Pages

Monday, June 29, 2026

AMIT LAKHOTIA PARK PLUS

AMIT LAKHOTIA PARK PLUS

भारत के शहरों में वाहनों की पार्किंग की एक बहुत बड़ी समस्या है. लोगों को अक्सर अपनी कार पार्क करने में समस्या आती है. लोगों को अच्छा खासा समय इसमें जाया हो जाता है. आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जो कार पार्किंग की समस्या से जूझता था लेकिन एक दिन उसने इस समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया और पार्क प्लस नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया.


आज लाखों लोग पार्क प्लस की मदद से बिना समय गंवाए अपनी कार पार्क कर लेते हैं. इससे इनका काफी समय बर्बाद होने से बच जाता है. आज हम आपको बताएंगे कैसे कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर अमित लाखोटिया ने पार्क प्लस की शुरुआत की और कुछ ही समय में स्टार्टअप काफी लोकप्रिय हो गया.

कैसे हुई पार्क प्लस की शुरुआत?

पार्क प्लस की बात करें तो ये एक मोबाइल बेस्ड ऐप प्लेटफॉर्म है. इसके फाउंडर अमित लाखोटिया हैं, जिन्होंने साल 2019 में पार्क प्लेस प्लेटफॉर्म की स्थापना की. अमित की बात करें उन्हें गुरुग्राम स्थित एक कॉर्पोरेट ऑफिस में पार्किंग ढूंढने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें ऑफिस में पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती थी.

Park Plus Success Story: पार्किंग में दिक्कत आई तो एक आइडिया से लाखों लोगों की समस्या की दूर
पार्क प्लस की बात करें तो ये एक मोबाइल बेस्ड ऐप प्लेटफॉर्म है. इसके फाउंडर अमित लाखोटिया हैं, जिन्होंने साल 2019 में पार्क प्लेस प्लेटफॉर्म की स्थापना की.

Park Plus Success Story: पार्किंग में दिक्कत आई तो एक आइडिया से लाखों लोगों की समस्या की दूर
भारत के शहरों में वाहनों की पार्किंग की एक बहुत बड़ी समस्या है. लोगों को अक्सर अपनी कार पार्क करने में समस्या आती है. लोगों को अच्छा खासा समय इसमें जाया हो जाता है. आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जो कार पार्किंग की समस्या से जूझता था लेकिन एक दिन उसने इस समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया और पार्क प्लस नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया.

आज लाखों लोग पार्क प्लस की मदद से बिना समय गंवाए अपनी कार पार्क कर लेते हैं. इससे इनका काफी समय बर्बाद होने से बच जाता है. आज हम आपको बताएंगे कैसे कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर अमित लाखोटिया ने पार्क प्लस की शुरुआत की और कुछ ही समय में स्टार्टअप काफी लोकप्रिय हो गया.

कैसे हुई पार्क प्लस की शुरुआत?
पार्क प्लस की बात करें तो ये एक मोबाइल बेस्ड ऐप प्लेटफॉर्म है. इसके फाउंडर अमित लाखोटिया हैं, जिन्होंने साल 2019 में पार्क प्लेस प्लेटफॉर्म की स्थापना की. अमित की बात करें उन्हें गुरुग्राम स्थित एक कॉर्पोरेट ऑफिस में पार्किंग ढूंढने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें ऑफिस में पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती थी.

इसके बाद आसपास उन्हें पार्किंग खोजने में 30 मिनट से ज्यादा लग जाते थे. इस वजह से उनका अच्छा खास समय जाया हो जाया करता था. इसलिए एक दिन परेशान होकर उन्होंने इस समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया. उन्होंने साल 2019 में पार्क प्लस नाम का वेंचर बनाया. इस वेंचर के जरिए लोगों की पार्किंग की समस्या को दूर करने लगे. काफी कम समय में ये वेंचर लोगों के बीच में लोकप्रिय हो गया और देशभर में इस वेंचर का नाम फैल गया.

पार्क प्लस को मिली 250 करोड़ की फंडिंग
इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्क प्लस को 250 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है. अमित लाखोटिया दावा करते हैं कि पार्क प्लस जैसी सुविधा दुनिया में कहीं भी नहीं है. भारत में ही दुनिया भर में लोग पार्किंग की समस्या से काफी परेशान हैं. अब इस पर भी उनका वेंचर काम कर रहा है.

पार्क प्लस की बात करें तो 20 साख से ज्यादा कार इनके साथ लिस्टेड है. जबकि 50 लाख से ज्यादा फास्टटैग ट्रांजैक्शन पार्क प्लस की ऐप से हो चुके हैं. पार्क प्लस के पास अभी 1 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं. देश में 1.50 लाख पार्किंग लोकेशन पर इनकी सर्विस उपलब्ध है.

2000 में कॉरपोरेट में शुरू की जॉब
अमित लखोटिया ने साल 2000 में कॉरपोरेट में अपनी पहली नौकरी की. साल 2019 में अपना वेंचर शुरू करने से पहले वो , पेटीएम मोबाइल सॉल्यूशंस में वाइस प्रेसिडेंट बिजनेस और मेकमायट्रिप में प्रोडक्ट मैनेजर और बिजनेस हेड जैसे टॉप पदों पर काम कर चुके है. वो गेटमीएकैब डॉट कॉम के फाउंडर और डायरेक्टर भी रह चुके हैं.
अमित लोखाटिया ने बताया कि पार्क प्लस आरएफआईडी टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्मार्ट पार्किंग सलूशन उपलब्ध कराती है. पार्क प्लस से लोगों को पता चल जाता है कि किस जगह पर कार पार्किंग के लिए जगह उपलब्ध है और उसकी फीस क्या है? पार्क प्लस की मदद से लोग ट्रैफिक चालान की धनराशि भी चुरा सकते हैं

No comments:

Post a Comment

हमारा वैश्य समाज के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।