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Wednesday, October 19, 2011

भारत का अंतिम हिंदु सम्राट एक वैश्य था.

आपको विश्वास न होगा यह सुनकर कि भारत का अंतिम हिंदु सम्राट एक वैश्य था. वह दिल्ली का आखिरी हिंदु सम्राट था, हेम चन्द्र विक्रमादित्य. जो कि हेमू विक्रमादित्य  के नाम से मशहूर था. वह बिहार के सासाराम जनपद के एक रौनियार वैश्य परिवार से सम्बंधित था. उसका शासन १६ वी शताब्दी में था. उसके पिता रेवाड़ी में एक व्यापारी थे. हेमू सूरी वंश के आदिलशाह सूरी का प्रधानमंत्री व सेनापति था. वह अफ्घान विद्रोहियों से पंजाब और बंगाल में लड़ता रहा और उन्हें परास्त किया . अकबर व हुमायु व अफ्घन विद्रोहियों से  उसने २२ युद्ध जीते . ७ अक्टूबर १५५६ को वह दिल्ली का सम्राट बना और विक्रमादित्य की उपाधि से घोषित किया गया. उनका राजभिषेक दिल्ली के पुराना किले में किया गया. और हिन्दू शाही की ३५० साल बाद फिर स्थापना की. पानीपत की लड़ाई में अकबर ने हेमू की धोके से गर्दन काट दी. व गाजी कहलाया. यदि यह युद्ध हेमू जीत जाता तो भारत का इतिहास ही बदल जाता. पर इतिहास में  हेमू को याद नहीं किया जाता, व मुग़ल सल्तनत को महान बताया जाता हैं. यह कितनी शर्म की बात हैं. आज भी दिल्ली में उनका एक भी स्मारक नहीं  हैं. पर जिन्होंने हमें गुलाम बनाया उनके नाम पर सड़के व स्मारक  बने हुए हैं, हेमू पर हमें गर्व हैं. उस वैश्य वीर को शत शत नमन.




Saturday, October 15, 2011

गुप्त वंश के सम्राट वैश्य

गुप्त वंश या गुप्ता साम्राज्य की स्थापना महाराज श्रीगुप्त ने की थी जिसका शासन प्रयाग के पास था. वह जन्म से वैश्य था. जिसका गोत्र धारण था. धारण गोत्र अग्रवालो का एक गोत्र होता हैं. 

गुप्त या गुप्ता हमेशा से ही वैश्यो केलिए प्रयोग होता रहा हैं. गुप्त नाम भगवान विष्णु के लिए भी प्रयुक्त हुआ हैं. भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी हैं. और वैश्यों को लक्ष्मी पुत्र भी कहा जाता हैं. इसी लिए वैश्यो के लिए गुप्त शब्द प्रयोग होता हैं. 

गुप्त वंश के शासन को भारत का स्वर्ण काल कहा जाता हैं. गुप्तो की कुलदेवी माता लक्ष्मी थी. उस काल की स्वर्ण मुद्राओ पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के चित्र मिलते हैं. गुप्त काल में ही नारद पुराण लिखा गयाथा. जिसमे शर्मास्य ब्राहमण, गुप्तस्य वैश्य, वर्मस्य क्षत्रिय, लिखा गया  हैं. इससे सिद्ध होता हैं की गुप्त वंश के सम्राट वैश्य थे. गुप्त वंश के राजाओं के विवाह सम्बन्ध नाग वंश की कन्याओं से हुए थे. नाग वंश हम अगरवालो के लिए पूजनीय रहा हैं. नागों की पूजा अगरवालो के घर घर में होती हैं. 

सम्राट समुद्र गुप्त को भारत का नपोलियन कहा गया हैं. जिसका राज्य बर्मा से इरान तक फैला हुआ था. सम्राट चन्द्रगुप्त II को विक्रमादित्य की उपाधि से नवाजा गया हैं. गुप्त वंश का शासन भारत में ३०० साल तक रहा. गुप्तो ने शको और हूणों का दमन किया. और भारत को उनसे मुक्ति दिलाई. गुप्त वंश जैसा साम्राज्य भारत में और कोई दिखाई नहीं देता. यह हम वैश्यो के लिए बड़े ही गर्व की बात हैं.


Tuesday, July 12, 2011

वैश्य क्रांतिवीर व आज़ादी के दीवाने


वैश्य वर्ण में स्वतंत्रता के संग्राम में आहुति देने वाले बहुत से वीर हुए हैं,
जिनका वर्णन में नीचे कर रहा हूँ. जिन्हें की में जनता हूँ. यदि आप भी किसी वैश्य  क्रांतिवीर को जानते हो तो संपर्क करे.

१. राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी.

2. सरदार वल्लभ भाई पटेल.

3. लाला लाजपत राय जो की सभी महान क्रन्तिकारी जैसे की सरदार       भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बिस्मिल, मनमंथ नाथ गुप्त आदि के गुरु थे.

४. मनमंथ नाथ गुप्त (काले पानी की सजा )

५. बादल गुप्ता (अलीपुर बम कांड ) .

६. दिनेश गुप्ता (जिन्हें फांसी पर चढ़ाया गया)

७. नालोनी कान्त गुप्ता

8. निरंजन सेन गुप्ता

९. सेठ जमनालाल बजाज

१०. सेठ घनश्याम दस बिरला

११. लाला परमानन्द

१२. लाला जगत नारायण





Thursday, June 30, 2011

वैश्यों का स्वर्णिम इतिहास

हमारे वैश्य समाज का एक स्वर्णिम इतिहास रहा हैं. वैश्य समुदाय की ९०% जातिया क्षत्रियो से उत्पन्न हुईं हैं. कुछ जातियों का वर्णन नीचे कर रहा हूँ,

१. अग्रवाल :- अग्रवालो की उत्पत्ति महाराजा अग्रसेन से हुईं हैं, जो की  सूर्यवंशी क्षत्रिय थे.

२. महेश्वरी:- माहेश्वरियो की उत्पत्ति भगवन शिव से हुईं.

३. खंडेलवाल:- इनकी उत्पत्ति रजा खंडेल सेन से हुईं हैं.

४. वर्णवाल:- राजा अहिर्वर्ण से.

5. पोडवाल:- राजा पुरु से.

६. वार्ष्णेय:- राजा अक्रूर जी से, जो की भगवान श्री कृष्ण के चाचा थे.

७. माहुरी:- चन्द्रगुप्त मौर्या से

८. कलवार:- राजा सहस्र बाहु से.

९. साहू तेल्ली:- गुरु गोरखनाथ से


वैश्य सम्राट और राजा

१. सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्या
जो कि भारत के पहले घोषित चक्रवर्ती सम्राट थे.

२. सम्राट बिन्दुसार

३. सम्राट अशोक महान

४. राजा श्रीगुप्त

५. राजा घटोत्कच गुप्त

६. सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य

७. सम्राट समुद्र गुप्ता

८. राजा कुमार गुप्त

९. सम्राट स्कन्द गुप्त

१०. सम्राट यशो वर्धन

११. सम्राट हर्षवर्धन

१२. सम्राट हेमू विक्रमादित्य( भारत के आखिरी हिन्दू सम्राट)
१३. राजा भामाशाह

१४. नंदराय जी ( श्री कृष्ण जी के पिता )

१५. वृषभान जी ( राधा जी के पिता )

१६. राज कुमार उदयन (उज्जैन)

१७. सम्राट भृतहरी

इससे पता चलता हैं की हमारा इतिहास कितना महान और विशाल हैं.





Monday, April 18, 2011

चन्द्र गुप्त मौर्य एक महान वैश्य-CHANDRAGUPTA MOURYA A GREAT VAISHYA




सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य  एक वैश्य जाति माहुरी से सम्बन्ध रखता था। गुजरात का राज्यपाल पुष्पगुप्त जो की उसका बहनोई था वह भी एक वैश्य था। गुप्त या गुप्ता उपनाम केवल वैश्य ही प्रयोग करते थे , ओर करते हैं । चन्द्रगुप्त ने बाद में जैन धर्म अपना लिया था, जैन पूरी तरह से एक वैश्य जाती हैं. १००% जैन वैश्य हैं।



 माहुरी जाति अपने आप को चन्द्रगुप्त का वंशज मानती हैं। जो की बिहार के गया जिले में निवास करती हैं। मौर्य उपनाम चन्द्रगुप्त को चाणक्य ने दिया था। क्योंकि चन्द्रगुप्त कि माँ का नाम मुरा था। मुरा से ही मौर्य बना। चन्द्रगुप्त की पत्नी एक वैश्य नगर सेठ की पुत्री थी। चन्द्रगुप्त की कुलदेवी माता लक्ष्मी थी। जो की वैश्य समुदाय की कुल देवी मानी जाती हैं। चन्द्रगुप्त के समय में जो विदेशी इतिहासकार भारत में आयें उन्होंने भी चन्द्रगुप्त को वैश्य ही बताया था। इतिहास में उसका कही भी क्षत्रिय होने का प्रमाण नहीं मिलता हैं। नाही शुद्र होने का, क्योंकि एक ब्रहामण चाणक्य कभी भी एक शुद्र को शिक्षा नहीं दे सकते थे।


राजा को हमेशा क्षत्रिय माना गया हैं, वैश्य समुदाय की अधिकतर जातियों की उत्पत्ति क्षत्रियो से ही हुईं हैं। जो की एक इतिहास हैं। भारत मैं हर जाति व समुदाय का शासन रहा हैं। आधुनिक इतिहासकारों को कोई भी राजा व सम्राट,  वैश्य व शुद्र होना हज़म नहीं होता हैं। चन्द्रगुप्त के पोते सम्राट अशोक की पत्नी भी एक वैश्य पुत्री थी। ज़ाहिर हैं रिश्ते नाते आदमी अपने वर्ण या जातिं में ही करते रहे हैं। ये प्रमाण सिद्ध करते हैं। कि चन्द्रगुप्त मौर्या और सम्राट अशोक वैश्य ही थे।