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Wednesday, February 7, 2024

THE GREAT AGRAWALS - क्या यहूदी ही एकमात्र प्रेरणा पुरुष हैं?

#THE GREAT #AGRAWALS - क्या यहूदी ही एकमात्र प्रेरणा पुरुष हैं? 

महाराजा अग्रसेन की राजधानी अग्रोहा (आधुनिक हिसार) का सेल्फी प्वाइंट.... हिसार के अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम भी महाराजा अग्रसेन के नाम पर है... यहां अग्रसेन की मूर्ति, मंदिर चौक सब स्थापित हैं...

क्या यहूदी ही एकमात्र प्रेरणा पुरुष हैं?
 
'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'

ये बात उस ईश्वर ने कही थी जो लाखों साल पहले मानव रूप में इस धरती पर आया जिसने रावण की सोने की लंका को जीतने के बाद त्याग दिया और जन्मभूमि अयोध्या लौट आये। आज हमारे भारत साहित्यकार यहूदी जाती की तारीफ में कसीदें गाते हैं कि उन्होंने अपनी जन्मभूमि को कभी भूल नहीं उसके गीत गाते रहे - (यहूदियों ने चाहे वो देश के किसी भी कोने में रहे अपने पूर्वज डेविड की बसाई राजधानी येरुशलम को नहीं भूले।)
"यदि हम तुम्हें भूल जाएँ, ओ येरुशेलम, तो मेरा यह दाहिना हाथ मर जाये
यदि हम तुम्हें भूल जाएँ, तो मेरी यह जिह्वा झड़ जाये" (साम)
लेकिन सिर्फ यहूदी ही ऐसे नहीं थे बल्कि हमारे भारत के अग्रवाल समाज की भी यही व्यथा रही लेकिन अफसोस भारत के साहित्यकारों का ना तो इस ओर ध्यान है ना उन्होंने इसे पढ़ने की कोशिश की। उन्हें मल्लेछ यहूदियों के महिमामंडन स्वीकार है लेकिन अपने सनातनियों का नहीं..

अगर विश्व के शीर्ष उद्योगपतियों में यहूदी हैं तो भारत मे भी शीर्ष 10 उद्योगों में जिंदल और मित्तल अग्रवाल कुल से हैं। एशिया की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल भी अग्रवाल हैं। भारत के तमाम आद्योगिक घराने बजाज, सिंघानिया, डालमिया, साहू जैन, गोयनका, मोदी, रुइया आदि से लेकर वर्तमान में ओला, जोमाटो, ओयो, फ्लिपकार्ट, लेंसकार्ट आदि स्टार्टअप्स अग्रवालों ने शुरू किए हैं.. यहूदियों की टेक्नोलॉजी और हथियारों की बात करने वालों ने भारत की सर्वश्रेष्ठ मिसाइल (अग्नि सीरीज) के जनक जयपुर के वैज्ञानिक राम नारायण अग्रवाल के बारे में जानने की कोशिश की क्या? भारत में भारतवंशियों द्वारा संचालित सर्वप्रथम बैंक बनाने का श्रेय लाला लाजपत राय अग्रवाल को जाता है। विश्व के सबसे बड़े स्टील एक्सपोर्टर भी मारवाड़ के लक्ष्मी निवास मित्तल हैं जिसके लिए उन्हें स्टील किंग कहा जाता है। यहूदियों को अगर अपना धर्म प्रिय हैं तो अग्रवालों ने भी मुस्लिम लीग के विरोध में हिन्दू महासभा बनाई, हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी प्रेस बनाई, रामजन्मभूमि को मुक्त कराया अशोक सिंघल ने या गौ माता और माँ गंगा के लिए बलिदान देने वाले रामकृष्ण डालमिया और स्वामी सानंद (प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल)
 
अग्रवाल जाती का इतिहास महाभारत कालीन आग्रेय गणराज्य से शुरू होता है। आग्रेय गणराज्य भारत की पश्चिमी सीमा में था जो भारत का मुख्य प्रवेश द्वार हैं जिसपर सदियों से विदेशी आक्रमण होते आये हैं। आग्रेय गणराज्य पर सिकंदर के आक्रमण की बात ग्रीक इतिहासकार M. C. Crindle ने दर्ज की है। भारतीय इतिहासकार महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन ने आग्रेय निवासियों को वीर यौद्धेयों का वंशज बताया है जिन्होंने सदियों तक विदेशी शकों, हुणों, यवनों और मल्लेछों से भारत भूमि की रक्षा की है। इतिहासकार स्वराजमणि अग्रवाल के अनुसार अग्रोहा पर शकों, हुणों, कुषाणों, सिकंदर, गौरी और अंतिम फ़िरोज़ शाह तुगलक का आक्रमण हुआ था। ASI के अनुसार अग्रोहा का अंतिम विध्वंस फ़िरोज़ शाह तुगलक ने किया था जिसने अग्रोहा के भग्नावशेषों से हिसार के फ़िरोजा का निर्माण किया।
 
शक, हूण, कुषाण, सिकंदर, गौरी, तुगलक से हमने वीरता पूर्वक कई युद्ध लड़े। कई बार उन्हें भारत भूमि से खदेड़ दिया कई बार खुद भी उजड़े। लेकिन बार बार उजड़ने के बाद भी हम अपनी मातृभूमि जिसे हमारे पूर्वज राजा अग्रसेन ने बसाया था कभी भूले नहीं। अग्रोहा कई बार उजड़ा लेकिन हमने उसे बार बार बसाया। अग्रोहा को पुनः बसाकर लोककथाओं में सेठ हरभज शाह अमर हो गए। अग्रोहा को अंतिम बार बसने का प्रयास पटियाला रियासत के यशस्वी दीवान नानूमल अग्रवाल ने किया था। दीवान नानूमल ने अपने सैन्य बल से दिल्ली के मुगल सम्राट के अधीनस्थ फतेहाबाद, सिरसा, हांसी और हिसार जैसे महत्वपूर्ण नगरों को पटियाला राज्य में सम्मिलित कर लिया l जब हिसार उनके आधिपत्य में आ गया तो उन्होंने अग्रोहा में एक किले का निर्माण कराया।
 
देश के मध्य भाग मध्यप्रदेश बैठे हुए अग्रवाल जैन श्रेष्ठियों के कई शिलालेख हैं जिन्होंने अपने नाम से पूर्व अग्रोतकान्वेय लिखा तो पूर्वांचल में बैठे हुए आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ने भी अपनी उत्पत्ति अग्रोहा से बताई। दिल्ली के सरबान शिलालेख हों या गवालियर के किले पर लगे शिलालेख या ग्वालियर के जैन मंदिर या राजा हरसुख राय द्वारा बनवाये हुए जैन मंदिर या सुदूर पूर्व मेंकोलकाता का बेलगछिया मंदिर बनवाने वाले जैन श्रेष्ठि उन्होंने अपना परिचय अगरोताकांवय अमुक गोत्र करके दिया।
हमें भी यहूदियों की तरह कई बार अपनी मातृभूमि से उजाड़ना पड़ा लेकिन हम कभी अपनी जन्मभूमि अग्रोहा को भूले नहीं जो साम्यता हममें और यहूदियों दोनों में है। आधुनिक हिसार में जिंदल परिवार और लाला लाजपत राय जी के प्रयासों से बहुत विकास कार्य हुए हैं। वहाँ के मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल्स, धर्मशालाएं, मंदिर आदि बनाकर अग्रवालों ने हिसार को हरयाणा की स्टील सिटी और सबसे विकसित शहरों में से एक बना दिया है। वहाँ अग्रोहाधाम मंदिर और अग्रविभूति स्मारक आज भी अग्रयवंशीओं की अपनी मातृभूमि के आरती तड़प दिखाते हैं... अग्रवंशिओं ने पूरे भारत में जहाँ भी गए अग्रोहा नरेश महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा स्थापित की है ... उत्तर में जम्मू और उत्तराखंड के ऋषिकेश से लेकर दक्षिण के हैदराबाद और तमिल नाडु तक पश्चिम में हरायणा राजस्थान से लेकर पूर्व में असम और कोलकाता तक.. महाराजा अग्रसेन की प्रतिमाएं स्थापित हैं..
 
साभार - प्रखर अग्रवाल

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