SETH PREMCHAND RAYCHAND - बोम्बे स्टॉक एक्सचेंज के संस्थापक
जब भी भारत में स्टॉक मार्केट की बात होती है, सबसे पहला नाम आता है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का, जो न केवल देश बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। इसी बदलाव को औपचारिक रूप देने में सबसे अहम भूमिका निभाई प्रेमचंद रायचंद ने
भारत के शेयर बाजार की कहानी सिर्फ संख्याओं और ग्राफ्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा इतिहास है जिसने देश के वित्तीय ढांचे की नींव रखी। जब भी भारत में स्टॉक मार्केट की बात होती है, सबसे पहला नाम आता है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का, जो न केवल देश बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।
इस ऐतिहासिक वित्तीय व्यवस्था की शुरुआत 19वीं सदी में हुई, जब मुंबई के टाउन हॉल (आज का हॉर्निमन सर्कल) के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे कुछ शेयर दलालों ने मिलकर शेयरों की खरीद-फरोख्त शुरू की। यह साधारण शुरुआत धीरे-धीरे एक बड़े वित्तीय सिस्टम में बदल गई।
इसी बदलाव को औपचारिक रूप देने में सबसे अहम भूमिका निभाई प्रेमचंद रायचंद ने। 1875 में उन्होंने ‘द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ की स्थापना की, जो आगे चलकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के रूप में विकसित हुआ। इसी कारण उन्हें भारतीय शेयर बाजार का जनक भी कहा जाता है।
प्रेमचंद रायचंद अपने समय के बेहद प्रभावशाली व्यापारी थे और उन्हें “कॉटन किंग” और “बुलियन किंग” जैसे नामों से भी जाना जाता था। अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान कपास के वैश्विक व्यापार में आई उथल-पुथल का उन्होंने शानदार लाभ उठाया और अपार संपत्ति अर्जित की।
हालांकि उनकी जिंदगी हमेशा आसान नहीं रही। 1865 में अमेरिका में गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद कपास की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ और वे दिवालिया तक हो गए। लेकिन उनकी कारोबारी समझ और जुझारू स्वभाव ने उन्हें दोबारा खड़ा किया और उन्होंने फिर से सफलता हासिल की।
प्रेमचंद रायचंद की कहानी आज भी यह सिखाती है कि जोखिम, समझदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ असफलताओं के बाद भी नई शुरुआत की जा सकती है। उनकी विरासत आज भी भारत के आधुनिक शेयर बाजार की मजबूत नींव के रूप में जिंदा है।

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