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Sunday, October 14, 2018

SAHU TELI VAISHYA HISTORY - साहू तेली वैश्य समाज का इतिहास

SAHU TELI VAISHYA HISTORY - साहू तेली वैश्य समाज का इतिहास

तेली वैश्य वानिया समुदाय एक प्राचीन और प्रतिष्ठित व्यापारिक समुदाय है, जिसका मुख्य पारंपरिक कार्य तेल निकालना और उसका व्यापार करना रहा है。 'तेली' शब्द संस्कृत के 'तैलिक' से बना है। वर्ण व्यवस्था में इन्हें वैश्य (बनिया) माना जाता है, जो सदियों से अपनी उद्यमशीलता और सामाजिक योगदान के लिए जाने जाते हैं。

तेली वैश्य वानिया समुदाय का इतिहास और उत्पत्ति

पौराणिक उत्पत्ति: कई हिंदू ग्रंथों के अनुसार, इस समुदाय की उत्पत्ति भगवान शिव से जुड़ी मानी जाती है。 समाज को तेल की आपूर्ति और विभिन्न औषधीय तेलों के उपयोग के लिए इस कार्य का सृजन किया गया था।

पारंपरिक तकनीक: ऐतिहासिक रूप से समुदाय का मुख्य केंद्र 'कोल्हू' या 'घानी' (बैलों से चलने वाली लकड़ी की मशीन) हुआ करती थी。 तिलहन (सरसों, तिल, अलसी आदि) को पेरकर तेल निकालने की पारंपरिक कला इनकी मेहनत और हुनर का प्रमाण रही है

वैश्य वर्ण की मान्यता: हिंदू चातुर्वर्ण्य व्यवस्था में इन्हें वैश्य (व्यापारी वर्ग) का प्रमुख अंग माना जाता है。 देश के विभिन्न हिस्सों में इन्हें अलग-अलग नामों, जैसे- तेली, साहू, गुप्ता, राठौर, मोदी, और वैश्य वाणी के रूप में जाना जाता है

समाज की ऐतिहासिक भूमिका और विस्तार
अर्थव्यवस्था और व्यापार: यह समुदाय केवल तेल निकालने तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ था। ये लोग साहूकारी (ऋण देना) और अनाज के थोक व्यापार में भी अग्रणी थे

सामाजिक निर्माण: आर्थिक रूप से संपन्न होने पर इस समुदाय ने समाज-कल्याण के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ऐतिहासिक रूप से इन्होंने कई मंदिरों, धर्मशालाओं और जन-सुविधाओं का निर्माण कराया。


प्रमुख विभूतियाँ और संत परंपरा
संत जगनाडे महाराज: तेली समुदाय की संत परंपरा में संत जगनाडे महाराज का नाम अत्यंत आदरणीय है, जो महाराष्ट्र के प्रसिद्ध वारकरी संप्रदाय से जुड़े थे और तुकाराम महाराज के अनुयायी थे।

राजा धनुआ तेली: लोककथाओं और इतिहास में राजा धनुआ तेली का उल्लेख एक प्रतापी राजा के रूप में मिलता है。

वर्तमान परिदृश्य
वर्तमान समय में यह समुदाय शिक्षा, राजनीति, प्रशासन और आधुनिक उद्योगों में सक्रियता से अपनी भागीदारी निभा रहा है。 तेली वैश्य समुदाय भारत के विभिन्न राज्यों—विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात—में एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक उपस्थिति रखता है。 सामाजिक उत्थान के लिए सक्रिय तेली जन जागृति संघ जैसे संगठन भी समुदाय के इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं

3 comments:

  1. कुछ भी लिख दिया

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  2. Right information

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  3. Evidances and proof are totally correct .

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