Pages

Saturday, February 12, 2022

HAMARA BAJAJ PASSED AWAY

HAMARA BAJAJ PASSED AWAY 



बजाज समूह के मानद चेयरमैन राहुल बजाज अब हमारे बीच नहीं रहे. सन् 1965 में बजाज ग्रुप की बागडोर संभालने वाले राहुल बजाज की आयु 83 वर्ष थी. बजाज को निमोनिया के साथ-साथ हृदय संबंधी परेशानी भी थी. उन्हें पिछले महीने ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने आज दोपहर ढाई बजे अंतिम सांस ली.

SHAH FAMILY - PREM CABLE

 SHAH FAMILY - PREM CABLE



NITIN JAIN - CA FINAL TOPPER - 2022

NITIN JAIN - CA FINAL TOPPER - 2022

सीए फाइनल में खतौली के नितिन जैन को देश में दूसरा स्थान


सीए की फाइनल परीक्षा में पहली बार मेरठ मंडल से अखिल भारतीय स्तर पर सेकेंड टापर निकला है। खतौली के रहने वाले नितिन जैन ने सीए न्यू स्कीम में 79 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है।

सीए की फाइनल परीक्षा में पहली बार मेरठ मंडल से अखिल भारतीय स्तर पर सेकेंड टापर निकला है। खतौली के रहने वाले नितिन जैन ने सीए न्यू स्कीम में 79 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में पहली बार सीए के टाप थ्री में कोई होनहार आया है। नितिन ने दैनिक जागरण से बातचीत में अपनी सफलता की पूरी कहानी बताई है।

मेरठ से शुरू की सीए की तैयारी

नितिन जैन ने 12वीं की परीक्षा खतौली से उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 2017 से सीए की तैयारी शुरू की। इसमें उन्होंने सबसे पहले मेरठ में संजय जैन क्लासेज में तैयारी की। वर्ष 2019 से ग्रांट थनर्टन फर्म नई दिल्ली से आर्टिकलशिप शुरू की। इसके बाद आफलाइन कोचिग छोड़कर आनलाइन पढ़ाई जारी की। 2020 में कोरोना के बाद उन्होंने सीए की पेन ड्राइव क्लास में प्रवेश लिया। आफिस से आने के बाद जब भी समय मिला वह आनलाइन क्लास में अपनी तैयारी करते रहे।

बकौल नितिन कोविड के समय में आफिस भी बंद हो गया और घर पर तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिला। घर पर आनलाइन क्लास की। दिन में जो पढ़ता था, उसे रात तक एक बार जरूर दोहरा लेता था। इससे परीक्षा की तैयारी पूरी हुई।

इंटरनेट मीडिया से रखी पूरी दूरी नितिन का कहना है कि छात्रों को इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इस पर सक्रिय होने का मतलब है कि आपका बहुत सा समय यूं ही गुजर जाएगा और पता भी नहीं चलेगा। परीक्षा के समय में तो इंटरनेट मीडिया को हाथ भी नहीं लगाना चाहिए। मैं इंटरनेट मीडिया से दूर रहा। आफिस के समय में कभी- कभार इसका इस्तेमाल किया।

नियमित अध्ययन जरूरी

नितिन बताते हैं कि मैंने अपनी पढ़ाई अच्छे से की, परीक्षा के समय में भी मेरे मन में टापर बनने का ख्याल नहीं था। केवल अपना शतप्रतिशत देने का प्रयास किया। सीए बनने की इच्छा रखने वाले छात्र- छात्राओं को उनका कहना है कि सीए के लिए नियमित अध्ययन जरूरी है। जो पढ़ा जाए, उसे नियमित दोहराना भी जरूरी है।

स्कूल के समय सोचा सीए बनने की : नितिन के परिवार में कोई सीए नहीं है। स्कूल की पढ़ाई के दौरान सीए के विषय में उन्होंने जाना और शिक्षकों के सुझाव पर सीए की तैयारी शुरू की। नितिन का कहना है कि सीए अच्छा प्रोफेशन है, इसमें प्रतिष्ठा भी है। वह आगे नौकरी करना चाहते हैं।

देश के टापर से एक फीसद पीछे

सीए के अखिल भारतीय स्तर पर तीन टापर के नाम घोषित किए गए हैं। पहले स्थान पर सूरत की राधिका की 800 में 640 अंक है। जो 80 फीसद अंक है, जबकि खतौली के नितिन जैन ने 800 में 632 अंक हासिल किए हैं। जो 79 फीसद है। प्रोफाइल

नाम- नितिन जैन पिता - नीरज जैन, बिजनेस मां- भावना जैन, गृहिणी 10वीं - एमएलएम एकेडमी खतौली - वर्ष 2015 - 9.8 सीजीपीए 12वीं - एमएलएम एकेडमी खतौली- वर्ष 2017 -94.4 फीसद नितिन की सीए फाइनल की मार्कशीट ग्रुप एक - 305 अंक पेपर प्राप्तांक फाइनेंशियल रिपोर्टिग - 85 स्ट्रेटजिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट- 92 एडवांस आडिटिग एंड प्रोफेशल एथिक्स- 60 कारपोरेट एंड इकोनोमिक्स ला- 68 ग्रुप दो- 327 अंक स्ट्रेटजिक कास्ट मैनेजमेंट एंड परफार्मेस इव्यूलेशन- 77 इलेक्टिव पेपर - 80 डायरेक्ट टैक्स ला एंड इंटरनल टैक्सेशन- 76 इनडायरेक्ट टैक्स ला- 94.

SABHAR: DAINIK JAGRAN 

Thursday, February 10, 2022

KUNDALPUR MAHAMAHOTSAV

 KUNDALPUR MAHAMAHOTSAV 


JAISHALMER FORTE JAIN TEMPLE - जैसलमेर दुर्ग के जैन मंदिर

JAISHALMER FORTE JAIN TEMPLE - जैसलमेर दुर्ग के जैन मंदिर


जैसलमेर दुर्ग में कई प्राचीन जैन मंदिर बने हुए हैं। जिसमे से पार्श्वनाथ प्रभु, एवम संभवनाथ जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। श्री पार्श्वनाथ जी का मुख्य मंदिर जैसलमेर के महारावल लक्ष्मण के राजत्वकाल में खरतरगच्छाधीश जिन राजसुरि के उपदेश से बनवाया गया था। इस मंदिर की प्रतिष्ठा 1402 ईसवी में सागर चंद्र सुरि जी के कर कमलों द्वारा करवाई गई थी। इस मंदिर का निर्माण ओसवाल वंश रांका गोत्रीय सेठ श्री जयसिंह जी ने करवाया था। उस समय इस मंदिर का नाम उस समय के महारावल लक्ष्मण के नाम से लक्ष्मण विहार था, परंतु बाद में श्री पार्श्वनाथ जी के नाम से विख्यात हुआ। इस मंदिर में कुल 1253 प्रतिमाएं हैं।

इस मंदिर के पास संभवनाथ जी का मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 1437 में महारावल लक्ष्मण के काल में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण श्री जिन भद्र सुरि जी के उपदेश से चोपड़ा गोत्रिय ओसवाल सेठ शिवरता, महिराज, लोला और लाखण नाम के चार भाईयो ने मिलकर कराया था। इस मंदिर में कुल 533 प्रतिमाएं हैं।

इस मंदिर के सामने शीतल नाथ जी का मंदिर है। शीतलनाथ जी की प्रतिमा अष्ट धातु की है। इस मंदिर का निर्माण 1480 में महारावल देवकरण के राज्यकाल में हुआ था। इस मंदिर का निचला हिस्सा संखलेचा गोत्रिय सेठ खेता ने करवाया था। ऊपरी भाग पिता ने अपनी बेटी वीरा के नाम पर करवाया था। बेटी ने अपने आभूषणों से प्रतिमा पर स्वर्ण परत चढ़वाया था। इसके अतिरिक्त चंद्र प्रभु स्वामी और ऋषभ देव जी के मंदिर भी बने हुए हैं।
ये मंदिर एक किले नुमा संरचना के अंदर है। मुख्य द्वार बेहद ही छोटा होना इस बात की प्रमाण है कि प्राचीन काल में शत्रुओ के आक्रमण से बचने एवम सुरक्षा की दृष्टि से मंदिरो एवम मकानों के मुख्य दरवाजे छोटे छोटे बनाए जाते थे।

लगभग छः सौ साल पुराने इन मंदिरों की स्थापत्य कला एवम इनमे स्थापित प्राचीन प्रतिमाएं देखते ही बनती है। इन मंदिरों में कुल 6600 प्रतिमाओं की पूजा प्रतिदिन होती है। मंदिरो के तोरण, गर्भगृह, शिखर और प्रदक्षिणाओ में बनी जैन एवम अन्य प्रतिमाएं शिल्पियों के श्रम और साधना के साथ साथ उच्च कोटि की कला का स्वरूप प्रस्तुत करती है। मूर्तियों की भाव भंगिमा देखते ही बनती है। मूर्तिकला के उच्च शिखर को प्राप्त इन प्रतिमाओं की तुलना कोणार्क, किराडू, खजुराहो से की जाती है।

SABHAR : ओम प्रकाश सोनी दंतेवाड़ा
संदर्भ — 1.सुनहरा नगर जैसलमेर नंदकिशोर शर्मा
2 जैसलमेर की सांस्कृतिक धरोहर डा रघुवीर सिंह भाटी
3 जैसलमेर राज्य का इतिहास मांगीलाल व्यास मयंक

CA FINAL - वैश्य छात्र छात्राओं का जलवा

 
CA FINAL - वैश्य छात्र छात्राओं का जलवा 






Tuesday, February 8, 2022

Friday, February 4, 2022

Thursday, February 3, 2022

SANDEEP MAHESHWARI - SUCCESS STORY

SANDEEP MAHESHWARI - SUCCESS STORY 

संदीप महेश्वरी (Sandeep Maheshwari) एक ऐसी पर्सनालिटी हैं जो पूरे देश के युवाओं की प्रेरणा हैं।


आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जिस व्‍यक्ति की सक्‍सेस स्‍टोरी बताने जा रहे हैं, वो हैं इस वेबसाइट के संस्‍थापक और सीईओ संदीप महेश्वरी (Sandeep Maheshwari)। उन्होंने अपनी असफलताओं से सीखकर, संघर्ष के बाद जो सफलता हासिल की, वह अपने आप में मोटिवेशनल स्टोरी है। यही कारण है कि, आज इन्‍हें भारतीय युवाओं का मोटिवेशन आइकन माना जाता है। ये अपने मोटिवेशनल सेमिनार और इंस्पायरिंग वीडियो के माध्‍यम से युवाओं को मोटिवेट करते हैं।

बचपन में ही करना पड़ा आर्थिक समस्या का सामना

संदीप माहेश्वरी (Sandeep Maheshwari) एक जन्‍म मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। इनके पिता रूप किशोर माहेश्वरी का एल्युमीनियम का बिजनेस था। संदीप जब पढाई कर रहे थे, तभी किसी कारणवश इनके पिता का एल्युमीनियम का बिज़नेस बंद हो गया। जिसके चलते परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। जिसके कारण संदीप ने 12वीं के बाद उन्‍होंने पढ़ाई के साथ ही जॉब करनी शुरू कर दी। उन्‍होंने छोटी-मोटी नौकरी शुरू कर दी और साथ ही किरोरीमल कॉलेज से बीकॉम करने लगे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण इन्‍हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

शुरुआती दौर में करना पड़ा काफी संघर्ष

संदीप के पिता का बिजनेस जब बंद हुआ था, तब संदीप 10वीं क्‍लास में थे। इनके पिता ने बिजनेस बंद होने के बाद पीसीओ शॉप खोली थी, जहां पर संदीप में काम करते थे। इसके बाद उन्होंने घर पर ही एक लिक्विड शॉप बनाया, जिसे वे घर-घर जाकर बेचते थे। इस काम से उन्हें जो पैसे मिलते थे, उससे घर खर्च चलता था। हालांकि यह काम भी ज्यादा दिन नहीं चला और बंद हो गया।

इसके बाद संदीप ने मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहा। हालांकि यहां भी संदीप को ज्‍यादा सफलता नहीं मिली। यहां पर उन्होंने देखा कि बहुत सारे युवा इस फील्ड में संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए उन्‍होंने सोच कि क्‍यों न इन्‍हें प्रेरित करने का कार्य करूं। जिसके बाद उन्होंने अपना टारगेट बदला और लोगों को अपने अनुभव के आधार पर मोटिवेट करने लगे। इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया था।

खोली खुद की कंपनी

हर फिल्‍ड में लगातार मिल रही असफलताओं के बाद भी संदीप हार मानने को तैयार नहीं थे। उन्होंने Audio visual pvt. Ltd. नाम से एक कंपनी खोल ली, लेकिन यहां भी वे असफलत रहे। कुछ समय बाद इसे भी बंद करना पड़ा। इसके बाद उनके एक दोस्त ने उन्हें एक मल्टी नेशनल मार्केटिंग कंपनी ज्वाइन कराई। जहां पर कुछ दिनों के कार्य के बाद संदीप का मन नहीं लगा और इसे भी छोड़ना पड़ गया। इसके बाद संदीप ने वर्ष 2002 में अपने 3 दोस्तों के साथ मिलकर एक कंपनी खोली। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार वह सफल हो जाएंगे।

लेकिन यह कंपनी केवल 6 महीने ही चल पाई। संदीप ने एक इंटरव्‍यू में बताया कि इन असफलताओं के बाद मैं काफी परेशान रहने लगा। क्योंकि मैं जिस भी कार्य को करता उसमें असफलता के अलावा कुछ भी नहीं मिलता। उनके ऊपर परिवार की बहुत बड़ी जिम्मदारी थी। वह अपने परिवार में सबसे बड़े थे और उनकी एक छोटी बहन थी।

फोटोग्राफी की दुनिया में रखा कदम

संदीप माहेश्वरी को मॉडलिंग के समय से ही फोटोग्राफी में रूचि थी। जब भी उनका मन बेचैन होता तो वो अपना कैमरा लेकर फोटोग्राफी करने निकल पड़ते थे। वो उन फोटो को स्टोर करके रखते थे। उन्होंने सन् 2003 में 10.45 घंटे में 122 मॉडल्स के 10,000 से भी ज्यादा अलग अलग फोटोज ली। इस बार उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिया। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इस बार उन्हें इस काम में सफलता मिली। वे अपने इस सफल प्रयास से बहुत खुश थे। यहां से उन्होंने फोटोग्राफी में ही अपना करियर बनाने का फैसला किया।

Imagesbazaar.com वेबसाइट की पड़ी नींव

संदीप माहेश्वरी ने इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद खुद की एक कंपनी बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक वेबसाइट बनाई जिसका नाम Imagesbazaar.com है। शुरू में इस वेबसाइट से उन्‍हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, क्योंकि उस समय इस वेबसाइट में कम फोटोज हुआ करती थी। संदीप शुरू में इंडियन मॉडल्स और इंडियन फोटोग्राफर की फोटो डालते थे। समय के साथ साथ वह इस वेबसाइट को डिजाइन बेहतर बनाते गए। वो इस पर दिन रात मेहनत करने लगे। जिसके बाद उन्‍होंने इस वेबसाइट में वर्ल्ड वाइड मॉडल्स के फोटोज भी डालने लगे।

आज इमेज बाजार में करोड़ों फोटोज हैं। उन्होंने 26 साल की उम्र में इस कंपनी की शुरुआत की थी और 29 साल की उम्र में संदीप माहेश्‍वरी भारत के प्रसिद्ध युवा उद्योगपतियों में गिने जाने लगे। आज संदीप माहेश्वरी बहुत सारे लोगो को मोटीवेट करते है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है। जो लोग असफल हो जाते हैं, उनका साहस बढ़ाते हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है। Imagesbazaar.com संदीप माहेश्वरी की मेहनत का परिणाम है।

साभार: नव भारत टाइम्स 

SHREYA AGRAWAL - ISSF WORLDCUP

SHREYA AGRAWAL - ISSF WORLDCUP

म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के

जबलपुर की श्रेया अग्रवाल का ISSF वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में चयन।

मध्यप्रदेश के संस्कारधानी की श्रेया अग्रवाल ने समाज का नाम रोशन किया है, राइफल शूटर श्रेया अग्रवाल का आईएसएसएफ वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में चयन हुआ है, यह प्रतियोगिता कायरों, इजिप्ट की राजधानी में 25 फरवरी से 8 मार्च 2022 तक होगी, जिसमें की वर्ल्ड कप शूटिंग चैंपियनशिप के लिए कई शूटर प्रतियोगिता भी शामिल होंगे, श्रेया अग्रवाल 10 मीटर एयर राइफल वुमन कैटेगरी में भाग लेगी।


श्रेया ने हाल ही में संपन्न हुई नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 पदक जीते थे एवं इंडियन टीम सिलेक्शन ट्रायल्स में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था, इस वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए नई दिल्ली में डॉ कर्णी सिंह रेंज में 9 से 24 फरवरी तक शूटिंग कैम्प का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कि श्रेया भाग लेगी एवं आने वाले वर्ल्ड कप की तैयारी भी श्रेया दिल्ली में ही करेगी, गौरतलब है कि श्रेया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अभी तक 20 मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया है, श्रेया गन फॉर ग्लोरी एकेडमी के कोच निशांत नथवानी के मार्गदर्शन में बीते 6 सालों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

प्रतियोगिता के लिए श्रेया अग्रवाल को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और उज्जवल भविष्य की कामना।

TRIPTI GUPTA - USA SCIENTIST

TRIPTI GUPTA - USA SCIENTIST



Sunday, January 30, 2022

AKSRSH SHROFF - UNO AWARD WINNER

AKSRSH SHROFF - UNO AWARD WINNER



CHAMELI DEVI AGRAWAL ANNKSHETRA UJJAIN

 CHAMELI DEVI AGRAWAL ANNKSHETRA UJJAIN 



IVF - RAJASTHAN

IVF - RAJASTHAN


 

PROUD TO BE A MARWADI - मुझे मारवाड़ी होने का गर्व क्यों है

PROUD TO BE A MARWADI - मुझे मारवाड़ी होने का गर्व क्यों है

1. मारवाड़ी धर्मपरायण होते हैं. उन्होंने भारतवर्ष में कई मंदिर और गौशालाएं बनवाईं हैं. हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी धार्मिक प्रेस #गीताप्रेस_गोरखपुर दो #मारवाड़ी अग्रवाल जयदयाल गोयनका और हनुमान प्रसाद पोद्दार की देन थी.
2. हम #नास्तिक बनकर अपने देवी देवताओं को गाली नहीं देते.
3. मारवाड़ी धर्म निरपेक्ष नहीं होते. कट्टर साम्प्रदायिक हिन्दू होते हैं.
4. मारवाड़ी ने कभी धर्म परिवर्तन नहीं किया। (मारवाड़ियों के धर्म परिवर्तन के कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है आज भी मुसलमानों में कोई मारवाड़ी या अग्रवाल नहीं मिलता)
5. मारवाड़ी महाराज अग्रसेन और महावीर स्वामी के सिद्धान्तों पर चलते हुए शुद्ध #शाकाहारी होते हैं.
6. मारवाड़ियों ने कभी आरक्षण नहीं मांगा, न ही कोई हिंसक आंदोलन कर आम जनता को नुकसान पहुंचाया.
7. हमें कोई अपनी चालाकी भरी बातों से मूर्ख नहीं बना सकता. हम तार्किक होते हैं. 52 बुद्धि बनिया की इसीलिए कहा जाता है.
8. मारवाड़ीदेश धर्म के लिए अपने प्राण न्योछावर करने से पीछे नहीं हटते उधारणतः लाला लाजपत राय, सेठ रामजीदास गुड़वाला, भामाशाह, लाला झनकुमल सिंघल, कोठारी बंधु आदि
10. भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है मारवाड़ी. भारत के अधिकांश उद्योग मारवाड़ियों द्वारा स्थापित किये गए हैं.
11. आखिरी मारवाड़ी भारत की सबसे #समृद्ध जाती है जो अपने #दान के लिए मशहूर हैं.. मारवाड़ियों के द्वारा स्थापित कई उद्योग और उनकी द्वारा बनवाई हवेलियां,जोहड़, बावड़ी, पौशालायें, धर्मशालाएं, गौशालाएं, मंदिर इत्यादि इसके प्रतीक हैं..


चित्र - मारवाड़ियों के महाराजा अग्रसेन की एक रुपया और एक ईंट की परंपरा

Saturday, January 29, 2022

TAKHTMAL JAIN, A GREAT LEADER

TAKHTMAL JAIN, A GREAT LEADER

28 मई 1948 को पश्चिम-मध्य भारत की 25 रियासतों को जोड़कर मालवा संघ राज्य बनाया गया जिसे मध्य भारत के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत की आजादी से पहले सेंट्रल इंडिया एजेंसी का एक हिस्सा था, जिसके जीवाजीराव सिंधिया राजप्रमुख थे और वह इस पद पर 31 अक्तूबर 1956 तक रहे। राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के बाद 1 नवंबर 1956 को इसका विंध्य प्रदेश और भोपाल के साथ विलय करके मध्य प्रदेश राज्य बना दिया गया।

मध्य भारत की विधानसभा में 99 सदस्य होते थे। इस क्षेत्र से लोकसभा के लिये 9 सदस्य चुने जाते थे। श्री तख्तमल जैन (जालोरी) इस राज्य के अंतिम मुख्यमंत्री पद पर 31 अक्तूबर 1956 तक रहे। वैसे श्री जैन ने इस राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में 18 अक्तूबर 1950 की पद संभाला था।

श्री तख्तमल जैन का जन्म विदिशा जिले के भिलसा में जनवरी 1895 को श्री के परिवार में हुआ था। इनका विवाह श्रीमती दाखबाई के साथ हुआ और परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। इन्होंने 1913 में वकालत की परीक्षा पास की थी। श्री जैन ने वकालत को अपना पेशा बनाया। इन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन 1924 में भिलसा नगरपालिका के सदस्य के तौर पर प्रारंभ किया। श्री जैन 10 साल से अधिक भिलसा नगरपालिका के उपाध्यक्ष और 1939-40 में अशासकीय अध्यक्ष बने इनके नगरपालिका के उपाध्यक्ष और अध्यक्षता के दौरान
नगरपालिका की कार्य प्रणाली में सुधार और सार्वजनिक हित की अनेक योजनाओं को क्रियान्वनित किया गया। श्री जैन 1940-41 में ग्वालियर राज्य के ग्राम सुधार और स्वायत्त शासन विभाग के प्रथम लोकप्रिय मंत्री रहे। 1942 में इन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। श्री जैन कई साल तक ग्वालियर राज्य हरिजन बोर्ड के सदस्य रहे और भिलसा में व्यायामशाला, सार्वजनिक पुस्तकालय आदि कई सार्वजनिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की है। ये एस.एल. जैन इंटर कॉलेज के संस्थापक और ग्वालियर मजलिस ग्राम एवं मजलिस खास के कई साल तक सदस्य तथा सिक्योरिटी ऑफ सर्विसेज, लैंड रिफॉर्म आदि अनेक समितियों के सदस्य रहे। इन्होंने 1947 में ग्वालियर राज्य के मंत्रिमंडल में मंत्री पद संभाला ग्वालियर राज्य उत्तरदायी शासन संबंधी समझौता समिति का सदस्य होने के साथ इन्होंने मध्य भारत के निर्माण में एमुख रूप से भाग लिया।


ये मध्य भारत के निर्माण के समय केन्द्र द्वारा स्थापित प्रारंभिक एकीकरण शासकीय समिति के सदस्य भी थे। 1948 में मध्य भारत के प्रथम मुख्यमंत्री लीलाधर जोशी के मंत्रिमंडल में श्री तख्तमल जैन ने वित्त मंत्री का पद संभाला। श्री जोशी जनवरी 1948 से मई 1949 तक मुख्यमंत्री रहे और उनके बाद गोपीकृष्ण विजयवर्गीय मुख्यमंत्री पद पर 17 अक्तूबर 1950 तक रहे। इनके बाद श्री तख्तमल जैन 18 अक्तूबर 1950 से 3 मार्च 1952 मध्य भारत के मुख्यमंत्री रहे। 1952 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद श्री जैन प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद 1954 तक रहे। इस दौरान इन्होंने विभिन्न समितियों की स्थापना, प्रदेश कांग्रेस अधिवेशन शिवपुरी आदि कार्यों द्वारा प्रांत में कांग्रेस पार्टी को सुदृढ़ एवं नई दिशा में कार्य करने की प्रेरणा दी। इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने श्री जैन को पेप्स प्रदेश कांग्रेस के झगड़े की जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके अलावा श्री जैन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त भूमि सुधार समिति, वेतन समानीकरण, हरिजन अयोग्यता निवारण जांच समिति आदि अनेक महत्वपूर्ण समितियों के अध्यक्ष रहे। भिलसा उपचुनाव के बाद मध्य भारत विधानसभा के सदस्य और 16 अप्रैल 1955 से 31 अक्तूबर 1956 तक दोबारा मुख्यमंत्री पद संभाला। नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश बन जाने के बाद श्री जैन प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के मंत्रिमंडल के भी सदस्य रह चुके हैं। 1958 में श्री जैन को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सचिव नियुक्त किया गया। 2 जनवरी 1975 को इनका निधन हो गया।

साभार : वैश फेडरेशन 

VAISHYA VARNA IN STATES

VAISHYA VARNA IN STATES


ये बड़े गर्व से कहा जा सकता है कि देश और विदेश में विद्यालय, अस्पताल, धर्मशालाए, वैश्य समाज की देन है। अपनी व्यावहिरकता से वैश्य समाज ने दुनिया को जीने का तरीका और कमाने का तरीका सिखाया है।
भारत में वैश्य समाज विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वैश्य समुदाय का राज्यवार विभाजन-



Tuesday, January 25, 2022

RADHESHYAM KHEMKA JI - PADAM VIBHUSHAN

RADHESHYAM KHEMKA JI - PADAM VIBHUSHAN 

पद्म विभूषण  राधेश्याम खेमका, जि‍न्‍होंने गीताप्रेस के लिए समर्पित कर दिया था जीवन, मुंगेर से है नाता


पद्म विभूषण 2022 राधेश्याम खेमका को भारत सरकार ने पद्म पुरस्‍कार देने की घोषणा की है। उनका जन्‍म मुंगेर बिहार में हुआ था। वारणसी में रहते थे। जीवन के अंतिम दिन तक वे लगातार गीता प्रेस को अपनी सेवा करते रहे। बीएचयू से की थी पढ़ाई।

 राधेश्याम खेमका को वर्ष 2022 में पद्म पुरस्‍कार दिया जाएगा। उनका चयन पद्म विभूषण के लिए हुआ है। वे मूलत: मुंगेर के रहने वाले थे। हालांक‍ि उनका ज्‍यादातर समय बनारस में बीता है। उन्‍होंने अपना जीवन गीता प्रेस के लिए समर्पित कर दिया था। कल्‍याण पत्रिका का काफी समय तक उन्‍होंने संपादन किया था।

राधेश्याम खेमका गीता प्रेस, गोरखपुर के अध्यक्ष रहे थे। सनातन धर्म की प्रसिद्ध पत्रिका 'कल्याण' के संपादक उन्‍होंने काफी समय तक किया था। उन्‍हें पद्म विभूषण देने की घोषणा से मुंगेर ही नहीं बल्कि बिहार के लोग गौरव महसूस कर रहे हैं।

राधेश्याम खेमका के पिता सीताराम खेमका बिहार के मुंगेर जिले से उत्‍तर प्रदेश वाराणसी आए थे। राधेश्‍याम ने स्वामी करपात्री जी, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद, कथा व्यास रामचन्द्र डोंगरे जैसे संतों के संपर्क में रहे। लगातार उनका उन्‍हें सानिध्य मिलता रहा। राधेश्याम खेमका ने बीएचयू से पढ़ाई की थी।

अप्रैल 2021 में केदारघाट स्थित अपने आवास पर राधेश्याम खेमका का निधन हो गया। उन्‍होंने गीता प्रेस में अनेक धार्मिक पत्रिकाओं और पुस्तकों का संपादन किया। उन्‍होंने वाराणसी में मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट से भी सेवा की। इन संगठनों से वे जुड़े रहे।

राधेश्याम खेमका ने गीताप्रेस के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण सम्मान देने की घोषणा की तो मुंगेर, बनारस और गीताप्रेस खुशियों में डूब गया।

गीताप्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल व प्रबंधक लालमणि तिवारी ने खुशी जताते हुए कहा कि राधेश्याम खेमका ने गीताप्रेस के शताब्दी वर्ष की तैयारियों के क्रम में पिछले साल सात मार्च को वाराणसी में गीताप्रेस प्रबंधन के साथ बैठक की थी। गीताप्रेस में कर्मकांड व संस्कारों से संबंधित पुस्तकों का प्रकाशन राधेश्याम खेमका के सुझाव पर किया गया।

सादगी जीवन का उनका

राधेश्याम खेमका धार्मिक व सात्विक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने हमेशा पत्तल में खाना खाया। कुल्हड़ में पानी पीते थे। उन्होंने कभी चर्म वस्तुओं का उपयोग नहीं किया। कपड़े के जूते पहनते थे।

राधेश्याम खेमका का एक परिचय

राधेश्याम खेमका के पिता सीताराम खेमका थे। उनका जन्म 12 दिसंबर 1935 को मुंगेर, बिहार में हुआ था। बाद में वे वाराणसी में रहने लगे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एमए व साहित्य रत्न। 1982 में वे गीताप्रेस की कल्याण पत्रिका के संपादक बने। तीन अप्रैल 2021 को काशी में उनका निधन हो गया।

साभार: दैनिक जागरण 

Wednesday, January 12, 2022

Saturday, January 8, 2022

VAISHYA MAHARATAN

VAISHYA MAHARATAN

अक्सर लोग बणियों के बारे में बकवास करते हैं कि इन्होंने देश को लूट लिया.. और सरकारी कंपनी का प्रयोग करो प्राइवेट सेक्टर की कंपनी का नहीं... भारत सरकार ने 11 कंपनियों को महारत्न माना है.. उसके बाद आती हैं 13 कंपनियां जिन्हें सरकार ने नवरत्न माना है..

सरकार के 11 महारत्नों में 5 को बनियों ने ही संभाल रखा है.. लगभग आधी यानी..

BHEL - नलिन सिंहल
ONGC - अलका मित्तल
CIL - प्रमोद अग्रवाल
GAIL - मनोज जैन
HPCL- एम. के. सुराणा

बनियों को भारतीय अर्थव्यवस्था का कर्णधार इसीलिए कहा जाता है क्योंकि अर्थव्यवस्था टिकी ही उनके कंधों पर है... चाहे वो कोई से भी सेक्टर हो.. सरकारी कंपनियों में भी हम वैश्य ऊंचे पदों पर काम करते हैं और हमारी ही मेहनत से वो उपक्रम सफल होकर महारत्न, नवरत्न आदि बनते हैं... वैश्यों ने अपनी काबिलियत से ही प्राइवेट फर्म्स भी खड़ी की हैं लेकिन मूर्ख लोगों को समझ नहीं आता.. उन्हीं मूर्खों को तमाचा मारती पोस्ट है ये..

SATI OF AGRAWALS - अग्रवाल वंश की सतिया

SATI OF AGRAWALS - अग्रवाल वंश की सतिया 

अग्रवाल वंश (गोत्र/ जात) की सतीयों के नाम :

*बंसल / जालान* : श्री राणी सती दादीजी(झुंझुनू ), श्री सीता सती, श्री महादेई सती, श्री मनोहारी सती, श्री मनभावनी सती, श्री यमुना सती, श्री ज्ञानी सती, श्री पुरा सती, श्री वीरागी सती, श्री जीवनी सती, श्री टीला  सती, श्री बाली सती, श्री गुजरी सती(फतेहपुर)
(13 सती एक कुल में )

*जिंदल गोत्र सती * ( जिंदल गोत्र कुलदेवी ) :श्री महारानी कल्याणी सती दादीजी ,(भादवा पंचमी संवत 1118) ,लिजवाना धाम जिला जींद , हरियाणा 

*मुरारका* : श्री जेतल सती दादीजी, (लछमनगढ़)

*गोयनका*  : श्री बीरा, बरजी , बरजल दादीजी (फतेहपुर)

*पोद्दार* : श्री मादल सती दादीजी (लछमनगढ़)

*गर्ग गोत्र* : श्री पाली सतीजी(नुआ)

*मंगल गोत्र* : श्री राजल बिंदल दादीजी (जुगलपुरा )

*सर्राफ (बिंदल गोत्र )* : श्री धोली सती दादीजी (फतेहपुर )

*केडीया* : श्री केड सती (खेमी - तोली- ठुकरी- संतोखी सती) दादीजी (केड, झुंझुनू )

*माखरिया* : श्री वीणा सती दादीजी (माखर, झुंझुनू )

*सिंघल गोत्र* : श्री हरबी डाली सती दादीजी (दिसणाऊ)

*धानुका* : श्री सावा सती दादीजी (फतेहपुर )

*बजाज / भरतीया* : श्री टिड़ा गेला दादीजी (ढांढण )

*डालमिया* : श्री नानू सती दादीजी (सुहासरा )

*रूंगटा/ खेतान/ भोजंगरवाल* : श्री चावो वीरों दादीजी (बग्गड़)

*चामडिया* : श्री चामडिया सती (4 सती दादीजी)(फतेहपुर )

*तिब्रेवाल* : श्री खेमी मोली सती दादीजी (झुंझुनू )

*खेमका* : श्री उदो -मादो-संतोष सती दादीजी (बुहाना )

*चौधरी* : श्री छाजल अमरी सती दादीजी (फतेहपुर-रामगढ़ )

*चौधरी* : श्री लाडो-सरो सती दादीजी  (झुंझुनू श्री मंदिर )

*तोड़ी* : श्री माना सती दादीजी (भडुन्दा )

*सरावगी* : श्री राजुल दे सती जी (फतेहपुर )

*सुरेका* : श्री उदी सती दादीजी जी (ठेलासर)

*लाठ* : श्री गिलो सती दादीजी (मंन्द्रेला )

*हरलालका* : श्री बरजल सती दादीजी(सांखुगढ़)

*केशान/भवसिंहका* : श्री पारा सारा सती दादीजी (फतेहपुर )

*डीडवानिया* : श्री रुक्मा सतीजी (जयपुर )

*मित्तल गोत्र* : श्री बुची सती दादीजी  (रींगस )

*धेलिया(मित्तल गोत्र )*: श्री चावल सती दादीजी (फतेहपुर )

*मोदी (मंगल गोत्र )* : श्री आली -पाली-माली सती दादीजी(जिल्ला झुंझुनू )

*मोदी (गर्ग गोत्र)* : श्री पाली सती दादीजी एवं श्री गुलाब सती दादीजी  (फतेहपुर )

*केजरीवाल* : श्री चिरी- मोली सती दादीजी (फतेहपुर )

*लोहिया* : श्री जीवनी सती दादीजी(फतेहपुर )

*गौरीसरिया* : श्री गौरी-सरो सती जी

*कानोड़िया* : श्री कमला सती दादीजी (फतेहपुर )

*गोयल/ तोलासरिया/ चूड़ीवाल* : श्री मौली सती दादीजी (उदयपुरवाटी )

*सिंघानिया* : श्री डेडल सती दादीजी (सिंघाना और फतेहपुर )

*गिनोडिया* : श्री मंचूई सती दादीजी (झुंझुनू )

*बायला* : श्री बायली सती दादीजी (फतेहपुर )

*बंसल* : श्री सतवंती सती दादीजी 

*मोर* : श्री सेजल-देशल सती दादीजी(फतेहपुर )

*छितरका/भोतिका(गोयल गोत्र)* : श्री मुक्ता सती दादीजी (डीडवाना )

*लुहारुका* : श्री माली सती जी (मलसीसर, चिड़ावा )

*परसरामपुरिया/ सोनथालिया* : श्री मोहिनी सती दादीजी(झाझर)

*महिपाल* : श्री कुलदे सती दादीजी

*टाईंवाला(सिंघल गोत्र )* : श्री करमा पीरागी सती जी(टाईं)

*टाईंवाला(गर्ग गोत्र )* : श्री राजल- नूरल सती दादीजी(टाईं)

*कसेरा* : श्री राजल सती जी(फतेहपुर )

*मरदा* : श्री महासती जी(चूरू )

*सरिया* : श्री नौरंग - श्री सरिया सतीजी - श्री जाटनी सती दादीजी(लूणकरणसर)

*गाडोडिया (गर्ग गोत्र )* :  श्री कुम्पावत सतीजी - श्री कुंवारी सती जी (डीडवाना )

*यह जानकारी सभी अग्रवाल भाइयो तक पंहुचाइये 🙏 सभी अग्र वंशी अपने कुल की सती दादी को पहचाने और सबसे पहले उनकी पूजा करे 🙏🏻जो जिस कि गोत्र(कुल) सती होती हे। वो ही उनकी कुलदेवी होती हैं।  🙏यह सभी अग्रवाल भाइयो का कर्तब्य है ।

Friday, December 24, 2021

ANURADHA GUPTA - A GREAT PAINTER

ANURADHA GUPTA - A GREAT PAINTER

कानपुर की #वैश्य_परिवार की बेटी #अनुराधा_गुप्ता जी को अनंत बधाई एवं शुभकामनाएंअनुराधा गुप्ता जी का नाम #इंडियन_रिकॉर्ड_बुक में शामिल किया जाएगा अनुराधा गुप्ता जी ने अपने परिवार का ही नहीं समस्त वैश्य समाज का नाम रोशन किया हैं