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Tuesday, April 28, 2026

AGRAWAL HISTORY FROM KURUVANSH

AGRAWAL HISTORY FROM KURUVANSH

बहुत पहले श्री त्रिलोक सिंह धाकरे जो की एक राजपूत लेखक थे उनके द्वारा लिखित एक पुस्तक " राजपूतो की वंशावली और इतिहास महागाथा " प्रकाशित की थी जिद्मे अग्रवाल वैश्यों की उत्पत्ति कुरु वंश से बतायी हैं उसके कुछ प्रकाशित प्रष्ट नीचे दे रहा हूँ




1. तौमर वंश का प्रथम राज्य - हस्तिनापुर महाभारत समाप्ति के बाद हस्तिनापुर की राजगद्दी के महाराजा

सत्यार्थप्रकाश समल्लोस 11 के अनुसार

1. महाराजा युधिष्ठिर इन्होने 36 वर्ष 8 महा 25 दिन राज्य किया है इन्होने राजसूय यज्ञ भी किया है। 2.अभिमन्यु ये महाभारत में वीरगति को प्राप्त हुए इन्होने राज्य नहीं किया इनके समय से कलयुग प्रारम्भ हुआ। 3. परीक्षित ने 60 वर्ष राज्य किया। 4. जनमेजय (इन्होने जरसन आबाद किया तथा 84 वर्ष 7 माह 23 दिन राज्य किया। 5. अश्वमेघ ने 82 वर्ष 8 माह 22 दिन राज्य किया। 6. द्वितीय राम ने 88 वर्ष 2 माह 8 दिन राज्य किया। 7. छत्रमल ने 81 वर्ष 11 माह 27 दिन राज्य किया। 8. चित्र रथ ने 75 वर्ष 3माह 18 दिन राज्य किया इन्होने चीन व रूस को आबाद किया। 9. दुष्टशैल्य या बल्लभ सेन ने बलिया बल्लभ या बल्लमीपुर बसाया। इन्हाने 75 वर्ष 10 माह 14 दिन राज्य किया 10. अग्रसेन इनके वंशज अग्रवाल वैश्य उन्होने अग्रोह शहर आबाद किया इन्होने 78 वर्ष 7 माह 21 दिन राज्य किया। 11. सूरसेन अग्रसेन के भाई थे इनका हाल अज्ञात हैं 12. भुवनपति इन्होने 69 वर्ष 5 माह 5 दिन राज्य किया। 13. रणजीत ने 65वर्ष 10 माह 4 दिन राज्य किया। 14. रिक्षक ने 64 वर्ष 7 माह 4 दिन राज्य किया। 15. सुखदेव ने 62 वर्ष 24 दिन राज्य किया । 16. नृहरिदेव 51 वर्ष 10 माह 2 दिन राज्य किया। 17. सुचिरथ ने वर्ष माह दिन 18. सूरसेन ने 58वर्ष 10 माह 8 दिन राज्य किया। 19. पर्वत सेन ने 55 वर्ष 8 माह 10 दिन राज्य किया । 20, मेघावी ने 52 वर्ष 10 माह 10 दिन राज्य किया। 21. सोनवीर ने 50 वर्ष 8 माह 21 दिन राज्य किया। 22. भीमदेव ने 47 वर्ष 8 माह 20 दिन राज्य किया। 23. नृहरिदेव द्वितीय ने 45 वर्ष 11 माह 23 दिन राज्य किया। २४. पूर्णमल ने 44वर्ष 8 माह 6 दिन राज्य किया। 25. पूर्ण मल के 2 पुत्र हुए कारादेव व धर्मदेव (धुलियान शाखा) इनका हाल अज्ञात हैं। 26 अलमाक ने 50 वर्ष 11 माह 8 दिन राज्य किया। 27. उदयपाल ने 38 वर्ष 9 माह राज्य किया। 28. दुवन पाल ने 40वर्ष 10 माह 26 दिन राज्य किया। 29. दमात ने 22 वर्ष राज्य किया। 30. भीमपाल ने 58वर्ष 5माह 8 दिन । 31. क्षेमक ने 48 वर्ष 11 माह 21 दिन राज्य किया। अपिराजा विश्रवा ने क्षेमक को मारकर 17 वर्ष 3 माह 21 दिन राज्य किया इसके बाद फिर इसी वंश (तौमर वंश) ने राज्य किया। 32. मानक राजा 33. जायकराजा 34. जोधाराजा 35. जलभरत राजा 36. कन्नराजा इसके 15 पुत्र हुए 37. सम्राट अनंगपाल तौमर प्रथम 734ई-754ई.

सम्राट अनंगपाल प्रथम के वंशज - 1. अनंगपाल प्रथम 2. बामदेव 3. गंगादेव 4. पृथ्वीमल 5. जयदेव 6. नरपाल 7. उदयपाल 8. अप्रिश देव 9. पिपलराजदेव 10. रघुपाल देव 11. तिलहनपाल देव 12. गोपाल देव 13. सुलखनपाल देव 14. जयपाल 15. कुमारपाल, 16. अनंगपाल

8. अग्रवाल वंश (कुरूवंश की आठवी शाखा)

अग्रवाल वंश (निकास तौमर वंश से)

महाराजा अग्रसेन तोमर वंश में महाराजा युधिश्ठिर के 10वी पीढी में और महाराजा जनमेजय की 7वी पीढी में हुए इन्होंने अग्रोहा शहर बसाया और अग्रवाल वंश की स्थापना की। अग्रवालों का विवाह रिश्ता 36 कुरी के राजपूतों में नही होता है।

अग्रवंश भासकर में पृष्ठ 10 पर अग्रवालों की कुल 84 शाखाओं का वर्णन है। इनमें से 18 शाखायें राजपूतों की है। कई विद्वानों का मत है कि अग्रवालों के केवल 18 ही शाखायें है, सही नही है, उनका यह भी मत है कि अग्रसेन महाराज के अठारह पुत्र थे जिनसे ये भिन्न-भिन्न शाखायें चली। यह मत सही नहीं है। क्यों कि यदि ये अठारह सगे भाई होते तो फिर इनमें परस्पर वैवाहिक संबंध क्यों होते हैं? वास्तव में अग्रोहा नगर के संस्थापक महाराज अग्रसेन और उसके पुत्रों को जैन धर्म के आचार्य स्वामी लोहाचार्य जी ने अहिंसा का महत्व समझाया था। अंत में राजा ने एक वृहद्ध यज्ञ किया जिसमें भारत के सभी राजाओं को निमंत्रित किया था। इस युद्ध में पूर्वी राजस्थान के 18 राजकुमार सम्मिलित हुए थे। और अहिंसा परमो धर्मः का उपदेश ग्रहण कर वैश्य बन गये थे। इनका विवरण इस प्रकार है ।

नाम राजकुमार

1. गुलाब देव

2. गैदूमल

3. करण

4. मणीपाल

5. भृन्देव

6. द्रावकदेव

7. सिन्धुपाल

8. जैत्रसंघ

9. मंत्रीपति

10. तम्बोलकर्ण

11. ताराचन्द्र

12. वीरमान

13. घ्वसुदेव

14. नारसेन

15. अमृतसेन

16. इन्द्रसेन

17. माधवसेन

18. गोधर

गोत्र असली

गर्ग

गोमिल

कश्यप

कौशिक

वशिष्ठ

धौम्य

सांडिल्य

जेमिनी

मैत्रेय

तांडव

तिगंल

तेतिरेय

वत्स

धान्यान

नागेन्द्र

मांडव्य

ओर्व

मुकुल

गौतम

वैश्य होने पर गोत्र

गर्ग

गोहिल या गोयल

कंछन

कांसल

विन्दल

ढलन

सिंधल

जिंदल

मित्तल

तायल

बांसल

देरण

नागिल

मंगल

ऐरन

मधुकुल

मोहन

वैश्यों में अग्रवाल वैश्य, ओसवाल वैश्य, माहेश्वरी वैश्य, खंडेलवाल वैश्य, विजयवर्गीय वैश्य, सरावगी वैश्य तथा जैन वैश्य की उत्पत्ति राजपतों से हई हैं

रमेशचन्द्र राजस्थानी जातियों की खोज पृष्ठ 5

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