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Tuesday, July 12, 2011

वैश्य क्रांतिवीर व आज़ादी के दीवाने


वैश्य वर्ण में स्वतंत्रता के संग्राम में आहुति देने वाले बहुत से वीर हुए हैं,
जिनका वर्णन में नीचे कर रहा हूँ. जिन्हें की में जनता हूँ. यदि आप भी किसी वैश्य  क्रांतिवीर को जानते हो तो संपर्क करे.

१. राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी.

2. सरदार वल्लभ भाई पटेल.

3. लाला लाजपत राय जो की सभी महान क्रन्तिकारी जैसे की सरदार       भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बिस्मिल, मनमंथ नाथ गुप्त आदि के गुरु थे.

४. मनमंथ नाथ गुप्त (काले पानी की सजा )

५. बादल गुप्ता (अलीपुर बम कांड ) .

६. दिनेश गुप्ता (जिन्हें फांसी पर चढ़ाया गया)

७. नालोनी कान्त गुप्ता

8. निरंजन सेन गुप्ता

९. सेठ जमनालाल बजाज

१०. सेठ घनश्याम दस बिरला

११. लाला परमानन्द

१२. लाला जगत नारायण





Thursday, June 30, 2011

वैश्यों का स्वर्णिम इतिहास

हमारे वैश्य समाज का एक स्वर्णिम इतिहास रहा हैं. वैश्य समुदाय की ९०% जातिया क्षत्रियो से उत्पन्न हुईं हैं. कुछ जातियों का वर्णन नीचे कर रहा हूँ,

१. अग्रवाल :- अग्रवालो की उत्पत्ति महाराजा अग्रसेन से हुईं हैं, जो की  सूर्यवंशी क्षत्रिय थे.

२. महेश्वरी:- माहेश्वरियो की उत्पत्ति भगवन शिव से हुईं.

३. खंडेलवाल:- इनकी उत्पत्ति रजा खंडेल सेन से हुईं हैं.

४. वर्णवाल:- राजा अहिर्वर्ण से.

5. पोडवाल:- राजा पुरु से.

६. वार्ष्णेय:- राजा अक्रूर जी से, जो की भगवान श्री कृष्ण के चाचा थे.

७. माहुरी:- चन्द्रगुप्त मौर्या से

८. कलवार:- राजा सहस्र बाहु से.

९. साहू तेल्ली:- गुरु गोरखनाथ से


वैश्य सम्राट और राजा

१. सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्या
जो कि भारत के पहले घोषित चक्रवर्ती सम्राट थे.

२. सम्राट बिन्दुसार

३. सम्राट अशोक महान

४. राजा श्रीगुप्त

५. राजा घटोत्कच गुप्त

६. सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य

७. सम्राट समुद्र गुप्ता

८. राजा कुमार गुप्त

९. सम्राट स्कन्द गुप्त

१०. सम्राट यशो वर्धन

११. सम्राट हर्षवर्धन

१२. सम्राट हेमू विक्रमादित्य( भारत के आखिरी हिन्दू सम्राट)
१३. राजा भामाशाह

१४. नंदराय जी ( श्री कृष्ण जी के पिता )

१५. वृषभान जी ( राधा जी के पिता )

१६. राज कुमार उदयन (उज्जैन)

१७. सम्राट भृतहरी

इससे पता चलता हैं की हमारा इतिहास कितना महान और विशाल हैं.





Monday, April 18, 2011

चन्द्र गुप्त मौर्य एक महान वैश्य-CHANDRAGUPTA MOURYA A GREAT VAISHYA




सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य  एक वैश्य जाति माहुरी से सम्बन्ध रखता था। गुजरात का राज्यपाल पुष्पगुप्त जो की उसका बहनोई था वह भी एक वैश्य था। गुप्त या गुप्ता उपनाम केवल वैश्य ही प्रयोग करते थे , ओर करते हैं । चन्द्रगुप्त ने बाद में जैन धर्म अपना लिया था, जैन पूरी तरह से एक वैश्य जाती हैं. १००% जैन वैश्य हैं।



 माहुरी जाति अपने आप को चन्द्रगुप्त का वंशज मानती हैं। जो की बिहार के गया जिले में निवास करती हैं। मौर्य उपनाम चन्द्रगुप्त को चाणक्य ने दिया था। क्योंकि चन्द्रगुप्त कि माँ का नाम मुरा था। मुरा से ही मौर्य बना। चन्द्रगुप्त की पत्नी एक वैश्य नगर सेठ की पुत्री थी। चन्द्रगुप्त की कुलदेवी माता लक्ष्मी थी। जो की वैश्य समुदाय की कुल देवी मानी जाती हैं। चन्द्रगुप्त के समय में जो विदेशी इतिहासकार भारत में आयें उन्होंने भी चन्द्रगुप्त को वैश्य ही बताया था। इतिहास में उसका कही भी क्षत्रिय होने का प्रमाण नहीं मिलता हैं। नाही शुद्र होने का, क्योंकि एक ब्रहामण चाणक्य कभी भी एक शुद्र को शिक्षा नहीं दे सकते थे।


राजा को हमेशा क्षत्रिय माना गया हैं, वैश्य समुदाय की अधिकतर जातियों की उत्पत्ति क्षत्रियो से ही हुईं हैं। जो की एक इतिहास हैं। भारत मैं हर जाति व समुदाय का शासन रहा हैं। आधुनिक इतिहासकारों को कोई भी राजा व सम्राट,  वैश्य व शुद्र होना हज़म नहीं होता हैं। चन्द्रगुप्त के पोते सम्राट अशोक की पत्नी भी एक वैश्य पुत्री थी। ज़ाहिर हैं रिश्ते नाते आदमी अपने वर्ण या जातिं में ही करते रहे हैं। ये प्रमाण सिद्ध करते हैं। कि चन्द्रगुप्त मौर्या और सम्राट अशोक वैश्य ही थे।