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Friday, February 18, 2022

RAVI GUPTA IPS - RASHTRAPATI VISHIST SEWA MEDAL

RAVI GUPTA IPS - RASHTRAPATI VISHIST SEWA MEDAL


मध्यप्रदेश शासन के अति महानिदेशक(IPS )श्री रवि कुमार गुप्ता जी को राष्ट्रपति जी द्वारा विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त होने पर
बधाई
व शुभकामनाएं|



SHILPI GUPTA IAS - SHIVPURI DM

SHILPI GUPTA IAS - SHIVPURI DM

शिल्पी_गुप्ता जी बनी शिवपुरी मध्यप्रदेश की कलेक्टर, वैश्य समाज को अपनी बेटी पर गर्व है आपको बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ।


JAYDAYAL GOENAKA HAWELI CHURU

 JAYDAYAL GOENAKA HAWELI CHURU 


राजस्थान के शेखावाटी के चूरू में स्थित हिंदुओं की सबसे बड़ी धार्मिक प्रेस "गीताप्रेस गोरखपुर" के संस्थापक "सेठ जयदयाल गोयन्दका जी" के पुरखोंकी हवेली.. इसी हवेली में सेठ जी का जन्म हुआ था और इसी हवेली में उन्हें भगवान के दर्शन हुए थे। ये अग्रवालों की अनुपम धरोहर है..



MAHARAJA AGRASEN AIRPORT HISAR

 MAHARAJA AGRASEN AIRPORT HISAR


हरयाणा में हिसार शहर के हवाई अड्डे के नाम महाराजा अग्रसेन के नाम पर हुआ... जय महाराजा अग्रसेन...

हिसार ऐतिहासिक शहर है यही महाराजा अग्रसेन की राजधानी थी.... और यहीं अभी राखीगढ़ी संभयता मिली थी जिसने वामपंथियों की आर्य और द्रविड़ की विभाजन कारी थ्योरी को ध्वस्त कर दिया था..


DOUSAR VAISHYA CHOWK, NAGPUR

DOUSAR VAISHYA CHOWK, NAGPUR

दोसर वैश्य चौक मेट्रो स्टेशन,नागपुर*

यह हमारे समाज के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि हमारे श्री दोसर वैश्य समाज के नाम पर नागपुर मेट्रो के एक स्टेशन का नामकरण किया गया है,जो कि हमारे समाज के भवन के पास स्थित दोसर वैश्य चौक के समीप ही है । यह पहली बार हुआ है कि किसी मेट्रो स्टेशन का नाम किसी समाज के नाम पे रखा गया है ,यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है ।



 

Thursday, February 17, 2022

SETH GHANSHYAM DAS BIDLA - A GREAT INDUSTRIALIST

SETH GHANSHYAM DAS BIDLA - A GREAT INDUSTRIALIST


घनश्यामदास बिड़ला की कहानी आज़ाद भारत के औद्योगिकीकरण की कहानी है। एक दौर में बिड़ला और टाटा ही हिन्दुस्तान के व्यवसायिक क्षितिज पर आलोकित सितारे थे। 1857 में जब भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम हुआ तो लगभग उन्हीं दिनों उनके दादा शिवनारायण बिड़ला ने राजस्थान के पानी से उठकर मुंबई में कारोबार जमाया, लेकिन चार साल बाद ही उनके पिता बलदेवदास बिड़ला ने मुंबई के बजाए कलकत्ता को अपनी व्यवसायिक गतिविधियों का केंद्र बना लिया।



30 वर्ष की आयु होने तक खुद घनश्यामदास बिड़ला का औद्योगिक साम्राज्य अपनी जड़े जमा चुका था। स्वदेशी के इस सच्चे समर्थक के लिए व्यापार राष्ट्र निर्माण का ही माध्यम था। व्यापार में भी सच्चरित्रता तथा ईमानदारी उनके लिए सर्वोपरि थे। वे सच्चे अर्थों में गांधीवादी थे। महात्मा गांधी के हरेक आंदोलन में उन्होंने आर्थिक योगदान दिया। हिंदुस्तान टाइम समूह की स्थापना के लिए भारत का मीडिया जगत उन्हें हमेशा याद रखेगा । अनेक उद्योगों के साथ-साथ देशभर में अनेक शिक्षण संस्थाओं की उन्होंने स्थापना की। अपने पुश्तैनी घर पिलानी में भारत के सर्वश्रेष्ठ निजी तकनीकी संस्थान बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान पिलानी की स्थापना की।

Wednesday, February 16, 2022

BHANSALI VAISHYA SAMAJ

BHANSALI VAISHYA SAMAJ 















CHITTODA MAHAJAN VAISHYA

CHITTODA MAHAJAN VAISHYA 

श्री वैश्य चित्तौड़ समाज का इतिहास 1670 वर्ष पुराना है। जाति का मूल चौहान वंश है और चौहान वंश का मूल अग्निवंश था। चौहान वंश में एक राजा चतुरभुज (अग्निपाल) थे। उसके बाद 131 राजाओं ने शासन किया। 40वीं शताब्दी में राजा नरपाल और राजा चतुरपाल का शासन था। राजा चतुरपाल के परिवार में हरिभान जी नाम का एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जो सांभर के राजा थे। राजा हरिभान जी का विवाह सोलह रानियों के साथ हुआ था। इन सोलह रानियों से 27 पुत्र उत्पन्न हुए। इन रानियों के सत्ताईस पुत्र (राजकुमार) चित्तौड़ समाज के उद्गम थे। और चित्तौड़ समाज के 27 गोत्र आजकल उपयोग में हैं। 16 रानियों और उनके 27 पुत्रों का विवरण इस प्रकार है:-

QueensNo of sonsName of sons

Queens
No of sons
Name of sonsSolanky ji 3 1. Shri Achal Das Ji
2. Shri Gajadhar Ji
3. Shri Hathi Ji
Rathor ji 1 Shri Som Pal Ji
God ji 2 1. Shri Bahadir Ji
2. Shri Jog Raj Ji
Jadun Ji 0 Not Available
Kachh Bai Ji 5 1. Shri Kalu Ji
2. Shri Chatra Som Ji
3. Shri Surat Pal Ji
4. Shri Jeev Raj Ji
5. Shri Peechan Ji
Puwar Ji 2 1. Shri Kam Pal Ji
2. Shri Sod Dev Ji
Gohal Ji 4 1. Shri Panna Ram Ji
2. Shri Fadak Dev Ji
3. Shri Shesh Mal Ji
4. Shri Bhadhya Ram Ji
Besh Ji 0 Not Available
Rawree Ji 0 Not Available
Dhidhali Ji 0 Not Available

विक्रम संवत 319 में ये 27 कुंवर (राजकुमार) अपने मूल जन्म स्थान को छोड़कर अपने राज्य के विस्तार के लिए आगे बढ़ते हैं। वे चित्रकूट (गंगा के घाव) में पहुँचते हैं जहाँ नीला सवेदी नाम की एक ब्राह्मण महिला रहती थी। वह साधना (साधना) में थी। एक दिन इन कुंवरों (राजकुमार) ने ब्राह्मण साध्वी को गंगा में नहाते हुए देखा था। उसने इन राजकुमारों को देखा और उन्हें दंडित किया। उन सभी को पत्थर की मूर्तियों में बदल दिया गया। 85 वर्षों की लंबी अवधि तक वे पत्थर की मूर्तियों में बने रहते हैं। संवत 404 में अचानक भगवान और देवी शिव-पार्वती चित्रकूट (मृत्युलोक की यात्रा) पर पहुंचते हैं। देवी पार्वती ने इन शीलखंड (पत्थर की मूर्तियों) को देखा और भगवान शिव से इनका इतिहास पूछा। उसी स्थान पर गुरु नरहरि भी रहते थे जो साधना (साधना) में थे। गुरु नरहरि इन पत्थर की मूर्तियों के इतिहास की व्याख्या करते हैं कि ब्राह्मण साध्वी ने राजकुमारों को कैसे दंडित किया। तब देवी पार्वती ने भगवान शिव से पुनर्जीवित होने के लिए आग्रह किया। देवी पार्वती की प्रार्थना पर वे गंगा में स्नान करते हैं और मूर्तियों पर गंगा का जल छिड़कते हैं। एक ही बार में सभी राजकुमार पुनर्जीवित (पुनरजीवत) हो जाते हैं। भगवान शिव और देवी पार्वती उन्हें आशीर्वाद दें कि आज से आप सभी बनिक (महाजन) बनेंगे, जाओ और व्यापार शुरू करो। अब वे केवल कुंवर हैं राजकुमार नहीं। वे सभी चित्रकूट में व्यापार में व्यस्त हो गए। बनिक व्यवसाय के कब्जे के कारण, सभी कुंवरों का नाम चित्रा कोटा महाजन रखा गया। चित्तौड़ समाज का यह प्रथम चरण था। इस तरह सभी कुंवर चौहान वंश को छोड़कर संवत 404 में चित्र कोटा महाजन बन गए थे। कुछ समय बाद इन 27 कुंवरों का विवाह राजा इंद्र के 27 फेज (अप्सरा) के साथ हुआ। बाद में ये 27 फेज चित्तौड़ समाज के 27 गोत्र और कुल-देवी में प्रसिद्ध हुए। अपनी पत्नियों (अप्सराओं) के साथ 27 कुंवरों का विवरण इस प्रकार है: -

Chitrakut

Prince NameWife Name

Shri Aas Karan ji Smt Moran Mata
Shri Achal Das ji Smt Rohini
Shri Bahadur ji mt Dhanna
Shri Banne Singh ji Smt Dharang
Shri Bhadhya Ram ji Smt. Kaneshwari
Shri Chatru Som ji Smt Jageshwari
Shri Deep Singh ji Smt Dhameri
Shri Fadak Dev ji Smt Kesar
Shri Gaja Dhar ji Smt Vaman Devi
Shri Genda ji Smt Dhanes

In such a manner 27 gotra were famed in Chittora Samaj as detailed below:-

Name of GotraMata (Kuldevi)Date of poojan/Puja

Name of Gotra
Mata (Kuldevi)
Date of poojan/PujaAchlawat Rohini Saptmi (7 of Pakhwada)
Gujar Vaman Devi Ashthmi ( 8th Day)
Hatwar Khad Bhawan Ashthmi ( 8 th Day)
Sakrodiya lateron Thikardiya Chosar Dashmi ( 10th Day)
Ved Dhanna Puji Ashthmi (8th Day)
Jundliya,Dundliya,Gundliya Matra Puji Ashthmi (8th Day)
Valas Sonam Puji Navami ( 9th Day)
Chatra Soma Jageshwari Chaudas (14 th Day)
Surat Monwas Ashthmi ( 8th Day)
Jav eya Deen Mani Ashthmi ( 8th Day)

ऐसे में चित्रकूट महाजन ने 3 साल का लंबा समय चित्रकूट में गुजारा। वे अपने गृह नगर/गांव वापस नहीं जाना चाहते थे। इसलिए वे सभी पालनपुर (गुजरात) पहुंच गए और 300 साल की लंबी अवधि तक बने रहे। बाद में विक्रम संवत 725 में वे पालनपुर छोड़ कर चित्तौड़ (राजस्थान) पहुँचे और अपना जीवनयापन किया। उस समय मोर्य वंश के राजा भुनांग चित्तौड़ के शासक थे। इस बीच जब चित्तौड़ में हमारे चित्तौड़ समाज के लोग रह रहे थे तो हमारे समाज बंधु श्री टोडु राम जी झिता लाल जी बगड़िया ने माघ शुक्ल नवमी सामवत् 989 पर चार धाम यात्रा की। जब वे अपने निवास चित्तौड़ वापस आ रहे थे तो वे रुक गए। दिल्ली में और यज्ञ किया। चित्तौड़ में वे सभी 12.5 महाजनों के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था करते हैं और चित्तौड़ के सभी महाजनों को पीतल के बर्तन वितरित करते हैं। संवत 999 में फाल्गुनी बुड़ी पंचमी श्री टोडर मल जी ने यज्ञ किया, जिसमें सभी 12.5 जाति के महाजनों को सामूहिक भोज के लिए आमंत्रित किया गया। उस समय से सभी 12.5 नयत महाजन अपना "अप्सी भोजन ववर" नियम चुनते हैं। संवत 1364 में राजा लक्ष्मण सिंह चित्तौड़ / चित्तौड़ गढ़ के शासक थे। उनकी रानी पद्मावती थीं जो एक फे (अप्सरा) की तरह बहुत सुंदर थीं। रानी पद्मावती बादशाह अल्लाहुद्दीन ने चित्तौड़गढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह पर हमला कर दिया 

Chittor Garh

यह लड़ाई 12 साल तक जारी रही। इस युद्ध में राजा लक्ष्मण सिंह और उनके पुत्रों की मृत्यु हो गई। अदिसी का इकलौता बेटा जीवित था। वे अपने समुदाय के लोगों और अन्य राज्य किरायेदार के साथ विकारम संवत 1376 में चित्तौड़गढ़ छोड़ गए। युद्ध के समय श्री शेषमल चित्रकोटा महाजन राजा लक्ष्मण सिंह जी के सचिव (कामदार) थे। इसके कारण चित्रकूट महाजनों के सैकड़ों लोग श्री शेषमल जी के युद्ध में मारे गए। शेष चित्रकूट महाजनों ने 750 बैलगाड़ियों के साथ संवत 1376 में चित्तौड़गढ़ छोड़ दिया। इनमें से 125 बैलगाड़ियां मेवाड़ उदयपुर में, 225 मालवा की ओर देवास, सोनकच्छ, शेष 350 बैलगाड़ी बूंदी कोटा की ओर शुरू की गईं। वे बूंदी साम्राज्य (बूंदी राज्य) के गांवों खेरुना और एस्टोली में बस गए थे। बूंदी राज्य के शासक राजा हाड़ा रामदेव जी थे।

उस समय सभी चित्रकूट महाजनों (चित्तौरा) ने एक टका टका राशि एकत्र की और सभी लोगों के उपयोग के लिए खेरुना और अस्तोली के मुख्य मार्ग में एक बावरी (कुंड) का निर्माण किया। बाद में यह बावरी (कुंड) "टका बावरी" द्वारा प्रसिद्ध था। उसके बाद चित्तौड़ समाज के लोग अपना अलग व्यवसाय/व्यवसाय विकसित करते हैं और बूंदी और अन्य राज्यों के विभिन्न गांवों को निवास और व्यापार के लिए चुनते हैं। ऐसे विवरण अभी भी "जगा बुक" में सुरक्षित हैं। विभिन्न गोत्रों के लोगों को भी "जग बुक" से अपना विवरण मिल सकता है। वास्तव में चित्रकूट महाजन चित्तौड़गढ़ से आए थे इसलिए इन्हें "चित्तौरा महाजन" कहा जाता था। वे सभी चित्तौड़गढ़ के वैष्णव धर्म के थे। लेकिन बाद में हमारे कुछ लोगों ने "जैन और वैष्णव" जैसे अलग धर्म को चुना। चित्तौड़गढ़ छोड़ने के बाद हमारे जाति के साथी बूंदी और कोटा जिले में निवास और व्यवसाय के लिए निम्नलिखित गाँव / कस्बे / शहर का चयन करते हैं। ऐसे गांवों के नाम इस प्रकार हैं।

Bundi
Kheruna
Astoli
Seelor
Matunda
Onkar Pira
Jhar
Jawati
Khatkad
Ganoli
Barana
Manoli
Chharakwada
Jakhana
Pipliya
Jaithal
Karwala
Jaloda
Kapren
Keshawrai Patan
Darakpira
Baniyani
Saweli

Gudhli
Teerath
Bajad
Dablana
Bambori
Hindoli
Seetapura
Khurad
Barudhan
Namana
Andher
Loyacha
Laxmipura
Aamthune
Kalyanpura
Dhaneshwar
Dabi
Palaka
Lambakhoh
Garadada
Ulera
Gudha Nathawatan
Neem ka khera

Kota
Sakatpura
Nanta
Ganwari
Koela
Anta
Palaytha
Mahuaa
Arandkheda
Gandifali
Mandana
Mandliya
Kasar
Girdharpura
Medpura
Sarola Kanla
Gehukheri
JhalaraPatan
Bijoliya
Kuaa khera
Neemadi
Tilsawa
Begu
Amar Garh

Kota district :-(Rajasthan State)
Kota
Mandana
Mandliya
Bundi district:
Bundi
Uleda
Neem ka Kheda
Namana
Barudhan
Laxmi Pura
Taleda
Ganoli
Jhali ji ka Barana
Kesho Rai Patan
Kapren
Jakhana
Jaloda
Chharakwada
Garadada
Baran District:-
Baran
Koela
Anta
Bhilwada District:-
Bhilwada
Bijolian
Udaipur District:-
Udaipur
Aayad
Bhuwana
Palodara
Jawar Mines
AAkola
Banswada
Madhya Pradesh state ( detail lists are not available will be edited on availibility):-
Indore
Ujjain
Sonkutchh
Bhopal
Burhanpur
Pani Gaon
Kampel
Barotha

List of Following cities and their villages are not available with us if provided by any of us will be edited:-
Pune
Mumbai
Gujrat
Nagpur
Delhi

Saturday, February 12, 2022

HAMARA BAJAJ PASSED AWAY

HAMARA BAJAJ PASSED AWAY 



बजाज समूह के मानद चेयरमैन राहुल बजाज अब हमारे बीच नहीं रहे. सन् 1965 में बजाज ग्रुप की बागडोर संभालने वाले राहुल बजाज की आयु 83 वर्ष थी. बजाज को निमोनिया के साथ-साथ हृदय संबंधी परेशानी भी थी. उन्हें पिछले महीने ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने आज दोपहर ढाई बजे अंतिम सांस ली.

SHAH FAMILY - PREM CABLE

 SHAH FAMILY - PREM CABLE



NITIN JAIN - CA FINAL TOPPER - 2022

NITIN JAIN - CA FINAL TOPPER - 2022

सीए फाइनल में खतौली के नितिन जैन को देश में दूसरा स्थान


सीए की फाइनल परीक्षा में पहली बार मेरठ मंडल से अखिल भारतीय स्तर पर सेकेंड टापर निकला है। खतौली के रहने वाले नितिन जैन ने सीए न्यू स्कीम में 79 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है।

सीए की फाइनल परीक्षा में पहली बार मेरठ मंडल से अखिल भारतीय स्तर पर सेकेंड टापर निकला है। खतौली के रहने वाले नितिन जैन ने सीए न्यू स्कीम में 79 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में पहली बार सीए के टाप थ्री में कोई होनहार आया है। नितिन ने दैनिक जागरण से बातचीत में अपनी सफलता की पूरी कहानी बताई है।

मेरठ से शुरू की सीए की तैयारी

नितिन जैन ने 12वीं की परीक्षा खतौली से उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 2017 से सीए की तैयारी शुरू की। इसमें उन्होंने सबसे पहले मेरठ में संजय जैन क्लासेज में तैयारी की। वर्ष 2019 से ग्रांट थनर्टन फर्म नई दिल्ली से आर्टिकलशिप शुरू की। इसके बाद आफलाइन कोचिग छोड़कर आनलाइन पढ़ाई जारी की। 2020 में कोरोना के बाद उन्होंने सीए की पेन ड्राइव क्लास में प्रवेश लिया। आफिस से आने के बाद जब भी समय मिला वह आनलाइन क्लास में अपनी तैयारी करते रहे।

बकौल नितिन कोविड के समय में आफिस भी बंद हो गया और घर पर तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिला। घर पर आनलाइन क्लास की। दिन में जो पढ़ता था, उसे रात तक एक बार जरूर दोहरा लेता था। इससे परीक्षा की तैयारी पूरी हुई।

इंटरनेट मीडिया से रखी पूरी दूरी नितिन का कहना है कि छात्रों को इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इस पर सक्रिय होने का मतलब है कि आपका बहुत सा समय यूं ही गुजर जाएगा और पता भी नहीं चलेगा। परीक्षा के समय में तो इंटरनेट मीडिया को हाथ भी नहीं लगाना चाहिए। मैं इंटरनेट मीडिया से दूर रहा। आफिस के समय में कभी- कभार इसका इस्तेमाल किया।

नियमित अध्ययन जरूरी

नितिन बताते हैं कि मैंने अपनी पढ़ाई अच्छे से की, परीक्षा के समय में भी मेरे मन में टापर बनने का ख्याल नहीं था। केवल अपना शतप्रतिशत देने का प्रयास किया। सीए बनने की इच्छा रखने वाले छात्र- छात्राओं को उनका कहना है कि सीए के लिए नियमित अध्ययन जरूरी है। जो पढ़ा जाए, उसे नियमित दोहराना भी जरूरी है।

स्कूल के समय सोचा सीए बनने की : नितिन के परिवार में कोई सीए नहीं है। स्कूल की पढ़ाई के दौरान सीए के विषय में उन्होंने जाना और शिक्षकों के सुझाव पर सीए की तैयारी शुरू की। नितिन का कहना है कि सीए अच्छा प्रोफेशन है, इसमें प्रतिष्ठा भी है। वह आगे नौकरी करना चाहते हैं।

देश के टापर से एक फीसद पीछे

सीए के अखिल भारतीय स्तर पर तीन टापर के नाम घोषित किए गए हैं। पहले स्थान पर सूरत की राधिका की 800 में 640 अंक है। जो 80 फीसद अंक है, जबकि खतौली के नितिन जैन ने 800 में 632 अंक हासिल किए हैं। जो 79 फीसद है। प्रोफाइल

नाम- नितिन जैन पिता - नीरज जैन, बिजनेस मां- भावना जैन, गृहिणी 10वीं - एमएलएम एकेडमी खतौली - वर्ष 2015 - 9.8 सीजीपीए 12वीं - एमएलएम एकेडमी खतौली- वर्ष 2017 -94.4 फीसद नितिन की सीए फाइनल की मार्कशीट ग्रुप एक - 305 अंक पेपर प्राप्तांक फाइनेंशियल रिपोर्टिग - 85 स्ट्रेटजिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट- 92 एडवांस आडिटिग एंड प्रोफेशल एथिक्स- 60 कारपोरेट एंड इकोनोमिक्स ला- 68 ग्रुप दो- 327 अंक स्ट्रेटजिक कास्ट मैनेजमेंट एंड परफार्मेस इव्यूलेशन- 77 इलेक्टिव पेपर - 80 डायरेक्ट टैक्स ला एंड इंटरनल टैक्सेशन- 76 इनडायरेक्ट टैक्स ला- 94.

SABHAR: DAINIK JAGRAN 

Thursday, February 10, 2022

KUNDALPUR MAHAMAHOTSAV

 KUNDALPUR MAHAMAHOTSAV 


JAISHALMER FORTE JAIN TEMPLE - जैसलमेर दुर्ग के जैन मंदिर

JAISHALMER FORTE JAIN TEMPLE - जैसलमेर दुर्ग के जैन मंदिर


जैसलमेर दुर्ग में कई प्राचीन जैन मंदिर बने हुए हैं। जिसमे से पार्श्वनाथ प्रभु, एवम संभवनाथ जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। श्री पार्श्वनाथ जी का मुख्य मंदिर जैसलमेर के महारावल लक्ष्मण के राजत्वकाल में खरतरगच्छाधीश जिन राजसुरि के उपदेश से बनवाया गया था। इस मंदिर की प्रतिष्ठा 1402 ईसवी में सागर चंद्र सुरि जी के कर कमलों द्वारा करवाई गई थी। इस मंदिर का निर्माण ओसवाल वंश रांका गोत्रीय सेठ श्री जयसिंह जी ने करवाया था। उस समय इस मंदिर का नाम उस समय के महारावल लक्ष्मण के नाम से लक्ष्मण विहार था, परंतु बाद में श्री पार्श्वनाथ जी के नाम से विख्यात हुआ। इस मंदिर में कुल 1253 प्रतिमाएं हैं।

इस मंदिर के पास संभवनाथ जी का मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 1437 में महारावल लक्ष्मण के काल में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण श्री जिन भद्र सुरि जी के उपदेश से चोपड़ा गोत्रिय ओसवाल सेठ शिवरता, महिराज, लोला और लाखण नाम के चार भाईयो ने मिलकर कराया था। इस मंदिर में कुल 533 प्रतिमाएं हैं।

इस मंदिर के सामने शीतल नाथ जी का मंदिर है। शीतलनाथ जी की प्रतिमा अष्ट धातु की है। इस मंदिर का निर्माण 1480 में महारावल देवकरण के राज्यकाल में हुआ था। इस मंदिर का निचला हिस्सा संखलेचा गोत्रिय सेठ खेता ने करवाया था। ऊपरी भाग पिता ने अपनी बेटी वीरा के नाम पर करवाया था। बेटी ने अपने आभूषणों से प्रतिमा पर स्वर्ण परत चढ़वाया था। इसके अतिरिक्त चंद्र प्रभु स्वामी और ऋषभ देव जी के मंदिर भी बने हुए हैं।
ये मंदिर एक किले नुमा संरचना के अंदर है। मुख्य द्वार बेहद ही छोटा होना इस बात की प्रमाण है कि प्राचीन काल में शत्रुओ के आक्रमण से बचने एवम सुरक्षा की दृष्टि से मंदिरो एवम मकानों के मुख्य दरवाजे छोटे छोटे बनाए जाते थे।

लगभग छः सौ साल पुराने इन मंदिरों की स्थापत्य कला एवम इनमे स्थापित प्राचीन प्रतिमाएं देखते ही बनती है। इन मंदिरों में कुल 6600 प्रतिमाओं की पूजा प्रतिदिन होती है। मंदिरो के तोरण, गर्भगृह, शिखर और प्रदक्षिणाओ में बनी जैन एवम अन्य प्रतिमाएं शिल्पियों के श्रम और साधना के साथ साथ उच्च कोटि की कला का स्वरूप प्रस्तुत करती है। मूर्तियों की भाव भंगिमा देखते ही बनती है। मूर्तिकला के उच्च शिखर को प्राप्त इन प्रतिमाओं की तुलना कोणार्क, किराडू, खजुराहो से की जाती है।

SABHAR : ओम प्रकाश सोनी दंतेवाड़ा
संदर्भ — 1.सुनहरा नगर जैसलमेर नंदकिशोर शर्मा
2 जैसलमेर की सांस्कृतिक धरोहर डा रघुवीर सिंह भाटी
3 जैसलमेर राज्य का इतिहास मांगीलाल व्यास मयंक

CA FINAL - वैश्य छात्र छात्राओं का जलवा

 
CA FINAL - वैश्य छात्र छात्राओं का जलवा 






Tuesday, February 8, 2022

Friday, February 4, 2022

Thursday, February 3, 2022

SANDEEP MAHESHWARI - SUCCESS STORY

SANDEEP MAHESHWARI - SUCCESS STORY 

संदीप महेश्वरी (Sandeep Maheshwari) एक ऐसी पर्सनालिटी हैं जो पूरे देश के युवाओं की प्रेरणा हैं।


आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जिस व्‍यक्ति की सक्‍सेस स्‍टोरी बताने जा रहे हैं, वो हैं इस वेबसाइट के संस्‍थापक और सीईओ संदीप महेश्वरी (Sandeep Maheshwari)। उन्होंने अपनी असफलताओं से सीखकर, संघर्ष के बाद जो सफलता हासिल की, वह अपने आप में मोटिवेशनल स्टोरी है। यही कारण है कि, आज इन्‍हें भारतीय युवाओं का मोटिवेशन आइकन माना जाता है। ये अपने मोटिवेशनल सेमिनार और इंस्पायरिंग वीडियो के माध्‍यम से युवाओं को मोटिवेट करते हैं।

बचपन में ही करना पड़ा आर्थिक समस्या का सामना

संदीप माहेश्वरी (Sandeep Maheshwari) एक जन्‍म मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। इनके पिता रूप किशोर माहेश्वरी का एल्युमीनियम का बिजनेस था। संदीप जब पढाई कर रहे थे, तभी किसी कारणवश इनके पिता का एल्युमीनियम का बिज़नेस बंद हो गया। जिसके चलते परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। जिसके कारण संदीप ने 12वीं के बाद उन्‍होंने पढ़ाई के साथ ही जॉब करनी शुरू कर दी। उन्‍होंने छोटी-मोटी नौकरी शुरू कर दी और साथ ही किरोरीमल कॉलेज से बीकॉम करने लगे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण इन्‍हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

शुरुआती दौर में करना पड़ा काफी संघर्ष

संदीप के पिता का बिजनेस जब बंद हुआ था, तब संदीप 10वीं क्‍लास में थे। इनके पिता ने बिजनेस बंद होने के बाद पीसीओ शॉप खोली थी, जहां पर संदीप में काम करते थे। इसके बाद उन्होंने घर पर ही एक लिक्विड शॉप बनाया, जिसे वे घर-घर जाकर बेचते थे। इस काम से उन्हें जो पैसे मिलते थे, उससे घर खर्च चलता था। हालांकि यह काम भी ज्यादा दिन नहीं चला और बंद हो गया।

इसके बाद संदीप ने मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहा। हालांकि यहां भी संदीप को ज्‍यादा सफलता नहीं मिली। यहां पर उन्होंने देखा कि बहुत सारे युवा इस फील्ड में संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए उन्‍होंने सोच कि क्‍यों न इन्‍हें प्रेरित करने का कार्य करूं। जिसके बाद उन्होंने अपना टारगेट बदला और लोगों को अपने अनुभव के आधार पर मोटिवेट करने लगे। इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया था।

खोली खुद की कंपनी

हर फिल्‍ड में लगातार मिल रही असफलताओं के बाद भी संदीप हार मानने को तैयार नहीं थे। उन्होंने Audio visual pvt. Ltd. नाम से एक कंपनी खोल ली, लेकिन यहां भी वे असफलत रहे। कुछ समय बाद इसे भी बंद करना पड़ा। इसके बाद उनके एक दोस्त ने उन्हें एक मल्टी नेशनल मार्केटिंग कंपनी ज्वाइन कराई। जहां पर कुछ दिनों के कार्य के बाद संदीप का मन नहीं लगा और इसे भी छोड़ना पड़ गया। इसके बाद संदीप ने वर्ष 2002 में अपने 3 दोस्तों के साथ मिलकर एक कंपनी खोली। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार वह सफल हो जाएंगे।

लेकिन यह कंपनी केवल 6 महीने ही चल पाई। संदीप ने एक इंटरव्‍यू में बताया कि इन असफलताओं के बाद मैं काफी परेशान रहने लगा। क्योंकि मैं जिस भी कार्य को करता उसमें असफलता के अलावा कुछ भी नहीं मिलता। उनके ऊपर परिवार की बहुत बड़ी जिम्मदारी थी। वह अपने परिवार में सबसे बड़े थे और उनकी एक छोटी बहन थी।

फोटोग्राफी की दुनिया में रखा कदम

संदीप माहेश्वरी को मॉडलिंग के समय से ही फोटोग्राफी में रूचि थी। जब भी उनका मन बेचैन होता तो वो अपना कैमरा लेकर फोटोग्राफी करने निकल पड़ते थे। वो उन फोटो को स्टोर करके रखते थे। उन्होंने सन् 2003 में 10.45 घंटे में 122 मॉडल्स के 10,000 से भी ज्यादा अलग अलग फोटोज ली। इस बार उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिया। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इस बार उन्हें इस काम में सफलता मिली। वे अपने इस सफल प्रयास से बहुत खुश थे। यहां से उन्होंने फोटोग्राफी में ही अपना करियर बनाने का फैसला किया।

Imagesbazaar.com वेबसाइट की पड़ी नींव

संदीप माहेश्वरी ने इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद खुद की एक कंपनी बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक वेबसाइट बनाई जिसका नाम Imagesbazaar.com है। शुरू में इस वेबसाइट से उन्‍हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, क्योंकि उस समय इस वेबसाइट में कम फोटोज हुआ करती थी। संदीप शुरू में इंडियन मॉडल्स और इंडियन फोटोग्राफर की फोटो डालते थे। समय के साथ साथ वह इस वेबसाइट को डिजाइन बेहतर बनाते गए। वो इस पर दिन रात मेहनत करने लगे। जिसके बाद उन्‍होंने इस वेबसाइट में वर्ल्ड वाइड मॉडल्स के फोटोज भी डालने लगे।

आज इमेज बाजार में करोड़ों फोटोज हैं। उन्होंने 26 साल की उम्र में इस कंपनी की शुरुआत की थी और 29 साल की उम्र में संदीप माहेश्‍वरी भारत के प्रसिद्ध युवा उद्योगपतियों में गिने जाने लगे। आज संदीप माहेश्वरी बहुत सारे लोगो को मोटीवेट करते है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है। जो लोग असफल हो जाते हैं, उनका साहस बढ़ाते हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है। Imagesbazaar.com संदीप माहेश्वरी की मेहनत का परिणाम है।

साभार: नव भारत टाइम्स 

SHREYA AGRAWAL - ISSF WORLDCUP

SHREYA AGRAWAL - ISSF WORLDCUP

म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के

जबलपुर की श्रेया अग्रवाल का ISSF वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में चयन।

मध्यप्रदेश के संस्कारधानी की श्रेया अग्रवाल ने समाज का नाम रोशन किया है, राइफल शूटर श्रेया अग्रवाल का आईएसएसएफ वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में चयन हुआ है, यह प्रतियोगिता कायरों, इजिप्ट की राजधानी में 25 फरवरी से 8 मार्च 2022 तक होगी, जिसमें की वर्ल्ड कप शूटिंग चैंपियनशिप के लिए कई शूटर प्रतियोगिता भी शामिल होंगे, श्रेया अग्रवाल 10 मीटर एयर राइफल वुमन कैटेगरी में भाग लेगी।


श्रेया ने हाल ही में संपन्न हुई नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 पदक जीते थे एवं इंडियन टीम सिलेक्शन ट्रायल्स में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था, इस वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए नई दिल्ली में डॉ कर्णी सिंह रेंज में 9 से 24 फरवरी तक शूटिंग कैम्प का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कि श्रेया भाग लेगी एवं आने वाले वर्ल्ड कप की तैयारी भी श्रेया दिल्ली में ही करेगी, गौरतलब है कि श्रेया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अभी तक 20 मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया है, श्रेया गन फॉर ग्लोरी एकेडमी के कोच निशांत नथवानी के मार्गदर्शन में बीते 6 सालों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

प्रतियोगिता के लिए श्रेया अग्रवाल को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और उज्जवल भविष्य की कामना।

TRIPTI GUPTA - USA SCIENTIST

TRIPTI GUPTA - USA SCIENTIST