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Tuesday, June 21, 2022

"धर्मस्य मूलं अर्थः" - THE GREAT VAISHYA

"धर्मस्य मूलं अर्थः" - THE GREAT VAISHYA

वैश्य किसी भी सभ्य राष्ट्र और उसकी समृद्धि का आधार होते हैं। आज भले ही भारत के वामपंथी धनिकों के प्रति नफरत फैलाते हैं पर क्या वैश्यों के बिना आज हमारे वर्तमान भारत की कल्पना संभव थी?
भारत की परंपरा सदैव लक्ष्मी नारायण की पूजा की रही है.... दरिद्र नारायण या गरीबी में भगवान का कांसेप्ट गांधी पता नहीं कहा से ले आये थे? लक्ष्मी के बिना तो नारायण भी अधूरे हैं...
देश का गौरव अंतरिक्ष संस्थान एक वैश्य विक्रम साराभाई की देन है तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भी प्रेमचंद रॉयचंद की देन जो कि ओसवाल वैश्य हैं। भरतवंशियों द्वारा संचालित प्रथम बैंक देने वाले अग्रवाल नवरत्न लाला लाजपत राय थे। देश का प्रथम रोबोट बनाने वाले दिवाकर वैश्य थे। देश मे नवरत्न कंपनिया (सिंघानिया, बजाज, डालमिया, मित्तल, जिंदल, रुइया बिड़ला आदि से लेकर ओला, ओयो, जोमाटो आदि) बनाने वाले वैश्य हैं और भारत की अर्थव्यवस्था वैश्यों के ही कंधो पर टिकी हुई है... यह बात प्राचीन काल से भारत के नीतिनिर्माण करने वाले और राजन्य वर्ग समझता रहा है। लोग कहते हैं कॉरपोरेट्स की सत्ता से सांठ गाठ है लेकिन नहीं देश के सत्तावर्ग को हमारी जरूरत है.. आज ही नहीं बल्कि पुराप्राचीन भारत से भी थी...
भामाशाह और महाराणा प्रताप की जोड़ी विश्व प्रसिद्द है.. राजपूताने में सेठों को विशेष आदर सत्कार प्राप्त था तो पंजाब में भी राजा रंजीत सिंह ने अग्रवालों और जैनों को अमृतसर में बुलाकर बसाया था ताकि अमृतसर भी लाहौर जैसी समृध्दि प्राप्त कर सके... गांधी को भी बिड़ला और बजाज की जरूरत पड़ी थी।
अखंड भारत की कल्पना को साकार करने वाले आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति सूत्र के पहले ही अध्याय में कहा है -
धनिकःश्रोत्रियोराजानदवैिद्यस्तुपंचमः ॥
पंचयत्रनविद्यतेन तत्रदिवसंवसेत् ॥ ९ ॥
अर्थात - घनिक, वेदकाज्ञाता-ब्राह्मण, राजा, नदी, और पांचवां वैद्य ये पांच जहां विद्यमान नर नहीं हैं तहां एकदिनभी वास नहीं करना चाहिये ॥ ९ ॥
चाणक्य ने कहा है धर्मस्य मूलं अर्थः और अशोक सिंघल से लेकर कोठारी बंधुओं और सीताराम गोयल से लेकर बिड़ला परिवार तक वैश्यों ने इसे सिद्ध भी किया। गौमाता के लिए रामकृष्ण डालमिया तो माँ गंगा के लिए स्वामी सानंद (जीडी अग्रवाल) ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी धार्मिक प्रेस बनाई तो जिन्नाह के मुस्लिम लीग के विरोध में लाला लाजपत राय जी ने पंजाबी हिन्दू महासभा बनाई...
यही बात भीष्म पितामह भी महाभारत में कहते हैं -
राजा को चाहिए कि वह देश के धनी व्यक्तियों का सदा भोजन-वस्त्र और अन्नपान आदि के द्वारा आदर सत्कार करे और उनसे विनयपूर्वक कहे, 'आपलोग मेरे सहित मेरी इन प्रजाओं पर कृपादृष्टि रखें। भरतनंदन ! धनी लोग राष्ट्र के मुख्य अंग हैं। धनवान पुरुष समस्त प्राणियों में प्रधान होता है, इसमें संशय नहीं है।
(सोर्स - महाभारत, शांति पर्व , राजधर्मानुशासन पर्व के 88 वें अध्याय के श्लोक 29-31)
आज भले ही नेता नगरी अपनी राजनीति चमकाने के लिए अम्बानी अडानी करें लेकिन कुछ दिन पूर्व ही शरद पवार अडानी का मंच पर सम्मान करते हुए दिखे थे और कुछ माह पूर्व ही ममता बनर्जी भी अडानी के साथ उनके राज्य में निवेश करने की वार्ता के लिए देखीं गयी थीं।
SABHAR- प्रखर अग्रवाल

GOUTAM ADANI - A GAREAT BILLIONIOR

 GOUTAM ADANI - A  GAREAT BILLIONIOR



Sunday, June 19, 2022

DIVYANSHI AGRAHARI - UP BOARD INTER TOPPER - Ist RANK - 2022

DIVYANSHI AGRAHARI - UP BOARD INTER TOPPER - Ist RANK - 2022

वैश्य समाज की होनहार बेटी बहन, पूरे प्रदेश में अपने प्रतिभा और परिश्रम की लोहा मनवाने वाली

UP Board 12th Topper : सफलता की कहानी दिव्यांशी की जुबानी, व्यवसायी की पुत्री कैसे बनी 12वीं में यूपी टॉपर



यूपी बोर्ड परीक्षा में 12वीं में प्रदेश में टॉप करने वाली फतेहपुर की दिव्यांशी ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों माता-पिता और अपनी बड़ी बहन को दिया है। उन्होंने बेहतर पढ़ाई के लिए समय प्रबंधन पर जोर दिया है।


फतेहपुर, जागरण संवाददाता। यूपी बोर्ड 12वीं के रिजल्ट आने के साथ ही मेरिट सूची जारी हुई तो फतेहपुर के रेडीमेड व्यवसायी राधेकृष्ण अग्रहरि के घर पर खुशियां की बहार छा गई, उनकी बेटी दिव्यांशी का नाम प्रदेश के टॉपरों में सबसे पहल नंबर था। बेटी के यूपी टॉप करने की जानकारी होते ही बधाइयों का तांता लग गया और शुभकामनाएं देने लोग घरों में पहुंचने लगे। 95.4 प्रतिशत अंक लेकर यूपी टॉप करने वाली दिव्याशी व्याख्याता बनकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने का सपना संजोय हैं।

फतेहपुर शहर के जय मां सरस्वती ज्ञान मंदिर राधा नगर की होनहार छात्रा दिव्यांशी ने प्रदेश में टाप करके जिले का मान बढ़ाया है। उन्होंने 600 में से 559 अंक प्राप्त किए हैं। दिव्यांशी के पिता राधेकृष्ण अग्रहरि शहर में साधारण रेडीमेड व्यवसायी हैं। उनकी बड़ी बहन दीक्षा ने वर्ष 2017 में हाईस्कूल की यूपी मेरिट में सातवां स्थान प्राप्त किया था, वहीं 2019 में 12वीं की यूपी मेरिट में पांचवां स्थान प्राप्त किया था। दो छोटी बहनें दिव्या, दीप्ती और भाई जय है। मां जावित्री देवी गृहणी हैं।

दिव्यांशी पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं और व्याख्याता बनकर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर योगदान देना चाहती है। वह अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों, माता-पिता के साथ बड़ी बहन को देती हैं। वह कहती हैं शिक्षकों के मार्गदर्शन और बड़ी बहन के टिप्स से उन्हें सफलता मिली है। मेहनत, लगन व समय पालन ही सफलता के मूल मंत्र है। कहा, शिक्षा की बेहतरी के लिए नकलविहीन परीक्षाएं कराना स्वागत योग्य कदम है, इससे मेधा का अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल रहे हैं।

दिव्यांशी का कुछ यूं रहा टाइम टेबल

सुबह 4 से 6 बजे तक - विभिन्न विषयों का अध्ययन व लर्निंग

सुबह 6 से 7 बजे तक- दैनिक क्रियाएं

सुबह 7 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक- विद्यालय में पठन-पाठन

दोपहर बाद तीन से चार बजे तक- भोजन व विश्राम

शाम चार बजे से छह बजे तक- खेलकूद व ग्रुप डिस्कशन

शाम छह बजे से रात 11 बजे तक- कठिन विषयों का अध्ययन व नोट्स तैयार करना

    SABHAR: DAINIK JAGRAN  Abhishek Agnihotri

Friday, June 17, 2022

ASHI CHOUKSE - A NEW BORN STAR PLAYER

ASHI CHOUKSE - A NEW BORN STAR PLAYER

भारत में सेठों ने इस बार अपने देश के लिए मेडल्स की झड़ी लगा दी है।

सेठ समाज की बेटी आशी चौकसे ने अपने सहखिलाड़ी स्वप्निल कुसाले के साथ मिलकर अजरबैजान के बाकू में खेले जा रहे आईएसएसएफ शूटिंग वर्ल्ड कप में कमाल दिखाया है।

आशी चौकसे और स्वप्निल कुसाले की जोड़ी ने अजरबैजान के बाकू में खेले जा रहे आईएसएसएफ शूटिंग वर्ल्ड कप में कमाल दिखाया है। उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन मिक्स्ड इवेंट में स्वर्ण पदक जीता है। इन दोनों ने फाइनल में यूक्रेन के सेरही कुलिश और दरिया तिखोवा को 16-12 से हराया।


यह भारत का बाकू शूटिंग वर्ल्ड कप में दूसरा स्वर्ण पदक रहा। इससे पहले सेठ समाज की बेटियों श्रेया अग्रवाल और रमिता जिंदल ने अपनी सहखिलाड़ी इलावेनिल वलारिवान के साथ मिलकर 10 मीटर एयर राइफल महिला टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा टीम इंडिया ने टूर्नामेंट में तीन रजत पदक भी जीते। पदक तालिका में भारतीय टीम दूसरे नंबर पर रही। पहले स्थान पर कोरियाई टीम रही।


फाइनल में यूक्रेन की जोड़ी ने मजबूत शुरुआत की और भारतीय जोड़ी पर 6-2 की बढ़त बना ली। हालांकि, इसके बाद भारत ने कमबैक किया और अगले आठ में से छह सीरीज में जीत हासिल की और स्कोर 14-10 कर दिया। सेरही और दरिया ने हार नहीं मानी और गैप को 14-12 कर दिया। हालांकि, इसके बाद भारतीय टीम ने अंक हासिल करते हुए मैच अपने नाम किया।

आशी चौकसे को बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएं व उज्जवल भविष्य की कामना।भगवान श्री नृसिंह नारायण का आशीर्वाद आप दोनों पर हमेशा बना रहे।

सेठ समाज के जो युवा खेलकूद अपना भविष्य देख रहे हो वो आशी से प्रेरणा ले सकते हैं।

MAHESHWARI EDUCATION TRUST

MAHESHWARI EDUCATION TRUST 



AMAN GUPTA - SAMEER MEHTA - BOAT

AMAN GUPTA - SAMEER MEHTA - BOAT 



Thursday, June 2, 2022

KARTIK JAYSWAL IAS - UPSC 2022

KARTIK JAYSWAL  IAS - UPSC 2022


खंडवा के पंडित दीनदयाल पुरम निवासी कार्तिकेय जायसवाल ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2021 में आल इंडिया लेवल पर 35 वीं रैंक हासिल की है। कार्तिकेय के साथ ही पूरा परिवार इस सफलता से खुश है। 2020 में स्नातक पढ़ाई पूरी होने के बाद वे खंडवा आ गए। घर पर रहकर ही पढ़ाई पूरी की। रोजाना 15 घंटे तैयारी को समय दिया। इस दौरान टीवी देखना छोड़ दिया वहीं मोबाइल का भी आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया। 23 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास से उन्होंने सफलता प्राप्त की व जिले का नाम रोशन किया।

कार्तिकेय ने दसवीं तक खंडवा में पढ़ाई की। 11वीं, 12 की पढ़ाई आंध्र प्रदेश की स्कूल से की। इसके बाद दिल्ली जाकर ग्रेजुएशन पूरा किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही यह तैयारी धीरे-धीरे शुरू की। कार्तिकेय की माता मनीषा ने बताया जब वह तैयारी कर रहा था तो पूरे परिवार ने सहयोग दिया। जब वह बीमार होता तो चिंता हो जाती थी। अब बेटा देश सेवा करे यह इच्छा है। कार्तिकेय के पिता आशीष जायसवाल होटल व्यावसायी है। छोटी बहन भूमिका पढ़ाई कर रही हैं। यूपीपीएससी में सफलता मिलने की जानकारी के बाद घर पर स्वजनों व परिचित पहुंचे व सभी को बधाई दी।

यूपीएससी को बनाया लक्ष्य

-12 वीं के बाद दिल्ली पहुंचा। वहां पर धीरे-धीरे सिविल सर्विसेस की तरफ जाने का मन बना। इसके लिए पहले उसे जाना फिर इंटरनेट मीडिया से टापर्स के इंटरव्यू देखे, नोट्स व पुराने पेपर देखकर तैयारी की रणनीति बनाई।

ऐसे की तैयारी

-2020 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद खंडवा आ गया। पूरी तैयारी घर से ही की है। दिन भर में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई की।
इस तरह बनाई रणनीति

- कुल समय का आधा समय आप्शनल सबजेक्ट को दिया। बाकि समय न्यूजपेपर, सामान्य ज्ञान को दिया।

इनसे बनाई रखी दूरी

- टीवी नहीं देखी। मोबाइल में भी आवश्यकता के अनुसार सीनियर्स से बात। इंटरनेट मीडिया से पढ़ाई संबंधित जानकारी ली।

तैयारी करने वालों को मैसेज

- सभी अपने ऊपर भरोसा रखे व अपनी तैयारी को जारी रखे। अपनी तरफ से पूरी मेहनत करें सफलता जरूरद मिलेगी।

SABHAR: NAIDUNIA

MHAHAK JAIN - IAS - 2022 BATCH

 MHAHAK JAIN - IAS - 2022 BATCH

जनपद बागपत की बेटी महक जैन पुत्री श्री प्रदीप जैन ने संघ लोक सेवा आयोग (सिविल सर्विसेज) परीक्षा में सत्रहवाँ स्थान प्राप्त कर अपना, अपने परिवार , बड़ौत नगर और जनपद का नाम पूरे देश मे रोशन किया है l


बेटी को बहुत- बहुत बधाई और उज्जवल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं l

SAMYAK JAIN - IAS - UPSC BATCH -2022

SAMYAK JAIN - IAS - UPSC BATCH - 2022

सहायक लेखक बनकर मां ने की मदद, दृष्टिबाधित सम्यक 7वीं रैंक हासिल कर अब बनेगा IAS अधिकारी
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 9 में रहने वाले सम्यक जैन ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 7वां रैंक हासिल किया है। वह इस सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं। विशेष रूप से वह अपनी मां के आभारी हैं।


दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 9 में रहने वाले सम्यक जैन ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 7वां रैंक हासिल किया है। वह इस सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं। विशेष रूप से वह अपनी मां के आभारी हैं। वह बताते हैं कि मैं दृष्टिबाधित हूं और मुझे परीक्षा में एक सहायक लेखक की जरूरत पड़ी और मेरी मां ने यह किया। पूरे परिवार ने मदद की। कोविड की तीसरी लहर थी और मौसम भी खराब था ऐसे में मेरे मामा ने मुझे परीक्षा दिलाई मैं परीक्षा दे रहा था और मामा नीचे बारिश में थे।

सम्यक की मां वंदना जैन और पिता संजय जैन सरकारी कर्मचारी हैं। वह बताते हैं कि जब मैंने अपना स्कूल समाप्त किया तब तक मुझे आंखों में दिक्कत नहीं थी जब मैं 20-21 का हुआ तब मुझे दिक्कत बढ़ी। लिखना पढ़ना सब मुश्किल हो गई। काफी संघर्ष किया। शुरूआती पढ़ाई दिल्ली की थी, फिर 10-12वीं मुंबई से की फिर मैं डीयू के एसओएल से मैंने स्नातक किया। परास्नातक आईआईएमसी से किया और फिर जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में पढ़ाई की। जर्नलिज्म में जब गया तो मैं लोगों की दिक्कतों से धरातल पर वाकिफ हुआ। मुझे लगा कि आईएएस सर्विस एक बेहतर मौका दे सकती है लोगों की जिंदगी में बदलाव करने की।

यह पूछे जाने पर कि जो दृष्टिबाधित हैं उनके लिए सिविल सर्विस की तैयारी कितनी मुश्किल या आसान है? सम्यक का कहना है कि दृष्टिबाधित लोगों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। वह अपनी मेहतन से इसे कर सकते हैं। किताबें ऑनलाइन उपलब्ध है। डिजिटल फार्मेट में किताबें ऑनलाइन मुफ्त मिल जाती है। आत्मविश्वास के साथ इसकी तैयारी करने की आवश्यकता है इससे सफलता मिलेगी।

SABHAR : HINDUSTANLIVE

Wednesday, June 1, 2022

SHREYA AGRAWAL- RAMITA JINDAL - GOLD WINNER INSHOOTING WORLDCUP

SHREYA AGRAWAL- RAMITA JINDAL - GOLD WINNER

सेठ समाज की दो बेटियों श्रेया अग्रवाल और रमिता जिंदल ने अपनी सहखिलाड़ी 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में जीता स्वर्ण पदक।(श्रेया इस फोटो में मध्य में हैं और रमिता जिंदल उनके दाएं तरफ हैं)







अजरबैजान के बाकू में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में श्रेया अग्रवाल,रमिता जिंदल और इलावेनिल वालारिवान की तिकड़ी ने 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भारतीय तिकड़ी का कमाल. श्रेया अग्रवाल,रमिता जिंदल और इलावेनिल ने गोल्ड मेडल जीता है।

भारत ने अजरबैजान के बाकू में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में अपना खाता स्वर्ण पदक के साथ खोला। श्रेया अग्रवाल,रमिता जिंदल और इलावेनिल वालारिवान ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

श्रेया अग्रवाल,रमिता जिंदल और उनकी सहखिलाड़ी की तिकड़ी ने डेनमार्क को 17-5 से हराया पोलैंड को कांस्य पदक मिला।

दुनिया की पूर्व नंबर एक निशानेबाज श्रेया अग्रवाल, रमिता जिंदल और इलावेनिल सोमवार को दो दौर के क्वालिफिकेशन के बाद फाइनल में पहुंची थीं.

पहले क्वालिफिकेशन में उन्होंने 944.4 अंक बनाकर पहला स्थान हासिल किया था। दूसरे क्वालिफिकेशन में डेनमार्क के बाद दूसरे स्थान पर रही थीं।

इस उपलब्धि के लिए श्रेया अग्रवाल और रमिता जिंदल को बहुत-बहुत शुभकामनाएं व उज्जवल भविष्य की कामना।भगवान श्री नृसिंह नारायण का आशीर्वाद आप दोनों पर हमेशा बना रहे।

सेठ समाज के जो युवा खेलकूद अपना भविष्य देख रहे हो वो श्रेया और रमिता से प्रेरणा ले सकते हैं।

RAMITA JINDAL - शूटर रमिता ने जर्मनी में लगाया सोने पर निशाना

RAMITA JINDAL - शूटर रमिता ने जर्मनी में लगाया सोने पर निशाना


धर्मनगरी की शूटर रमिता जिदल ने जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जूनियर व‌र्ल्ड कप 2022 सोना पर निशाना लगाकर विश्व भर में अपना और देश का नाम रोशन कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय जूनियर व‌र्ल्ड कप 2022 में अलग-अलग इवेंट में जीते तीन पदक जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : धर्मनगरी की शूटर रमिता जिदल ने जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जूनियर व‌र्ल्ड कप 2022 सोना पर निशाना लगाकर विश्व भर में अपना और देश का नाम रोशन कर दिया है। रमिता ने इस प्रतियोगिता में एक सोना और दो चांदी के पदक जीते हैं। रमिता की इस उपलब्धि पर खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है और लाडवा में उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इससे पहले भी रमिता ने पिछले दिनों साउथ अमेरिका में आयोजित हुए जूनियर व‌र्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता था।

लाडवा की रहने वाली रमिता जिदल कुरुक्षेत्र के सेक्टर 13 में बनी कर्ण शूटिग एकेडमी में अभ्यास करती है। पिछले करीब तीन सालों से रमिता ने पदकों की झड़ी लगा रखी है। जूनियर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए रमिता ने पहले भी कई पदक जीते हैं। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर रमिता ने अंतरराष्ट्रीय जूनियर व‌र्ल्ड कप में अपनी जगह बनाई। यह प्रतियोगिता जर्मनी में आठ से 20 मई तक चलेंगी। रमिता के पिता अरविद जिदल ने बताया कि इस प्रतियोगिता में रमिता ने 10 मीटर एयर राइफल के टीम इवेंट में सोना और मिक्स व व्यक्तिगत मुकाबले में चांदी जीतकर उनका रोशन किया है। उन्होंने बताया कि बेटी के भारत लौटने पर उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा।

SABHAR: Jagran

ANKITA AGRAWAL - SUCCESSFUL TOPPER CANDIDATE IAS UPSC AIR - 2

ANKITA AGRAWAL - SUCCESSFUL TOPPER CANDIDATE IAS UPSC AIR - 2

UPSC Topper 2021 Ankita Agarwal (Air 2): आईआरएस अंकिता तीसरे प्रयास में बनीं सेकंड टॉपर, अब आईएएस बन, करेंगी ये काम

UPSC Civil Services Result 2nd Rank holder Ankita Agarwal: अंकिता अपने पहले ही प्रयास में आईआरएस (Indian Revenue Service) में चुनी गई थीं। अब तीसरे प्रयास में न केवल आईएएस बल्कि सिविल सेवा परीक्षा की दूसरी टॉपर बनकर दिखाया है।
 


UPSC Result 2021 Topper Ankita Agarwal: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में दूसरा स्थान हासिल करने वाली अंकिता अग्रवाल 2020 बैच की आईआरएस अधिकारी हैं। अंकिता अपने पहले ही प्रयास में आईआरएस (Indian Revenue Service) में चुनी गई थीं। अब तीसरे प्रयास में न केवल आईएएस चुनीं गईं बल्कि सिविल सेवा परीक्षा की दूसरी टॉपर बनकर इतिहास भी रच दिया है।

महिला सशक्तीकरण के लिए काम करने की चाहत : अंकिता

2020 बैच की भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क) अधिकारी अग्रवाल वर्तमान में हरियाणा के फरीदाबाद में राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (NACIN) में तैनात हैं। अंकिता का कार्यकाल अभी परिवीक्षाधीन है।
सोमवार को परिणाम जारी होने और दूसरी टॉपर बनने के बाद खुशी जाहिर करते हुए अंकिता अग्रवाल ने कहा कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल होने के बाद महिला सशक्तीकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए काम करना चाहेंगी।

मैं दूसरी रैंक पाकर बहुत खुश हूं : अंकिता

अंकिता ने अकादमी से ही फोन पर बात करते हुए कहा कि मैं दूसरी रैंक पाकर बहुत खुश हूं। मैंने आईएएस को चुना है और सेवा में शामिल होने के बाद महिला सशक्तीकरण, प्राथमिक स्वास्थ्य और स्कूली शिक्षा क्षेत्रों के लिए काम करना चाहती हूं। कोलकाता की मूल निवासी अंकिता अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा टॉप की है। इससे पहले वह अपने पहले प्रयास में आईआरएस में चुनी गई थी। 
पढ़ने के लिए एक फिक्स रूटीन बनाया

सिविल सेवा परीक्षा 2021 में शीर्ष तीन रैंक हासिल करने वाली महिलाओं पर, जिसके परिणाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा दिन में घोषित किए गए थे, अग्रवाल ने कहा कि यह मेरे लिए और पूरे के लिए बहुत गर्व की बात है। देश में महिलाओं ने परीक्षा में शीर्ष तीन स्थान प्राप्त किए हैं।

अपनी तैयारी और सफलता के मंत्र के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने बताया कि मैं परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक से अधिक घंटे देती थी। एक निश्चित संख्या में घंटे लगाने के बजाय, मैंने एक फिक्स रूटीन कार्यक्रम बनाए रखने की कोशिश की।

SABHAR: AMARUJALA

GAMINI SINGLA (SINGHAL) - UPSC TOPPER RANK - 3

GAMINI SINGLA (SINGHAL) - UPSC TOPPER RANK - 3

UPSC Topper Gamini Singla (Air 3): सेल्फ स्टडी से गामिनी बनीं यूपीएससी टॉपर, दो साल तक रोज इतने घंटे की थी पढ़ाई

UPSC CSE Result 2021 Topper Gamini Singla (Air 3) : अपने दूसरे ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास ही नहीं बल्कि टॉप-3 में जगह बनाने वाली गामिनी ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी और अपने पिता को दिया है।
 

UPSC CSE 2021 Topper Gamini Singla (Air 3): संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से 2021 के सिविल सेवा परीक्षा परिणाम (CSE Result 2021) जारी कर दिए गए हैं। परिणाम में पंजाब की गामिनी सिंगला ने तीसरी रैंक हासिल की है। अपने दूसरे ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास ही नहीं बल्कि टॉप करने वाली गामिनी ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी और अपने पिता को दिया है।

कड़ी मेहनत से कुछ भी कर सकती हैं महिलाएं : गामिनी

सिविल सेवा परीक्षा 2021 में अपने चयन और तीसरी रैंक हासिल करने से उत्साहित गामिनी सिंगला ने सोमवार को कहा कि महिलाएं अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से कुछ भी हासिल करने में सक्षम हैं। इस बार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2021 के अंतिम परिणामों में श्रुति शर्मा, अंकिता अग्रवाल और गामिनी सिंगला ने परीक्षा में क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है।

देश के विकास और जनकल्याण में योगदान देना हैं

अपने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास करने को लेकर गामिनी कहती हैं कि मैं बहुत खुश हूं। यह एक सपने के सच होने जैसा है। मैंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) को चुना है। पंजाब के आनंदपुर साहिब से फोन पर बातचीत में गामिनी सिंगला ने कहा कि मैं देश के विकास और लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहती हूं।


दिन में 9-10 घंटे पढ़ाई करती थीं

अपनी सफलता का राज साझा करते हुए गामिनी ने कहती हैं कि वह दिन में 9-10 घंटे पढ़ाई करती थीं। बकौल गामिनी, मैंने पटियाला में विनोद सर से कोचिंग भी ली। परीक्षा की तैयारी के लिए मैंने ज्यादातर समय सेल्फ स्टडी की और आखिर में मैं सफल हो गई। गामिनी ने कहा कि मेरे पिता ने परीक्षा की तैयारी में मेरी मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गामिनी के माता-पिता हिमाचल प्रदेश सरकार में चिकित्सा अधिकारी के तौर पर कार्यरत हैं।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में 685 उम्मीदवार क्वालीफाई

परीक्षा में शीर्ष तीन रैंक प्राप्त करने वाली महिलाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि महिलाएं अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से कुछ भी हासिल करने में सक्षम हैं। गामिनी ने कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक किया हुआ है।उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र को चुना था। बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 के अंतिम परिणाम में कुल 685 उम्मीदवारों - 508 पुरुषों और 177 महिलाओं ने क्वालीफाई किया है। आयोग ने विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए उनके नामों की सिफारिश भी कर दी है।

SABHAR: AMARUJALA  

MRIDUL SHIVHARE - SUCCESSFUL IAS CANDIDATE - 2022

 MRIDUL SHIVHARE - SUCCESSFUL IAS CANDIDATE - 2022



VAISHYA UPSC - IAS LIST - 2022

VAISHYA UPSC - IAS LIST - 2022

यूपीससी द्वारा जारी रिजल्ट जिसमे वैश्य समाज ने अपना परचम लहराया अभी इसमे कम से कम 20-25 नाम छूटे है उनको भी मेंशन किया जाएगा

सभी को वैश्य समाज की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी देश व समाज का नाम ऐसे ही रोशन करते रहे 

नाम              रैंक

1-अंकिता अग्रवाल 2
2-गामिनी सिंगला 3
3-सम्यक जैन 7
4-अभिनव जैन. 14
5- महक जैन 17
6-सक्षम गोयल 27
7-नमन गोयल 30
8-कार्तिकेय जायसवाल 35
9-रवि कुमार 38
10-कुशल जैन 40
11-नमन कुमार सिंगला 47
12-अंकुर दास 52
13-अर्पित संगल 53
14-अर्पित गुप्ता -54
15-मुकुल जैन 59
16-पार्थ गुप्ता 72
17-सुरभि सिंगला 75
18-सुरभि गोयल 78
19-निखिल महाजन 80
20-ईशु अग्रवाल 81
21-आशीष भगत 85
22-गौरब कुमार अग्रवाल 86
23-अमन अग्रवाल 88
23-अंकित कुमार चौकसी 89
24-वृष्टि जैन 119
25-लम्बिका जैन 128
26-अंतरिक्ष जैन 130
27-ट्विंकल जैन 138
28-नवदीप अग्रवाल 150
29-नेहा जैन 152
30- प्रतीक अग्रवाल 156
31-हिमानी सिंघल 160
32-तरुन गोयल 166
33-शिवांगी गोयल 177
34-आयुषी जैन 178
35-अमृत जैन 179
36-लोविष गर्ग 184
37-समीक्षा रत्नेश चंद जैन 186
38-अर्चिता मित्तल 188
39-मयूर खंडेलवाल 198
40-पूजा साहू 199
41-अर्जित महाजन 204
42-दिव्यंजली जैसवाल 216
43-कांची सिंघल 223
४४- तन्मयी सुहास देसाई २२४
44-संचित गुप्ता 237
45-उत्कर्ष खण्डेल 243
46-मृदुल शिवहरे 247
47-राहुल बंसल 251
48-अभिषेक अग्रवाल 254
49-शुभम बजाज 256
50-अर्चिता गोयल 257
51-रविन्द्र कुमार गुप्ता 259
52-अभिनव जैन 269
53- अनूप गर्ग 270
54-कार्तिक कंसल 271
55-अभी जैन 282
56-रचित कुमार गुप्ता 286
57-प्रतीक जैन 290
58-दक्ष जैन 293
59-निधि गोयल 298
60-हार्दिक अग्रवाल 302
61-प्रेक्षा अग्रवाल 303
62-दीपक रामचन्द्र सेठ 311
63-चिराग मेहता 312
64-आशिमा गोयल 320
६४- विवेक कुमार मोदी ३२६
६५- आकर्ष सोनी ३४२
65-राहुल बंसल 377
66-उमेश गोयल 388
67-आयुष कुमार शिवहरे 391
६७- ईशान सोनी ३९९
६८- शिवम् धाकड़ ४०२
68-केशव गुप्ता 439
69-वैशाली जैन 440
70-एकांत जैन 443
71-पारस गर्ग 445
72-मनीष अग्रवाल 446
७३- रोहित कुमार शाह ४६६
73-नेहा गोयल 476
74-सविता गोयल 479
75-मुकेश कुमार गुप्ता 499
76-सानु कुमार भगत 505
77-मानस रंजन साहू 513
78-मनोज शाह 540
79-पौरुष अग्रवाल 542
80-नीरज शाह 550
81-अनुराधा अग्रवाल 598
82-नयन रंजन दास 614
83-आयुषी कलवार 618
91-मयंक मेघवाल 638
९२ - दीपशिखा बिडला ६६१
93-दव्य गोयल 680
94-रवि साहा
९५-उमाशंकर प्रसाद १३७

Thursday, May 19, 2022

SHISHIR GUPTA - A INDUSTRIALIST OF KHANDWA

 

SHISHIR GUPTA - A INDUSTRIALIST OF KHANDWA


VAISHYA FREEDOM FIGHTER - वैश्य स्वतंत्रता सेनानी

VAISHYA FREEDOM FIGHTER - वैश्य स्वतंत्रता सेनानी

सेठ रामजी दास गुड़वाला (कुत्तों के सामने जिंदा छुड़वाया फिर उसी घायल अवस्था में फांसी)
सेठ हुकुमचंद जैन (फांसी)
अमरचंद बांठिया (फांसी)
लाला मटोलचंद अग्रवाल
लाला झंकुमल सिंघल (फांसी)
सेठ हुकुमचंद अग्रवाल जैन (फांसी)
सेवा राम मोर माहेश्वरी (फांसी)
कृष्ण दास शारदा माहेश्वरी (फांसी)
सेठ राम प्रकाश अग्रवाल (पेशवा को आर्थिक मदद करने वाले)
2000 व्यापारी 30 मार्च 1864 को नगरसेठ चम्पालाल के नेतृत्व में कर्नल ईडन के घर विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे
लाला हरदयाल और लाला जयदयाल (कोटा राजवंश के अधिकारी जिन्होंने अपने राजा के खिलाफ जाकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया)
भारतेंदु हरिश्चंद्र - अपनी प्रसिद्ध रचना भारत दुर्दशा लिख कर कई क्रांतिकारियों की प्रेरणा बने।
मुख्य स्वतंत्रता संग्राम
लाला लाजपत राय
हनुमान प्रसाद पोद्दार
राम मनोहर लोहिया
महात्मा गांधी
दामोदर दास राठी (माहेश्वरीयों के भामाशाह)
भगवान दास बागला
सेठ कन्हैलाल चितलान्गीया
कृष्ण दास जाजू
अर्जुन लाल सेठी
विनोबा भावे
जमनालाल बजाज
घनश्याम दास बिड़ला
देशबंधु गुप्ता
मनमंथ नाथ गुप्ता (काकोरी कांड)
बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता (विनय बसु की जोड़ी के साथ मिलकर बंगाल के लाल-बाल-पाल)
डॉ भगवान दास
लाला जगत नारायण
बाबू बनारसी दास गुप्ता
ज्योतिप्रसाद अग्रवाल
गोपीनाथ साहा
बलवंत राय मेहता

SABHAR: वैश्य सेना वैश्यवंशी

Saturday, May 14, 2022

Wednesday, May 4, 2022

DHARMDAS VAISHYA

DHARMDAS VAISHYA 


भविष्य पुराण के अनुसार प्राचीन काल में एक धर्मदास नाम का वैश्य था। उसकी सदाचार, देव और ब्राह्मणों के प्रति गहरी श्रद्धा थी। अक्षय तृतीया पर उस वैश्य ने गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की, व्रत के दिन स्वर्ण, वस्त्र तथा दिव्य वस्तुएँ ब्राह्मणों को दान में दी। अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के बावजूद भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान व पूजन के कारण वह बहुत धनी प्रतापी बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेष धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ। माना जाता है कि यही राजा आगे चलकर राजा चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ।


SABHAR: PRAYAG AGRAWAL

JAIN AGRAWAL HERITAGE - दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, हस्तिनापुर (मेरठ) उत्तरप्रदेश

JAIN AGRAWAL HERITAGE - दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, हस्तिनापुर (मेरठ) उत्तरप्रदेश

इस मंदिर का निर्माण राजा हरसुख राय ने करवाया था। राजा हरसुख राय मूल रूप से हरयाणा के हिसार के अग्रवाल जैन परिवार से थे। इन्होंने जैन धर्म के उत्थान के लिए बहुत कार्य किया.. राजा हरसुख राय ने सन् 1810 में जैन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए भव्य दिल्ली रथ यात्रा निकाली थी। राजा हरसुख राय ने मुगल काल में सोने के छत्र वाले जैन मंदिर का निर्माण करवाया था। जो दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर है। इन्होंने और इनके बेटे शगुन चंद ने भारत वर्ष में 51 जैन मंदिरों का निर्माण करवाया था।


SABHAR: Prayag Agarwal is with Rahul Jain and Utkarsh Agrawal.

Sunday, May 1, 2022

मध्यप्रदेश में वैश्य समाज की तीन बेटियां पूर्वी गुप्ता,दीर्घा एरन‌ और वंशिता गुप्ता बनी जज

मध्यप्रदेश में वैश्य समाज की तीन बेटियां पूर्वी गुप्ता,दीर्घा एरन‌ और वंशिता गुप्ता बनी जज

पूर्वी गुप्ता-:


मध्य प्रदेश के कटनी शहर में रहने वाले संजय गुप्ता की पुत्री पूर्वी गुप्ता का सिविल जज परीक्षा में चयन होने से परिजनों ने मिठाई बांटकर ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया है पूर्वी गुप्ता को प्रदेश में 5वीं रैंक हासिल हुई है।

पूर्वी गुप्ता ने सिविल जज में चयन होने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने भगवान और माता पिता को इसका श्रेय दिया है, तो वहीं पूर्वी के पिता संजय गुप्ता ने बताया कि उनके परिवार खानदान में पहली बार कोई न्यायाधीश पद पर चयनित हुई है इस पद पर उनकी बेटी का चयन होने से उन्हें काफी खुशी हो रही है।

दीर्घा एरन-:


नीमच सिटी निवासी दीर्घा एरन ने बताया कि वह नेशनल हाईवे ऑथोरिटी दिल्ली में सर्विस करती है। उन्होंने नीमच कॉन्वेट से आठवीं तक पढ़ाई की है। एलएलएम रायुपर छत्तीसगढ़ से किया है। पढ़ाई के दौरान न्यायाधीश भानुमति का भी सान्निध्य मिला। उनके बड़े पापा नरेंद्र अग्रवाल एडवोकेट हैं। दादाजी कन्हैयाला ऐरन भी एडवोकेट थे। उन्होंने बचपन में दीर्घा को न्याय के क्षेत्र में जाने के लिए समय-समय पर प्रेरित किया। दीर्घा साल 2019 में सिविल जज की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी थी, इसके बाद इंटरव्यू में असफल हुई। उसने अपना हौसला कम नहीं किया और फिर से मेहनत की और इसी का परिणाम रहा कि वह दूसरे प्रयास में भी सफल हो गई।परिवार न्यायिक सेवा से जुड़ा होने के कारण उनके मन में भी इसके प्रति झुकाव था और अंत में तैयारी की और सेकंड प्रयास में उनका सिविल जज में चयन हुआ है। वह आठ घंटे की नौकरी के समय में सुबह जल्दी उठकर पढऩा पसंद करती थी। ऑफिस में भी सभी का सहयोग मिलता था, थोड़ा समय मिलते वह अध्ययन करने में जुट जाती थी। उनके पिता जितेंद्र एरन पुस्तक विक्रेता हैं।

वंशिता गुप्ता-:


एक जिला व सत्र न्यायालय में न्याय विभाग के लघु वेतन कर्मचारी (ड्राइवर) अरविंद गुप्ता की बेटी वंशिता गुप्ता है। वंशिता ने यह परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की है।
इसमें वंशिता को प्रदेश में सातवीं रैंक मिली है।

वंशिता ने बताया कि पिता को मेहनत करते हुए देखती थी, तो उसको महसूस होता था कि जीवन में कुछ करना है। बचपन से ही उसकी इच्छा थी कि जज बने। पिताजी अक्सर कहा करते थे कि बेटी ऐसा काम करना, जिससे तुम्हारे कारण मेरी पहचान हो।

एक जज के ड्राइवर की बेटी की जज बनने की कहानी पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है, सोशल मीडिया पर भी वंशिता की खूब वाहवाही हो रही है। बेटी की सफलता से उनके पिता काफी खुश हैं उन्होंने बताया कि वंशिता के दादा सिविल कोर्ट में ही क्लर्क थे। वंशिता को बचपन से ही घर में वकालत का महौल मिला था। घर में अक्सल कोर्ट-कचहरी की बातें हुआ करती थी जिसे सुनते ही वंशिता बड़ी हुई है। बता दें कि वंशिता की मां स्कूल में शिक्षिका हैं। वंशिता की मां ने बताया कि यह वंशिता का बचपन का सपना था कि वह एक दिन जज बने जो आज पूरा हो गया है।

पूर्वी गुप्ता,दीर्घा एरन और वंशिता गुप्ता को बहुत-बहुत शुभकामनाएं व उज्जवल भविष्य की कामना आशा है कि वह आगे भी ऐसे ही लगन और ईमानदारी से जज के तौर पर सेवाएं देकर समाज सेठ समाज और देश का नाम ऊंचा रखेंगी।

साभार: देवांश गुप्ता : जय श्री नृसिंह नारायण 🦁🙏🙏||जय श्री सेठ ✊✊||विजई सेठ समाज ✊✊

KANCHWALA MANDIR INDORE

KANCHWALA MANDIR INDORE

इंदौर में सेठों का बनवाया अद्भुत मंदिरः जिसके कांच बेल्जियम से मंगवाए तो कारीगर ईरान से आए थे।

इंदौर: ये मंदिर ने सिर्फ आध्यात्म का प्रतीक होते हैं बल्कि अपनी स्थापत्य काल,आर्किटेक्चर, बनावट और ख़ूबसूरती के लिए भी जाने जाते हैं. हर एक मंदिर पवित्रता और शांति का प्रतीक है. ऐसे ही देशभर में कई मशहूर मंदिर है, जो अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता हैं. ऐसा ही एक मंदिर अहिल्यानगरी यानी इंदौर में भी है। जिनमें एक जैन मंदिर भी है जो बहुचर्चित है।
 


दरअसल इंदौर का कांच मंदिर ना केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है।इस मंदिर का पूरा इंटीरियर कांच से किया गया है यानी छत से लेकर,खंभे,दरवाज़े, खिड़कियां, झूमर सबकुछ कांच का बना हुआ है.
ये कांच बेल्जियम से बुलवाया गया था, जिसके कारीगर ईरान से आए थे।

जैन समाज के इस मंदिर में कई शहरों से अलग-अलग समाज के लोग दर्शन करने आते हैं और दर्शन के साथ इसकी खूबसूरती को निहारते ही रह जाते हैं. मंदिर बनाने की शुरुआत करीब 1913 में इंदौर के ' सेठ हुकुमचंद' ने की थी जिसमें भगवान शांतिनाथ की मूर्ति काले संगेमरमर की और आदिनाथ और चन्द्रप्रभु भगवान की मूर्ति सफेद संगमरमर से बनाई हुई है। सेठ जी की जैन धर्म में गहरी आस्था थी।

इस इमारत में सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है
सेठ हुकुमचंद' के वारिस कमलेश कासलीवाल ने ANI को बताया, कि 100 साल पहले इसे बनाने जाने के लिए बेल्जियम से कांच बुलवाए गए थे।जिसे लगाने के लिए ईरान से कारीगर आए थे।वहीं पत्थर और उसके कारीगर राजस्थान से आए थे।पूरे मंदिर में बनाई गई अद्भुत कलाकृतियों में जैन धर्म के विषय में बताया गया है। मंदिर की स्थापना मेरे परदादा सर सेठ हुकुमचंद जी ने की थी।इसकी इमारत में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं है बल्कि चूने से पत्थर की जुड़ाई की गई है।इसका आर्किटेक्ट खुद सेठ हुकुमचंद ने किया था।सेठ हुकुमचंद ने कई मिलें और मन्दिर बनवाए हैं।मन्दिर में रखा सोने का रथ और पालकी महावीर जयंती पर निकाला जाता था।

ढाई सौ कारीगरों ने इसे बनाया
मन्दिर के पड़ोस में रहने वाले बुज़ुर्ग सुरेशचंद गंगवाल ने बताया कि कांच मन्दिर बनाने वाले सर सेठ हुकुमचंद ने अपना निजी मन्दिर बनाए जाने के उद्देश्य से इसे बनवाया था लेकिन ये सभी लोगों के लिए खुला था. करीब 1913 में इसे बनाए जाने की शुरुआत हुई. इसमें खुद का पैसा लगाकर इसे बनवाया जिसका खर्च करीब 1 लाख 62 हज़ार आया था।इसे करीब ढाई सौ कारीगरों ने बनाया है।

जैन धर्म के बारे में बताता मंदिर
इस कांच मंदिर की खासियत ये है कि ये छत से ज़मीन तक कांच का बनाया हुआ है. इसमें जैन समाज के सभी भगवान,गुरु और मुनियों की कलाकॄति के साथ धर्म के विषय मे भी खूबसूरत नक्काशी की गई हैं
इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हो पाई इसलिए इसे चेतालय कहा जाता है।भगवान शांतिनाथ के काली संगरमरमर की मूर्ति राजस्थान से गई थीं।

SABHAR: DEVANSH GUPTA - जय श्री नृसिंह नारायण ||जय श्री सेठ ||विजई सेठ समाज

बीकानेर स्थापना दिवस और बीकानेरी सेठ

बीकानेर स्थापना दिवस और बीकानेरी सेठ


ये हैं हमारे नगरसेठ का मंदिर। जी जगतपालक भगवान लक्ष्मीनाथ। इसी मंदिर के प्रांगड़ में एकपूरे राज्य की नींव रखी थी इसलिए इन्हें नगरसेठ बोलते हैं। अक्षय तृतीया को विक्रम संवत 1545 में राव बीका ने भगवान लक्ष्मीनाथ को साक्षी मानकर उनके आगे बीकानेर की नींव रखी थी। भगवान लक्ष्मीनाथ नगरसेठ की ही तरह इस पूरे राज्य का भरण पोषण करते हैं। इस मंदिर की अलग ही शान है क्योंकि इसका निर्माण बीकानेर के राजघराने ने स्वयं करवाया था।
 
राज्य के स्वामी ही जब नगरसेठ हैं तो इस नगर ने भी एक से एक सेठ दिए हैं जिन्होंने बीकानेर का ही नहीं पूरे भारत का नाम रौशन किया। बीकानेर मारवाड़ अंचल में पड़ता है और जब बात तो धर्म और व्यापार की तो उसमें मारवाड़ी व्यापारियों का अग्रणी स्थान रहा है।
 
1857 के युद्ध में शहीद सेठ अमरचंद बांठिया को ही ले लीजिये जिन्हें अंग्रेजों ने इसलिए फांसी पर लटका दिया था क्योंकि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी रानीलक्ष्मीबाई की धन देकर मदद की थी। सेठ जी ग्वालियर राजघराने के खजांची थे.. रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के ग्वालियर पहुंचने पर ग्वालियर का शाही खजाना उनके हवाले कर दिया था। 1857 की क्रांति को जब कुचल दिया गया तब फिर बीकानेर की धरती ने एक भामाशाह को जन्म दिया।
वो थे सेठ नृसिंह अग्रवाल। 1920 में इन्होंने कलकत्ता में पंजाब केसरी लाल लाजपत राय जी की अध्यक्षता में एक सम्मेलन में भाग लिया और उनसे प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पढ़े। वहाँ से वापस लौटते वक़्त उन्हें साबरमती आश्रम में सेठ जमनालाल बजाज जी से मिलने का मौका मिला। सेठ जी जमनालाल बजाज जी की स्वतंत्रता के लिए की जरहिं गतिविधियों और त्याग से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने जमनालाल बजाज जी को अपना आदर्श मान लिया। उसके बाद सेठ जी ने अपनी अथाह संपत्ति जमनालाल जी की तरह स्वतंत्रता के लिए लगा दी। तिलक स्वराज्य फण्ड आदि में बहुत दान किया। एकबार तो गांधी जी ने इन्हें कहा कि नृसिंह अब तो तुम एकदम बाबा जी बन गए हो।
 
आजाद भारत मे सबसे बड़े आंदोलन 'श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन' में सर्वप्रथम शहादत देने वाले और बाबरी मस्जिद के ऊपर चढ़कर भगवा लहराने वाले कोठारी बंधु स्वयं बीकानेर के मारवाड़ी परिवार से थे।
बीकानेर ने एक से एक धन्ना सेठ दिए हैं। भारत के तीसरे सबसे अमीर उद्योगपति राधाकृष्ण दमानी बीकानेर के ही तो हैं। यहाँ जैन श्रेष्ठियों द्वारा बनवाया गया विश्वप्रसिद्ध सेठ भण्डाशाह जी का मंदिर है। सेठ जी इतने धन्ना की, जैन भाण्डाशाह मंदिर की नींव पानी की बजाय घी से रखी गई थी। काम इतना बारीक की देश विदेश से लोग देखने आते हैं इस प्रांगण को। बीकानेर के सेठों की रामपुरिया हवेलियां भी विश्व प्रसिद्ध हैं। बीकाजी और हल्दीराम के अग्रवाल सेठ भी बीकानेर के ही थे।
 
नगरसेठ के मंदिर के बाहर बीकानेर के महान संत स्वामी रामसुखादास जी की पंक्तियां भी अंकित है - "हे नाथ! हे नाथ मैं तुम्हें भूलूँ नहीं।
 
बीकानेर के सेठों पर नगरसेठ लक्ष्मीनाथ और स्वयं महालक्ष्मी की अनन्य कृपा बनी रहे और वो सनातन और भारतवर्ष के प्रति समर्पित रहें।
 
SABHAR: - प्रखर अग्रवाल

GUJARATI BANIYE

GUJARATI BANIYE
 
गुजरात अपने व्यापार के लिए विश्वप्रसिद्ध है। हो भी क्यों न गुजराती व्यापारियों ने अपने व्यापार का डंका पूरे विश्व मे बजाया है और उनका भारत के विकास और अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक योगदान है। आखिर हमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और ISRO जैसे संस्थान देने वाले भी गुजराती ही थे।


विक्रम साराभाई - ISROके जनक और APJ अब्दुल कलाम के गुरु

आचार्य हेमचंद्र (मोध जैन) - पाटन के सोलंकी राजवंश के शासक के सलाहकार और गुरुतुल्य जिनकी शिक्षाओं से प्रभावित होकर पूरे गुजरात से ही मांसाहार को खत्म कर दिया था और आज आचार्य हेमचंद्र के 900 वर्ष पश्चयात भी गुजराती अपने शुद्ध शाकाहारी होने की पहचान पर गर्व करते हैं।
 
प्रेमचंद रॉयचंद - बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के जनक
पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास (मोध वणिक) - मुम्बई आज जो भी है वो अपने गुजराती और मारवाड़ी व्यापारियों की वजह से है। बॉम्बे प्लान के उद्योगपतियों में एक पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास भी थे। अन्य थे जे. आर. डी. टाटा, लाला श्रीराम अग्रवाल, घनश्यामदास बिड़ला आदि.. इन्होंने सेठ घनश्याम दास बिड़ला जी के साथ Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry (FICCI) की स्थापना भी की थी।

हीरालाल जयकिशनदास - भारत के सर्वोच्च न्यायालय प्रथम CJI
धीरूभाई अंबानी - व्यापारिक विस्तार के प्रेरणादायक आदर्श
अडानी - एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति
गुजराती व्यापारी रजवाड़ों में प्रशासन भी संभालते थे... आचार्य हेमचंद्र या हम पोरबंदर रियासत के दीवान (प्रधानमंत्री) करमचंद गांधी को ही ले लें..

ACHARYA HEMCHANDRA - आचार्य हेमचंद्र और राजा कुमारपाल

ACHARYA HEMCHANDRA - आचार्य हेमचंद्र और राजा कुमारपाल
किसकी वजह से व्यापक समुद्री तट होने के कारण भी अधिकतर गुजराती हैं शाकाहारी?


आचार्य हेमचंद्र मोध वणिक कुल थे और पाटन के सोलंकी क्षत्रिय राजा कुमारपाल के सलाहकार थे कुमारपाल के शासनकाल के दौरान, गुजरात संस्कृति का केंद्र बन गया। कहा जाता है कि अनेकांतवाद के जैन दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, हेमचंद्र ने एक व्यापक विचारधारा का प्रदर्शन किया, जिससे कुमारपाल प्रसन्न हुए। कुमारपाल एक शैव थे और उन्होंने प्रभास पाटन में सोमनाथ के पुनर्निर्माण का आदेश दिया। कुमारपाल के साथ हेमचंद्र की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या करने वाले कुछ हिंदू संतों ने शिकायत की कि हेमचंद्र एक बहुत ही अभिमानी व्यक्ति थे, कि वह वैदिक देवताओं का सम्मान नहीं करते थे और उन्होंने हिंदू भगवान शिव के आगे झुकने से इनकार कर दिया था।
 
जब सम्राट कुमारपाल ने आचार्य हेमचंद्र को मंदिर के उद्घाटन के समय बुलाया तो उन्होंने तुरंत झुक कर कहा -

मैं उसे नमन करता हूं जिसने आसक्ति और द्वेष जैसे वासनाओं को नष्ट कर दिया है जो जन्म और मृत्यु के चक्र के कारण हैं; चाहे वह ब्रह्मा, विष्णु, शिव या जिन हों।
 
शनै शनै आचार्य हेमचंद्र से प्रभावित होकर राजा कुमारपाल जैन धर्म को भी पूर्ण आदर सत्कार देने लगे।
1121 में तरंग में बनने वाले जैन मंदिर में भी हेमचंद्र का योगदान था। कुमारपाल पर उनके प्रभाव के परिणामस्वरूप जैन धर्म गुजरात का आधिकारिक धर्म बन गया और राज्य में पशु वध पर प्रतिबंध लगा दिया गया। गुजरात में धर्म के नाम पर पशु बलि की परंपरा को पूरी तरह से उखाड़ फेंका गया। नतीजतन, हेमचंद्र के लगभग 900 साल बाद भी, एक व्यापक समुद्र तट होने के बावजूद, गुजरात अभी भी मुख्य रूप से शाकाहारी राज्य बना हुआ है।

सोर्स - The Jains by paul dundhas
जैन साहित्य और ग्रंथों में आचार्य हेमचंद्र