेष शाखा)
हर्षवर्धन वनगाला
(उपायुक्त वाणिज्यिक कर)
आईजे नायडू आईएएस (पूर्व मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश)
के. सुब्बा राव आईएफएस (सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य
संरक्षक एवं प्रसिद्ध लेखक)
के.एस.एन.मूर्ति आईपीएस (सेवानिवृत्त आईजीपी, समन्वय गो एपी)
के. सत्यनारायण राव, आईपीएस (पेदा बाबू) (डीआईजी)
केवीएसमूर्ति आईपीएस (अतिरिक्त
पुलिस महानिदेशक, चेन्नई, तमिलनाडु)
कादिम नारायण कुमार आईएएस निदेशक, ग्रामीण विकास मंत्रालय
, भारत सरकार।
कदीम पद्मजा आईआरएस (भारतीय रेलवे)
कोल्ला साई (आईएफएस, बैंगलोर)
एम. कमल नायडू, आईएफएस (शौर्य चक्र)- प्रधान
मुख्य वन संरक्षक अध्यक्ष-गोदावरी
घाटी विकास प्राधिकरण (सेवानिवृत्त)
एमवी भास्कर राव आईपीएस (पूर्व डीजीपी, आंध्र प्रदेश)
पीवी राजेश्वर राव आईआरएस, मुख्य आयकर आयुक्त
एच. श्रीनिवासुलु आईआरएस, आयकर आयुक्त
पीवी राव आईआरएस, आयकर आयुक्त
कामेश्वरी आईआरएस, आयकर आयुक्त
बालकृष्ण आईआरएस, संयुक्त आयकर आयुक्त
एस. श्रीनिवास आईआरएस, आयकर उप आयुक्त
पी. सत्य प्रशांत आईआरएस, आयकर उप आयुक्त
एमवी कृष्णा राव आईपीएस ( एपीएसआरटीसी के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक)
एम. गोपाल कृष्ण आईएएस
(सेवानिवृत्त विशेष मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश)
मोटुपल्ली वेंकटरत्नम आईएएस
(पूर्व अध्यक्ष आंध्र बैंक)
मुरली आईपीएस (एसपी, विजाग ग्रामीण)
मुरली कृष्णा आईपीएस (संयुक्त निदेशक एसीबी,गोआप्र)
नक्का बालासुब्रमण्यम आईपीएस (ओंगोल एसपी)
नमना वेंकट कृष्णैया, संस्थापक मुख्य
अभियंता, नागार्जुन सागर बांध परियोजना
नरेश कुमार आईएएस (हैदराबाद जिला कलेक्टर)
नूकला जयराम आईएफएस
(मुख्य प्रधान वन संरक्षक, एपी)
पीवी रंगैया नायडू आईपीएस
(पूर्व डीजीपी, पूर्व केंद्रीय मंत्री)
पी. मदन मोहन राव आईआरटीएस (भारतीय रेलवे)
पीवीराव आईआरएस (अतिरिक्त संचार प्रशासन आयकर)
पद्म भूषण गण नरसिम्हा राव
(संयुक्त राष्ट्र जल संसाधन के विशेष सलाहकार,
केंद्रीय जल शक्ति आयोग के अध्यक्ष,
नागार्जुन सागर बांध के मुख्य अभियंता)
पिनिसेट्टी सच्चिदानंद मूर्ति आईएफएस
आरके रागला, आईपीएस, डीजीपी (सेवानिवृत्त)
आरएमगोनेला आईएएस
रागमसेट्टी जनार्दन
(आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी)
एसवी प्रसाद, आईएएस (
चंद्रबाबू नायडू के पूर्व प्रधान सचिव और वर्तमान विशेष मुख्य सचिव)
एसवी रमण मूर्ति, आईपीएस (आईजीपी कंप्यूटर)
श्रीरामुलु नायडू (डीएसपी, बोब्बिली)
कमांडर थोटा वेंकटेश्वर राव (भारतीय नौसेना), चेन्नई
डॉ. थोटा वेंकटेश्वर राव (राज्य चिकित्सा सेवा निदेशक)
टी. विक्रम आईपीएस (एसपी, केरल)
तव्वाला सुब्बा राव नायडू (आयकर आयुक्त)
वाइस एडमिरल आर.डी. कटारी ( 22 अप्रैल 1958 से 4 जून 1962 तक प्रथम नौसेना प्रमुख )
वाई. श्रीलक्ष्मी आईएएस (सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार)
खेल
अडागरला परसैय्या नायडू ('सिक्सर नायडू' के नाम से जाने जाते हैं।
प्रसिद्ध क्रिकेटर और कोच,
संयुक्त सचिव वीडीसीए/एसीए)
अंबाती तिरुपति रायडू (गतिशील युवा क्रिकेटर)
आंध्र सिम्हा बंडारू श्रीराम सत्यनाधा राव नायडू (मुक्केबाजी)
बडेटी तेजस्विनी नायडू (पावर लिफ्टर)
मंगवरम विशाखापत्तनम की नौ वर्षीय शतरंज प्रतिभा बोड्डा प्रत्युषा
बडेती वेंकटरमैया (दक्षिण भारत भारोत्तोलन संघ के महासचिव )
बोंडाडा सत्यनारायण (पूर्व ओलंपियन)
जमशेदपुर में टाटा समूह के साथ काम किया
चलदी रमेश बाबू (कडवाकोल्लु रमेश नायडू -
कबड्डी - राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी)
कोटारी कंकय्या नायडू (सीके नायडू - पूर्व
भारतीय क्रिकेट कप्तान)
डी. मेहर बाबा (आंध्र और हैदराबाद रणजी टीमें)
आई. राम प्रसाद- एथलेटिक खेल
के पार्थ सारथी (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर)
के. श्रीनिवास राव (4x400 मीटर रेली में जूनियर एशियाई स्वर्ण पदक)
कोडी राममूर्ति नायडू (भारत के महानतम पहलवान)
कोम्मीरेड्डी परिवार (कोम्मीरेड्डी गोपन्ना, कोम्मीरेड्डी
बस्करराम मूर्ति सीनियर, बस्करम मूर्ति जूनियर,
कोमिरेड्डी कामराजू-आंध्र रणजी टीम)
कोथापल्ली शेषु बाबू (पूर्व राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी)
Padma Raju (Kabbadi player from Vizag, represented India)
सावरम मस्तान राव (क्रिकेटर व्यवसायी गुंटूर)
सलादी सत्तीराजू (सहायक निदेशक स्पॉट अथॉरिटी ऑफ इंडिया)
एसएसपी सत्यनारायण राव (भारतीय खेल प्राधिकरण में सेवानिवृत्त उप निदेशक)
Vaddi Sudhakar(Badminton, National Player)
वड्डी नरसिंह राव (निदेशक, भारतीय खेल प्राधिकरण)
वंका प्रताप (हैदराबाद रणजी खिलाड़ी और कप्तान)
वाई. वेणु गोपाल राव (क्रिकेटर)
बुद्धिजीवियों
डॉ. ए.वी. रामा राव (पूर्व निदेशक, भारतीय
रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान,
भारत सरकार से "पद्मश्री" प्राप्त, अवरा प्रयोगशालाओं के संस्थापक)
डॉ. आलम अप्पा राव (प्राचार्य, इंजीनियरिंग कॉलेज
, आंध्र विश्वविद्यालय)
डॉ. अनुमाकोंडा जगदीश, वैज्ञानिक (पवन ऊर्जा)
डॉ. अनिसेटी सत्यनारायण मूर्ति (प्रोफेसर
आंध्र प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय)
ब्रह्मर्षि, राव बहादुर और सर रघुपति
वेंकट रत्नम नायडू (महान शिक्षाविद् और समाज सुधारक)
डॉ. सीएच. उमेश चंद्रा (प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ)
डॉ. गणपति वेंकट लक्ष्मी नरसिम्हा राव
पुलापर्थी (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री)
डॉ. गोपालम सुब्रमण्यम ( आंध्र विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार )
जी. श्रीराम मूर्ति (संपादक सूर्य तेलुगू दैनिक
, पूर्व में आंध्र प्रभा और आंध्र पत्रिका के लिए)
डॉ. गोपालम वीरा हनुमंत राव
प्रोफेसर आई.चलापति नायडू (सर्जन और
गुंटूर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल)
डॉ. कोटिकला पुडी कनक प्रसाद राव - प्रख्यात गन्ना वैज्ञानिक
डॉ. के.वी. नायडू (प्रमुख सीटी सर्जन और पूर्व निदेशक, एसवीआईएमएस, तिरुपति। संस्थान की सफलता
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई )
डॉ. शशिप्रभा (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिक्षा की पूर्व निदेशक;
किंग जॉर्ज अस्पताल, विशाखापत्तनम की अधीक्षक)
डॉ. शेखर टैम टैम ( ब्रिटिश कैरिबियाई द्वीप ग्रेनेडा में
जिला चिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवा के लिए महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा 2006 में ब्रिटिश साम्राज्य के सदस्य का सम्मान प्राप्त )
डॉ. सुंकारा बलपरमेश्वर राव (भारत के शीर्ष न्यूरोसर्जन)
डॉ. ए.एस. सुंकारा वेंकट आदिनारायण (प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ,
संस्थापक, प्रेमा अस्पताल, विशाखापत्तनम के महानिदेशक)
डॉ. सुरेश के. अलाहारी (
एलएसयू मेडिकल कॉलेज, न्यू ऑरलियन्स, अमेरिका में जैव रसायन विज्ञान के प्रोफेसर)
डॉ. थोटा लक्ष्मी नरसिम्हा राव, नेत्र रोग विशेषज्ञ,
किंग जॉर्ज अस्पताल, विशाखापत्तनम के पूर्व अधीक्षक
गोविंदा राजुलु नायडू (एसवी विश्वविद्यालय, तिरूपति के प्रथम कुलपति)
कलाला रंगनाथम (विशेष अधिकारी, उड़ीसा पावर कॉर्पोरेशन।
पूर्व सीएमडी-एनपीडीसीएल, एसपीडीसीएल, एपी पावर कॉर्पोरेशन)
कूर्म वेणुगोपाला स्वामी नायडू (आंध्र विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार)
एम. गोपालकृष्ण आईएएस (अध्यक्ष एपीएसएफसी,
भारत के अग्रणी अर्थशास्त्रियों में से एक)
एमवी राव (पूर्व कुलपति, एपी कृषि विश्वविद्यालय)
मणिकोंडा चलपति राव (
30 वर्षों तक नेशनल हेराल्ड के महान संपादक और जवाहरलाल नेहरू के घनिष्ठ मित्र)
मेंदु राम मोहन राव (डीन, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, आईएसबी)
पेंटापति पुल्ला राव (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री)
राव बहादुर वीनम वेरन्ना (इंजीनियर जिन्होंने डोलेश्वरम
बांध निर्माण में आर्थर कॉटन की मदद की)
रोक्कम राधाकृष्ण (पूर्व वीसी आंध्र विश्वविद्यालय)
श्रीमती रोहिणी कमल नायडू (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध
शास्त्रीय नृत्यांगना, शिक्षाविद् और व्यवहार विशेषज्ञ)
वेंकटेश "वेंकी" नारायणमूर्ति (इंजीनियरिंग और
एप्लाइड साइंसेज के डीन, हार्वर्ड विश्वविद्यालय)
उद्यमियों
अकुला शिवा नायडू (एकीकृत चिप्स निर्माता, हैदराबाद)
अकुला श्री रामुलु (एएसआर ग्रुप ऑफ कॉलेजेज और
एएसआर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष)
अकुला विक्रम [टाइम पत्रिका की 100 सर्वाधिक
प्रभावशाली लोगों की सूची 2006]
बडिगा रामकृष्ण (सांसद एवं उद्योगपति रामय्या
ग्रुप ऑफ कंपनीज)
बोनम कनकइह (शैक्षिक संस्थान)
चाडलवाडा कृष्णमूर्ति (तिरुपति के उद्योगपति, पूर्व विधायक)
डीके आदिकेसावुलु नायडू (केबीडी लिमिटेड (बैंगलोर),
वाणी शुगर्स, आदि; चित्तौड़ एमपी)
डॉ. डीएन राव (प्रबंध भागीदार, शक्ति समूह, विजयवाड़ा)
डॉ. पी. नारायण (नारायण ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक और अध्यक्ष )
डॉ. पर्वतारेड्डी आनंद (आनंद एंटरप्राइजेज और आनंद
ग्रेनाइट एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी)
डॉ. ए.एस. सुंकारा वेंकट आदिनारायण (संस्थापक,
प्रेमा अस्पताल, विजाग के महानिदेशक )
गेड्डम सूर्य चंद्र राव (रेखा कॉर्पोरेशन, सेवन हिल
सॉफ्टवेयर कंपनियां)
घंटा श्रीनिवास राव (शिपिंग व्यवसाय, विशाखापत्तनम)
गोपालम वेंकट गुरुनाथम (एमडी, ईएसए ग्रुप ऑफ कंपनीज)
आईआर शेखर राव (एमडी, वेंस एंड हेल्थ, हैदराबाद) - फार्मास्यूटिकल्स
केवीएसचलपति राव (संस्थापक/सीईओ टेक4सॉल्यूशंस-यूएसए/भारत)
कलावाकोलानु तुलसी (ले क्लॉथ निर्यातक, नरसापुरम, डब्ल्यूजी जिला)
किलारू वेंकट रोसिया (विजया कृष्णा इंटरनेशनल के एमडी और
मिर्च एसोसिएशन के अध्यक्ष)
कृष्णा भोगाडी (संस्थापक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक,
इन्फोरेज़ टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड)
कुमारय्या (सलिवाहन कंस्ट्रक्शन्स के एमडी और मिनर्वा
कॉम्प्लेक्स, सिकंदराबाद के मालिक)
एल.वी. रामैया (यादालम एंड कंपनी के संस्थापक)
लक्ष्मी भौमिक (अध्यक्ष, श्वेतांबरी कंस्ट्रक्शन, हैदराबाद)
एम.एस. रामैया (बैंगलोर स्थित उद्योगपति,
शैक्षिक/चिकित्सा संस्थान)
एन.आनंद (नंदिनी ग्रुप ऑफ रेस्टोरेंट्स)
नुकला रामकृष्ण (मत्स्य पालन एवं समुद्री निर्यात)
पोलुरु श्रीकांत नायडू (विनिर्माण और बैराइट निर्यात)
रंगनाथ कटारी (वेलोसिस कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ - एक कटारी समूह की कंपनी, एनआरसीसी के लिए व्यापार सलाहकार परिषद
के मानद अध्यक्ष - राष्ट्रीय रिपब्लिकन कांग्रेस समिति)
रायला अप्पाराव ( गुडीवाडा और गुंटूर में रेड चिलीज़ व्यवसाय और कोल्ड स्टोरेज )
शकुंतला रंगराजन (उद्योगपति और वेल्टेक समूह)
सनक्कयाला सत्यनारायण (क्रांति ट्रांसपोर्ट, विजयवाड़ा)
सारधी (ट्रेन टायर निर्माता, नुजिविदु, कृष्णा जिला)
स्वामी करातम् (एमडी, विक्यूब सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, लंदन)
टी.स्ट्यानंदम (कोणार्क पावर प्रोजेक्ट्स)
टीसी अशोक (संस्थापक/सीईओ - फोर्टुना टेक्नोलॉजीज - यूएसए/भारत)
थाडी थाटा राव (शराब निर्माण कंपनी, ठेकेदार,
अमलापुरम, ईजी जिला)
थोरम त्रिनाधा बाबू (सत्या ग्रुप ऑफ कंपनीज,
भीमावरम, डब्ल्यूजी जिला)
थोटा सत्यनारायण (जगदीश मरीन्स, भीमावरम, डब्ल्यूजी जिला)
थोटा सुब्बा रायुडू (टर्बो टायर निर्माता, हैदराबाद)
तुलसी रंचद्र प्रभु (एमडी तुलसी ग्रुप ऑफ कंपनीज)
वज्रमसेट्टी चद्रशेखर (वज्रम स्टार होटल्स और वज्रम कंस्ट्रक्शन बैंगलोर के एमडी )
वामसी विकास गणेशुला (अध्यक्ष और एमडी, रघु वामसी
मशीन टूल्स लिमिटेड, हैदराबाद)
वनपल्ली बाबू राव (कल्याणी एग्रो.टीपीगुडेम,
आंध्र, महाराष्ट्र में पावर प्रोजेक्ट्स)
वंका रवींद्रनाथ (इंडियन हेयर इंडस्ट्रीज, तनुकु, डब्ल्यूजी जिला)
आईटी/कॉर्पोरेट
अदापा राजा सुरेश (एमडी, जीई कैपिटल इंडिया)
अल्लम आदिसेशु बाबू (एमडी - मैककॉय, चेन्नई)
बी. वीरभद्र राव (पूर्व सीईओ इंटरग्राफ, भारत)
बी.वी. नायडू (अध्यक्ष, एसटीपीआई)
Bhogadi Krishna (MD, Inforaise Technologies Ltd,HYD)
सीएस राव (पूर्व अध्यक्ष और सीईओ ल्यूसेंट, भारत)
चिंतागुंटा कल्याण राव (एमडी, कॉन्सेप्ट इन्फोटेक सोल., यूएसए)
डॉ. वेंकट रमण राव सीईओ - आरएसआई हेल्थ केयर
(कंप्यूटर संगठनों के लिए)
जी सीताराम (सीटीओ 7हिल्स बिजनेस सॉल्यूशंस लिमिटेड, भारत और अमेरिका)
गंडलुरु उमामहेश्वर (प्रथम अमेरिकी निगम)
हरि रंगीसेट्टी (रेडीटेकएलएलसी, यूएसए)
केवीएसचलपति राव (पूर्व एमडी और सीईओ
गोल्डस्टोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड)
कोल्ला श्रीहरि (अध्यक्ष - अरुणटेक सॉल्यूशंस, HYD)
नरेश (प्रबंध निदेशक, नरेश टेक्नोलॉजीज)
निरुप कृष्णमूर्ति नायडू (सीटीओ, नॉर्दर्न ट्रस्ट
कॉर्पोरेशन, पूर्व सीआईओ यूनाइटेड एयरलाइंस)
पंचकरला श्रीनिवास (सीईओ पिनेकल बिजनेस एप्लीकेशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, यूनाइटेड किंगडम, लीसेस्टर/भारत, हैदराबाद)
पोसिना गणेश (सीईओ प्रोनेस्ट इंक यूएसए, एनजे)
पोथुला रंगा राम (कार्यकारी निदेशक ईएमसी कॉर्पोरेशन)
Prasad Bhogadi (Vice President, INFO RAISE, INDIA)
Prasad.V.lokam(CEO /President Miracle Software Systems Inc)
रघु मेंडू (संस्थापक और सीईओ मेटामोर)
रंगनाथ थोटा, पूर्व सीईओ मोबाइल2विन, चीन;
बिजनेस हेड हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप
Ravindranath Thota,Vice president, Standard Chartered Bank ,Dubai
रोक्कम किरण (प्रथम अमेरिकी निगम)
एस. श्रीनाथ नायडू (उप सीईओ - एक्टिया सीमेंस एशिया
पैसिफिक डिवीजन, नई दिल्ली)
श्रीनि कोपोलु (एमडी माइक्रोसॉफ्ट इंडिया)
श्रीनिवास किशन (जीएम, विप्रो टेक्नोलॉजीज)
सुब्बू कोटा (सीईओ बोस्टन टेक्नोलॉजी ग्रुप)
सुंकरी वेंकट सत्य रामदास, सीआईओ, उच्च शिक्षा एवं विज्ञान अनुसंधान मंत्रालय , अबू धाबी, यूएई
सूर्या पंडिती (पूर्व सीईओ एविसी सिस्टम्स)
टीसी अशोक (संस्थापक/सीईओ - फोर्टुना टेक्नोलॉजीज - यूएसए/भारत)
थोटा सूर्यनारायण (महाप्रबंधक, सिरिस इम्पेक्स
फार्मास्युटिकल कंपनी, विजयवाड़ा)
वासु कामिरेड्डी (उपाध्यक्ष, वोल्गा सिस्टम्स सर्विसेज, सैन जोस, सीए)
येरमसेट्टी रमेश (एमडी, जीएसएस टेक्नोलॉजीज, हैदराबाद और यूएसए)
आर्ट्स एक
कविता
दादा सिद्ध कवि
Gudaru Venkatadasa Kavi
कोनिडेना नागाया कवि
मनकू श्री (मनकू श्रीनिवास, कोप्पारू)
Matcha Venkataraya Kavi
Nanne Choda
नरसिम्हुलु नायडू
Raghunatha Naidu
Rani Ganga Devi
रानी थिरुमलम्बा देवी
एसवीटी कुमार - तमिलनाडु (पसुपुलेटी)
सेलम पगडाला नरसिम्हालु नायडु कोयंबटूर
Samukham Venkatakrishnappa Naidu
श्रीकृष्ण देवरायुलु (थर्स्टन के अनुसार विजयानगर,
मदुरा और तंजावुर के राजा बलिजा नायडू थे)
Thapi Dharma Rao Naidu
Thumu Ramadasa Kavi
थुपाकुला अनंत भूपालुडु
Tripurana Venkata Surya Prasada Rao Dora
वेमना (वेमना ने अपनी कविताओं में लिखा है कि वे कापू जाति से थे)
विजयरंगा चोक्कनाथ नायडू
येर्रा वेंकट स्वामी
शास्त्रीय संगीत
डी. अनंत वेंकट स्वामी नायडू
डी. वेंकट कृष्णैया (वायलिन वादक)
डॉ. डी. लक्ष्मी (राष्ट्रीय एकीकरण के लिए कलाकार, दूरदर्शन
और आकाशवाणी में विशेष फीचर)
द्वारम भवननारायण ("संगीत कलाप्रपूर्ण", "गंधर्व
विद्याभूषण" और प्रसिद्ध संगीतज्ञ)
Dwaram Mangatayaru
द्वारम वेंकट स्वामी नायडू (संगीता कलानिधि, वायलिन कलाप्रवीण
- महानतम संगीतकार एपी द्वारा निर्मित)
पीथापुरम नागेश्वर राव (गायक)
विजयालक्ष्मी कन्ना राव (गायक)
नृत्य
शोभा नायडू (प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना)
तन्नरु लावण्या भाग्य श्री (प्रसिद्ध आगामी बाल नर्तक)
नाटक - मंच प्रदर्शन
अचंता वेंटाका रत्नम नायडू
भागवतशेखर चेबरोलु बालकृष्ण दासू
मैं रंगा राव हूं।
डी.वी. सुब्बा राव (उपनाम डुब्बू है और वे
गुंटूर/प्रकाशम जिलों में अपने सत्य हरिश्चंद्र नाटक के लिए बहुत लोकप्रिय हैं)
उपन्यासकार
चल्ला सुब्रमण्यम
चंदू सोमबाबू
दशम गोपालकृष्ण
मुम्मिडी देवराय
मुम्मिडी श्यामला रानी
पिनिसेट्टी श्री राममूर्ति (रवि राजा पिनिसेट्टी के पिता)
एसवीटी कुमार - तमिलनाडु (पसुपुलेटी) svtkumar@gmail.com
येरमसेट्टी साई
फिल्म उद्योग के निर्माता
ए.एम. रत्नम (अलाहारी)
अदपा सत्यनारायण (ताताजी)
अडाला चांटी
आदिनारायण राव (अंजलि चित्र)
अकुला श्रीरामुलु
अल्लू अरविंद
अर्जुन दलुवॉय (हॉलीवुड निर्माता और
इंडो-अमेरिकन फिल्म एसोसिएशन के अध्यक्ष)
बी.ए. सुब्बा राव (चेंचुलक्ष्मी प्रसिद्धि)
बी.वी. रामानंदम (वरुधिनी)
बडेती सत्यनारायण
बडिगा सुब्रमण्यम (लक्ष्मी गणपति फ़िल्में)
चलम (सम्बरला रामबाबू)
चेगोंडी हरि बाबू (हरिराम जोगय्या)
Dasari Narayana Rao - darsakaratna
दुंदेश्वर राव (डूंडी)
एडिडा नागेश्वर राव (विश्वनाथ की अधिकांश फिल्में
उनकी पूर्णोदय क्रिएशन्स द्वारा निर्मित की गईं)
एडिडा नागेश्वर राव (संकरबरनम के निर्माता)
संपादक मोहन
गरिकेपति राजा राव
गावरा सारथी [श्री पेलम द्वारा निर्मित और चंद्रमुखी का तेलुगु संस्करण]
गुम्मल्ला गणेश (टैगोर के कार्यकारी निर्माता)
Jaya krishna
के. राघव (टाटा मनावडू निर्माता)
कैकला नागेश्वर राव
के.नागा बाबू (अंजलि प्रोडक्शंस)
कन्नम्बा और नागभूषणम (राजराजेश्वरी फिल्म्स)
करतम कृष्णमूर्ति
करतम रामबाबू [नंदी पुरस्कार विजेता देवुल्लू के निर्माता]
Kondeti Suresh
एमएस गोपीनाथ
एनवी प्रसाद (पूर्व वसंतम निर्माता)
नाचू शेषगिरी राव
नागेंद्र बाबू
पी. पुलैया और शांता कुमारी (पद्मश्री चित्र)
पंथम चिन्ना राव
पंथम नानाजी [श्री बक्था रामदास के निर्माताओं में से एक]
पोलिसेट्टी वीरा वेंकट सत्यनारायण (अब्बाई)
धंगेरू - भट्टी विक्रममार्क - 1960
रघुपति वेंकैया नायडू (तेलुगु सिनेमा के जनक, प्रथम निर्माता,
श्रीलंका और बर्मा में फिल्मों के परिचयकर्ता,
चेन्नई (गेइटी) और अन्य थिएटरों (क्राउन और ग्लोब) में मूवी थिएटर के प्रथम निर्माता)
रायला राधा कृष्ण ( बीआर प्रोडक्शंस के बैनर तले बंगाली
हिट फिल्मों - अधारेर बॉन, नैनेर अलो, क्रोधी आदि के निर्माता)
एस.भवनारायण (डी.योगानंद से संबंधित)
एसवीएस रामाराव (चिन्नम्मा कथा जैमिनी प्रोडक्शंस के निर्माता)
सना यादी रेड्डी
शेखर कम्मुला
शांताकुमारी और श्रीहरि
टी. त्रिविक्रम राव (विजया लक्ष्मी प्रोडक्शंस)
Thadi Thatha Rao
Thota Subba Rao
वड्डी श्रीनिवासुलु
वकाडा अप्पा राव
वेंकटेश्वरलु
विजयकांत (जिन्हें "कैप्टन" भी कहा जाता है। निर्माता
, अभिनेता, राजनीतिज्ञ और दक्षिण भारतीय
फिल्म कलाकार संघ के अध्यक्ष)
अभिनेताओं
अच्युत कुनापारेड्डी
अकुला विजय वर्धन
अल्लू अर्जुन
Anjali Devi
Arja Janardhana Rao
भानु चंद्र
Bhusarapu Venkateswara Rao
Brahmaji
चौधरी कृष्ण मूर्ति
चलम (संबरला रामबाबू प्रसिद्धि)
चिरंजीवी (कोनिडेला शिव शंकर वर प्रसाद,
पद्मभूषण, सर्वोच्च नायक, मेगास्टार)
Dasari Arunkumar
दसारी नारायण राव
Danush(Venkatesh Prabhu) Tamil Super Star
Devika
एडिडा श्रीराम
जी (गरीकेपति) वरलक्ष्मी
वरुण डे
हेमा सुंदर (वीईटी फिल्म में चिरु के पिता की भूमिका निभाई है और
वह थोटा थरानी के बड़े भाई हैं)
कैकला सत्यनारायण (नवरसा नट सर्वभौमा)
कमल काम राजू (गोदावरी फिल्म में अभिनेता)
कनक (देविका की पुत्री)
Kanakadurga
कनकला देवदास
Kodi Ramakrishna
कोनिडेला शिव शंकर वर प्रसाद (चिरंजीवी)
पवन कल्याण की कोनिडेला
राम चरण तेजा की कोनिडेला
लक्ष्मण नायडू (पसुपुलेटी)
श्री राधा
एम.एस. नारायण (हास्य अभिनेता)
एमआर वासु (एमआर राधा के पुत्र, तमिल फिल्मों के अभिनेता और निर्माता)
Nagarathna
नागेंद्र बाबू (अभिनेता/निर्माता)
निसानकरराव सावित्री (महानती सावित्री)
पी. शांता कुमारी
पद्मश्री अल्लू राम लिंगैया (महान अभिनेता और हास्य अभिनेता)
पसुपुलेटी कन्नम्बा
पवन कल्याण (कोनिडेला कल्याण)
पिनिसेट्टी श्रीराम मूर्ति
प्रदीप पिनिसेटी
Prasanna Rani
सीमावर्ती कल्लिया
राजनला नागेश्वर राव
राजश्री (कई जनपद फिल्मों में अभिनय किया और वह पुरुषोत्तम पटनम, गुंटूर डीटी
से थोटा पांचजन्य की पत्नी हैं )
राजीव कनकला
Ramakrishna
रवि (तमिल और तेलुगु अभिनेता, संपादक मोहन के पुत्र)
रवि कृष्णा (निर्माता एएम रत्नम के पुत्र)
रविकिरण (तमिल और कन्नड़ अभिनेता)
एस. वरलक्ष्मी
एसवीआरंगा राव समरला वेंकट रंगा राव
(एसवीआर के नाम से जाने जाते हैं) - विश्व नट चक्रवर्ती
S.V. Jagga Rao
Sandhya Rani
श्रीनिवास (रामकृष्ण और गीतांजलि के पुत्र)
श्रीहरि (रघुमुद्री श्री हरि)
सुरेश (एमएस गोपीनाथ के पुत्र, निर्माता)
तारा (प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेत्री)
Thoogudeepa Darshan
त्याग राजू
विक्रम (एमएस नारायण के पुत्र)
निदेशक
अडापाला पूर्णचंद्र राव(पूर्ण अडापाला)
अडाला श्रीकांत (कोठा बंगारू लोकम) प्रसिद्धि
बी.ए. सुब्बा राव
बीरम मस्तान राव
डी. योगानंद
दसारी नारायण राव
Dhavala Sathyam
Guna Sekhar
जम्पना चन्द्रशेखर राव (कृष्णलीलालु प्रसिद्धि)
के.वीरा शंकर (निर्देशक गुदुम्बा शंकर)
कनकला देवदास
कंदुला वारा प्रसाद राव
कस्तूरी राजा (तमिल निर्देशक)
कोडी रामकृष्ण
कुनापारेड्डी नंदन राव
कुम्माला शेखर
एम.एस. नारायण
मंजुला नायडू
नागेश कुकुनूर
नायडू बहनें
निम्माला शंकर
पी. पुल्लिया
पी. लक्ष्मीनारायण
पसुपुलेटि वामसी कृष्णा (कृष्णा वामसी)
Pusala Radhakrishna
राजा (संपादक मोहन के पुत्र)
रवि राजा पिनिसेट्टी
सत्तारू प्रवीण (LBW ) प्रसिद्धि
सेल्वा राघवन (तमिल निदेशक) 7जी बृंदावन कॉलोनी
S. Bhavanarayana
एसवीएसरामाराव (निर्देशक-चिन्नम्मा कथा)
सावित्री (चिन्नारी पापालू, मथरू देवता आदि)
शेखर कम्मुला
सुकुमार बांद्रेड्डी
Thapi Chanakya
वी.वी. विनायक
वन्नेमरेड्डी राजा (क्षेममगा वेल्ली लभामगारांडी प्रसिद्धि)
वीरू.के (आरो प्रणाम के निदेशक)
संगीत निर्देशक
आदिनारायण राव
Akula Appal Raj (A.A. Raj)
Devi Sri Prasad
Gandham Sagar
जिल्ला चकरी
Salur Koteshwar Rao (Koti)
सलूर राजेश्वर राव
कुंचे रघु (गायक और एंकर)
मास्टर वेणु
रमण गोगुला
Ramesh Naidu
शिव
लेखकों
ए.एम. रत्नम
अकुला शिव
अनंत श्रीराम (गीतकार)
अनिसेट्टी सुब्बा राव
बोल्लिमुंथा शिवराम कृष्ण
चंदू सोमबाबू
चीनी मिट्टी के कृष्ण
Chittareddy Surya Kumari
Dasam Gopala krishna
दसारी नारायण राव
गंधम सत्यमूर्ति
पिनिसेट्टी श्रीराम मूर्ति
गलती
आर. संध्या देवी (उपनाम रोला है)
शेखर कम्मुला
Thapi Dharma Rao Naidu
वर्धिनीदी सुरेश बाबू (ओका ओरिलो) (वीरावासरम, पश्चिम गोदावरी जिला,)
विजयलक्ष्मी सीलमसेट्टी
यारमसेट्टी साई
तकनीकी समर्थन
ए.एल. कृष्ण प्रसाद (दक्षिण भारतीय स्टिल कैमरामैन एसोसिएशन के संस्थापक)
अडाला चांटी (कला निर्देशक/निर्माता)
बंदी गोपाल राव (संपादक)
बंदी नायडू (मेकअप मैन)
बांद्रेड्डी वेंकट सुब्बा राव (डबिंग आयोजक और डबिंग कलाकार)
सी.नागेश्वर राव (छायाकार)
चंद्रा (मेकअप मैन)
छोटा के. नायडू (कोम्मारेड्डी नायडू) (छायाकार)
गुंडा मूर्ति (सह-निदेशक, नी नववे चालू, टीपी गुर्थू, वीरवसाराम)
कट्टुला दत्तू (कैमरामैन)
के.एम. मार्थांड (संपादक, निर्देशक और निर्माता बी.ए.सुब्बा राव के भतीजे)
Kodi Lakshman (Cameraman)
मार्तण्ड वेंकटेश (संपादक, के.एम. मार्तण्ड के पुत्र)
मोहन (संपादक)
Mohanji-Jaganji (Still Photographers)
पिनिसेट्टी राम (छायाकार)
Potha Raju (Makeup man)
एसवीएसरामाराव (कला निर्देशक-श्री वेंकटेश्वर महत्यम)
श्याम के. नायडू (कैमरामैन)
Thota Ramana (Cameraman)
थोटा थारिनी (कला निर्देशक)
Thota Venkateswara Rao (Art director)
वीएसआर स्वामी (छायाकार/निर्देशक)
शिक्षण संस्थानों
अकुला गोपय्या इंजीनियरिंग कॉलेज, ताडेपल्लीगुडेम
अकुला श्रीरामुलु इंजीनियरिंग कॉलेज, तनुकु, पश्चिम गोदावरी।
अवंती डिग्री कॉलेज, विशाखापत्तनम
अवंती ग्रुप ऑफ़ इंजीनियरिंग कॉलेज
(नारिसपट्टनम, गुंथापल्लीनम, चेरुकुपल्ली)
अवंती इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल
साइंसेज, चेरुकुपल्ली, विजयनगरम
बोनम वेंकट चालमैया इंजीनियरिंग कॉलेज,
ओडालारेवु अमलापुरम (वाया) पूर्वी गोदावरी
बोनम वेंकटचलमैया प्रौद्योगिकी संस्थान,
अमलापुरम, पूर्वी गोदावरी।
दिल्ली पब्लिक स्कूल (हैदराबाद, सिकंदराबाद)
डॉ. अल्लू रामलिंगैया सरकार होम्योपैथिक मेडिकल
कॉलेज और अस्पताल, राजमुंदरी, पूर्वी गोदावरी।
डॉ.सतीश पॉलराजू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग,
भद्राचलम, खम्मम जिला
काकीनाडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, काकीनाडा।
केजीआरएल कॉलेज, भीमावरम
लोयोला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक एंड मैनेजमेंट
धुलिपल्ला (वी), गुंटूर नागार्जुन विश्वविद्यालय
मावेरिक्स स्कूल ऑफ बिजनेस, कोम्पल्ली, आंध्र प्रदेश
मड्डाला रामकृष्ण पॉलिटेक्निक, वीरवासरम, पश्चिम गोदावरी
एमएस रमैया मेडिकल कॉलेज, बैंगलोर
एमएस। रामय्या इंजीनियरिंग कॉलेज, बैंगलोर
नारायण ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, नेल्लोर।
नोवा ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, जंगारेड्डी गुडेम, डब्ल्यू.जी
राजीव गांधी प्रबंधन अध्ययन संस्थान, काकीनाडा
राव और नायडू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, ओंगोल
एसवीएल पॉलिटेक्निक कॉलेज, मछलीपट्टनम
सप्त गिरी कॉलेज, विजयवाड़ा।
श्रीनिवास प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन अध्ययन संस्थान
, चित्तूर (SITAMS)
श्री आदर्श जूनियर कॉलेज, अत्तिली, पश्चिम गोदावरी।
श्री सारधी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी,
नुजिविडु, कृष्णा जिला।
श्री श्रीनिवास विद्या परिषद कॉलेज समूह, विशाखापत्तनम
(श्री सुनकर अलवरदास शिक्षा सोसायटी) [18]
सेंट एन्स कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
वेटापलेम (एम), चिराला, प्रकाशम
सेंट थेरेसा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड
टेक्नोलॉजी, विजयनगरम
विकलांग बच्चों के लिए स्वीकार विशेष विद्यालय एवं पुनर्वास संस्थान , सिकंदराबाद।
वेलटेक ग्रुप ऑफ इंजीनियरिंग कॉलेज, चेन्नई
विदेही मेडिकल कॉलेज, बैंगलोर
व्यादेही इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बैंगलोर।
येरामिलि नारायण राव (वाईएन कॉलेज नरसापुरम -
100 साल पुराना कॉलेज)
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